बेबाक , बिंदास , बेलौस ,बेसाख्ता सी कुछ बातें ......
-
बिखरे आखर
ट्विटर सेंसर को तैयार , गूगल ने किया इनकार ,
उपयोग दुन्नो का अईसा करें , रहे टेंसन में सरकार
मेरे इर्द गिर्द रहकर , तुम जो यूं , अपना ये ...
1 सप्ताह पहले















अपनी जगह दूसरे का फोटो क्यों लगा दिए हैं? भाभी जी ने फोटो खींचने से मना कर दिया क्या?
गिरिजेश राव ने कहा…
5 अप्रैल 2010 9:03 अपराह्न
काहे विसवास नहीं है
प्रत्येक सांस तक विसवास ही विश्वास है
विश्वास में हमारी हर सांस है
सांस ही तो जीवन की आस है
ब्लॉग पोस्ट पर टिप्पणी पाना
एक उच्छवास है
सुवास है
सुगंध है
मनमुग्ध तानपुरा है
घी बूरा है।
अविनाश वाचस्पति ने कहा…
5 अप्रैल 2010 9:04 अपराह्न
गिरिजेश जी ई फ़ोटो हमारा ही है कैमरा मेड इन दक्षिण अफ़्रीका था तो ,...भौजी कहां से गोरका फ़ोटो निकालतीं ....एक तो जबरिया हमसे हमारे ही पोस्ट पर टिपवाते हैं फ़िर कहिएगा ....कि काहे ऐसा करते हैं जी ...देखिए हम सूतल हैं अभी जगाईये मत ..
अजय कुमार झा
अजय कुमार झा ने कहा…
5 अप्रैल 2010 9:14 अपराह्न
काश फोटो में मैं होता..इतनी अच्छी नींद...
कृष्ण मुरारी प्रसाद ने कहा…
5 अप्रैल 2010 9:23 अपराह्न
कब से इंतज़ार करवा रहे हो ! नींद ही नहीं खुलती क्या या गोली दे रहे हो ....
:-)
सतीश सक्सेना ने कहा…
5 अप्रैल 2010 9:23 अपराह्न
ओह्हो तो साब सो रहे हैं
सोते सोते टिप्पणी का जवाब
पूरा विश्वास है
विश्वास को नहीं
कोई भी आंच है
कैमरा मेड इन अफ्रीका हो
या हो मेड इन अमेरिका
आजकल तो ऐसा ही
फोटुआ है निकलता
क्या पहले कैमरे का
नहीं देखा था कमाल
हम सदा रहे बेदाढ़ी वाले
फोटो हमारी निकाली दाढ़ी वाली।
अविनाश वाचस्पति ने कहा…
5 अप्रैल 2010 9:26 अपराह्न
कभी कभी ऐसा मूड भी होना ही चाहिए !!
संगीता पुरी ने कहा…
5 अप्रैल 2010 9:27 अपराह्न
विश्वास नही होता तो
ये श्वास नही होता
ब्लाग खोले बैठे है
कब श्री श्री (108 बार) अजय जी पधारें
M VERMA ने कहा…
5 अप्रैल 2010 9:33 अपराह्न
दिल्ली वालों की बात का तो कोनो विश्वास नाहीं :-)
पं.डी.के.शर्मा"वत्स" ने कहा…
5 अप्रैल 2010 9:55 अपराह्न
ये महाशय तो कोई सुहाना सा सपना देख रहे हैं।
फिर काहे जगाना है भाई।
डॉ टी एस दराल ने कहा…
5 अप्रैल 2010 9:59 अपराह्न
स्वागत है!
मनोज कुमार ने कहा…
5 अप्रैल 2010 9:59 अपराह्न
बहुतै खोज खोज के पोस्ट लिखैल बा
ससुरा हम तीन दिन छुट्टी बिताये, कौनो
काम का नहीं रहा. आज सोमवारे के
दिन ही अर्जेंट काम करे का पड़ी
कईसे निपटाते ऑफिस का काम. आज भी
छुट्टी ले लिए. का कहियेगा.
सूर्यकान्त गुप्ता ने कहा…
5 अप्रैल 2010 10:12 अपराह्न
एकदम मेरे मन की बात कह दी।
Gagan Sharma, Kuchh Alag sa ने कहा…
5 अप्रैल 2010 11:04 अपराह्न
इंतजार है।
दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…
5 अप्रैल 2010 11:07 अपराह्न
हम तो इ सोचे की बचुवा "सानिया " की तस्वीर लगाये बैठा है आज कल टी वी पर इसके अलावा कुछो दिखाते ही नहीं , और आप लो हमारे ब्लॉग पर आना ही छोड़ दिए कौनो नाराज़गी है का
Sonal Rastogi ने कहा…
5 अप्रैल 2010 11:37 अपराह्न
हम तो खुदहि आराम की मुद्रा में डले हैं..दूसरे से का कहें!!
Udan Tashtari ने कहा…
6 अप्रैल 2010 12:33 पूर्वाह्न
बहुते सही है.
रामराम.
ताऊ रामपुरिया ने कहा…
6 अप्रैल 2010 8:30 पूर्वाह्न