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मंगलवार, 10 जून 2008

कुछ अच्छी बातें

जानते हैं हमारे आसपास , बचपन से ही कई अच्छी अच्छी बातें हमें सुनने को , पढने को , और सीखने को मिलती हैं। कुछ हमें पसंद आती हैं, कुछ बिल्कुल अजीब और कुछ सिर्फ़ बातें सी लगती हैं। कल अचानक मुझे भी ऐसा ही कुछ पढने को मिल गया । आपको भी पढ़वाता हूँ

क्या आपने कभी गौर किया है की हम सबकी आंखों में क्या दिखाई देता है, वैसे तो आपने शायद ये भी गौर नहीं किया हो की हम अपनी आखों से सब कुछ देख सकते हैं मगर ख़ुद अपनी आंखों से अपनी आंखें नहीं देख सकते , बिना आईने की मदद के ।, खैर,

पिता की आंखों में क्या दिखता फ़र्ज़

माता की आंखों में क्या दिखता है ममता

बहन की आंखों में क्या दिखता है स्नेह

भाई की आंखों में क्या दिखता है प्यार

पत्नी की आंखों में क्या दिखता है समर्पण

प्रेमिका की आंखों में क्या दिखता है शंशय

बालक की आंखों में क्या दिखता है जिज्ञासा

शिष्य की आंखों में क्या दिखता है आदर

मित्र की आंखों में क्या दिखता है सहयोग

दुश्मन की आंखों में क्या दिखता है बदला

अमीर की आंखों में क्या दिखता है घमंड

गरीब की आंखों में क्या दिखता है आशा

सज्जन की आंखों में क्या दिखता है दया

तो देखा आपने देखने के कितने रूप और नज़रिये हैं।


5 टिप्‍पणियां:

  1. हें हें हें.. अजी कभी आपसे मिला तो आपकी आखों में झांककर देख लूंगा जी.. :)

    वैसे बहुत ही बढिया और सही लिखा है..

    उत्तर देंहटाएं
  2. सही कहा आपने। अब तो आपकी आँखों में देखने की इच्छा है।

    उत्तर देंहटाएं
  3. aadarniya mahamantree jee,
    chaliye dua karte hain ki kabhee ye aankhein aamne saamne hon.

    उत्तर देंहटाएं

मैंने तो जो कहना था कह दिया...और अब बारी आपकी है..जो भी लगे..बिलकुल स्पष्ट कहिये ..मैं आपको भी पढ़ना चाहता हूँ......और अपने लिखे को जानने के लिए आपकी प्रतिक्रियाओं से बेहतर और क्या हो सकता है भला

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