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इसके बारे में अधिक जानिए: http://blogbukhar.blogspot.com/2009/07/blog-post_14.html

मंगलवार, ९ फरवरी २०१०

दिल्ली ब्लोग बैठक ( सिलसिलेवार रपट नं ३)




ब्लोग बैठक में इसके बाद धीरे धीरे सभी एक एक करके आने लगे मगर सबसे ज्यादा चौंकाने वाली उपस्थिति रही मसीजीवी की, उनसे मुझे थोडी देर अकेले बात करने का अवसर मिला जब राज भाटिया जी अपने ब्लोग्गिंग की शुरूआती अनुभवों को बांटना शुरू किया तो वो भी खासा दिलचस्प रहा उन्होंने बताया कि जर्मनी में बहुत बर्फ़बारी होती है और ऐसे में सिवाय घर में दुबके रहने के कुछ नहीं किया जा सकता ऐसे ही एक मौसम में जब दो दिन की बोरियत भरी बर्फ़बारी का मजा ले रहे थे तो उनके नजदीक में ही रहने वाले एक मित्र घर पहुंचे और जब वे दोनों ही नेट पर समय बिताने की कवायद में लगे थे तो मित्र ने ही सबसे पहले उन्हें ब्लोग्गिंग के बाते में बताया जानते हैं वे मित्र कौन थे ....और कोई नहीं जाने माने ब्लोग्गर श्री सी मिश्रा जी बस यहीं से राज भाटिया जी , जो कहते हैं कि विदेश में जहां हिंदी की कोई कटिंग भी वे खजाने की तरह सहेज कर रख लेते थे , ऐसे में हिंदी ब्लोग्गिंग तो उनके लिए ऐसे था जैसे टाईटेनिक के रूप में दबा हुआ खजाना

राज भाई की पहली लाईन थी अपने परिचय की .....मैं एक हिन्दुस्तानी हूं ।राज भाई ने बताया कि शुरूआती ब्लोग्गिंग में ही कुछ टिप्पणियों के कारण उनका एक सामूहिक ब्लोग से विचारधारा का टकराव हो गया और उन्हें भी स्वाभाविक रूप से धडाक से उसी मानसिकता वाला करार देकर खूब किरकिरी की गई उन्होंने कहा कि पहले तो वे बिल्कुल सकपका गए मगर फ़िर जल्दी ही संभल गए और फ़िर कभी उस पचडे में नहीं पडे अपने अनुभवों को सुनाते हुए एक सरल हृदय सज्जन पुरुष जो पराए देश में भी रहते हुए अपने दिल में हिंदुस्तान को जीता हो , उसके मनोभावों को देखना और पढना एक अलग ही अनुभूति प्रदान करने वाला रहा इसके बाद जैसे जैसे ब्लोग्गर्स मित्रों की संख्या बढती जा रही थी , मुझे अंदर एक कसावट सी महसूस हो रही थी और अंदाजा हो रहा था कि इस तरह बैठने से सभी एक साथ आमने सामने बैठ कर बातचीत नहीं कर पाएंगे मैं फ़ौरन वहां के मैनेजर शर्मा जी से मिलने गया और उसे कोई और व्यवस्था करने को कहा उसने फ़ौरन ही एक वैकल्पिक व्यवस्था करने की बात कही , वो थी बाहर लान में मैं थोडा झिझक रहा था मगर अविनाश भाई से पूछा तो उन्होंने हरी झंडी देते हुए इसे और बेहतर बताया बस सभी बाहर की ओर लपक लिए

अब मजलिश जम चुकी थी और ,और काफ़ी, चाय , स्नैक्स के साथ गरम भी हो रही थी मेरा फ़ोन लगातार बज रहा था और मैं सभी मित्र ब्लोग्गर्स को साथ साथ वहां पहुंचने में रही कठिनाईयों को दूर करने में लगा था जब फ़ोन से बात नहीं बनती तो फ़िर स्कूटर से दौड....... इसी बीच फ़ोन पर एक और आवाज आई ,,,भाई आपके बताई स्थान के पास पहुंच चुका हूं मगर अब कैसे आऊं मैंने कहा आप बताईये कहां हैं और कौन हैं मैं फ़ौरन वहां पहुंचता हूं उन्होंने कहा जाईये जब आप पहचान ही नहीं रहे हैं तो फ़िर आने का क्या फ़ायदा मैं सकपका गया , मैं आपसे बात तो कर चुका हूं पहले, और आप अपने नंबर से फ़ोन नहीं कर रहे हैं इसलिए पहचान नहीं पा रहा हूं जाईये फ़िर मैं नहीं आऊंगा इससे पहले कि मैं और परेशान होता ....एक ठहाका लगा और पता चला कि उधर से भाई पंकज मिश्रा जी ब्लोग्गर्स मीट का हालचाल और बधाई देने के लिए फ़ोनिया रहे थे

बाहर बैठने के बाद , औपचारिक परिचय दौर ( जो कि बार बार चला किसी नए मित्र के आने पर स्वाभाविक रूप से ) के साथ साथ जिस पहली बात पर विमर्श चला वो था ब्लोग्गिंग और हिंदी तथा , पश्चिमी देशों में भारतीय सभ्यता तो बचाए बनाए रखने की जद्दोजहद जाहिर है कि यू के से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिंदी को बढावा दिए जाने के लिए पुरस्कार ग्रहण करके भारत का मान बढाने वाली कविता जी से बेहतर और कौन होता इस विषय पर विचार व्यक्त करने के लिए काविता जी अपने बेबाक अंदाज़ में अपनी बात कही और साफ़ कहा कि बदलते हुए समय के साथ चलना ही बेहतर और आखिरी विकल्प है उन्होंने बताया कि कई बार विदेशों में भारतीय सभ्यता/संस्कृति/भाषा को बचाए रखने के नाम पर जो कुछ किया जाता है वो बहुत ही अप्रासंगिक और निर्रथक सा लगता है उन्होंने स्पष्ट कहा कि अब जबकि वो अपनी बिटिया के लिए वर तलाश रही हैं तो जाहिर है कि वो उस वर में वो बातें नहीं ढूंढेंगी जो उन्होंने अपने समय में ढूंढी होंगी इसलिए समय के साथ चलना ही समझदारी है बात करते करते उनके निकलने का समय हो चुका था , मसीजीवी भी साथ ही निकलने को तैयार थे जाते जाते उन्होंने दो बातें मुख्य रूप से कहीं एक तो ये कि सभी ब्लोग्गर्स की ये सामूहिक जिम्मेदारी बनती है कि ब्लोग्गिंग का माहौल खराब हो दूसरी और ज्यादा महतवपूर्ण ये कि सभी ब्लोग्गर्स को हिंदी को सबल बनाने उसे समृद्धता प्रदान करने के लिए अपनी पोस्टों में अपनी रचनाएं, अपने विचार देने के अलावा एक एक बडे स्थापित लेखक, प्रेमचंद, निराला, रेणु, पंत, नागार्जुन , आदि जैसों की रचनाओं को भी अंतरजाल पर डालकर उसे अमर बनाने में योगदान देना चाहिए

इसके बाद कविता जी और मसीजीवी जी तथा मोईन शम्सी जी हमसे विदा लेकर निकल गए और इस बीच कुछ और साथी मिथिलेश दूबे जी , नीशू तिवारी जी , तारकेशवर गिरि जी , पद्म सिंह जी और सतीश सक्सेना जी भी पधार चुके थे बातों का सिलसिला और आगे बढा डा. टी.एस दराल जी ने अपना परिचय सीधे सादे तरीके से रखने के कारण , खुशदीप भाई ने चुटकी लेते हुए कह ही दिया कि हरियाण्वी के लिए इस तरह से परिचय देना कैसे हजम होगा इसके बाद सुनाए गए हरियाणवी किस्से आपको खुशदीप भाई ने बताए ही

सोमवार, ८ फरवरी २०१०

दिल्ली ब्लोग बैठक (सिलसिलेवार रपट नं २)



जब राज भाटिया जी ने अपने स्वदेश प्रवास का मन बनाया तो मुझसे संपर्क करके कहा कि अजय भाई क्या ये संभव है कि मेरे भारत प्रवास और दिल्ली में रुकने के दौरान सभी ब्लोग्गर्स मित्रों से मिल बैठ हो जाए । पिछले ब्लोग्गर सम्मेलन के बाद से सभी स्थानीय मित्र ब्लोग्गर्स भी इसी बात का आग्रह कर रहे थे । हमने सोचा कि गोया ये तो डबल आग्रह हो गया । पहले निर्णय किया किया गया कि दो ब्लोग बैठक किए जाएं एक नए साल के शुरूआत के उपलक्ष्य में और दूसरा राज भाई के सम्मान में । मगर कहते हैं न जो होना होता है वही होता है । दिल्ली की बढती ठंड ने और जल्दी जल्दी दो बैठकों में मौजूद रह पाने में असमर्थता जाहिर करने जैसे कारणों ने ये तय कर दिया कि सिर्फ़ एक ही ब्लोग बैठक होगी । अब अगली बात तय हुई कि ब्लोग बैठकी का दिन रविवार होना चाहिए , और राज भाई जी के पूरे प्रवास के दिनों में से जो इक्लौता रविवार मिल रहा था वो था .....७ फ़रवरी २०१० । बस तो बन गया ये दिन एक इतिहास , एक सुंदर पल , एक ऐसा दिन जो ताउम्र मेरे जीवन के कुछ बहुत सुनहरे दिवसों में से एक ।

इसके बाद सिलसिला शुरू हुआ सबको बताने का ,और याद दिलाने का कि राज भाई जी से मिलने जरूर पहुंचना है । दिल्ली और आसपास के सभी मित्र तो पहले ही आने का वादा कर चुके थे । मगर खुशी की बात ये थी कि , लखनऊ से महफ़ूज़ अली जी , राजस्थान से दिनेश राय द्विवेदी जी , छत्तीसगढ से अनिल पुसदकर जी, बी एस पाब्ला जी, ललित शर्मा जी , निर्मला कपिला जी तथा और भी बहुत से ब्लोग्गर्स साथियों ने आने की संभावना जताई । बस पिछली बार की तरह मैं लग गया काम पर । अब इस सरकारी ड्यूटी में मुझ जैसे कर्मचारी के लिए , जिसने अभी तक नौकरी में बंक मारना नहीं सीखा थोडा मुश्किल था मगर फ़िर पिछली बार वाली जगह ही काम आई । हमारे निवास स्थान के करीब था , देखा भाला था तो वही तय हो गया ।मगर समय के साथ साथ सबकी असुविधा कठिनाई और कुछ कारण सामने आए जिससे बहुत से साथियों का तो ब्लोग बैठक के तय दिवस से पहले ही नहीं पहुंच पाने की सूचना मिल गई थी । मगर शनिवार शाम तक महफ़ूज़ भाई का आना तय था । मगर इस बीच एक अप्रत्याशित खुशखबरी ये मिल गई थी कि कविता वाचक्नवी जी भी दिल्ली में ही हैं और वे भी हमारी बैठकी में चार चांद लगाने आएंगी ।


फ़िर आई ब्लोग बैठक की सुबह , पता नहीं क्या सोच कर शायद अपने मोबाईल के कैमरे को देखने परखने के लिए , मैंने ये सुबह का नजारा कैद कर लिया । तभी फ़ोन बजा देखा तो महफ़ूज़ भाई लाईन पर थे , मैंने पूछा कि कहां पहुंचे ....जवाब मिला बिस्तर पर ही । आयं ....ये क्या हुआ । उधर से महफ़ूज़ भाई ने बताया कि रात को तबियत खराब सी थी दवाई ले ली ...सुबह उठे तो शताब्दी निकल चुकी थी । बस एक और ब्लोग्गर छूट गया कुंवारा बेचारा ....श्रीमती होती तो शायद ये नौबत न आती (ऐसा खुशदीप भाई का मानना था , जो उन्होंने बाद में बैठक के दौरान बताया भी )


बैठक में सबसे पहले पहुंचने वालों में थे श्री मोईन शम्सी जी , फ़िर विनीत उत्पल जी , इसके बाद आए श्री राज भाटिया जी , श्री सरवत जमाल जी ,श्री राजीव तनेजा जी , श्रीमती संजू तनेजा जी और इन सबको हमने स्थान ग्रहण करने का आग्रह किया ही था कि अविनाश भाई की कौल आ गई , पूछा कहां हैं , उन्होंने जगह बताई , हम फ़ौरन निकल लिए उन्हें लाने । अविनाश भाई के साथ कविता वाचक्नवी जी भी थीं । जब अंदर पहुंचे तो इस बीच श्री अंतर सोहिल और सबको चौंकाते हुए मसीजीवी भी विराजमान हो चुके थे । फ़िर सबसे पहला दौर परिचय का चला ।हमारे टकले सर के बावजूद ताऊ की पहेली के गोल घर की तरह सब हमें पहचान चुके थे सो हमने सोचा परिचय करने करवाने का काम हम शुरू करें । पहली ही बौल पे क्लीन बोल्ड ...ये हैं कविता वाक्चनवी जी ....उधर से सुधारा गया ....नहीं जी कविता वाचक्नवी ....। बस हमने कहा झाजी अब चुप होके बैठ ही लो इससे पहले कि ऐसे ही परिचय करवाओ ...। यार हम भी क्या करते पहला ही परिचय इत्ते कठिन नाम से हुआ । ...

अब कल पढिएगा ....हमें यकीन है कि रपट पढ के आपको मायूसी नहीं होगी और आनंद भी आएगा

रविवार, ७ फरवरी २०१०

दिल्ली ब्लोग्गर्स बैठक संपन्न ,राज भाटिया जी से यादगार मुलाकात (ब्लोग बैठक रपट नं 1)



लीजीए हमने वादा क्या था न कि दिल्ली ब्लोगर्स बैठक की सारी रपट और फ़ोटो आपके लिए लेकर आज हाजिर हो जाएंगे । तो लीजीए अभी सिर्फ़ पोस्टर देखिए और आने वाली फ़िल्म का इंतजार कीजीए । यकीन मानिए , कई मायनों आपको हमारी ही तरह ब्लोग्गर बैठकी की ये पूरी पिक्चर यादगार रहेगी । अभी तो आप सिर्फ़ तस्वीरों देख के मजा लीजीए । अभी प्रेस रीलीज़ में व्यस्त हूं इसलिए कुछ भी कह नहीं पा रहा हूं एक और पोस्टर देखिए ।
अभी के लिए इतना ही कि लगभग पैंतीस ब्लोग्गर्स आपस में अपने दिल मिलाने के लिए पहुंचे थे और सुबह के ११ बजे से लेकर शाम के चार बजे तक का समय कब बीत गया , पता ही नहीं चला ।
कहानी और डायलाग के लिए देखते रहिए , मिलते हैं एक ब्रेक के बाद ........


आप लोगों की शिकायत/उलाहना पर मैं एक और फ़ोटो लगा रहा हूं , मगर अब अगली पोस्ट तक प्रतीक्षा कीजीए , अगली में नाम / काम सब आपको पता चलेगा .................

शनिवार, ६ फरवरी २०१०

ये जगह कर रही है ब्लोगगर मिलन का इंतजार ( दिल्ली ब्लोग्गर्स बैठकी, राज भाटिया जी से मुलाकात )



लीजीए जी अब तो सिर्फ़ कुछ घंटे ही बचे हैं जब इसी नीचे दिखाए स्थान को हम सभी ब्लोग्गर्स एक बार फ़िर गुलज़ार करने जा रहे हैं । जो पिछली ब्लोग्गर बैठक को देख पढ चुके हैं वे सोच रहे होंगे कि यार ये झाजी हर बार इसी जगह को क्यों चुन लेते हैं , कुछ सेटिंग तो नहीं कर रखी है इसके मालिकों से । अजी तो सिर्फ़ इतना सा फ़ंडा है कि हम ठहरे कामकाजी वो सरकारी वाले , पूरी ईमानदारी से ड्यूटी बजाने वाले ऐसे में तो सिर्फ़ यही हो सकता था कि जो भी स्थान आसानी से हमें उपलब्ध हो जाता है उसे हम कब्जा लेते हैं । पिछली बार भी कुछ कुछ ऐसा ही हुआ था और अबकी बार भी । मगर जगह तो दिल में होनी चाहिए सो है हमारे । जगह की फ़ोटू फ़िर से लगा रहे हैं पता तो पहले ही ठोक चुके हैं और सबसे बतिया भी रहे हैं ...........क्या कहा किन किन से ....नहीं पहले इसका पता एक बार फ़िर नोट करा देते हैं जी आप सबको









Day :- The 7th Day of Febrauary(sunday)

Time:- 11 a.m. to 4.oo p.m.

Place :- GGS FAST FOOD AND BANQUET
PLOT NO. 14, LAKSHMI NAGAR
DISTRICT CENTRE
DELHI -110092
PH:- 011-42448800


तो बस जगह आप सबने नोट कर ही ली है , अच्छा अच्छा आप सोच रहे हैं कि कौन कौन पहुंच रहे हैं झाजी ने बताया ही नहीं

श्री राज भाटिया जी

श्री अविनाश वाचस्पति जी ,

डा. टी एस दराल जी ,

श्री खुशदीप सहगल जी ,

श्री महफ़ूज़ अली जी ,

श्री तारकेशवर गिरि जी ,

श्री सतीश सक्सेना जी ,

श्री नीरज जाट जी ,

श्री लिमटी खरे जी ,

श्री विनीत कुमार जी ,

श्री राजीव तनेजा जी,

श्रीमती संजू तनेजा जी ,

श्री मिथिलेश दूबे ,

श्री विनीत उत्पल जी,

श्री नीशू तिवारी,

श्री प्रवीण पथिक जी ,

श्री मोईन शम्सी जी ,

श्री एम वर्मा जी ,

श्री यशवंत जी ,

श्री पवन कुमार जी ,

श्री सत्येन्द्र कुमार जी ,

श्री धीरू सिंह जी ,

पं वत्स जी ,



, इनके अलावा और भी बहुत से मित्र ब्लोगगरों ने आने की संभावना जताई है और पहुंचने का आश्वासन दिया है .........और सेवक तो रहेगा ही सेवा में । इसके अलावा हमारे मीडिया मित्रों ने पहले से धावा बोलने का मन बना रखा है । तो बस कल शाम को आप दिखाएंगे हम ............यादों की बारात ....


अपना फ़ोन तो वही है ही ...........9871205767

शुक्रवार, ५ फरवरी २०१०

बस खत्म हुआ इंतज़ार ,बस आ गया रविवार ( दिल्ली ब्लोग्गर्स मिलेंगे राज भाटिया जी से , और आपस में भी )




जी हां बहुत समय से टलते टलते आखिरकार वो दिन आ ही गया है जिसका मुझे और भाटिया जी को इंतज़ार था ,जी हां इस रविवार यानि सात फ़रवरी को सुबह ग्यारह बजे से शाम चार बजे तक हम सब आपस में मिल बैठेंगे । फ़िर से उन्हें याद दिला रहा हूं ताकि फ़िर से मुझे ये न सुनना पडे कि अरे आपने तो बताया नहीं , लीजीए नोट करिए जी

Day :- The 7th Day of Febrauary(sunday)

Time:- 11 a.m. to 4.oo p.m.

Place :- GGS FAST FOOD AND BANQUET
PLOT NO. 14, LAKSHMI NAGAR
DISTRICT CENTRE
DELHI -110092
PH:- 011-42448800

तो आप सब जो भी आना चाहें स्वागत है , आप सबका साथ ही जो भी अपना संदेश राज भाटिया भाई तक पहुंचाना चाहते हैं , या फ़ोन के माध्यम से हम सबसे संवाद स्थापित करना चाहते हैं तो और अन्य किसी भी जानकारी के लिए मैं पुन: अपना फ़ोन नं दे रहा हूं , कोशिश ये होगी कि ब्लोग्गर बैठक के बीच ही सभी उपलब्ध फ़ोन संपंर्कों के माधय्म से आप सबको जोडा जा सके । मुझे प्रतीक्षा रहेगी आप सबकी ॥

मेरा नं है 9871205767

गुरुवार, ४ फरवरी २०१०

हां , भविष्यवाणी सच साबित हुई .....और तो और कई ब्लोग्स का तापमान भी माईनस में चला गया


अभी कुछ समय पहले भविष्यवाणी की गई थी कि ३ और ४ फ़रवरी को मौसम खराब हो सकत है , हालांकि आमतौर पर भविष्यवाणियों में रुचि न होने के कारण मैं इसपर ध्यान नहीं दे पाता इसलिए इस बार भी ऐसा ही हुआ । मगर अबकी बार तो ऐसा बिल्कुल भी नहीं हुआ कि इस बात पर अविश्वास किया जाए । अरे मौसम तो मौसम , जब ब्लोगवाणी पर आया तो देखा कि कुछ ब्लोग्स का तापमान ( जिसमें से एक तो खुद इस खाकसार का था ) माईनस डिग्री में चल रह है , कई ब्लोगस पर तो पढा गया दिख रहा था दो और एक दूसरा स्कोर है ना ....पसंद ..वो ज्यादा था ..यानि माईनस तीन या माईनस चार । मुझे तब जाके पक्का यकीन हो गया कि , और मुझे क्या ...मुझे तो लगता है कि खुद भविष्यवाणी करने वालों ने भी नहीं सोचा होगा कि मौसम इस कदर बिगडेगा कि उसका प्रभाव ब्लोगवाणी पर आने वाली कुछ पोस्टों तक पर पड जाएगा । मैं ये भी सोच रहा था कि अब तक तो मैं ग्लोबल वार्मिंग की बात सुन रहा था ....मगर इसके साथ साथ ही ब्लोगल वार्मिंग भी बढ रही है ..ये अब जाके पता चला ।

मैंने गौर किया तो पता चला कि मौसम की मार सिर्फ़ कुछ खास ब्लोग्स पर ही पडी है । किसी मित्र ने भी इस ओर ईशारा किया तो हमने धडाक से अपना एंगल दिखाते हुए उनसे फ़रमाया ....भाई मियां ...आप काहे इस टाईप से सोच रहे हो ...ऐसे सोचो न कि हम लोग अब खासमखास हो गए । अरे भाई जी ये सोचो बिना पढे ...सिर्फ़ नाम गाम देख कर ही कौनो आपको एक चटका लगा दे रहा है तो होईए गए न खासमखास । वो फ़िर कहने लगे ...मगर यार इसके बावजूद भी उस पोस्ट को ढेरमढेर लोग पढ जाते हैं , टीप जाते हैं ....ई तो महाकंफ़्यूजन है जी । लो ये तो ह्यूमन सायोकोलोजी है भाई मियां ......जो उसे नापसंद करके चटकाते हैं वे चटकाने के बाद पढते हैं ...और बकिया लोग बाग इस लिए पढते हैं कि ....यार आखिर ऐसा क्या घटिया लिख दिया कि इत्ता नापसंद किया जा रहा है ???? यानि कुल मिला के ढाक के तीन पात ।

अमा भाई मियां , हमने तो सुना है कि ई नापसंद वाले मित्र लोग एतना डेडिकेटेड हैं कि बेचारे खानी पीना सोना जागना सब हराम करके सिर्फ़ इसी ताक में रहते हैं कि कब वो पोस्टें आएं जिनका टेम्प्रेचर नाप के उनको माईनस में पहुंचाया जाना है । गज़ब का डेडिकेशन है जी , हम तो फ़ुल फ़्लौट फ़िदा टाईप हो गए हैं उनके समर्पण भाव पर । चलिए अच्छा है ........हमें तो ऐसा लगता है कि नापसंद में भी एक ठो छोटा सा ही सही पसंद ( और देखा जाए तो बडा सा पसंद , क्योंकि ना तो खुदे उसके आगे छोटा बन जाता है ) तो घुसा ही रहता है । उफ़्फ़ ये ग्लोबल वार्मिंग .........अरे धत तेरे कि ....ब्लोगल वार्मिंग या कोल्डिंग ....कितना तेजी से बढ रही है ??????

बुधवार, ३ फरवरी २०१०

अब तैयार हो जाईये विश्व स्तरीय ब्लोग्गिंग के लिए ....एक्शन और लीगल एक्शन के साथ ...



आजकल जो कुछ और जितनी तेजी से घट रहा है , उस स्थिति का अंदाज़ा तो मुझे पहले ही हो चुका था क्योंकि कभी मौज के नाम पर तो कभी चर्चा के नाम पर , कभी पोस्ट लिख कर कभी टिप्पणी और कभी प्रति टिप्पणी के सहारे अपनी प्रतिक्रियाओं , अपने गुस्से, और अपनी उस सोच को खुले आम इस ब्लोगजगत पर रख कर या कहूं कि परोस कर , आग लगा कर तमाशा देखने वाले काम कर रहे थे , उससे देर सवेर ये तो होना ही था कि किसी न किसी बिंदु पर किसी न किसी स्तर पर जाकर उन लोगों को बुरा लग सकता है जो सिर्फ़ ब्लोग्गिंग कर रहे थे या हैं । और ये तो शुक्र मनाने की बात है कि अब तक न तो उन तमाम बडे लोगों , बडे प्रशासकों , राजनीतिज्ञों , अधिवक्ताओं , कानून विदों और विधि क्षेत्र से जुडे लोगों ने व्यापक रूप से हिंदी ब्लोग्गिंग में कदम नहीं रखा । और जिन्होंने रखा भी वे जरूर ही मन के किसी न किसी कोने में हिंदी ब्लोग्गिंग को शायद एक भाषा ,एक देश, एक समाज या और भी किसी कारण से .यदि परिवार नहीं मानते तो भी ..इसे सिर्फ़ आभासी दुनिया तो नहीं ही मानते हैं ।

मगर असली दिक्कत शुरू हुई मुख्य रूप से दो वजहों से , पहला कारण ये रहा कि हमारे कुछ मित्र जो हर लिहाज से चाहे वो ब्लोग्गिंग में रहने के समय काल से हो या फ़िर हिंदी भाषा की अपनी विद्वता के लिहाज़ यदि सर्वश्रेष्ट नहीं भी तो उससे कम भी नहीं थे , मगर जो हिंदी ब्लोग्गिंग में एक नई पौध जिसने विशुद्ध ब्लोग्गिंग का रास्ता पकडा ( यानि जो मन किया लिख डाला बेबाक और बिंदास , जिसे मैं लोकप्रिय ब्लोग्गिंग का नाम दे सकता हूं ) से किसी न किसी या बहुत सारे वजहों से न सिर्फ़ दूर रहे बल्कि प्रतयक्ष अप्रत्यक्ष रूप से इन्हें कभी उपेक्षित तो कभी उपहास का पात्र , पहले समझने और फ़िर बनाने लगे । बात यदि यहीं तक रुकती तो भी चलिए क्षम्य होती शायद , मगर हममें से ही कुछ मित्रों ने अनाम बेनाम गुमनाम बनके , टिप्पणी और पोस्टों के माध्यम से इस तरह का रास्ता अख्तियार किया जो कभी किसी के अपमान से होकर गुजरता था तो किसी की बदनामी से वास्ता रखता था । हालांकि ऐसे समय में मुझे अक्सर दो बातों को लेकर शिकायत रही वो भी उन मित्रों से जो तकनीकी रूप से बहुत सबल हैं कि अथक प्रयासों के बावजूद आज तक एक भी ऐसा चेहरा सामने नहीं लाया जा सका कि जिसके लिए कहा जा सकता कि ये है वो जिसने अंधेरे में रहते हुए सब कुछ करना /करवाना चाहा .......हालांकि मैं जानता हूं कि इस दिशा में प्रयास चल रहे हैं और जिस दिन किसी को ठोस सफ़लता मिली आधी समस्या का अंत तो उसी दिन हो जाएगा । इस मामले में दूसरी शिकायत मुझे एग्रीगेटर्स से भी है , आखिर क्या जरूरी है कि ऐसी विवाद वाली पोस्टों , बेहूदा शीर्षकों , दूसरों के नाम उछाल कर लिखने वाली पोस्टों , और इस तरह की मंशा से लिखी गई सभी पोस्टों को ऐग्रीगेटर्स क्यों आने देते हैं और आने के बाद भी रहने देते हैं । सोचिए यदि ऐसी पोस्टों को पाठक ही न मिलें , कोई पढे ही न, कोई प्रतिक्रिया ही न दे तो ........तो भी क्या माहौल अशांत हो पाएगा ????और हां सबसे जरूरी बात तो ये कि इस कसौटी पर सबको रख दिया जाए , किसी का नाम नहीं , किसी का ओहदा नहीं , नया पुराना नहीं , स्थापित और नया लिक्खाड भी नहीं कुछ नहीं ,सबके साथ सिर्फ़ एक ही व्यवहार ॥

अब बात करते हैं विश्व स्तरीय ब्लोग्गिंग की ...जी हां विश्व स्तरीय ब्लोग्गिंग के गुण अब हिंदी ब्लोग्गिंग में भी तो आने लगे हैं न .......अब देखिए न एक्शन तो पहले से ही चलता रहा है और अब तो अब तो ये और भी बढ रहा है ....अनामी बेनामी सुनामी बन कर लोग एक दूसरे से भितरघात को बखूबी निभा पा रहे हैं , और इसके अलावा जो भी हिंदी ब्लोग्गिंग को आभासी दुनिया करार देने में लगे हुए हैं , उन्हें भी अब ये समझ लेना चाहिए कि चाहे ऐसे या वैसे सभी आभासी तो हो ही रहे हैं । मगर मैं यहां फ़िर उसी बात को दोहराऊंगा कि जब बात आभासी दुनिया की होती है और लोग इसकी वकालत करते हैं तो फ़िर कोई मित्र क्यों किसी की पोस्ट से टिप्पणी से आहत होते ही उसके नाम से जो मन में आया लिख मारते हैं । अभी हाल ही के एक विवाद में , एक तरफ़ तो हिंदी ब्लोग्गिंग में उस खास नाम से किसी संवेदना , आत्मीयता होने का दावा किया जा रहा है , मगर उसके लिए किसी से भी ( बेशक ये किन्हीं एक नाम के इर्द गिर्द घुमाया जा रहा है , मगर प्रयास तो सामूहिक ही था ) कम से कम एक बार स्नेहपूर्वक गुजारिश तो करनी ही चाहिए थी ....मगर फ़िर आभासी होने हवाने का दावा करने वालों ने शायद इसे ठीक रास्ता नहीं माना चलिए ठीक भी था ........हालांकि मुझे अब भी संदेह है कि यदि यही सब किसी रिचर्डसन, राबर्ट , या ऐसे ही नाम और सुदूर नागरिकता वाले के साथ जुडता तो भी क्या उसे ये सब समझाया या जताया जा सकता था , तो अब जब बिना ये सब किए ....वो तथाकथित आभासी दुनिया वाले कदम को ही उचित माना गया तो फ़िर उसके अनुरूप ही आगे के लिए भी तैयार ही रहना चाहिए ।

आप सोच रहे होंगे कि लो ......अब झाजी भी पता नहीं क्या अनाप शनाप लिख कर सबको धमकाने में लगे हैं .....नहीं जी बिल्कुल नहीं मैं तो आपको आने वाला कल दिखा रहा हूं । और जो हालात हैं न यदि अब भी सब कुछ सही दिशा में नहीं गया तो वो दिन भी दूर नहीं जब ...हिंदी के ब्लोग्गर भी प्रसिद्ध हो रहे होंगे , सुर्खियों में आ रहे होंगे ......जी हां अपनी लेखनी की वजह से ही ,अपनी टिप्पणियों और सबसे बढ कर अपनी अच्छी नीयत और बदनीयती के लिए भी । शुक्र मनाईये कि अभी सायबर कानूनों ने अपना पंख पसारा नहीं है , अन्यथा मौजू उडान भरने वाले तमाम परिंदों , टिप्पणियों में कैसी भी भाषा इस्तेमाल करने की तथाकथित स्पष्टवादिता के सहारे कुछ भी लिख जाते हैं ......तो तैयार हैं न विश्व स्तरीय स्तर हासिल करने के लिए ?????????????????????