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शुक्रवार, 23 अप्रैल 2010

ब्लोगवाणी और चिट्ठाजगत, से आग्रह कि वे मेरे ब्लोग्स को हटाने पर विचार करें


पिछली पोस्ट में मैंने लिखा था कि एक निश्चित समय के बाद मैं ब्लोगवाणी और चिट्ठाजगत , संकंलकों के संचालकों से आग्रह करूंगा कि , वे सही निर्णय लेते हुए ये फ़ैसला करें कि , हिंदी ब्लोग्गिंग में जो भी गंदगी धर्म , जाति आदि के नाम पर फ़ैलाने की कोशिश की जा रही है , फ़िर चाहे वो हिंदू धर्म के नाम पर हो रही हो या मुस्लिम धर्म के नाम पर , या किसी और ही धर्म के नाम पर ,यदि उसे रोकने के लिए सच में ही कुछ नहीं किया जा सकता है , या करना ठीक नहीं होगा तो फ़िर , हम जैसे ब्लोग्गर्स को अपने यहां स्थान न देने जैसे फ़ैसले पर विचार करना चाहिए ।

इसलिए ज्यादा नहीं लिखते हुए इस पोस्ट के माध्यम से सिर्फ़ ये आग्रह करना चाहता हूं कि नीचे मेरे ब्लोग्स की सूची है , उसे हटाने पर विचार करें । वैसे मैं अलग से मेल करके भी यही आग्रह कर रहा हूं ॥

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समय के साथ साथ इनमें से कुछ ब्लोग इतिहास के पन्नों में खो जाएंगे । इसी के साथ अभी से जिन ब्लोग्स में मेरी सहभागिता है उनसे मैं अपना नाम भी हटा रहा हूं । ये सब मेरा फ़ैसला है , और जाने क्यों लिया है , बस ले लिया है ।

45 टिप्‍पणियां:

  1. डॉक .अनवर जमाल ,गिरी.... जैसे लोगो ने मूड और माहोल दोनों खराब किया है
    aap ye nhi ker sakte mai aap ka bada fan hu

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  2. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  3. आपने निर्णय सोच समझकर लिया होगा।
    लेकिन जरुरत है वाहयात ब्लागो को हटाने की।
    जो माहौल खराब कर रहे हैं।

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  4. जी बहुत बहुत शुक्रिया ज्योत्सना जी , मगर आपके मन की नहीं कर सकता , हां आप मेरी तरफ़ से ब्लोगवाणी से इसी तरह का जोरदार आग्रह करें तो शायद आपके मन की बात हो जाए । बस यही तो देखना है कि ज़ोर कितना बाजुए कातिल में है

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  5. मतलब अब आप अपने घर में भी रहना छोड़ देंगे - यह तो खुदकुशी हुई जो कि अपनी खुशी से नहीं की जा रही है। आपको ब्‍लॉगप्रहरी पर रहना चाहिए। जिनको हटना चाहिए वे डटे हुए हैं जिन्‍हें डटना चाहिए वे कटने लगे हैं। यह तो विजय नहीं हुई, यह अजय का काम भी नहीं।

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  6. ये ठीक नहीं कर रहे हैं आप!

    अविनाश जी सही कह रहे हैं.

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  7. जनाब आपसे ऐसे ड्रामे की उम्मीद तो नहीं कर सकते हैं.....ये ड्रामे तो उनको शोभा देते हैं जो कहीं खड़े नहीं दीखते. आप सक्षम हैं ये जानने और समझने के लिए कि सही गलत क्या है.
    ब्लॉग रद्द करना और खुद हटा देना दो तरह की बातें हैं. आप खुद हटना ही नहीं चाहते और ......................
    ये तो वही बात हो गई..."मन - मन भावे, मुड़ी हिलावे." कुछ और सोचो जनाब!!!!
    जय हिन्द, जय बुन्देलखण्ड

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  8. अभी-अभी तो मैं आया हूं जनाब... क्या आप यूं ही चले जाएंगे। फैसला अच्छा नहीं है लेकिन जाहिर सी बात है कुछ न कुछ बात ऐसी है जिसकी वजह से आपका मन दुखा है। ये ज्योत्सना कौन रे बाबा... क्या शास्त्री जी की चेली है क्या।

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  9. अविनाश जी और समीर भाई से सहमत |

    अजय भाई, मान जाओ ............ हम सब आपके मुरीद है ! वैसे कल आपसे बात करता हूँ !

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  10. डा. कुमारेंद्र सेंगर ...बेशक आपको ये ड्रामा लगे , आपकी सोच पर आपका हक है और मैं उसे बदलना भी नहीं चाहता , मगर मैं संजीदा हूं और पूरी तरह आश्वस्त भी , और वही चाहता हूं जो लिखा है । शायद ब्लोगवाणी मेरी बातों की तस्दीक कर सके ।

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  11. और हां मंत्वय फ़िर स्पष्ट कर दूं .....संकंलकों की सूची से खुद को हटाने का आग्रह है ...न कि ब्लोग्गिंग छोडने का ...अन्य ऐग्रीगेटर्स की सूची में लिखूंगा तो दिखूंगा ही

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  12. अरे अरे हम तो भाई आप को यही सलह देगे जो अविनाश जी ने दी है, दिल तो कई बार हमारा भी करता है ऎस करने को, लेकिन अभी ओर इन हालात मै नही, बिलकुल नही, तो भाई दोवारा विचार करे....
    ज्योत्सना जी मुंह छुपा कर बात ना करे, खुल कर सामने आये....वेसे तो आप के लिखने की भाषा से समझ मै आ गया कि आप है कोन, आज पहली बार आप ने हिन्दी मै ओर नाम धर कर टिपण्णी दी है, चलिये धीरे धीरे लाईन पर आ जायेगी.... ओर इस ममले मै टांग मत आडये वरना मुंह के बल गिरेगी ....

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  13. गेंद को दूसरे के पाले में डालने का क्या फ़ायदा

    या तो जी जान से जुट कर वाहियात लिखने वालों को हटाईये या खुद मन कडा कर के कोई निर्णय लीजिए दूसरे पर निर्णय छोडना खुद के आत्मबल की कमी को दर्शाता है

    और अगर आप उनके आत्मबल की जांच कर रहे है तो ये मुझे उचित प्रतीत नहीं होता
    क्योकि ब्लोग्वानी और चिट्ठाजगत का अतुलनीय योगदान हिंदी ब्लोगिंग के लिए रहा है,, रहेगा

    वो हमसे कोई शुल्क नहीं ले रहे
    आप खुद चर्चा करते हैं इस लिए आप जानते होनेग कितना समय और कितनी मेहनत लगती है और समर्पण भाव भी तो चाहिए

    समीर जी की नई पोस्ट भी अपने निर्णय को लेने से पहले दुबारा पढ़े

    ये हमारी फितरत है कोई तमाशा करे तो भीड़ लगा लेते हैं

    ऐसे गिरे हहुए तमाशेबाजों के यहाँ भी भीड़ लग रही है तो क्या गलत हो रहा है

    प्रश्न ये भी तो है की भीड़ कौन लगा रहा है

    जब भीड़ चली जायेगी तो तमाशा वाला भी क्या तमाशा करता रहेगा

    आपका शुभेच्छुक - वीनस

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  14. अजय भाई,
    ब्लॉगिंग पर कोई बात नहीं करने जा रहा...

    जिस प्यार से आप हम सबको बुलाते रहे हैं, उसी प्यार से आपको बुला रहा हूं...कल या परसो, आ जाइए नोएडा मेरे घर...बस दोनों बैठेंगे और ब्लॉगिंग को छोड़ दुनिया जहां की सारी बातें करेंगे...हो सका तो सतीश सक्सेना भाई को भी बुला लूंगा...या उन्हीं के घर चल देंगे...सुबह फोन पर बात करता हूं...

    खूब गुजरेगी जब मिल बैठेंगे दीवाने दो...

    जय हिंद...

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  15. मै बहुत कम ही ऐसा कमेन्ट करता हूँ
    आशा करता हूँ आप अन्यथा नहीं लेंगे

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  16. झा जी,
    ये आप क्यूँ कर रहे हैं..मुझे नहीं मालूम, लेकिन अगर आप कुछ साबित करना चाहते इसलिए ये कर रहे हैं....तो ब्लॉग वाणी को ईमेल कीजिये, तभी वो इसपर काम करेंगे, आपके पोस्ट लिखने से वो आपको डिलीट नहीं करेंगे....
    धन्यवाद...

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  17. मैंने टिपण्णी की है ये मानते हुए कि आप कहीं जा नहीं रहे हैं..बस कुछ साबित करना कहते हैं...जैसा कि आपने अपनी टिपण्णी में लिखा है....
    शुभकामनाएं..

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  18. " हिंदी ब्लोग्गिंग में जो भी गंदगी धर्म , जाति आदि के नाम पर फ़ैलाने की कोशिश की जा रही है , फ़िर चाहे वो हिंदू धर्म के नाम पर हो रही हो या मुस्लिम धर्म के नाम पर , या किसी और ही धर्म के नाम पर ,यदि उसे रोकने के लिए सच में ही कुछ नहीं किया जा सकता है .......",

    उपरोक्त बात से पूर्णतया सहमत हूँ , मध्ययुगीन काल की यह परम्परा आज आधुनिक काल में इस महान देश का मज़ाक बनवाने के लिए काफी है ! भेदभाव फैलाने का हर प्रयत्न का पुरजोर विरोध करना चाहिए !

    "फ़िर , हम जैसे ब्लोग्गर्स को अपने यहां स्थान न देने जैसे फ़ैसले पर विचार करना चाहिए ।"

    मैं अजय से सहमत नहीं हूँ ! यह कायरता है ! व्यक्तिगत तौर पर मैं आपको बहुत जिम्मेवार व्यक्ति मानता हूँ मगर यह कैसा विरोध हुआ समझ नहीं पा रहा हूँ ! मेरा अनुरोध है एक बार पुनर्विचार करें !
    खुशदीप भाई के सुझाव पर गौर करियेगा !
    सादर !

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  19. अजय जी, आप वकील हैं, सारे पैंतरे जानते हैं। आपका कदम किसलिए है यह तो आप ही जाने। लेकिन ब्‍लागवाणी ने मेरी पोस्‍ट पर तो मेरी फोटो हटा दी है। इसका उपाय भी बता दें। इसकारण मेरी तो पोस्‍ट ही पिट गयी है।

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  20. वीनस जी ,
    मैं बखूबी जानता हूं कि ब्लोगवाणी और चिट्ठाजगत का योगदान कितना है हिंदी ब्लोग्गिंग को बढाने में , यही कारण है कि मैंने ये नहीं लिखा है कि मुझे हटा दिया जाए , मैंने लिखा है कि अब संकंलकों को विकल्पों का चुनाव करना चाहिए । यदि आपकी दलील ये है कि संकंलक ऐसा नहीं कर सकते , तो मेरी समझ में बस ये नहीं आ रहा है कि फ़िर अतंर्जाल पर फ़ैले हुए हजारों अश्लील सामग्री वाले साईट्स यहां आने से किस तरह रोक लेते हैं ये संकंलक । आखिर कुछ तो होगा ही जो छन्नी की तरह काम करता होगा ।
    रही बात कडे दिल से निर्णय करने की , तो वही किया है , ब्लोग ही डिलीत कर दूं , ये फ़िलहाल करने का मन नहीं है , कम से कम इन जैसी टुच्ची बातों पर तो कतई नहीं । तमाशा लगाने की भी अब कोई लालसा नहीं बची ।

    अदा जी ,
    मेल वाला काम भी कर चुका हूं , और फ़िर यही कह रहा हूं कि मैं वाकई गंभीर हूं , न हो तो मेरे अन्य ब्लोग्स को देख लें जिन्हें मैं बंद कर चुका हूं । और बस संकंलकों का मंतव्य जानने तक ये पोस्ट और ब्लोग दिख रहा है ।

    मन क्षुब्ध है , और इसके बाद मैं किसी को कोई सफ़ाई नहीं देने जा रहा हूं । आप सबका शुक्रिया ।

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  21. आप अपने फैसले पर पुनर्विचार करें!
    ब्लॉगिस्तान आपको बहुत चाहता है!

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  22. .
    .
    .
    आदरणीय अजय कुमार झा जी,

    कुछ मुद्दों पर मत वैभिन्य के बावजूद बहुत सम्मान करता हूँ आपका... ब्लॉगिंग के प्रति आपके समर्पण व जुनून को लेकर... पर आपका संकलकों द्वारा सेंसरशिप लाने का यह आग्रह मेरी समझ से बाहर है... ब्लॉगिंग एक ऐसा माध्यम है जिसमें हर वो बात देर-सबेर लिखी जायेगी... जो आदमी के दिमाग में चलती है...यही ब्लॉगिंग की ताकत भी है... इन सब बातो से इतना परेशान या ऑफेंडेड होने की आवश्यकता नहीं... आभिजात्य सौन्दर्यबोध रखने वालों के लिये तो नहीं ही है ब्लॉगिंग... आप तो खुद पेशे से एक अधिवक्ता हैं... सभी प्रकार के विचारों, मतों व दॄष्टिकोणों के महत्व को अच्छी तरह से समझ सकते हैं... फिर इस तरह की अपरिपक्व जिद किसलिये ?

    रही बात हमारी तो संकलक हों या न हों, जब भी आप हमारे लिये महत्वपूर्ण कुछ लिखेंगे तो हम आप तक पहुंच ही जायेंगे।

    अंत में फिर यही कहूँगा कि:-

    Let thousand flowers bloom... Let each and everyone's opinion count and matter... Let us create a virtual platform for sharing of views, experiences & thoughts where everybody feels wanted & everybody is welcomed with an open heart & an unbiased mind...

    Ameen!

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  23. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  24. अर ेजितने लोगों ने माहौल खराब किय ाहै उनको बाहर निकाल फेंके ना ये एग्रीगेतर

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  25. ब्लोग्वन्नी को तो एक बहाना मिल जायेगा ब्लोग हताने का

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  26. इनकी भी कोई अछ्छी टिप्पणि कहीं दिखे तो बताना भाई लोगो

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  27. वैसे इनको बहुत तकलीफ़ होती है जब ब्लोगवानी को कोई तल्कलीफ़ देता है

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  28. दूसरों के लिखे को तमाशा बताती हैं क्योंकि पहले ये खुद तमाशा बन चुकी हैं

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  29. ऐसे पता नहीं दसियों प्रोफ़ाईल बना रखे हैं इसने

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  30. बेचारीकरे भी क्या अपना ब्लोग तो बना नहीं सकती दूसरों का डिलीट करवातीरहती है

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  31. अरे अब याद आया कि मुझे कहीं जाना है

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  32. घूम फिर कर फिर आऊँगा जब आपका मूड ठीक हो जायेगा

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  33. और हां ये ब्लॉग बंद नहीं होने चाहिये ना ही ब्लोगवानी से हटने चाहिये
    माहुअल खराब करने वाले दोनो तरफ़ के ब्लोग भले ही हट जायें एग्रीगेटरोण से

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  34. अच्छा नही हो रहा है जी ये
    आप खुशदीप जी और सक्सेना जी से मिल आईये जी
    उसके बाद पुनर्विचार कीजियेगा

    प्रणाम

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  35. अकेले अकेले मिलोगे जी तो लगेगा पाप
    खुशदीपजी हमें क्‍यों नहीं बुला रहे हैं आप

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  36. naam hai ajay aur baat paraajay ki...date raho bhai... kuchh log hame ukasaate hai... hataash karane ke liye ghatiyaa baaten karate hai. maine apne blog me pichhale dino ek sher kahaatha, parha hoga, ki ''jab bhi aaye gande log/ peechhe ho gaye achchhe log'' shatir aksar apne makasad me kaamyaab ho jate hai. bade bhai ke naate meri yahi salaah hai ki morche par date raho achchha likh-parh rahe they, blog jagat me shatiron ka varchasv barhataa jaarahaa hai, aise me sahi log tooten nahi, apnaa kaam karte rahe.

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  37. कल मन विक्षुब्ध था और उत्तेजित भी , इसलिए जो दिल ने सोचा कहा वो जस का तस आपके सामने रख दिया , और उस पर आपने जो सोचा जाना वो मेरे साथ और पूरी ब्लोगजगत के साथ बांटा । अक्सर बिना मोडरेशन वाले मेरे जैसे ब्लोग्स उन ब्लोग्गर्स के लिए अखाडे की तरह बन जाते हैं , और वो खुल कर अपने जौहर दिखाते हैं , खैर ये तो .....और यही तो ब्लोग्गिंग है । संकंलकों का अपनी नीति है अपना फ़ैसला है , मेरे मन में जो था वो मैंने कह दिया , और भविष्य में भी ऐसा नहीं करूंगा इस बात की कोई गारंटी भी खुद को नहीं दे सकता हूं । बस इतना चाहता था और आगे भी चाहता रहूंगा कि , सिर्फ़ चंद लोग मिलकर पूरे ब्लोग जगत का माहौल बिगाड सकने की क्षमता रखते हैं तो ऐसे में किंकर्तव्यविमूढ होकर चुप बैठे रहना ऐसे लगता है जैसे अचानक फ़ालिज़ का दौरा पडने पर तन मन सब शिथिल हो गया हो हो । आज इससे ज्यादा कुछ कहने का मन नहीं है

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  38. aapkee is tippanee ne tasveer saaf kar dee hai...vaise mujhe maamla abhi bhi samajh nahi aaya...

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  39. mai bhi sir lalit sharma avam avinash ji ki baato se sahamat hun.
    poonam

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  40. पलायन नही . मोर्चा लेना पड़ेगा ।

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  41. अजय जी का इतना असर

    असर असरदार हुआ

    ब्‍लॉगप्रहरी ने मोर्चा छोड़ दिया

    तो यह है आपका असरदार।

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मैंने तो जो कहना था कह दिया...और अब बारी आपकी है..जो भी लगे..बिलकुल स्पष्ट कहिये ..मैं आपको भी पढ़ना चाहता हूँ......और अपने लिखे को जानने के लिए आपकी प्रतिक्रियाओं से बेहतर और क्या हो सकता है भला

साथ चलने वाले

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