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मां पता नहीं आज क्यों मन इतना व्याकुल है , मुझे नहीं पता । आज न तो कोई त्यौहार है न ही कोई दुख या संकट की घडी मुझ पर अचानक आई है , क्योंकि अक्सर इन्हीं दोनों समय पर तुम मुझे बहुत ही याद आती थी , मगर फ़िर भी मैं नहीं जानता कि आज तेरी इतनी याद क्यों आ रही है मुझे । मां , मुझे नहीं पता कि तुझ तक ये चिट्ठी कैसे पहुंचेगी मगर इतना जानता हूं कि जब यहां भी बिना बोले , बिना कुछ कहे तू मेरी हर बात , समझ जाती थी तो ये बात भी तुझ तक जरूर ही पहुंच जाएगी ।

मां गांव और घर तो उसी दिन छूट गया था जिस दिन पढाई पूरी करने के बाद इस शहर का रुख किया था । काश कि पता होता कि ट्रेन पर शुरू की गई वो यात्रा , गांव की मिट्टी से , तुझसे , गांव के खेत खलिहान से , बगीचों तालाबों से मेरी विदाई जैसा है तो वो यात्रा नहीं शुरू करता । मुझे नहीं पता कि गांव में रहते हुए मेरा भविष्य क्या होता । मैं ये भी नहीं जानता कि यहां राजधानी में रह कर जो नाम पैसा कमाया वो ज्यादा अच्छा था या गांव में किसी छोटी दुकान पर दिन भर में कुछ बेच कर शाम को आंगन में तुम्हारे हाथों की पकाई हुई रोटी और खेडही दाल ( मूंग की छिलके वाली दाल ) की नींबू वाली चटनी के साथ जिंदगी गुजारना । गांव के छूटने का दुख तो पहले ही था ,मगर जब तू थी और बाबूजी के साथ गांव में ही रहने के तेरी जिद थी तो उसके कारण एक बहाना तो था ही , और इस बहाने को अंजाम तक पहुंचाने में तेरा वो आग्रह छठ पूजा मे आने का आग्रह , बसंत पंचमी में आने की जिद , बिलटू के उपनयन में पहुंचने की ताकीद , जाने कितने बहाने थे जिन्हें सुनने को मैं मन ही मन आतुर रहता था और फ़िर लाख इधर उधर होने के बाद अंदर से अपना मन होने के कारण किसी न किसी जुगाड से पहुंच ही जाता था ।

मां इस बार तेरे बैगैर वो घर , घर कम एक सराय ज्यादा लग रहा था । कहने को तो चाची , चाचा सब थे मगर फ़िर भी जितने दिन रुका मैं बिपिन के घर ही खाता पीता रहा । बाबूजी जिद कर रहे थे , कि मुझे यहीं छोड जाओ , मैं कहां रह पाऊंगा , मगर मां ये तो तुझे भी पता था न कि अब गांव में कोई ऐसा भी नहीं बचा है जो दवाई भी ला सके बाहर से इसलिए बाबूजी को भी साथ ले आया । मां , बस यही एक गलती हो गई है शायद मुझसे , मगर क्या करूं उन्हें किसके भरोसे छोडता वहां , अब कौन है वहां तेरे जैसा ? यहां कुछ दिनों के लिए बबलू ले कर गया था बाबूजी को , अपने यहां रखने के लिए , मैं कैसे मना करता , आखिर उनका छोटा बेटा है , मगर मां नहीं बता सकता कि क्यों फ़ोन पर की गई एक बातचीत के बाद मैं उन्हें लेकर यहां आ गया हूं कभी कहीं नहीं जाने के लिए । मां , तू होती तो शायद इस बार भी बबलू की बात को छिपा कर मुझे और उसे भी मना लेती , मगर देख न अब तो वो पूरी तरह निश्चिंत हो गया है, महीनों हो गए उससे बात करते हुए ।

मां मैं बाबूजी की सेवा पूरी निष्ठा से कर रहा हूं , यहां उन्हें किसी बात की तकलीफ़ भी नहीं है । मगर फ़िर भी जाने क्यों मुझे लगता है कि मैंने उनका दिल कहीं किसी आलमारी , किसी शैल्फ़ में कैद करके रख दिया है । उनका मन हमेशा ही कहता रहता है कि उन्हें मुक्त कर दूं , उन्हीं अपने घर दालान , खेत खलिहान , आम के पेड, गेहूं धान सब देखने के लिए , अपने हाथों से बेलपत्र तोड कर महादेव मंदिर में चढाने के लिए , मगर मैं चाह कर भी नहीं कर सकता ये । मां उन्हें अब मेरे साथ ही यहीं रहना है वे रह भी रहे हैं , और मां एक और बात बेशक तेरी बहू समझे न समझे तेरे पोता और पोती समझ रहे हैं अच्छी तरह कि वे दादा जी हैं , एक ऐसे व्यक्ति जिनकी उनके पिता बहुत इज्जत करते हैं और शायद यही वजह है कि वे अब उनके साथ खूब समय बिताते हैं ...। मां तू जल्दी चली गई ...कुछ दिन तो और रुकती न .....

मैं नहीं जानता कि मैंने ये क्यों लिखा ...............मगर आज मां की याद आई तो लिखता चला गया ........

25 टिप्पणियाँ:

माँ का सानिध्य, माँ का साया, भगवान सभी को लम्बे समय तक दे। हम तो बचपन से खो चुके हैं

16 मई 2010 11:20 अपराह्न  

अजय जी,

बहुत ही संवेदनशील पोस्ट....मन भर आया इसको पढते पढते....
आपके ये एहसास हर माँ तक पहुंचें

16 मई 2010 11:25 अपराह्न  

बड़े बूढ़े पेड़ की तरह होते है अपनी जड़ों से जुड़े हुए उनको वहां से शहर के मौहोल में लाना तो आसान है पर उनका एकाकीपन कोई नहीं भर पता .
जहाँ गाँव में हर छोटा बड़ा हाल चाल पूछता चलता है वही शहर में शक की निगाह से देखने लगते है ...
मार्मिक अभिव्यक्ति

16 मई 2010 11:27 अपराह्न  

चिट्ठी ना कोई सन्देश .......... जाने वह कौन सा देश जहाँ तुम चले गए !!

वन्दे मातरम !!

16 मई 2010 11:55 अपराह्न  

आपने रुला दिया...

16 मई 2010 11:55 अपराह्न  

maa toh hai maa
maa toh hai maa

maa jaisi
duniya me hai koi kahan ?

16 मई 2010 11:59 अपराह्न  

महिलाओं में श्रेष्ठ ब्लागर कौन- जीतिए 21 हजार के इनाम
पोस्ट लिखने वाले को भी मिलेगी 11 हजार की नगद राशि
आप सबने श्रेष्ठ महिला ब्लागर कौन है, जैसे विषय को लेकर गंभीरता दिखाई है. उसका शुक्रिया. आप सबको जलजला की तरफ से एक फिर आदाब. नमस्कार.
मैं अपने बारे में बता दूं कि मैं कुमार जलजला के नाम से लिखता-पढ़ता हूं. खुदा की इनायत है कि शायरी का शौक है. यह प्रतियोगिता इसलिए नहीं रखी जा रही है कि किसी की अवमानना हो. इसका मुख्य लक्ष्य ही यही है कि किसी भी श्रेष्ठ ब्लागर का चयन उसकी रचना के आधार पर ही हो. पुऱूषों की कैटेगिरी में यह चयन हो चुका है. आप सबने मिलकर समीरलाल समीर को श्रेष्ठ पुरूष ब्लागर घोषित कर दिया है. अब महिला ब्लागरों की बारी है. यदि आपको यह प्रतियोगिता ठीक नहीं लगती है तो किसी भी क्षण इसे बंद किया जा सकता है. और यदि आपमें से कुछ लोग इसमें रूचि दिखाते हैं तो यह प्रतियोगिता प्रारंभ रहेगी.
सुश्री शैल मंजूषा अदा जी ने इस प्रतियोगिता को लेकर एक पोस्ट लगाई है. उन्होंने कुछ नाम भी सुझाए हैं। वयोवृद्ध अवस्था की वजह से उन्होंने अपने आपको प्रतियोगिता से दूर रखना भी चाहा है. उनके आग्रह को मानते हुए सभी नाम शामिल कर लिए हैं। जो नाम शामिल किए गए हैं उनकी सूची नीचे दी गई है.
आपको सिर्फ इतना करना है कि अपने-अपने ब्लाग पर निम्नलिखित महिला ब्लागरों किसी एक पोस्ट पर लगभग ढाई सौ शब्दों में अपने विचार प्रकट करने हैं। रचना के गुण क्या है। रचना क्यों अच्छी लगी और उसकी शैली-कसावट कैसी है जैसा उल्लेख करें तो सोने में सुहागा.
नियम व शर्ते-
1 प्रतियोगिता में किसी भी महिला ब्लागर की कविता-कहानी, लेख, गीत, गजल पर संक्षिप्त विचार प्रकट किए जा सकते हैं
2- कोई भी विचार किसी की अवमानना के नजरिए से लिखा जाएगा तो उसे प्रतियोगिता में शामिल नहीं किया जाएगा
3- प्रतियोगिता में पुरूष एवं महिला ब्लागर सामान रूप से हिस्सा ले सकते हैं
4-किस महिला ब्लागर ने श्रेष्ठ लेखन किया है इसका आंकलन करने के लिए ब्लागरों की एक कमेटी का गठन किया जा चुका है. नियमों व शर्तों के कारण नाम फिलहाल गोपनीय रखा गया है.
5-जिस ब्लागर पर अच्छी पोस्ट लिखी जाएगी, पोस्ट लिखने वाले को 11 हजार रूपए का नगद इनाम दिया जाएगा
6-निर्णायकों की राय व पोस्ट लेखकों की राय को महत्व देने के बाद श्रेष्ठ महिला ब्लागर को 21 हजार का नगद इनाम व शाल श्रीफल दिया जाएगा.
7-निर्णायकों का निर्णय अंतिम होगा.
8-किसी भी विवाद की दशा में न्याय क्षेत्र कानपुर होगा.
9- सर्वश्रेष्ठ महिला ब्लागर एवं पोस्ट लेखक को आयोजित समारोह में भाग लेने के लिए आने-जाने का मार्ग व्यय भी दिया जाएगा.
10-पोस्ट लेखकों को अपनी पोस्ट के ऊपर- मेरी नजर में सर्वश्रेष्ठ ब्लागर अनिवार्य रूप से लिखना होगा
ब्लागरों की सुविधा के लिए जिन महिला ब्लागरों का नाम शामिल किया गया है उनके नाम इस प्रकार है-
1-फिरदौस 2- रचना 3-वंदना 4-संगीता पुरी 5-अल्पना वर्मा- 6 –सुजाता चोखेर 7- पूर्णिमा बर्मन 8-कविता वाचक्वनी 9-रशिम प्रभा 10- घुघूती बासूती 11-कंचनबाला 12-शेफाली पांडेय 13- रंजना भाटिया 14 श्रद्धा जैन 15- रंजना 16- लावण्यम 17- पारूल 18- निर्मला कपिला 19 शोभना चौरे 20- सीमा गुप्ता 21-वाणी गीत 21- संगीता स्वरूप 22-शिखाजी 23 –रशिम रविजा 24- पारूल पुखराज 25- अर्चना 26- डिम्पल मल्होत्रा, 27-अजीत गुप्ता 28-श्रीमती कुमार.
तो फिर देर किस बात की. प्रतियोगिता में हिस्सेदारी दर्ज कीजिए और बता दीजिए नारी किसी से कम नहीं है। प्रतियोगिता में भाग लेने की अंतिम तारीख 30 मई तय की गई है.
और हां निर्णायकों की घोषणा आयोजन के एक दिन पहले कर दी जाएगी.
इसी दिन कुमार जलजला का नया ब्लाग भी प्रकट होगा. भाले की नोंक पर.
आप सबको शुभकामनाएं.
आशा है आप सब विषय को सकारात्मक रूप देते हुए अपनी ऊर्जा सही दिशा में लगाएंगे.
सबका हमदर्द
कुमार जलजला

17 मई 2010 12:20 पूर्वाह्न  

महिलाओं में श्रेष्ठ ब्लागर कौन- जीतिए 21 हजार के इनाम
पोस्ट लिखने वाले को भी मिलेगी 11 हजार की नगद राशि
आप सबने श्रेष्ठ महिला ब्लागर कौन है, जैसे विषय को लेकर गंभीरता दिखाई है. उसका शुक्रिया. आप सबको जलजला की तरफ से एक फिर आदाब. नमस्कार.
मैं अपने बारे में बता दूं कि मैं कुमार जलजला के नाम से लिखता-पढ़ता हूं. खुदा की इनायत है कि शायरी का शौक है. यह प्रतियोगिता इसलिए नहीं रखी जा रही है कि किसी की अवमानना हो. इसका मुख्य लक्ष्य ही यही है कि किसी भी श्रेष्ठ ब्लागर का चयन उसकी रचना के आधार पर ही हो. पुऱूषों की कैटेगिरी में यह चयन हो चुका है. आप सबने मिलकर समीरलाल समीर को श्रेष्ठ पुरूष ब्लागर घोषित कर दिया है. अब महिला ब्लागरों की बारी है. यदि आपको यह प्रतियोगिता ठीक नहीं लगती है तो किसी भी क्षण इसे बंद किया जा सकता है. और यदि आपमें से कुछ लोग इसमें रूचि दिखाते हैं तो यह प्रतियोगिता प्रारंभ रहेगी.
सुश्री शैल मंजूषा अदा जी ने इस प्रतियोगिता को लेकर एक पोस्ट लगाई है. उन्होंने कुछ नाम भी सुझाए हैं। वयोवृद्ध अवस्था की वजह से उन्होंने अपने आपको प्रतियोगिता से दूर रखना भी चाहा है. उनके आग्रह को मानते हुए सभी नाम शामिल कर लिए हैं। जो नाम शामिल किए गए हैं उनकी सूची नीचे दी गई है.
आपको सिर्फ इतना करना है कि अपने-अपने ब्लाग पर निम्नलिखित महिला ब्लागरों किसी एक पोस्ट पर लगभग ढाई सौ शब्दों में अपने विचार प्रकट करने हैं। रचना के गुण क्या है। रचना क्यों अच्छी लगी और उसकी शैली-कसावट कैसी है जैसा उल्लेख करें तो सोने में सुहागा.
नियम व शर्ते-
1 प्रतियोगिता में किसी भी महिला ब्लागर की कविता-कहानी, लेख, गीत, गजल पर संक्षिप्त विचार प्रकट किए जा सकते हैं
2- कोई भी विचार किसी की अवमानना के नजरिए से लिखा जाएगा तो उसे प्रतियोगिता में शामिल नहीं किया जाएगा
3- प्रतियोगिता में पुरूष एवं महिला ब्लागर सामान रूप से हिस्सा ले सकते हैं
4-किस महिला ब्लागर ने श्रेष्ठ लेखन किया है इसका आंकलन करने के लिए ब्लागरों की एक कमेटी का गठन किया जा चुका है. नियमों व शर्तों के कारण नाम फिलहाल गोपनीय रखा गया है.
5-जिस ब्लागर पर अच्छी पोस्ट लिखी जाएगी, पोस्ट लिखने वाले को 11 हजार रूपए का नगद इनाम दिया जाएगा
6-निर्णायकों की राय व पोस्ट लेखकों की राय को महत्व देने के बाद श्रेष्ठ महिला ब्लागर को 21 हजार का नगद इनाम व शाल श्रीफल दिया जाएगा.
7-निर्णायकों का निर्णय अंतिम होगा.
8-किसी भी विवाद की दशा में न्याय क्षेत्र कानपुर होगा.
9- सर्वश्रेष्ठ महिला ब्लागर एवं पोस्ट लेखक को आयोजित समारोह में भाग लेने के लिए आने-जाने का मार्ग व्यय भी दिया जाएगा.
10-पोस्ट लेखकों को अपनी पोस्ट के ऊपर- मेरी नजर में सर्वश्रेष्ठ ब्लागर अनिवार्य रूप से लिखना होगा
ब्लागरों की सुविधा के लिए जिन महिला ब्लागरों का नाम शामिल किया गया है उनके नाम इस प्रकार है-
1-फिरदौस 2- रचना 3-वंदना 4-संगीता पुरी 5-अल्पना वर्मा- 6 –सुजाता चोखेर 7- पूर्णिमा बर्मन 8-कविता वाचक्वनी 9-रशिम प्रभा 10- घुघूती बासूती 11-कंचनबाला 12-शेफाली पांडेय 13- रंजना भाटिया 14 श्रद्धा जैन 15- रंजना 16- लावण्यम 17- पारूल 18- निर्मला कपिला 19 शोभना चौरे 20- सीमा गुप्ता 21-वाणी गीत 21- संगीता स्वरूप 22-शिखाजी 23 –रशिम रविजा 24- पारूल पुखराज 25- अर्चना 26- डिम्पल मल्होत्रा, 27-अजीत गुप्ता 28-श्रीमती कुमार.
तो फिर देर किस बात की. प्रतियोगिता में हिस्सेदारी दर्ज कीजिए और बता दीजिए नारी किसी से कम नहीं है। प्रतियोगिता में भाग लेने की अंतिम तारीख 30 मई तय की गई है.
और हां निर्णायकों की घोषणा आयोजन के एक दिन पहले कर दी जाएगी.
इसी दिन कुमार जलजला का नया ब्लाग भी प्रकट होगा. भाले की नोंक पर.
आप सबको शुभकामनाएं.
आशा है आप सब विषय को सकारात्मक रूप देते हुए अपनी ऊर्जा सही दिशा में लगाएंगे.
सबका हमदर्द
कुमार जलजला

17 मई 2010 12:20 पूर्वाह्न  

जो बीत चुका है उसकी याद हमेशा आती है।
उसका स्नेह दुलार डांट फ़टकार प्यार सब

माँ को याद कर
चलिए मन हल्का हो गया।

17 मई 2010 12:28 पूर्वाह्न  

माँ के नाम यह सन्देश उन तक पहुँच ही गया है..वह तो आप को हमेशा जहाँ भी है वहां से देखती ही रहती होंगी.
और आप जिस तरह से बाबूजी की सेवा कररहे हैं ,जानकर खुश भी होती होंगी.
--अब मुस्कुरा दिजीये.माँ हमेशा अपने बच्चों के आसपास ही रहती है.

17 मई 2010 12:39 पूर्वाह्न  

कल मेरे पिता जी की बरसी थी, लेकिन हम यहां इसे सही रुप मै मना भी नही सकते, कहां पंडित जी को ढुढे जब कि यहा है ही नही, फ़िर बहुत से रस्मो रिवाज
बस आंखे बन्द कर के भगवान से मन ही मन उन के लिये शांति का दान मांग लिया, ओर आज आप की यह पोस्ट पढी तो मन भारी हो गया, लेकिन मुझे यकीन है आप की यह चिट्टी मां ने जरुर सुन ली होगी, ओर कही दुर बेठी तुम्हे आशिर्वाद दे रही होगी, बाबू जी का ध्यान रख रहे है यह भी बहुत बडी पुजा है, ओर यह भी किसी किसी को ही सोभागया मिलता है, कुछ नालायक आंखो के होते अंधे होते है, तो कुछ मजबुरी मै.. आज आप के संग मै भी बहुत.......

17 मई 2010 1:02 पूर्वाह्न  

बहुत संवेदनशील चिट्ठी - मेरी अपनी माँ याद आ गयी. (माँ किसी की भी हो क्या फर्क पड़ता है)

17 मई 2010 4:37 पूर्वाह्न  

आँख भर आई. पिता जी को यहाँ लाया था. नहीं रुके, चार महिने में वापस अपनी जड़ के पास. माँ क्या चली गई, सब खत्म सा हुआ.

मित्र, निश्चित मानो माँ कहीं आस पास से ही हमें देख रही है. मैं महसूस करता हूँ हमेशा. वो तुम्हारा प्यारा पत्र भी पढ़ रही होगी और आज तुम पर गर्व भी कर रही होगी.

हमेशा महसूस करोगे उसे अपने आस पास.

बस, बाबू जी की जितनी सेवा कर पाओ, हमेशा कम ही रहेगी, यही मान कर करते जाना.

भावुक हो गया मैं पढ़ते पढ़ते.

17 मई 2010 5:41 पूर्वाह्न  

माँ की याद जब भी आती है ... ऐसे ही न जाने कितने ख़याल अपने आप चले आते हैं ...... वैसे एक बात मैं मानता हूँ.. .... माँ जहां भी है .... हमारी हर बात सुन रही है ... उस का हाथ हमेशा हमारे सर पर है.

17 मई 2010 7:42 पूर्वाह्न  

मन को भावनात्मक रूप से झकझोरती पोस्ट / अच्छा लगा आपकी सच्ची भावना को पढ़कर /

17 मई 2010 9:10 पूर्वाह्न  

एक शेर याद आ रहा है;
दर्द कुछ ऐसे भी होते है कि जो फटते नहीं
फासले गर बढ़ने लगे तो फिर घटते नहीं !

17 मई 2010 9:33 पूर्वाह्न  

बहुत ही भावुक लिखा आपने. आंखे नम हैं.

रामराम.

17 मई 2010 9:38 पूर्वाह्न  

Aapne rula,rula diya..

17 मई 2010 11:46 पूर्वाह्न  

बेहद संवेदनशील...भावुक कर देने वाली सामयिक पोस्ट....
कुछ वक्त पहले एक कविता लिखी थी मां गूंत रही है कविता...शीर्षक से....लगभग यही भावना थी....
महफूज़ भाई की तरह मैं भी रोया पढ़ते पढ़ते....
मेरी मां लखनऊ में हैं घर पर...बहुत मिस करता हूं...

@जलजला जी....आप जैसे भी जलजले हों...इससे कोई फर्क नहीं पड़ता...पर लगता है वाकई आपका दिमाग चल गया है...एक तो बेहूदी प्रतियोगिता की बात करते हैं....महिलाओं के नाम पर और फिर मां जैसी संवेदशील पोस्ट पर अपना वाहियात प्रचार अभियान मूर्खता पूर्ण तरीके से छेड़ देते हैं....क्या वाकई आपको इस पोस्ट की संवेदनशीलता का अंदाज़ा नहीं है....

17 मई 2010 2:04 अपराह्न  

.....बहुत ही संवेदनशील पोस्ट

17 मई 2010 4:23 अपराह्न  

माँ की याद तो कभी भी यूं ही चली आती है! मेरा मानना है की उस समय माँ भी हमी को याद करती होगी!आपकी चिट्ठी माँ के पास पहुँच गयी है ऐसा मेरा यकीन है! और देखिये जवाब भी आता ही होगा,...अपने तरीके से!

17 मई 2010 11:29 अपराह्न  

एक बेहतरीन पोस्ट अजय जी ये बुढ़ापा अवस्था ही ऐसी है जहां कोई यत्न अकेलेपन को नहीं खत्म कर पाता। यूँ तो मां कभी भूलती नहीं पर इस पोस्ट को पढ़ते हुए हम भी अपनी मां से दो चार बातें कर आये अपने ख्यालों में

18 मई 2010 1:12 पूर्वाह्न  

बहुत ही संवेदनशील।
भावुक कर दिया आपने

18 मई 2010 8:45 अपराह्न  

अजय मेरे भाई, तुमने इससे बढिया जीवन मे कु\छ भी नही लिखा होगा. मा शब्द अपने आप मे एक पूर्ण छद है एक कविता है एक महाकाव्य है. आपकी मा को यादकर मै भी अपनी मा को प्रणाम करता हू और आपका इस स्वर्णिम और पवित्रतम पोस्ट के लिये आभार प्रकट करता हू.

19 मई 2010 12:44 पूर्वाह्न  

रुला देते हो यार

5 जून 2010 1:04 पूर्वाह्न  

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