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सोमवार, 16 जून 2008

तुम औरतें, हर बार क्यों,

तुम औरतें,
हर बार, क्यों,
हम पुरुषों को ही,
कटघरे में,
खडा करती हो ?

जो मर्द,
बने फिरते हैं,
उन बेटों को,
बेटियों से ज्यादा,
लाड देकर , ख़ुद तुम्हीं तो ,
बड़ा करती हो॥

वो जो,
किसी कन्या के,
जन्म पर, सबसे ज्यादा,
छाती पीटती है,
और कोसटी है,
बेटी , बहू और बहिन को,
वो तो,
औरत ही होती है न।

वो जो,
शादी के बाद,
ताना देती,
और अक्सर,
आग लगाकर,
जला देती है,
अपनी बाहू और भाभी को,
वो भी,शायद,
औरत ही होती है न।

मैं मानता हूँ,
कि, इस मर्दाने,
समाज ने,
तुम से,
हमेशा ही,
अन्याय किया है।

लेकिन क्या,
तुम्हें नहीं लगता,
जाने -अनजाने,
ये अधिकार ,
भी ख़ुद,
तुमने ही दिया है।

क्या मर्दों के,
कपड़े पहनने से,
या उनकी,
तरह पनपने से,
औरत कोई,
मर्द सा बन जायेगी।

माना , गर ऐसा,
हो भी जाए,
तो फ़िर क्योंकर,
वो भी,
औरत ही कहलायेगी ?

सब सोच की,
लड़ाई है ,
नजरिये का फर्क है,
असंतुलन के ,
इस समीकरण में,
अज्ञानता की पर्त है॥

"नारी कभी,
कमजोर नहीं थी,
कमजोरी है,
उसका औरत्पन,
अपनी शक्ति,
ख़ुद पहचानो,
तौलो ख़ुद,
अपना अंतर्मन...

औरत आज भी कस्तूरी मृग की तरह अपनी शक्ति को ढूँढने के लिए भटक रही है, जबकि वो शक्ति ख़ुद उसके अन्दर मौजूद है.

10 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुंदर. सब कुछ कह दिया आपने. नारी द्वारा नारी के उत्पीणन के लिए पुरूष को जिम्मेदार ठहराना एक फैशन हो गया है. पुरूष ने नारी पर बहुत अत्त्याचार किए हैं. उस के लिए उस की निंदा की जानी चाहिए, पर जो अत्त्याचार नारी करती है उस के लिए उसे दोष क्यों?

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  2. तुम औरतें,
    हर बार, क्यों,
    हम पुरुषों को ही,
    कटघरे में,
    खडा करती हो ?
    mazaa aataa haen
    जो मर्द,
    बने फिरते हैं,
    उन बेटों को,
    बेटियों से ज्यादा,
    लाड देकर , ख़ुद तुम्हीं तो ,
    बड़ा करती हो॥
    sahii kehaa kyaa karey baeti sashkt haen apney ko sammahl laetee haen aadmi saari . mard saari umr bachcaa hee rehtaa haen
    वो जो,
    किसी कन्या के,
    जन्म पर, सबसे ज्यादा,
    छाती पीटती है,
    और कोसटी है,
    बेटी , बहू और बहिन को,
    वो तो,
    औरत ही होती है न।
    kyoki ham nahin chhtey jo takleef is samaaj nae ham ko dee woh hamaree beri ko bhi milae

    वो जो,
    शादी के बाद,
    ताना देती,
    और अक्सर,
    आग लगाकर,
    जला देती है,
    अपनी बाहू और भाभी को,
    वो भी,शायद,
    औरत ही होती है न।
    kartaa yae sab aadmi hee haen , matii kaa tael bazae sae kareed kar woh hii laataa haen maachis bhi wohi jalaata haen aur phir hamko aagey karkey khud bach jaata haen
    मैं मानता हूँ,
    कि, इस मर्दाने,
    समाज ने,
    तुम से,
    हमेशा ही,
    अन्याय किया है।
    ab sahii kehaa
    लेकिन क्या,
    तुम्हें नहीं लगता,
    जाने -अनजाने,
    ये अधिकार ,
    भी ख़ुद,
    तुमने ही दिया है।
    ab yae adhikaar kyoki ham vaaps lae rahey so tilmilaahat haen
    क्या मर्दों के,
    कपड़े पहनने से,
    या उनकी,
    तरह पनपने से,
    औरत कोई,
    मर्द सा बन जायेगी।
    koii bhi aurat mard bannaa hee nahin chathee , aurat samaj mae 50 % ki hissadari mang rahee haen aur rahee baat kapdo kii to jo mard kaan mae baali pehntae aur baal lambey kartey haen woh kyaa aurat ban rahey haen
    माना , गर ऐसा,
    हो भी जाए,
    तो फ़िर क्योंकर,
    वो भी,
    औरत ही कहलायेगी ?
    aurat ko aurat kaho , devi kaho , daain keho par agar mard ko is duniya mae aana haen to aurat kae paet sae aana haen
    सब सोच की,
    लड़ाई है ,
    नजरिये का फर्क है,
    असंतुलन के ,
    इस समीकरण में,
    अज्ञानता की पर्त है॥

    apna gyaan ka level mardo ko badhnaa hogaa kyokii aurat kaa bahut badh gayaa haen , vishwaas naa ho is saal kae 12th kaa result daekhlo
    "नारी कभी,
    कमजोर नहीं थी,
    कमजोरी है,
    उसका औरत्पन,
    अपनी शक्ति,
    ख़ुद पहचानो,
    तौलो ख़ुद,
    अपना अंतर्मन...
    naari ko apnee shkatee kaa pataa haen par mard ko shayaad nahin haen isiiliyae woh baar baar naari ko kehtaa haen yae karo wo karo

    उत्तर देंहटाएं
  3. बात तो सही कह रहे हैं..।l

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  4. :) ye smiley anaam ke liye..

    socha tha ki padh kar nikal lunga.. magar anam ka comment mast laga.. :)

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  5. introspection kar diya aapne ghara.....vakai is samaj ko is taraf bhi sochne kijarurat hai...ye anam bhai kisse dar ke apna naam chupa rahe hai.

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  6. kuch bat to aapki sahi hai par mei ise puri tarha se sahi nhi man sakti.

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  7. बहुत कुछ सही कहा है।

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  8. aap sab kaa bahut bahut dhanyavaad. main jaantaa tha ki is tarah kee post par shaayad aisee hee pratikriya aayegee. aur haan anaam jee, main maantaa hoon ki harek kaa apnaa apnaa anubhav hota hai aur shaayad aapkaa wohee anubhav khud aapko bhee aage aane se rok raha hai, kamal kee baat to ye hai ki itnee saaree baatein keh dene ke baavjood aap baahr nikal kar nahin aayein. chaliye fir bhee tippnniyon ke liye dhanyavaad. main is bahas ko abhee khatm karene ke mood mein nahin hoon, yani abhee aur bhee jhelnaa hogaa.

    उत्तर देंहटाएं

मैंने तो जो कहना था कह दिया...और अब बारी आपकी है..जो भी लगे..बिलकुल स्पष्ट कहिये ..मैं आपको भी पढ़ना चाहता हूँ......और अपने लिखे को जानने के लिए आपकी प्रतिक्रियाओं से बेहतर और क्या हो सकता है भला

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