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सोमवार, 17 मई 2010

जाईये आप सबसे कुट्टा ..खुद तो 21 कमाए नहीं , हमारे 11 भी गए ...


मैं आज आप सब महिला ब्लोग्गर्स से बहुत ही नाराज़ हूं ..एकदम से कुट्टा करने का मूड बन गया है । एक तो कायदे से आप लोग कभी कोई जलजला आने नहीं देते , खासकर तब तो बिल्कुल भी नहीं जब कोई अपने बंदूक की नल्ली आप महिला ब्रिगेड की तरफ़ घुमा दे । आप लोग सब कुछ छोड के उसके पीछे ऐसे पडते हो जैसे सुनामी आ जाती है ..अचानक ही ..हाहाकार करते ...हजारों फ़ुट लंबी लबीं लहरें (अरे रे रे ....यहां पोस्टें मान लीजीए न ) और उसके आगे सब के सब ठीक बैसे ही लगते हैं जैसे खली के आगे राजपाल । हमारा मामला तो होता तो देखिए बिना नाम के ही ( अरे मेरे कहने का मतलब है कि खाली सरनेम से ही ) हम कितने जलजलाटिक टाईप हो गए थे सब के सब , अभी हाल ही में । अब किसी नाम वाले बंदे , जीते जागते इंसान ब्लोग्गर में तो ये हिम्मत बची नहीं थी , सो भगवान ने या पता नहीं शैतान ने अचानक ही किसी दिलजले ..ओह माफ़ करिएगा जलजले को भेज दिया कि जा बच्चे कुछ ऐसा कर कि बस मेल जलजले से लोग पार पाएं भी न और फ़ीमेल जलजला आ जाए ।


बंदे ने ....अरे नहीं यार बंदा तो था ही नहीं वो ...तो उस जलजले ने फ़टाफ़ट क्या धांसू आईडिया निकाला । एक लंबी सी टीप बनाई और बस शुरू हो गए दनादन ....कौपी पेस्ट , कौपी पेस्ट ..अब इस Ctrl c ..और ,Ctrl v को थोडी पता है कि इसका उपयोग ब्लोग्गर भाई , लोग किस किस तरह से कर लेते हैं । इसी बहाने नाईस जी की सदाबहार टिप्पणी को पहली बार कडा मुकाबला मिला । नाईस जी ने पूरे साल भर में मिला कर जितनी बार नाईस लिखा होगा उसने एक ही टीप में उससे ज्यादा लिख डाला । और सुना है कि कई बार तो पोस्ट में से आवाज आने लगी । भाई जलजले बख्शो यार ...ये तुम्हारी टीप तो मुझसे भी बडी है ..कुछ काट छांट करो न ..मगर जलजले में कोई काट छांट हो सकती है भला । वो भी कुमार ..यानि कुंवारा जलजला था वो ....वैसे भी शादीशुदा होता ...तो काहे का जलजला ....पिलपिला होता वो । खैर , हमारे जैसे सनातनी भुक्कड ब्लोग्गर संगठन ने फ़ौरन से पेशतर इस टिप्पणी और उनकी प्रतियोगिता को गंभीरता से लेते हुए , फ़टाफ़ट ही टीम तैयार की । योजना बन गई थी कि पहले ११ हजार लपकने की कोशिश की जाएगी और यदि संभव हुआ तो अपने ही गैंग की किसी ब्लोग्गर के पक्ष में सबका वोट बटोर कर २१ भी अपने पास ही आ सकते हैं । यानि कुल बत्तीस हजार से एक ब्लोग्गर फ़ंड की शुरूआत की जाएगी ...नाम होगा जलजला हाईपोथिकेटेड बेस्ट महिला ब्लोग्गर ईनाम निर्मित फ़ंड .....।


मगर न जी , ऐसा कभी संभव है कि जो सोचो वो हो जाए । पूरी महिला मंडली ने ऐसा मोर्चा खोला ...मैदान , हवाई और समुद्र के अंदर तक मार मार कर ही दम लिया । अब सुना है कि जलजला जी बुलबुला बन कर बैठ गए हैं और इसी के साथ आप सब लोगों ने न तो खुद २१ कमाए न ही हमें ११ कमाने का मौका दिया । हाय आप सबको पाप चढेगा ..........॥



ओह आज बडे ही दुख का दिन है ...ब्लोगजगत का एक उदीयमान ..जलजला ...समय से पहले ही पिलपिला पड गया और पूरी महिला मंडली ने उस बुलबुला समझ के फ़ोड दिया ॥

23 टिप्‍पणियां:

  1. ब्लोगजगत का एक उदीयमान ..जलजला ...समय से पहले ही पिलपिला पड गया


    हा हा हा हा हा नाईस झा जी

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  2. का भैया कोनो दिन स्कूल नहीं गए का ..............जैसे अंधे को अँधा नहीं कहते एकदम वैसे ही पिलपिले को पिलपिला नहीं कहते !!

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  3. लो आ गया जलजला (भाग एक)
    वे ब्लागर जो मुझे टिप्पणी के तौर पर जगह दे रहे हैं उनका आभार. जो यह मानते हैं कि वे मुफ्त में मुझे प्रचार क्यों दें उनका भी आभार. भला एक बेनामी को प्रचार का कितना फायदा मिलेगा यह समझ से परे हैं.
    मैंने अपने कमेंट का शीर्षक –लो आ गया जलजला रखा है। इसका यह मतलब तो बिल्कुल भी नहीं निकाला जाना चाहिए कि मैं किसी एकता को खंडित करने का प्रयास कर रहा हूं। मेरा ऐसा ध्येय न पहले था न भविष्य में कभी रहेगा.
    ब्लाग जगत में पिछले कुछ दिनों से जो कुछ घट रहा है क्या उसके बाद आप सबको नहीं लगता है कि यह सब कुछ स्वस्थ प्रतिस्पर्धा नहीं होने की वजह से हुआ है. आप अपने घर में बच्चों से तो यह जरूर कहेंगे कि बेटा अब की बार इस परीक्षा में यह नबंर लाना है उस परीक्षा को तुम्हे क्लीयर करना ही है लेकिन जब खुद की परीक्षा का सवाल आया तो सारे के सारे लोग फोन के जरिए एकजुट हो गए और पिल पड़े जलजला को पिलपिला बताने के लिए. बावजूद इसके जलजला को दुख नहीं है क्योंकि जलजला जानता है कि उसने अपने जीवन में कभी भी किसी स्त्री का दिल नहीं दुखाया है। जलजला स्त्री विरोधी नहीं है। अब यह मत कहने लग जाइएगा कि पुरस्कार की राशि को रखकर स्त्री जाति का अपमान किया गया है। कोई ज्ञानू बाबू किसी सक्रिय आदमी को नीचा दिखाकर आत्म उन्नति के मार्ग पर निकल जाता है तब आप लोग को बुरा नहीं लगता.आप लोग तब सिर्फ पोस्ट लिखते हैं और उसे यह नहीं बताते कि हम कानून के जानकार ब्लागरों के द्वारा उसे नोटिस भिजवा रहे हैं। क्या इसे आप अच्छा मानते हैं। यदि मैंने यह सोचा कि क्यों न एक प्रतिस्पर्धा से यह बात साबित की जाए कि महिला ब्लागरों में कौन सर्वश्रेष्ठ है तो क्या गलत किया है। क्या किसी को शालश्रीफल और नगद राशि के साथ प्रमाण देकर सम्मानित करना अपराध है।
    यदि सम्मान करना अपराध है तो मैं यह अपराध बार-बार करना चाहूंगा.
    ब्लागजगत को लोग सम्मान लेने के पक्षधर नहीं है तो देश में साहित्य, खेल से जुड़ी अनेक विभूतियां है उन्हें सम्मानित करके मुझे खुशी होगी क्योंकि-
    दुनिया का कोई भी कानून यह नहीं कहता है कि आप लोगों का सम्मान न करें।
    दुनिया का कानून यह भी नहीं कहता है कि आप अपना उपनाम लिखकर अच्छा लिख-पढ़ नहीं सकते हैं. आप लोग विद्धान लोग है मुंशी प्रेमचंद भी कभी नवाबराय के नाम से लिखते थे. देश में अब भी कई लेखक ऐसे हैं जिनका साहित्य़िक नाम कुछ और ही है। भला मैं बेनामी कैसे हो गया।

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  4. लो आ गया जलजला (भाग-दो)
    आप सब लोगों से मैंने पहले ही निवेदन किया था कि यदि प्रतियोगिता को अच्छा प्रतिसाद मिला तो ठीक वरना प्रतियोगिता का विचार स्थगित किया जाएगा. यहां तो आज की तमाम एक जैसी संचालित पोस्टें देखकर तो लग रहा है कि शायद भाव को ठीक ढंग से समझा ही नहीं गया है. भला बताइए मेरी अपील में मैंने किस जगह पर अभद्र शब्दों का इस्तेमाल किया है.
    बल्कि आप सबमें से कुछ की पोस्ट देखकर और उसमे आई टिप्पणी को देखकर तो मुझे लग रहा है कि आपने मेरे सम्मान के भाव को चकनाचूर बनाने का काम कर डाला है। किसी ने मेरा नाम जलजला देखकर यह सोच लिया कि मैं किस कौन का हूं। क्या दूसरी कौन का आदमी-आदमी नहीं होता है। बड़ी गंगा-जमुना तहजीब की बात करते हैं, एक आदमी यदि दाढ़ी रख लेता है तो आपकी नजर में काफिर हो जाता है क्या। जलजला नाम रखने से कोई ........ हो जाता है क्या। और हो भी जाता है तो क्या बुरा हो जाता है क्या। क्या जलजला एक देशद्रोही का नाम है क्या। क्या जलजला एक नक्सली है। एक महोदय तो लिखते हैं कि जलजला को जला डालो। एक लिखते हैं मैं पहले राहुल-वाहुल के नाम से लिखता था.. मैं फिरकापरस्त हूं। क्या जलजला जैसा नाम एक कौम विशेष का आदमी ही रख सकता है। यदि ऊर्दू हिन्दी की बहन है तो क्या एक बहन किसी हिन्दू आदमी को राखी नहीं बांध सकती.
    फिर भी शैल मंजूषा अदा ने ललकारते हुए कहा है कि मैं जो कोई भी हूं सामने आ जाऊं। मैं कब कहा था कि मै सामने नहीं आना चाहता। (वैसे मैंने यहां देखा है कि जब मैं अपने असली नाम से लिखता हूं तो एक से बढ़कर एक सलाह देने वाले सामने आ जाते हैं, सब यही कहते हैं भाईजान आपसे यह उम्मीद नहीं थी, आप सबसे अलग है आप पचड़े में न पढ़े. अब अदाजी को ही लीजिए न पचड़े में न पड़ने की सलाह देते हुए ही उन्होंने ज्ञानू बाबू से लेकर अब तक कम से कम चार पोस्ट लिख डाली है)
    जरा मेरी पूर्व में दिए गए कथन को याद करिए मैंने उसमे साफ कहा है कि 30 मई को स्पर्धा समाप्त होगी उस दिन जलजला का ब्लाग भी प्रकट होगा। ब्लाग का शुभारंभ भी मैं सम्मान की पोस्ट वाली खबर से ही करना चाहता था, लेकिन अब लगता है कि शायद ऐसा नहीं होगा. एक ब्लागर की मौत हो चुकी है समझ लीजिएगा.
    अदाजी के लिए सिर्फ इतना कह सकता हूं कि मैं इंसान हूं.. बुरा इंसान नहीं हूं। (अदाजी मैंने तो पहले सिर्फ पांच नाम ही जोड़े थे लेकिन आपने ही आग्रह किया कि कुछ और नामों को शामिल कर लूं.. भला बताइए आपके आग्रह को मानकर मैंने कोई अपराध किया है क्या)
    आप सभी बुद्धिमान है, विवेक रखते हैं जरा सोचिए देश की सबसे बड़ी साहित्यिक पत्रिका हंस और कथा देश कहानी प्रतियोगिताओं का आयोजन क्यों करती है। क्या इन प्रतियोगिताओं से कहानीकार छोटे-बड़े हो जाते हैं। क्या इंडियन आइडल की प्रतिस्पर्धा के चलते आशा भोंसले और उदित नारायण हनुमान जी के मंदिर के सामने ..काम देदे बाबा.. चिल्लाने लगे हैं।
    दुनिया में किसी भी प्रतिस्पर्धा से प्रतिभाशाली लोग छोटे-बड़े नहीं होते वरन् वे अपने आपको आजमाते हैं और जब तक जिन्दगी है आजमाइश तो चलती रहनी है. कभी खुद से कभी दूसरों से. जो आजमाइश को अच्छा मानते है वह अपने आपको दूसरों से अच्छा खाना पकाकर भी आजमाते है और जिसे लगता है कि जैसा है वैसा ही ठीक है तो फिर क्या कहा जा सकता है.
    कमेंट को सफाई न समझे. आपको मेरे प्रयास से दुख पहुंचा हो तो क्षमा चाहता हूं (ख्वाबों-ख्यालों वाली क्षमा नहीं)
    आपकी एकता को मेरा सलाम
    आपके जज्बे को मेरा नमन
    मगर आपकी लेखनी को मेरा आहावान
    एक पोस्ट इस शीर्षक पर भी जरूर लिखइगा
    हम सबने जलजला को मिलकर मार डाला है.. महिला मोर्चा जिन्दाबाद
    कानून के जानकारों द्वारा भेजे गई नोटिस की प्रतीक्षा करूंगा
    आपका हमदर्द
    कुमार जलजला

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  5. लो जी नाम लिया और शैतान आई मीन जलजला हाजिर :-)

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  6. हे हे ..जलजला भाई ,,,जाल तू जलाल तू आयी बाला(ओह सारी ....बला) को टाल तू क्यों हो गए ...? कितना जबरदस्त सम्मान मिला है आपको ....सीना फूल कर अढाई सौ गज हो जाना चाहिए ....

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  7. आप मानें या न मानें
    पर यह सच है कि
    जलजला जलाने नहीं
    जगाने आया है
    आग लगाने नहीं
    लगी हुई आग को
    बुझाने आया है
    http://jhhakajhhaktimes.blogspot.com/2010/05/blog-post_18.html

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  8. अच्छी व्यंग्यात्मक प्रस्तुती के लिए धन्यवाद / अब जब जलजला ने माफ़ी मांग ली है तो उसे हमलोगों को भूल भी जाना चाहिए / वैसे है तो सोचने वाला ब्लोगर नहीं तो माफ़ी नहीं मांगता और उस व्यक्ति की कद्र होनी चाहिए जो अपनी गलती या भूल पर सार्थकता से सोचता हो / आशा है आप लोग भी अब इसे भूल जायेंगे क्योकि हम लोगों के सामने और बहुत साडी चुनौतिया हैं ,जिनका मुकाबला हम सब को एकजुट होकर करना है /

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  9. हिंदी ब्लोगिंग उत्थान पर है । :)

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  10. ओहो... अथ से इति पर पहुँच गये...? बहुत जल्दी...?

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  11. अजय भाई ,

    सच्ची ,इतना तो सोचा ही नहीं कि कित्ता बड़ा नुक्सान हो गया तुम्हारा...उफ़...ज़रा पहले बता दिए होते ......

    अब जो होना था हो गया....गुस्सा छोडो और कुट्टा तो मत ही करना..

    कभी कभी शांत समुद्र में भी ज्वालामुखी फटने से सुनामी आ जाती है.....क्या करें..प्रकृति का नियम है....


    और जलजला नाम के जीव ने भाग १ और भाग २ लिख कर अपनी पहचान का संकेत तो दे ही दिया है....अब सब कह रहे हैं कि उसने माफ़ी मांग ली है तो भैया हम भी सब भूल जाते हैं....

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  12. दैया रे ! इ तो हमको मालूम हे नहीं था ..बैठे बिठाये आपका और हमारा दोनों का नुक्सान हो गया .. आपका कम हमारा ज्यादा :-)
    पहले बताये होते तो कुछ कमीशन सेट कर लेते .
    @ जलजला भाई .. आपकी कोशिश अच्छी थी पर टाइमिंग एक दम गलत सारे ब्लॉगर राशन पानी लेकर पिल पड़े ,वैसे सब सुलग रहे थे आप पर धधक पड़े ....

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  13. अब क्या करें अजय जी ! कभी कभी महिलाओं को भी गुस्सा आ ही जाता है :) पर आप कुट्टा न होइए प्लीज़ :) खैर अब तो जलजला पिलपिला हुआ हो या बुलबुला ..अब तक तो फट ही गया होगा..रोचक पोस्ट झा जी !:)

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  14. हा हा ...बहुत ही रोचक पोस्ट..

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  15. बताओ खुद के २१००० के साथ आपके ११००० भी ले डूबे..ये लोग भी न!!

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  16. जब दोनों का ही नुकसान हुआ तो काहे का कुट्टा…।:) जैसी एकता नारी ब्लोगरस में हैं काश ऐसी एकता नर ब्लोगरस में भी होती तो वो सब न होता जो पिछले दिनों हुआ, है न? उससे सब आहत ही हुए, राहत किसे मिली?
    कुट्टा? ये शब्द तो मेरे लिए नया है, हमने तो कुट्टी सुना था, क्या इस शब्द में भी नर और नारी का भेद है?

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  17. अरे इस शेतान का नाम लिया ओर वो हाजिर, काश मैरे पास एक चिराग होता तो इस जिन्न को उस मै केद कर लेता, ओर खुद बेठ कर बीयर पीता इस से सारी टिपण्णीयां लिखवाता:)
    वेसे जो कोई बोर होता हो वो ब्लांगरो की दुनिया मै आ जाये रोजाना एक नया मजा अजी दिल बहला रहता है
    अजय जी सारा दिन का थका होने पर अब यहां आते ही कोई ना कोई नया मजा फ़िर से नयी ताकत भर देता है... आज का मजा इस जल जले के नाम

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मैंने तो जो कहना था कह दिया...और अब बारी आपकी है..जो भी लगे..बिलकुल स्पष्ट कहिये ..मैं आपको भी पढ़ना चाहता हूँ......और अपने लिखे को जानने के लिए आपकी प्रतिक्रियाओं से बेहतर और क्या हो सकता है भला

साथ चलने वाले

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