बेबाक , बिंदास , बेलौस ,बेसाख्ता सी कुछ बातें ......
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बिखरे आखर
ट्विटर सेंसर को तैयार , गूगल ने किया इनकार ,
उपयोग दुन्नो का अईसा करें , रहे टेंसन में सरकार
मेरे इर्द गिर्द रहकर , तुम जो यूं , अपना ये ...
1 सप्ताह पहले















हिंदी की सेवा तो कर नहीं रहे , लोगों से मिलने मिलाने के पीछे भी हमारा कोई छुपा एजेंडा है ..जरूर कोई गुप्त गुट बना रहे हैं हम ....
भाई हमें बःइ भर्ती कर लेना इस गुप्त एजेंडे वाली टीम में.
रामराम.
ताऊ रामपुरिया ने कहा…
22 फरवरी 2010 10:38 अपराह्न
बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
ढेर सारी शुभकामनायें.
संजय कुमार
हरियाणा
http://sanjaybhaskar.blogspot.com
संजय भास्कर ने कहा…
22 फरवरी 2010 10:40 अपराह्न
भूल सुधार :-
बःइ = भी
पढें.
रामराम.
ताऊ रामपुरिया ने कहा…
22 फरवरी 2010 10:43 अपराह्न
यही है ब्लोगिंग।
राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है।
मनोज कुमार ने कहा…
22 फरवरी 2010 11:02 अपराह्न
कुछ तो लोग कहेंगे ---लोगों का काम है कहना ---छोड़ो बेकार की बातों में कहीं ---बीत न जाये रैना।
आज हमने भी एक गाने की ये पंक्तियाँ लिख दी।
लेकिन हकीकत यही है।
डॉ टी एस दराल ने कहा…
22 फरवरी 2010 11:04 अपराह्न
bahut kuchh kahne ko man kar raha hai, lekin filhaal is post me chipe dard ke saath hamdardi jataate hue patli gali se nikal leta hoon bhai !
varna fir koi vivaad khada ho jaayega, vaise maine aapka har aalekh pasand kiya hai
aaj bhi achha laga
jai hind !
AlbelaKhatri.com ने कहा…
22 फरवरी 2010 11:05 अपराह्न
अच्छा लिखा है ......आपने
देवेश प्रताप ने कहा…
22 फरवरी 2010 11:07 अपराह्न
ब्लॉगिंग = ?
छड़े मुँडो का महबूबा मिलने तक का स्टैन्ड-बाई जुगाड़
मुझ जैसों को महबूबा हासिल हो जाने के गम का इज़हार
ब्लॉगिंग = ?
बोले तो बातूनी गूँगे का गुड़
इन्टरनेट की चॉकलेट मैलोडी
मैलोडी खाओ खुद जान जाओ
ब्लॉगिंग = ?
एक दूसरे की नाक की तारीफ़ में जुटी नकटों की ज़मात
बिन ब्याहे रँडुआ भये के लिये रचा गया सेहरा
ब्लॉगिंग = ?
दिमाग की खुजली का ज़ालिम लोशन..
कहाँ तक गिनायें.. मुँह में ब्रह्माँड छिपाये श्री हरि के सहस्त्रों रूप फीके पड़ जायेंगे
अजय बाबू कहाँ तक गिनायें एक्ठो बड़का टिप्पणी बक्सा लगाइये न !
डा० अमर कुमार ने कहा…
22 फरवरी 2010 11:10 अपराह्न
भड़ास दिल की...कीपैड के जरिए कंप्यूटर पे उतार लेता हूँ मैं...
मेरे लिए तो ब्लॉग्गिंग यही है....
@आदरणीय अमर कुमार जी ...
"एक दूसरे की नाक की तारीफ़ में जुटी नकटों की ज़मात
बिन ब्याहे रँडुआ भये के लिये रचा गया सेहरा"
सच इतना कड़वा भी नहीं है शायद....
राजीव तनेजा ने कहा…
22 फरवरी 2010 11:35 अपराह्न
चलिए आज पता चल ही गया की कोई है जो यह सब भी सोचता है ....भड़िया चिंतन !!
आभार
RaniVishal ने कहा…
22 फरवरी 2010 11:36 अपराह्न
hmmmmmmmmm mai nA bolunga
Mithilesh dubey ने कहा…
22 फरवरी 2010 11:54 अपराह्न
ब्लॉगिंग...
अजीब दास्तां है ये...
कहां शुरू, कहां खत्म...
मंज़िलें ये प्यार की...
न तुम समझ सके, न हम...
किसी के इतने पास हो...
कि सबसे दूर हो गए...
जय हिंद...
खुशदीप सहगल ने कहा…
23 फरवरी 2010 12:00 पूर्वाह्न
जब जब भी मैने अपने दिल की बात को
किसी पोस्ट में उतारा है
जाने क्यूँ..लोगों ने उसे
ब्लॉगिंग कह कर पुकारा है....
-जान जाईये तो बताईयेगा जरुर महाराज..कुछ भला हमारा भी हो जायेगा.
Udan Tashtari ने कहा…
23 फरवरी 2010 12:07 पूर्वाह्न
अपनी बात दंनिया को कहने के लिए बहुत ही अच्छा मंच मिला है .. और क्या कहा जाए ?
संगीता पुरी ने कहा…
23 फरवरी 2010 12:08 पूर्वाह्न
ब्लॉगिंग क्या है जी पता नही? लेकिन मेरे लिये तो यह स्वर्ग से कम नही, कोई जमाना था कि ढुढना पडता था अपनी भाषा मै बात चीत करने के लिये लोगो को, ओर अब पुरा भारत ही अपना सा लगता है, कोई जमाना था हिन्दी के अखबार के टुकडे को सम्भाल कर रखते थे,आज हिन्दी का समुंदर बह रहा है, कोई कुछ भी कहे हमे तो बहुत अच्छा लगता है इस ब्लॉगिंग मै.
आप ने बहुत सुंदर लिखा, लेकिन फ़िक ना करे कुछ तो लोग कहेगे...डॉ टी एस दराल जी से सहमत है जी
राज भाटिय़ा ने कहा…
23 फरवरी 2010 12:16 पूर्वाह्न
ऐं, ये ब्लॉगिंग नहीं है? पर मैंने तो अपने सब दोस्तों से यही बताया है. ये बात अलग है कि तब भी वो लोग नहीं पढ़ते. और ये गुटबाजी पता नहीं कहाँ होती है? हमें तो दिखती नहीं. हौवा बड़ा है लेकिन उसका.
ज़मीन-आसमान ने कहा…
23 फरवरी 2010 12:21 पूर्वाह्न
जब जब भी मैने अपने दिल की बात को
किसी पोस्ट में उतारा है
जाने क्यूँ..लोगों ने उसे
ब्लॉगिंग कह कर पुकारा है....:):)
'अदा' ने कहा…
23 फरवरी 2010 12:27 पूर्वाह्न
हम और आप जो कुछ ठेल रहे हैं यही तो ब्लोगिंग है.....अब कोई ना माने तो क्या किया जा सकता है??;)
विचारणीय पोस्ट लिखी है....
परमजीत बाली ने कहा…
23 फरवरी 2010 12:54 पूर्वाह्न
क्या बात है, आजकल गुटबाजी के बारे में बहुत सुनाई दे रहा है? लेकिन ये नहीं मालूम था कि हम जो कर रहे हैं ,वो ब्लॉगिंग नहीं है....प्रश्न बड़ा प्रासंगिक है.
mukti ने कहा…
23 फरवरी 2010 1:13 पूर्वाह्न
वाह जी वाह क्या उच्च विचार है :)
आप बिलकुल सही सोचते हैं अपने बारे में :)
हम भी कुछ कुच्छ ऐसा ही सोचते हैं मगर इतना दीपाली कभी मणी सोचा जितना दीपाली आप चले गए :)
ब्लोगिंग जिंदाबाद
venus kesari ने कहा…
23 फरवरी 2010 1:47 पूर्वाह्न
दीपाली को डीपली पढ़ा जाये
venus kesari ने कहा…
23 फरवरी 2010 1:47 पूर्वाह्न
रानी विशाल का लिखा 'भड़िया चिंतन' देखा तो दिमाग में लाइट जली - ब्लॉगरी 'भड़भड़िया चिंतन' भी है :)
गिरिजेश राव ने कहा…
23 फरवरी 2010 6:52 पूर्वाह्न
जो तीर छूट चुका कमान से वही है ब्लागिंग।
दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…
23 फरवरी 2010 7:42 पूर्वाह्न
गंभीर चिंतन ...इस लिहाज से हम कौनो जन्म में ब्लोगर नहीं कहलायेंगे ...!!
वाणी गीत ने कहा…
23 फरवरी 2010 7:43 पूर्वाह्न
nice
Suman ने कहा…
23 फरवरी 2010 8:02 पूर्वाह्न
किस ब्लॉगिंग के बारे में पूछ रहे हैं आप अजय जी? अंग्रेजी ब्लॉगिंग के या हिन्दी ब्लॉगिंग के?
जी.के. अवधिया ने कहा…
23 फरवरी 2010 8:12 पूर्वाह्न
लिखते लिखते ब्लॉगिंग हो जाये।
यही लिखना चाह रहा था लेकिन अवधिया जी ने डाऊट में डाल दिया। क्या करूँ?
लोकेश Lokesh ने कहा…
23 फरवरी 2010 9:14 पूर्वाह्न
ब्लोगिंग; बस एक अभिव्यक्ति का केंद्र है और लिखते जाना है।
अंशुमाली रस्तोगी ने कहा…
23 फरवरी 2010 10:56 पूर्वाह्न
आपको पता लग जाये तो कृप्या हमें भी बता दीजियेगा
प्रणाम
अन्तर सोहिल ने कहा…
23 फरवरी 2010 11:43 पूर्वाह्न
ब्लोगिंग वेबलॉग हैं एक निज कि डाइरी हैं जो सार्वजनिक हैं । डाइरी मे हम जो चाहे लिख सकते हैं और वो सब लिखते हैं जो मन मे होता हैं और अपना "निज " होता हैं , ये हैं ब्लोगिंग का प्रथम स्वरुप
अब आये ब्लोगिंग के उपयोग , गूगल के सौजन्य से या और किसी कम्पनी के सौजन्य से उनके सर्वर पर कुछ जगह मुफ्त मे आप को दे दी गयी हैं अब उसका उपयोग अपनी सहूलियत से करते हैं । वो कवि/ लेखक जो कहीं छापना नहीं चाहते { या छपते नहीं } अपनी अभिव्यक्ति को यहाँ दर्ज करा देते हैं और वो उस पर किसी भी कमेन्ट कि आपेक्षा नहीं रखते उनका उदेश्य मात्र अपनी रचनाओ को इस ब्लॉग प्लेटफोर्म पर दर्ज करना हैं घूमता फिरता कोई सरफर आजाता हैं और कमेन्ट दे जाता हैं । इसके अलावा सामाजिक मुद्दों पर बात करने के लिये और एक समान सोच वाले लोगो के साथ "मानसिक " रूप से जुडने के लिये ब्लॉग आभासी दुनिया का एक पहलु हैं । अपनी बात केवल कहने का नाकि अपने को बदलने का । इसके अलावा आज कल बड़ी कम्पनिया वेबसाइट के साथ साथ ब्लॉग का भी इस्तमाल करती हैं और छोटी कम्पनिया केवल ब्लॉग से काम चला लेती हैं ।
ये तो आप कि अपनी सोच हैं कि आप ब्लोगिंग मे क्यूँ आये हैं , अगर आप ब्लॉग मे सोशल नेटवर्क बड़ा करने आये हैं तो आभासी दुनिया से आप फिर बाहर आगये हैं ।
रचना ने कहा…
23 फरवरी 2010 12:09 अपराह्न
ब्लागिंग बस ब्लागिंग है.
Kajal Kumar ने कहा…
23 फरवरी 2010 2:53 अपराह्न
हमने कहीं ब्लागिंग की परिभाषा पढी थी कि "ब्लागिंग याने समय नष्ट करने का भ्रष्ट साधन"...अब ये तो पता नहीं कि इसमें कितनी सच्चाई है :-)
पं.डी.के.शर्मा"वत्स" ने कहा…
23 फरवरी 2010 3:00 अपराह्न
ब्लागिंग अच्छी है या बुरी है, है कि नहीं है, पता नहीं बस इतना पता है कि मन की लिख देते हैं और मन की पढ़ लेते हैं, मन हल्का हो जाता है। नहीं तो पहले दुनिया से झगड़ते ही फिरते थे।
Dr. Smt. ajit gupta ने कहा…
23 फरवरी 2010 4:50 अपराह्न