बेबाक , बिंदास , बेलौस ,बेसाख्ता सी कुछ बातें ......
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बिखरे आखर
ट्विटर सेंसर को तैयार , गूगल ने किया इनकार ,
उपयोग दुन्नो का अईसा करें , रहे टेंसन में सरकार
मेरे इर्द गिर्द रहकर , तुम जो यूं , अपना ये ...
1 सप्ताह पहले















अब का बताएं कि छोटा सा नींद में केतना छोटा छोटा ख्वाब देखे ...सोचते हैं कि फ़ुर्सत से सो कर देखते तो ...शायद देश ही सुधर गया होता .....
भैया
वे सिर्फ़ सपने ही देख रहे हैं जो संसद/विधान भवन में सोते हैं
गहरी नींद उनकी है आपकी थोडे न है
गिरीश बिल्लोरे ने कहा…
6 अप्रैल 2010 11:09 अपराह्न
झा जी,
यही तो एक सुख है कि सपने देखने पर कोई पाबंदी कोई राशन नहीं है। हाँ इधर राजस्थान में लाटरी के टिकट पर जरूर पाबंदी लग गई है। वरना एक रुपए के टिकट में पूरे महिने जागते-सोते, दिन-रात सपने देखने का इंतजाम हो जाता था।
दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…
6 अप्रैल 2010 11:11 अपराह्न
सोचता हूँ कि अब टिपियाना बंद करके मैं भी एक नींद मार लूं....मैं भी ख्वाब देखूं...
मजा आ गया.......वाह....बहुत खूब......
http://laddoospeaks.blogspot.com/
कृष्ण मुरारी प्रसाद ने कहा…
6 अप्रैल 2010 11:14 अपराह्न
bhai ab toh ek jhapki maarni hi padegi nahin toh saare khwab aap hi loot lenge
AlbelaKhatri.com ने कहा…
6 अप्रैल 2010 11:51 अपराह्न
अरे और ख्वाब देखते
राहुल गान्धी नगर पलिका चुनाव के टिकट के लिये शहर कान्ग्रेस के महासचिव की चमचागिरी करते फिर रहे है.
हमारे वकील साहब जब कचहरी मे घुसे तो युवा जज उनके सीट पर बैठने तक खदा रहे.
मास्टर लोग स्कूलो मे सिर्फ़ पढाये.
और हा सरकारी दफ़्तरो के लोग कभी काम भी किया करे.
हरि शर्मा ने कहा…
6 अप्रैल 2010 11:55 अपराह्न
मेरा भी एक खवाब है जो जेसा करे उसे इसी साल उस का फ़ल मिले...
राज भाटिय़ा ने कहा…
6 अप्रैल 2010 11:58 अपराह्न
क्या क्या सोंच लेते हैं आप !!
संगीता पुरी ने कहा…
7 अप्रैल 2010 12:14 पूर्वाह्न
और काहे नहीं सो लेते हैं..दू चार और ऐसन ही ख्वाब देख डालिये..कौनो टेक्स तो लगेगा नहीं ..हाँ, जियरा चैनिया जायेगा जरा..आपके साथ साथ हमारा भी!!
Udan Tashtari ने कहा…
7 अप्रैल 2010 12:46 पूर्वाह्न
हम नींद में ही टिपिया रहे हैं
ख्वाब देखे में कौनो बुराई
नहीं है. वास्तव में हम भी
रहने वाले हैं मुंगेली जिला बिलासपुर
छत्तीसगढ़. तो हम भी मुंगेरीलाल
के हसीन सपनों की भांति ख्वाब देख लेते हैं
और कह देते हैं मुन्गेलीलाल के हसीन सपने
सूर्यकान्त गुप्ता ने कहा…
7 अप्रैल 2010 12:54 पूर्वाह्न
ख्वाब तो बहुते अच्छा देख रहे हैं आप लेकिन उनका ख्वाब भी तो है कि कैटल क्लास का विमानवा ही अलग हो ताकि पसीने की बदबू (कैटल क्लास की खुश्बू) उन तक न पहुँचे और फिर इनके विमनवा का असमनवा भी अलग हो
M VERMA ने कहा…
7 अप्रैल 2010 4:49 पूर्वाह्न
nice
Suman ने कहा…
7 अप्रैल 2010 7:00 पूर्वाह्न
हमारा तो एक छोटा सा ख्वाब है कि हम लिखते रहे और आप सभी की टिप्पणी आती रहे। सब वाह वाह करते रहें।
ajit gupta ने कहा…
7 अप्रैल 2010 12:27 अपराह्न
गजब का आईडिया है जी.
रामराम.
ताऊ रामपुरिया ने कहा…
7 अप्रैल 2010 7:28 अपराह्न
आमीन ।
शरद कोकास ने कहा…
7 अप्रैल 2010 10:32 अपराह्न
बस इतना सा ख्वाब है
डॉ महेश सिन्हा ने कहा…
10 अप्रैल 2010 8:44 अपराह्न