शुक्रवार, 13 नवंबर 2009

दिल्ली व्यापार मेले से थोडा दूर लगेगा ब्लोग्गर्स का स्टाल (रविवार ब्लोग बैठकी सूचना )

जी अब तो ये तय हो गया है कि इस बार दिल्ली व्यापार मेले की शुरुआत के साथ ब्लोग्गर्स का स्टाल भी लगने जा रहा है...। लेकिन नहीं नहीं जी ...ट्रेड फ़ेयर के इटपो पार्क में नहीं ..उससे अलग ..।अरे भई कहने का सीधा सीधा मतलब ये कि रविवार के लिये जिस बैठक के आयोजन की चर्चा मैंने की थी ..उसका स्थान और समय तय हो गया है ..तो आप जो भी ब्लोग्गर्स मित्र आना चाहते हैं ..इसे नोट करें और पधारने का कष्ट करें ॥ बस एक बार आप कष्ट कर लें ...इसके बाद ..थोडा बहुत कष्ट आपको बैठक के दौरान हो सकता है ....इसके बाद ......अजी इसके बाद क्या .....इसके बाद तो आपको कष्ट सहने की आदत ही हो जाएगी ..॥

अरे नहीं नहीं जी ऐसा कोई बात नहीं है ..आप तो बस स्थान और समय को नोट करें और हो सके तो मुझे मेरे इस नीचे लिखे फ़ोन नंबर पर ., या ईमेल पते पर .आने/पहुंचने की सूचना देकर निश्चिंतता प्रदान करेंगे तो कार्यक्रम ..(हालांकि...सिर्फ़ हाथ मिलाने और गले मिलने का कार्यक्रम पक्का है ) की रूपरेखा तय करने में आसानी होगी जी ..लिजिये स्थान और समय ये है ॥

दिन रविवार 15 नवंबर 2009

समय दिन के 11 बजे से शाम चार बजे तक

स्थान :-

Gg's FAST FOOD & BANQUET
Plot No. 14, Laxmi Nagar ,
District Centre ,Vikas Marg,
Delhi 110092
phone :- 424448803

किसी भी तरह की अन्य सूचना के लिये आप मुझे इस नंबर पर संपर्क कर सकते हैं ..9871205767 और 9910384248 तथा मेरा ई मेल .: -ajaykumarjha1973@gmail.com

मंगलवार, 10 नवंबर 2009

यार पंद्रह को दिल्ली के ब्लागर फ़्री हैं क्या ....?

.....आप कहेंगे ।कि लो ये क्या प्रश्न हुआ भई ....ब्लोग्गर हैं तो फ़्री कैसे होंगे, फ़िर ऊपर सेआप कह रहे हैं कि दिल्ली के ....अजी यहां तो रजाई बनाने वाले कारीगर भी मई जून कीगर्मी में भी फ़्री नहीं हो पाते, सडकों पर जूलूस न भी निकल रहा हो किसी का दिल्ली आने जाने में ही पूरा जाम लगा देती है ॥सडकें भी फ़्री नहीं होती ..तो फ़िर काहे स्पेशली दिल्ली केब्लोग्गर्स से पूछा जी । अरे नहीं यार कुछ लोग इस एंगल से भी कह सकते हैं कि ..फ़्री हैं तभिये तो ब्लोग्गर है ।जरा से भी व्यस्त होते ..तो वही न होते जिसके लिये व्यस्त होते ...ई ब्लोग्गर्स थोडी होते ॥लेकिन मुद्दा ये नहीं हैजी ...न ही हम कौनो ब्लोग्गर एम्प्लौयमेंट एक्स्चेंज़ का स्थापना करने वाले हैं । वैसे ब्लोग्गर्स के लिये पेंशनस्कीम जरूर सोची है ....मगर हमारा व्हाट एन आईडिया बनने से पहले ही फ़्लौप हो गया ...कारण एक ही था । कोईब्लोग्गर् जीते जी तो ब्लोग्गिंग से रिटायर होने से रहा ..एक बार किसी मरते हुए ब्लोगगर से उसकी आखिरी इच्छापूछी गई तो ..उसका कहना था ..

बस जी जाते जाते ये बता दिजीये कि ,...
पहेली में अबके उडन जी की जगह कौन जीता...?
हां, आजकल कौन कौन एक दूसरे के नाम से पोस्ट लिख रहा है ..?
किसी की पोस्ट पर बेनामी जी की टीप से कोई नया लफ़डा शुरू हुआ क्या...?
कौन सी वाली चिट्ठा चर्चा में हमारी पोस्ट की चर्चा हुई/नहीं हुई ....?

पूछने वाले ने कहा...भैये ..ये सारे सवाल के जवाब सुनिये के मरोगे का ....तब तो तुम्हरा मरना ..कैंसिले होगा ..

देखिये मैं फ़िर भटक गया ...छोडिये मरने मारने की बातें ....दरअसल बात ये है कि ..बहुत विश्वस्त सूत्रों से पता चला है ..कि इस सप्ताहांत कुछ ब्लोग्गर्स ..(अजी दिल्ली के फ़्री वाले नहीं )..बल्कि दूर/सुदूर वाले का पदार्पण दिल्ली मे होने वाला है । कौन कौन हैं ....कहां कहां से ..क्यों पधार रहे हैं ..दिल्ली ही क्यों पधार रहे हैं ॥..भई इसका पता तो देर सवेर आप सबको चल ही जाएगा ..लेकिन चूंकि ..इस बरस सम्मेलनों का कुल निर्धरित कोटा ..हाल ही में हुए दो बडे बडे सम्मेलनों के कारण समाप्त हो गया है ..इसलिये ये तो पक्का है कि सम्मेलन उम्मेलन तो नहिये होगा ..ओईसे भी घर वाले कहे हैं कि इस मुई ब्लोग्गिंग के लिये आपके नेट का बिल का पेमेंट हो रहा है ..यही गनीमत समझिये,....ई सम्मेलन उम्मेलन किये और करवाये त जान लिजीये कि जबरिया वोलेंट्री रिटायरमेंट करवा दिया जाएगा ॥ हां इतना जरूर है कि ..जब मिल बैठेंगे ब्लोगगर चार ..आठ..सोलह ...या पता नहीं और कितने तो .......? हां यही तो देखना है कि ...का का हो सकता है .....?भई दिल्ली वाले इस लिये कहा है कि ..दिल्ली वालों के लिये तो ये कंपल्सरी सबजेक्ट है ..बकिया लोग आस पडोस के जतने भी हैं ......फ़्री होईये न ॥

अरे टेंशन कौनो मत लिजीये जी ....न खाने का न पीने का ॥ और भी किसी बात का भी नहीं ....काहे से जब हम लोग ही टेंशन नहीं लिये तो ..आप काहे लिजीयेगा जी ...और जब टेंशन नहीं लिजीयगा न ..तो ई सब तुच्छा बातों पर ध्यान नहीं जाएगा ...तो बस पंद्रह को फ़्री रहिये ...काहे से कि हमारे साथ व्यस्त होना है आप लोगन को ...कहां ..कितने बजे..कितने बजे तक.....लिजीये आजे थोडी बता देंगे आप लोगन को ....तब तक ..थोडा इंतजार का मजा लिजीये ...। बुधवार, वीरवार का मजा लिजीये ॥

सोमवार, 9 नवंबर 2009

हमारे और्कुटिया दोस्तों की संख्या तीन सौ के पार हुई ...


जब से इस तथाकथित आभासी दुनिया से जुडा ...इसके बारे में बहुत सी अलग अलग बातें सुनी। कई तरह की मसलन यहां के रिशते नाते, दोस्ती दुश्मनी ...सब कुछ आभासी ही है । आभासी ..यानि जिसका आभास भर होता है ..मगर आभास तो मुझे अपनी मां के आशिर्वाद का भी होता है .जो अब मुझे छोड के जा चुकी हैं ॥ और यदि यही आभास है ....तो फ़िर तो ये अहसास कम से कम उस एहसास तो लाख गुना ..सुखद है ..जो एहसास मुझे अपने पुश्तैनी मकान में जाने के बाद होता है । जब देखता हूं कि ..किस तरह मेरे पिताजी को उनके अपने भाईयों ने उनका सर्वस्व लूट कर ..किनारे लगा दिया । खैर ..ये अलग मसला है ..तो मैं कह रह था कि ..इसी आभासी सफ़र के दौरान मुझे मेरे एक युवा ..रिशतेदार ने बताया कि ..और्कुट नामकी एक सोशल नेटवर्किंग साईट होती है ॥


मैं सुन कर भी बहुत ही उदासीन रहा , कारण स्पष्ट और साफ़ था ..अपने संबंधो रिश्तेदारियों में इतना अनसोशल ..मशहूर था कि ..लगा कि यहां अपने मतलब का कुछ भी नहीं है । मेरे उस युवा मित्र/रिश्तेदार ने एक नया पत्ता खोला .....आप जानते हैं ..इस सोशल साईटस के जरिये लोगों को पता नहीं कितने पुराने ..बिछडे हुए मित्र , दोस्त, और सहेलियां मिल गयी। यहां भी हमारे लिये दाल नहीं गलने वाली जैसी पोजीशन थी ..जो सहेली हमें पढते समय नहीं मिली ..वो अब क्या खाक मिलती ..और जो सहेली हमें नौकरी के साथ मिली ..वो नौकरी के साथ साथ पहले से ही हमारे घर में भी ..सहकर्मी के साथ साथ ..घरकर्मी बन चुकी थीं । अलबत्ता ..दोस्त ढूंढने मिलने वाली बात ने थोडा रोमांचित सा जरूर कर दिया । हमने उसीसे कहा ..फ़िर क्या किया जाए । उसने सलाह दी ....और्कुट पर आपकी प्रोफ़ाईल बना दें । हम डर गये ..दरअसल उन दिनों ....और्कुट पर लोगों के प्रोफ़ाईल से छेडछाड की बहुत सी घटनाएं सुनने पढने को मिल रही थीं ...मगर फ़िर खुद ही सोचा ,...अमां हमें काहे का डर जी ...हम कौन सा खान या बच्चन हैं ..कि लोग बाग हमारे नाम और काम का फ़ायदा उठा लेंगे ..। ले दे कि एक ब्लागर ठहरे ...सो जो भी सींग से सींग लडाएगा ...उहो तो ब्लागारे होगा । तो बन गया आनन फ़ानन में और्कुट प्रोफ़ाईल ..। हमने बिछडे दोस्त का सुना था ..सो पहले उसी मुहिम पर काम किया गया । मैट्रिक में जो साथी छूटा था ..पहले उसकी तलाश की कोशिश हुई ....आखिरी बार जहां उसके होने का अनुमान था ..वो सूत्र लगा के ..लगे हाथ पांव मारने ....एक लिंक मिला ..मगर चित्र नदारद ..अब क्या करें ..। उसी मार्गदर्शक ने सुझाया ...हमने उसके प्रोफ़ाईल को टटोला ....युरेका ...वही स्कूल जिससे हम पढे थे .....आगे मित्रों की सूची देखी ...उसके छोटे भाई का नाम भी मिल गया ....मगर चूंकि तस्वीर नहीं थी ..सो ..सोचा ये गया कि ..तुक्के में एक संदेश भेजा जाए...और कुछ इंतजार किया जाए...।

थोडे दिन क्या ..बस दिन के बाद ही मैसेज आ गया ...अपना वही बिछडा दोस्त निकला ..पूरे उन्नीस वर्षों के बाद ..बस कुछ ही पलों में ..फ़ोन नम्बर का आदान प्रदान...जो मित्र मेरे संपर्क में थे ....वे मेरे माध्यम से उसके संपर्क में ...और उसके दायरे में जो थे ..वे सब मेरी पहुंच में आ चुके थे ॥ सिर्फ़ चंद घंटों मे ही एक अच्छी खासी मंडली बन गई हमारी ॥..अजी ये तो एक शुरुआत भर थी ...इसके बाद तो जैसे और्कुट महाराज को पता ही चल गया कि हमें कौन कौन ..अपनी दोस्ती में चाहिये....एक के बाद एक ब्लोग्गर ..हमने कहा...अरे इहां भी ...लो जी ...मजा आ गया । इसके बाद उसी परिचित ने ..पता नहीं किस किस सोशल साईट्स पर मुझे जोड दिया ...हालांकि भूले भटके ही उधर जा पाता हूं ॥ मगर इतना तो है कि ..कम से कम मेरे लिये तो ये सोशल साईटस ..बेमानी नहीं हैं ॥आज अचानक ध्यान गया तो देखा कि अपने और्किटिया दोस्तों की संख्या तो तीन सौ के पार चली गयी है ॥ यानि भैया ....वीरेन्द्र सहवाग हो लिये हम तो ......॥ जय हो ...आज तो मन टैण टैनेन कर रहा है इस खुशी में ........आप बताईये आपका कित्ता स्कोर हुआ जी .........?

शनिवार, 7 नवंबर 2009

चिट्ठाकारी से टिप्पीकारी तक का सफ़र



दूसरों की तरह मैंने भी जब इस ब्लोग जगत में कदम रखा था तो विशुद्ध रूप से एक लेखक था ...लेखक मतलब वो वाला लेखक नहीं ...सिर्फ़ एक लिखने वाला । इससे पहले कागजों पर कलम चलती थी और अब फ़र्क ये आया था सिर्फ़ ..कि अब उंगलियां कंप्यूटर पर चल रही थी । और ज्यादा फ़र्क तो नहीं आया था अलबत्ता ये भी जरूर था कि पहले सिर्फ़ अपने मतलब की यानि अपने स्वाद के हिसाब से , अपनी जरूरत के अनुसार ही पत्र पत्रिकाओं, समाचारों का पठन और संकलन करता था । यहां आने के बाद सबसे पहले तो अपनी पोस्ट पर आई प्रति्क्रियाओं और टीपों को पढने की आदत सी हो गई थी । यानि कहने का मतलब ये कि सिर्फ़ एक चिट्ठाकार की तरह का हो गया था । चूंकि कंप्यूटर नहीं था और सिर्फ़ एक डेढ घंटे की ब्लोग्गिंग सीमा में ही सब करने की मजबूरी थी सो .....पोस्ट लिखने के बाद जो भी समय मिलता था उसमें दूसरी पोस्टें जो भी सामने पडती गयीं , एक स्वाभाविक आदत सी बनी।

किंतु इस सबके बीच एक जो चीज़ अपने आप विकसित हुई वो थी पोस्ट पर आई टिप्पणियों को पढके उनका मजा लेना और उन टीपकारों के पीछे पीछे जाकर उनको जानना , फ़िर उनके लेखन का मजा उठाना और उनको भी टीपना । मेरी आदत थी कि मैं न सिर्फ़ उनकी पोस्ट के अनुसार टिप्पणी करता था बल्कि मुझे मिली टिप्पणियों का जवाब भी दे दिया करता था । ये बस इस तरह से था जैसे मुझे मिली किसी चिट्ठी का जवाब देना । मगर फ़िर भी बहुत चाहने के बाद भी मैं ये काम बखूबी नहीं कर पाता था । इसी दौरान मुझे एक बात ने बहुत प्रभावित किया वो थी उडनतशतरी जी की टिप्पणियां, जो मुझे हर दूसरी तीसरी पोस्ट पर मिल जाती थी । जब ब्लोग्गिंग में नियमित हुआ तो जाना कि ये तो अपने ब्लोग जगत के इकलौते एलियन हैं सो कोई भी ब्लोग इनके पहुंच से बाहर नहीं है , और न ही कोई पहेली ऐसी है जिसका जवाब इन्हें न मालूम हो ।

लेकिन इससे इतर इनकी एक आदत ने मुझे भी कायल बना दिया , और मैंने भी उसी पल ये सोच लिया था कि चाहे चिट्ठाकारी चले न चले टिप्पीकारी की दुकान तो सजा ही लेंगे । और फ़िर जब नियमित हुआ , माने अपने घर में कंप्यूटर आ गया तो ये काम जोरों शोरों से शुरू हुआ । मेरी कोशिश ये होती है कि खूब सारे ब्लोग्स को पढा जाए, कौन से कैसे क्यों ....ये पैमाने मैंने कभी तय नहीं किए ..इसलिये जो मिलता है जहां मिलता है पढता हूं ...और एक ऊसूल भी पक्का है जिसके ब्लोग में एक बार घुसता हूं बिना टीपे बाहर भी नहीं निकलता । लेकिन फ़िर भी कभी कभी ..मौन टीप ...देकर सिर्फ़ पढ के ही बाहर निकलना भी पडता है ।

किसी भी पोस्ट को टीपने के दौरान मेरी कोशिश रहती है कि पोस्ट लेखक तक कम से कम दो बातें तो जरूर पहुंच जाएं। एक ये कि हमने उनकी पोस्ट को खूब अच्छे से पढ लिया है ....दूसरी बात ये कि पढने के बाद मैं आखिर समझा क्या या कि मेरे मन में क्या आया ..ये भी उन तक पहुंच जाए। यही कारण है कि मेरी टीपों में कभी आपको चुहलबाजी , कभी कविता, कभी शरारत, कभी भीरूपन , कभी सलाह , कभी शिकायत , और कभी तीखापन मिलता होगा । मगर किसी भी सूरत में मेरी यही कोशिश रहती है कि ....यदि आपको आपकी पोस्ट याद रहे तो आपको मेरी टीप भी उसी के साथ याद रहे । अब इस कोशिश में कितना कामयाब होता हूं ये तो पता नहीं मगर ...चिट्ठाकार से एक टिप्पाकार तक का ये सफ़र मुझे खूब पसंद आया । यहां ये कहता चलूं कि ..शायद यही कारण था कि जब मैंने टिप्पणियों के संकलन और चर्चा वाले ब्लोग को देखा तो झट से उनसे आग्रह किया कि मुझे भी शामिल करें और मुझे बहुत खुशी और गर्व है कि मैं उस ब्लोग से जुडा ।

अब यदि टीपों की बात हो रही है तो यदि उन टीपकारों के नाम न लूं. जो मुझे प्रभावित करते हैं तो ये पोस्ट कुछ अधूरी सी लगेगी । जैसा कि पहले ही कह चुका हूं अपने एलियन जी महाराज, यानि समीर जी , का तो कोई जवाब ही नहीं है , इनके अलावा श्री गिरिजेश राव जी ,अविनाश भाई , अनिल पुसादकर जी ,समय जी , संगीता पुरी जी, अदा जी, निर्मला कपिला जी , श्री पाबला जी, द्विवेदी जी, अनूप शुक्ला जी, पांडे जी , मिश्रा जी , अरविंद मिश्रा जी भाई महेन्द्र मिश्रा जी , राज भाटिया जी, ताऊ जी , सी एम प्रसाद जी, पंडित जी , रंजन जी , शेफ़ाली पांडे जी, महफ़ूज़ अली, दीपक मशाल जी , विवेक जी , हिमांशु जी , शिवम मिश्रा जी ,पकंज मिश्रा जी , काजल कुमार जी , रूप चंद शास्त्री सी , पी सी गोदियाल जी श्री जी के अवधिया जी , भाई खुशदीप जी ,अलबेला खत्री जी ,और लास्ट बट नौट लीस्ट में अनाम जी ...इसके अलावा और भी जिनके नाम अभी नहीं ले पा रहा हूं उन सबका साथ मुझे इस टीपकारी के अनथक सफ़र में मिल रहा है ।

तो बताईये आप सब हैं न मेरे साथ ...

बुधवार, 4 नवंबर 2009

ब्लोग्गिंग के वर्तमान हालातों पर बिलागर्स (ब्लोग्गर्स नहीं ) का थौरो चिंतन.



ब्लोग्गिंग बदल रही है , ब्लोग्गर्स भी बदल रहे हैं । नहीं ब्लोग्गर्स बदल रहे हैं तभी तो ब्लोग्गिंग बदल रही है।
अरे छोडिये सीधा सीधा ..झेलिये न ..कि दोनो बदल रहे हैं । ब्लाग्गिंग सम्मेलन ( देखिये ई भी अब तो शोध का विषय बन गया है कि ऊ ठीके में ब्लाग्गिंग सम्मेलन ही था न कि सब ठो ब्लाग्गर मजे मजे में संगम डुबकी लगाने के लिये गये थे ) हो रहा है , कहिये कि जोरदार हुआ । भूगोल , विज्ञान, और इतिहास सब एके साथ बन गया जी । इसके तुरंत बाद एक ठो और सम्मेलन करा दिये अपने ताऊ जी ने.....गधा सम्मेलन । गर्दभ सम्मेलन ...कि कहें कि गजब सम्मेलन ..। ई तो नहीं पता कि ई सम्मेलन भी ऊ सम्मेलन के समांतर था कि नहीं ..मगर सुने कि सुपर हिट रहा जी ...। मुदा एक तकलीफ़ तो होईये गया ..हमारे समेत बहुते गरीब गुरबा ब्लागर को .......न तो उहे वाला में बुलाया गया न इहे में ...। इससे इतना तो फ़ायदा होईये गया कि न घर के ( बिलाग्गर सम्मेलन ) रहे न घाट (गधा सम्मेलन ) के ...ई टाईप का मुहावरा का मतबल एक दमे समझ में आ गया ..।



मुदा ई बात तो चीन द्वारा भारत का कुछ भाग दिखाने से भी जादे इंपोर्टेंट हो गया था ....सो तत्काल तय हुआ ... ...बडका ब्रिगेड एकदम इम्मिडियेट मीटिंग काल किया ...अरे एके बार नहीं जी..खेपमखेप में तो देखिये ..पढिये और चिंतन किजीये..काहे से कि बिलागर्स पर पहली बार एतना थौरो ..चिंतन हुआ है ..।तो हम भी आपको उसक रपट एकदमे नहीं ठेलेंगे .....धीरे धीरे ...और हां ई चिंतन बैठकी का कौनो तस्वीर उपलब्ध नहीं है . ..लिया हे नहीं गया जानके ..दुई ठो कारण है इसका भी ..सुना गया है कि ऐसी रपटों मे अक्सर तस्वीरें लगने से ..सारा ध्यान तस्वीरों की तरफ़ ही चला जाता है ..और रपट पिट जाती है ..दूसरा कारण ई कि ..कई बार तस्वीर देख के ..अचानक बिलागर सब को धक्का पहुंचता है....कि अरे एतना रोमांटिक गज़ल ..ठेलने वाला ई बुढऊ टाईप जवान था ...धत तेरे की..। अरे मारिये गोली इ सब टौपिक को ..पहली बैठकी में ...ताऊ जी ...अरे वही बिल्लन माने रामप्यारी वाले ...चच्चा ..टिप्पू जी ....और लाला उडनतशतरी जी शामिल हुए....। रामप्यारे से खासमखास सिफ़ारिश ..( पोल खोलिये देते हैं ..उ से कहे हैं कि ऊ का खुल्लम खेल फ़र्रुखाबादी ..मे रोजे टीपेंगे ..और कभी नहीं जीतेंगे ) पर हमको भी ई बैठकी का ..एक मात्र औडिएंस के रूप में ....नीचे चटाई पर बैठा दिया गया ..हम चुपचाप लपेटते रहे । आखिर आप सबके लिये रपट भी तो लानी थी ।





ताऊ जी :- और भैया ...का चिंतन करना है ..हमरे हिसाब से तो एजेंडा खाली ई तय होना चाहिये कि ...उडन जी और हमारे ब्लाग पर ..रिकार्ड टिप्पणी आ गयी हैं ....और आने वाले समय में हम लोग तेंदुलकर का रिकार्ड भी तोड सकते हैं ....और इस हेतु का का नया पहेली पूछा जाए....।पिक्चर बना लिये....मैगजीन भी खूबे चला....लूप में बहुते योजना सब है ....सोच रहे हैं एक ठो रिएल्टी शो भी शुरू किया जाए......एक दम फ़ाईट क्लब टाईप....लट्ठ हम देंगे ....और कपार सब तो लोग अपने उपलब्ध करा देता है ....का कहते हैं .....?








उडन जी :- देखिये हम आप दुनो ( ताऊ और चच्चा ) के बीच में सिर्फ़ इसलिये बैठ्की किये हैं ..कि भले हम सेर और सायरी ..बीडी के खोली पर लिख कर हिट करा रहे हैं ....मुदा सबको पता है कि हमरा उमर तो लडक पने से निकल के ...आप चचा , ताउ जईसने हो गया है ..और पहेली उहेली का कहें ...आप लोग पूछ पूछ के थक जाईयेगा ...हम जीत जीत के नहीं थकेंगे ....टीपवा तो ...आईये जाता है ...धडाधड ...कुछ तो विल्स कंपनी वाले भी भेज रहे हैं ...आखिर उनका विल्स कार्ड हमई तो फ़ेमस किए हैं न..।



चचा कहे :- देखिये उडन जी , ई उमर का बात ऊत नहीं किया किजीये आप ...आप ठहर एलियन ...आपका उमर का ...और आपकी जवानी का ....आप तो एवर ग्रीन जवान हैं जी । आ रहबे किजीयेगा ...ई बिलागरवा सब ..बुढैती में थोडे जाने देगा आपको ...हां आप लोगन का टीप का रिकार्ड और ऊ का स्पीड देख देख के हम सोच रहे हैं कि ..हमको तो अपने भतीजा सब के साथ ..एक दिन में आठ आठ बार टीप चर्चा लगानी पडेगा...। ओईसे भी जौन स्पीड से चर्चा मंच का विस्तार हो रहा है ..बहुत जल्दीये ई समय आने वाला है जब कौनो ब्लोगर को ई सिकायत नहीं रहेगा कि ..ऊ की पोस्ट की चर्चा नहीं हुई ....।


ताऊ :- अरे भई हमने तो अपनी इस बिल्लन को भी बराबर टरेनिंग दे दी है ....हमारा कैमरा लेकर लिकड लेती है ..का फ़ोटू खींच लाती है ...और कमाल तो ई की ...फ़ोटू एतना काट पीट के लेती है कि ...खुद हमें ही नहीं पता चलता...सो पहेली में लगा देते हैं ..ईसी बिल्लन की पहेली में .....आखिर ई बिल्लन का टेंशन अकेले हमही काहे पालें ...। कह रही थी ..ताऊ ई गर्दभ सम्मेलन का सारा फ़ोटो शूट हमें ही करने दो ...कईसे तो रोके हैं ....हम कहे ..नहीं ..हम नहीं चाहते कि ..सम्मेलन सम्मेलन का कंफ़्यूजन होई जाए..।


बस जी आज एतने ...उडन जी इसके बाद ब्रेक में बीडी पीने और ऊ का खोली पर ..का कहते हैं ..बिल्स कार्डवा लिखे चल दिये....चच्चा कहे ..रोहित को कहते हैं ..टेम्पलेटवा पकडे के मशीन का ओवरवायलिंग करदे ..आगे जरूरत पडेगा ... ताऊ तो बिजी थईये थे ...सो ब्रेक के वास्ते हम भी उठे ...और अगला चौपाल पर पहुंचे ......लिजीये सब एपीसोड आजे ....तो कल का ....


रविवार, 1 नवंबर 2009

क्या मेरी टिप्पणियां आपको कष्ट पहुंचाती हैं.....?

जी हां कोई भूमिका नहीं, कोई संदर्भ नहीं, कोई सफ़ाई नहीं, कोई आरोप भी नहीं ..और किसी से कोई शिकायत भी नहीं।

मुझे लगता था कि मैं जब भी किसी की कोई पोस्ट पढूं तो जब उस पर कुछ भी टिप्पणी करूं तो पोस्ट लिखने वाले को भी उतना नहीं तो कम से कम उससे थोडा कम ही सही आनंद आये जितन उन्हें पोस्ट लिखते समय आया हो। पता नहीं कोशिश में कितन कामयाब होता हूं..मगर विश्वास रहता है कि कम से कम ..मेरी लेखनी को पढने के बाद जो भी जैसी भी छवि मेरी उनके मन में बनी हुई है..उसको और मेरी टीप को देखते हुए..किसी भी सूरत में ..मेरी टिप्पणी किसी के लिये दुख का कारण तो नहीं बन सकती है।

मगर जाने अनजाने शायद ऐसा हो जाता है....और तब लगता है कि क्या पढना कम कर दूं ...नहीं तो फ़िर जिसे पढूं ..उस पर टीपना बंद कर दूं.....नहीं तो करूं क्या.....सोचा सीधे सीधे आपही से पूछा जाए...कि क्या वाकई मेरी टिप्पणियां ..आपको कष्ट पहुंचाती हैं...


और आपसे भी सीधे सीधे .....अपना विचार रख देने की अपेक्षा रहेगी....।

मंगलवार, 27 अक्टूबर 2009

जो बिलबिलाए...उहे है बिलागर ..खांटी बिलागर...



देखिये जी आप एकदमे ठीक समझ रहे हैं.....हमहुं संगम सम्मेलन का ही कौनो बवंडर पर सवार होकर एक ठो पोस्ट ठेलने की तैयारी कर बैठे हैं। देखिये देखिये अब ई मत कहियेगा कि आपहु शूरू हो गये....आप तो गईबे नहीं किये थे...अरे जाना छोडिये आप लोगन को बुलाया भी नहीं गया था जी...। अजी हम ऊ सब काहे रीपीट करेंगे जी....जब लोग बाग लिखिये रहे हैं...लिख का रहे हैं....एक दम से दाग रहे हैं...बोफ़ोर्स का मुंह खोल दिये हैं। इत्ता चर्चा तो कुंभ का नहीं हुआ होगा जतना ई सम्मेलन/संगोष्ठी/महासम्मेलन/कार्यक्रम/मेला/चौपाल...बस जी एतने आ रहा है अभी मन में......का हुआ ।

दरअसल पिछले दिन ..गाम की तरफ़ गये तो ....हम दू ठो बिलागर ...अरे दूसरे ओही चिट्ठा सिंह जी ...(अब तो सिंग भी बदल दिये हैं..काहे से राजा बाबू को एतराज न हो ) बतियाते जा रहे थे....तो चच्चा बीच में मिल गये। अब ई मत पूछियेगा कि चच्चा कौन। अरे एके गो चच्चा हैं...जिनके हम सर्टिफ़ाईड बच्चा ..माने भतीजा हैं।

पूछे लगे ," तब और बताओ..का सब चल रहा है ..का बने ...कुछ बनबो किये कि बस खलिया बंदूक ढन ढन"


हम कुछ कहते कि मित्र कह उठे ...," अजी का बात कर रहे हैं चच्चा....हम इनको अपने फ़ील्ड में ले आये हैं....लईका आपका अब आम नहीं रहा ......एक दमे खासमखास बिलागर हो गया है ॥"


आंय ई का होता है जी ...ई तो सुनने में कौनो अजगर , कारीगर, बाजीगर जैसा लग रहा है ..?


हां चच्चा होता तो कुछ अईसने टाईप का होता है ...मुदा का कहें आज कल सब इहे बन जाना चाहता है..माने जानिये कि ..आप इंसान हों न हों ....बिलागर होना जरूरी है.....काहे से कि बिलागर हो जाने के बाद आप इंसान, हैवान, शैतान, ....ई सब टाईप से मुक्त हो जाते हैं।


"अरे जादे नहीं छोडो हमको पता है ..ई पिछला दिन अभी तुम लोग अपने जैसे ही कुछ अजगर ,बाजीगर , का कुछ संगम मेला ..माने कुंभ जैसा कुछो था न जी...सुने हैं बडा ....कपडा उतारा -उतारी हुआ जी....आ हुआ का अभियो चलिये रहा है "।

"हम सिटपिटाते इससे पहिले ही ..मित्तर चिट्ठा बोल पडे," अरे चच्चा तुमका पता तो हईये नहीं है...अब ई बताओं..आदमी..अरे माने बिलागर ...ओह मान लो थोडिये देर के लिये कि जौन बिलागर सब था उ सब आदमीए था ...तो संगम जायेगा ..तो स्नान करबे करेगा न गंगा जी में...और गंगा जी में स्नान के लिये कपडवा तो उतारना ही न पडेगा जी....अब ई तो स्नेह है सबका कि ...सब एक दोसर का ही प्रेम प्यार से उतार दिया ...ई तो हम लोगन का चलता रहता है । देखो चचा ...बिलागर माने ...उ...चीज,प्राणी, जंतु,जीव ...जो बिलबिलाए...बिलबिलाते रहे। वजह होने पर भी बिना वजह भी , मुद्दों पर, बगैर मुद्दों पर , चिरकुटई पर, टिप्पणियों पर ....अब का गिनायें...बस ई समझिये कि जो बिलबिलाता हो बही ब्लागियाता भी है । बकिया सब तो ओइसे ही टाईम पास है ...।"

चचा कहां मानने वाले थे...कहे लगे .".चलो मान लिया ..मगर ई तो बताओ कि ..तुम्हरा चीफ़े गेस्ट ....जो बहुते नाम वाला था सुने हैं होस्टाईल हो गया जी....का तो कहा कि ई सब तो कचरा है जी । रे तुम लोग तो कबाडी हो गया न । "

अरे चचा तो जो लोग बुलाए थे ...उन्हीं को कहां मालूम था कि उ नाम वाले ..हमही को बेनाम कर जाएंगे ...फ़िर ठहरे चीफ़ गेस्ट....इहे गुस्ताखी तनिक इहां बिलागिंग में करते न तब देखते आप....ई जौन पोस्ट सब आ रहा है ..एकर दस गुना आता नाम से ....आ टीप आता बेनामी बन के ....नाम तो नाम ....काम भी तमाम हुई जाता उनका ।

देखिये हम जान रहे हैं ..जो इससे जादे बताए तो आप भी चचा की तरह बिलबिला के हमही को .......छोडते हैं जी ....फ़िर कहियो......
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