बेबाक , बिंदास , बेलौस ,बेसाख्ता सी कुछ बातें ......
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बिखरे आखर
ट्विटर सेंसर को तैयार , गूगल ने किया इनकार ,
उपयोग दुन्नो का अईसा करें , रहे टेंसन में सरकार
मेरे इर्द गिर्द रहकर , तुम जो यूं , अपना ये ...
1 सप्ताह पहले















अजय भाई , बढ़िया पोस्ट के लिए बधाइयाँ !
घर बैठे बैठे ही देशाटन करवाने का मूड बनाये हो क्या ?
शिवम् मिश्रा ने कहा…
28 अप्रैल 2010 1:09 अपराह्न
अपने देश में यह एकता बनी रहे यही दुआ है !
वर्ना नेताओ ने तो देश के टुकडे करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है !
शिवम् मिश्रा ने कहा…
28 अप्रैल 2010 1:14 अपराह्न
अच्छी और सामायिक पोस्ट.......
चूँकि मैं खुद उत्तर भारत के शहर लखनऊ की हूँ और मेरे पति केरलावासी विशुद्ध मलयाली और रहते हम चेन्नई में हैं। मैंने भारत के दोनों भूभागों के बीच के इस अंतर को बहुत करीब से देखा है..........अपने अनुभव से कह सकती हूँ कि प्रेम नेह धैर्य और स्वीकार्यता कि भावना ही वे कड़ियाँ हैं जिनसे इस अंतर को पाटा जा सकता है। आज जब मैं ससुराल जाती हूँ तो वहां सब खुश होते हैं कि अब आलू के पराठे या समोसे बनेंगे, और जब मायके जाती हूँ तो सब इडली दोसे की फरमाइश करते हैं। ससुराल में सब हिंदी बोलने की कोशिश करते हैं तो मायके में सब शब्दों के तमिल और मलयालम अर्थ पूछते हैं। और हमारे घर चेन्नई में जब तक जिक्र न आये याद ही नहीं रहता कि हम दोनों भिन्न भाषा संस्कृति से आये हैं। सब हमारी अपनी सोच पर निर्भर करता है.........आप दिल के दरवाजे जितने खुले रखेंगे आपको अपनापन भी उतना ही मिलेगा।
Shikha Deepak ने कहा…
28 अप्रैल 2010 1:40 अपराह्न
शिखा जी से सहमत..इस प्रकार से दो संस्कृतियों को आपस में इक दुसरे को समझने का मौका मिलता है!जब हम एक ही देश के निवासी है तो फिर आपस में मेलजोल में संकोच कैसा?"एक दूजे के लिए" फिल्म मुझे इसी लिए बहुत पसंद है...
RAJNISH PARIHAR ने कहा…
28 अप्रैल 2010 2:20 अपराह्न
बहुत सुंदर लिखा, मै भी शिखा जी ओर शिवन मिश्रा जी से सहमत हुं
राज भाटिय़ा ने कहा…
28 अप्रैल 2010 3:16 अपराह्न
मैं तो उस दिन की कल्पना करता हूँ जब हम भारतीय उत्तर दक्षिण की पहचान खो दें और भारतीय हो जाएँ।
दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…
28 अप्रैल 2010 5:42 अपराह्न
अच्छी मानवीय रिश्तों के महत्व को दर्शाती हुई आपके इस प्रेरक और जानकारी आधारित रचना के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद /
honesty project democracy ने कहा…
28 अप्रैल 2010 5:56 अपराह्न
इतनी विविधता में भी एकता बनाये रखना --यही तो हमारे देश की खूबी है।
डॉ टी एस दराल ने कहा…
28 अप्रैल 2010 6:34 अपराह्न
AJAY BHAIYA BAHUT HI ACHA LIKHA HAI AAPNE.
संजय भास्कर ने कहा…
28 अप्रैल 2010 7:20 अपराह्न
आप की पोस्ट पर आने का ये फ़ायदा हुआ कि शिखा जी के बारे में पता चला…।:)
हम तो शिखा जी से सहमत होगें ही, हम खुद उत्तर भारत से हैं और पति मलयाली हैं। वैसे अगर आप आकड़ें निकाल कर देखें तो पायेगें कि उत्तर भारत और दक्षिण भारत में कोई गुरुत्वाकर्षण है, वैसा आकर्षण पश्चिम और पूरब में नहीं, दक्षिण और पूरब में नहीं।
मुझे तो लगता है हर घर में एक अंतर राज्य शादी होनी ही चाहिए किसी सुदूर प्रांत के प्राणी से। भारतीय को भारतीय बनाने के लिए जरूरी है
anitakumar ने कहा…
28 अप्रैल 2010 11:30 अपराह्न
क्या वाकई ब्लॉगवानी से वास्ता तोड़ लिए??????
Udan Tashtari ने कहा…
29 अप्रैल 2010 8:30 पूर्वाह्न
चलिए, इसी बहाने कई रोचक बातें पता चल गयीं। आभार।
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गुफा में रहते हैं आज भी इंसान।
ए0एम0यू0 तक पहुंची ब्लॉगिंग की धमक।
ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…
29 अप्रैल 2010 11:50 पूर्वाह्न