बेबाक , बिंदास , बेलौस ,बेसाख्ता सी कुछ बातें ......
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बिखरे आखर
ट्विटर सेंसर को तैयार , गूगल ने किया इनकार ,
उपयोग दुन्नो का अईसा करें , रहे टेंसन में सरकार
मेरे इर्द गिर्द रहकर , तुम जो यूं , अपना ये ...
1 सप्ताह पहले
















कर गए न गलती। अलेक्सा कोई जाने और मांगने से मिलती है. बस अपना नंबर लगा देते डिब्बे से वह अपने आप ही चली आती।
दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…
13 अप्रैल 2010 8:54 अपराह्न
अलेक्सा जी अब अपने मुंह से क्या कहें ..........हें हें हें ...हम पिछले ढाई बरस से घुसे हुए हैं जी इस दुनिया में । पिछले बरस तो डिब्बा (लैपटौप ) भी घर ले आए ताकि लैप में न सही टौप में तो आ ही जाएं । टौप में तो क्या खाक आते , पहले तो सारे लफ़डों झगडों का पता ही नहीं चलता । अब मरे कम्बख्त आंखें बंद करके भी ब्लोग्स को पढता हूं तो तापमान से ही सब पता चल जाता
हा हा हा ....बहुत बढ़िया....
sangeeta swarup ने कहा…
13 अप्रैल 2010 8:54 अपराह्न
अजयजी अलेक्सा के चक्कर में क्यों पड़े हैं। हिन्दी ब्लॉगिंग का कोई मुकाबला है क्या।
Jandunia ने कहा…
13 अप्रैल 2010 9:30 अपराह्न
अलेक्सा नारी जाति का प्रतिनिधित्व करती है और नारी जाति से ........... नारी ब्लॉगरों से .......... कुछ खास ....... मोह है आपका ......... और उनका .......... फिर भी आप चले गए ........... रेंकिंग लेने .......... मतलब किंग बनने ....... कैसे बनते ....... पॉसीबल नॉट ....... अजय भाई
अविनाश वाचस्पति ने कहा…
13 अप्रैल 2010 9:50 अपराह्न
nice
Suman ने कहा…
13 अप्रैल 2010 10:31 अपराह्न
अलेक्सा --ये तो एक्स्ट्रा मेराइतल अफेयर जैसा लगता है।
राम, राम, राम !
डॉ टी एस दराल ने कहा…
13 अप्रैल 2010 11:07 अपराह्न
डॉ दराल की बात ही सही लगती है :-)
सतीश सक्सेना ने कहा…
13 अप्रैल 2010 11:21 अपराह्न
भैया मेरे क्यों पड़े हो चक्कर में ........... कोई नहीं है टक्कर में !
और सुनाओ क्या हाल है ?
ब्लॉग का लुक बढ़िया लगा साथ साथ आपका cartoon भी !
शिवम् मिश्रा ने कहा…
13 अप्रैल 2010 11:32 अपराह्न
जैसे ही मैं ब्लोग्गिंग के साथ हिंदी को जोड देता हूं कईयों के कलेजे पर सांप लोटने लगते हैं
हा हा
बेचारे सांप!
बी एस पाबला ने कहा…
13 अप्रैल 2010 11:46 अपराह्न
यह एलेक्सा सच में खतरनाक चीज है !!!
चंदन कुमार झा ने कहा…
14 अप्रैल 2010 12:01 पूर्वाह्न
जैसे आजकल कुछ मित्र बस प्रतीक्षा में रहते हैं कि कब हम कहें कि अब तो बहुत थक से गए हैं ब्लोग्गिंग करते करते ..वो कहेंगे कि ..शुभकामनाएं हैं जी ....ब्लोगजगत आपको हमेशा याद रखेगा । अलविदा ।
जिनके ऐसे दोस्त हों उन्हे दुश्मनो की दरकार नही है।
दुश्मनों की जिम्मेदारी भी निभा देते हैं,बड़े मासूम हैं जी।
घटोत्कच ने कहा…
14 अप्रैल 2010 1:05 पूर्वाह्न
Swadee kha ( Namaste) Ojha saab-
You have the skill to write, You are God gifted. Do not ask for more from almighty. Just be thankful to him.
Your achievement is 'blogging', not the awards or chatka or rank you get by lesser mortals.
awards or sanmaan or puraskaar brings greed in a person. One award instills the desire to get more . Is there any end of our expectations? .
"Greater the expectations, greater is the disappointment".
Next time if you happen to meet any Alexa..Do not forget to praise the lovely smile on her lips or the cute dimple on her cheeks with amul butter in your voice.
In case you are supposed to to see some 'Alexander'...do not forget to attach a dollar or two.
Ojha saab- Learn the art of blogging...opps...begging...oops...."Bhikshaam dehi"
"Bura na mano HOLI hai"
btw Ojha saab if you truly wish to remain ahead of everyone...here is a line for you...
"Omnia vincit amor" -(French ) (love can conquer the world)
Chalti hun,
Khapun kha ( Thanks)
Divya
PS- sorry for using French, Thai, English and Hindi.
Smiles !
zeal ने कहा…
14 अप्रैल 2010 6:02 पूर्वाह्न
Sorry,
'Jha' not 'Ojha'...(correction)
zeal ने कहा…
14 अप्रैल 2010 6:06 पूर्वाह्न
काहे ऐलेक्सा जैसों के मूँह लगते हैं...तब लतियाये ही न जायेंगे...उनका मूँह लाने दिजिये...तब लगियेगा तो अलगे बात होगी..सच्ची!!
Udan Tashtari ने कहा…
14 अप्रैल 2010 7:18 पूर्वाह्न
ये अलेक्सा क्या होता है झा जी???????
draradhana ने कहा…
14 अप्रैल 2010 7:43 पूर्वाह्न
जैसे ही मैं ब्लोग्गिंग के साथ हिंदी को जोड देता हूं कईयों के कलेजे पर सांप लोटने लगते हैं
अरे भाई!...कित्तों को लपेट लेते हो ?
राजीव तनेजा ने कहा…
14 अप्रैल 2010 8:53 पूर्वाह्न
"हाय री ऐसी मित्रता ..न छूटते बनता है न ही टूटते बनता है।"
याने कि मित्रता न हुई "साँप के मुँह में छुछूंदर" हो गया!
जी.के. अवधिया ने कहा…
14 अप्रैल 2010 9:11 पूर्वाह्न
सुना कि इससे सोशल रिलेशन बनते हैं , आखिर इसी के लिए तो हम ब्लोग्गिंग करते हैं ..बस इसी के लिए करते हैं , ऐसा मुझे बताया है किसी ने ।
ये सलाह देने वाला, इतना बडा शुभचिंतक कौन आगया?:)
रामराम.
ताऊ रामपुरिया ने कहा…
14 अप्रैल 2010 12:45 अपराह्न
आपय की गलती है, हुँआ गए ही काहें थे !!
फीद्जीत से ही जीतिए, ब्लोग्वानी तो आपय की सुन रहा है, चिट्ठाजगत में भी आपय छाये हौ.
अलेक्सा भाभी से हमहूँ मिले रहे, लात खाके घरे आ गए.
बस हिंदी ब्लोग्गिंग हिंदी ब्लोग्गिंग कहते रहिये, हमरा सुर आपय के साथ में है जी. :)
अब का कहें, मेहरारू जात समझ के जाने दीजिये, का कर लेंगे !!
ई-गुरु राजीव ने कहा…
14 अप्रैल 2010 3:08 अपराह्न
वैसे आप सबकी जानकारी के लिए बता दें कि इस ब्लोग की alexa ranking 809,782 है , अच्छा बुरा मुझे नहीं पता । ई गुरू अब क्या करें पहले ही कह दिया है कि जैसे ही ब्लोग्गिंग के साथ हिंदी लगाते हैं .....सांप लोटने लगता है । अब सांप बेचारा क्या जाने गुरू चेला ...ब्लोगवाणी और चिट्ठाजगत वालों को हमही ने किराए पर औफ़िस दिया हुआ है न ..शायद इसलिए आपको ऐसा लगा हो ..। आप इत्ते दिनों में गुरू से आगे क्यों नहीं बढते हैं अब तो गुरू घंटाल हो जाईए न प्रभु । कितने भक्त आस लगाए बैठे हैं
अजय कुमार झा ने कहा…
14 अप्रैल 2010 3:43 अपराह्न
मेरे ब्लॉग " ना जादू ना टोना " पर चीनी भाषा में एक टिप्पणी आई है , लेकिन न मुझे चीनी आती है न किसी मित्र को .. आपकी नज़र मे कोई हो तो बतायें ताकि पता तो चले कि क्या लिखा है ।
शरद कोकास ने कहा…
27 अप्रैल 2010 9:48 अपराह्न