बेबाक , बिंदास , बेलौस ,बेसाख्ता सी कुछ बातें ......
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बिखरे आखर
ट्विटर सेंसर को तैयार , गूगल ने किया इनकार ,
उपयोग दुन्नो का अईसा करें , रहे टेंसन में सरकार
मेरे इर्द गिर्द रहकर , तुम जो यूं , अपना ये ...
1 सप्ताह पहले















ha ha ha ha
AlbelaKhatri.com ने कहा…
17 मई 2010 11:49 अपराह्न
ब्लोगजगत का एक उदीयमान ..जलजला ...समय से पहले ही पिलपिला पड गया
हा हा हा हा हा नाईस झा जी
ललित शर्मा ने कहा…
18 मई 2010 12:09 पूर्वाह्न
का भैया कोनो दिन स्कूल नहीं गए का ..............जैसे अंधे को अँधा नहीं कहते एकदम वैसे ही पिलपिले को पिलपिला नहीं कहते !!
शिवम् मिश्रा ने कहा…
18 मई 2010 12:28 पूर्वाह्न
लो आ गया जलजला (भाग एक)
वे ब्लागर जो मुझे टिप्पणी के तौर पर जगह दे रहे हैं उनका आभार. जो यह मानते हैं कि वे मुफ्त में मुझे प्रचार क्यों दें उनका भी आभार. भला एक बेनामी को प्रचार का कितना फायदा मिलेगा यह समझ से परे हैं.
मैंने अपने कमेंट का शीर्षक –लो आ गया जलजला रखा है। इसका यह मतलब तो बिल्कुल भी नहीं निकाला जाना चाहिए कि मैं किसी एकता को खंडित करने का प्रयास कर रहा हूं। मेरा ऐसा ध्येय न पहले था न भविष्य में कभी रहेगा.
ब्लाग जगत में पिछले कुछ दिनों से जो कुछ घट रहा है क्या उसके बाद आप सबको नहीं लगता है कि यह सब कुछ स्वस्थ प्रतिस्पर्धा नहीं होने की वजह से हुआ है. आप अपने घर में बच्चों से तो यह जरूर कहेंगे कि बेटा अब की बार इस परीक्षा में यह नबंर लाना है उस परीक्षा को तुम्हे क्लीयर करना ही है लेकिन जब खुद की परीक्षा का सवाल आया तो सारे के सारे लोग फोन के जरिए एकजुट हो गए और पिल पड़े जलजला को पिलपिला बताने के लिए. बावजूद इसके जलजला को दुख नहीं है क्योंकि जलजला जानता है कि उसने अपने जीवन में कभी भी किसी स्त्री का दिल नहीं दुखाया है। जलजला स्त्री विरोधी नहीं है। अब यह मत कहने लग जाइएगा कि पुरस्कार की राशि को रखकर स्त्री जाति का अपमान किया गया है। कोई ज्ञानू बाबू किसी सक्रिय आदमी को नीचा दिखाकर आत्म उन्नति के मार्ग पर निकल जाता है तब आप लोग को बुरा नहीं लगता.आप लोग तब सिर्फ पोस्ट लिखते हैं और उसे यह नहीं बताते कि हम कानून के जानकार ब्लागरों के द्वारा उसे नोटिस भिजवा रहे हैं। क्या इसे आप अच्छा मानते हैं। यदि मैंने यह सोचा कि क्यों न एक प्रतिस्पर्धा से यह बात साबित की जाए कि महिला ब्लागरों में कौन सर्वश्रेष्ठ है तो क्या गलत किया है। क्या किसी को शालश्रीफल और नगद राशि के साथ प्रमाण देकर सम्मानित करना अपराध है।
यदि सम्मान करना अपराध है तो मैं यह अपराध बार-बार करना चाहूंगा.
ब्लागजगत को लोग सम्मान लेने के पक्षधर नहीं है तो देश में साहित्य, खेल से जुड़ी अनेक विभूतियां है उन्हें सम्मानित करके मुझे खुशी होगी क्योंकि-
दुनिया का कोई भी कानून यह नहीं कहता है कि आप लोगों का सम्मान न करें।
दुनिया का कानून यह भी नहीं कहता है कि आप अपना उपनाम लिखकर अच्छा लिख-पढ़ नहीं सकते हैं. आप लोग विद्धान लोग है मुंशी प्रेमचंद भी कभी नवाबराय के नाम से लिखते थे. देश में अब भी कई लेखक ऐसे हैं जिनका साहित्य़िक नाम कुछ और ही है। भला मैं बेनामी कैसे हो गया।
Kumar Jaljala ने कहा…
18 मई 2010 1:02 पूर्वाह्न
लो आ गया जलजला (भाग-दो)
आप सब लोगों से मैंने पहले ही निवेदन किया था कि यदि प्रतियोगिता को अच्छा प्रतिसाद मिला तो ठीक वरना प्रतियोगिता का विचार स्थगित किया जाएगा. यहां तो आज की तमाम एक जैसी संचालित पोस्टें देखकर तो लग रहा है कि शायद भाव को ठीक ढंग से समझा ही नहीं गया है. भला बताइए मेरी अपील में मैंने किस जगह पर अभद्र शब्दों का इस्तेमाल किया है.
बल्कि आप सबमें से कुछ की पोस्ट देखकर और उसमे आई टिप्पणी को देखकर तो मुझे लग रहा है कि आपने मेरे सम्मान के भाव को चकनाचूर बनाने का काम कर डाला है। किसी ने मेरा नाम जलजला देखकर यह सोच लिया कि मैं किस कौन का हूं। क्या दूसरी कौन का आदमी-आदमी नहीं होता है। बड़ी गंगा-जमुना तहजीब की बात करते हैं, एक आदमी यदि दाढ़ी रख लेता है तो आपकी नजर में काफिर हो जाता है क्या। जलजला नाम रखने से कोई ........ हो जाता है क्या। और हो भी जाता है तो क्या बुरा हो जाता है क्या। क्या जलजला एक देशद्रोही का नाम है क्या। क्या जलजला एक नक्सली है। एक महोदय तो लिखते हैं कि जलजला को जला डालो। एक लिखते हैं मैं पहले राहुल-वाहुल के नाम से लिखता था.. मैं फिरकापरस्त हूं। क्या जलजला जैसा नाम एक कौम विशेष का आदमी ही रख सकता है। यदि ऊर्दू हिन्दी की बहन है तो क्या एक बहन किसी हिन्दू आदमी को राखी नहीं बांध सकती.
फिर भी शैल मंजूषा अदा ने ललकारते हुए कहा है कि मैं जो कोई भी हूं सामने आ जाऊं। मैं कब कहा था कि मै सामने नहीं आना चाहता। (वैसे मैंने यहां देखा है कि जब मैं अपने असली नाम से लिखता हूं तो एक से बढ़कर एक सलाह देने वाले सामने आ जाते हैं, सब यही कहते हैं भाईजान आपसे यह उम्मीद नहीं थी, आप सबसे अलग है आप पचड़े में न पढ़े. अब अदाजी को ही लीजिए न पचड़े में न पड़ने की सलाह देते हुए ही उन्होंने ज्ञानू बाबू से लेकर अब तक कम से कम चार पोस्ट लिख डाली है)
जरा मेरी पूर्व में दिए गए कथन को याद करिए मैंने उसमे साफ कहा है कि 30 मई को स्पर्धा समाप्त होगी उस दिन जलजला का ब्लाग भी प्रकट होगा। ब्लाग का शुभारंभ भी मैं सम्मान की पोस्ट वाली खबर से ही करना चाहता था, लेकिन अब लगता है कि शायद ऐसा नहीं होगा. एक ब्लागर की मौत हो चुकी है समझ लीजिएगा.
अदाजी के लिए सिर्फ इतना कह सकता हूं कि मैं इंसान हूं.. बुरा इंसान नहीं हूं। (अदाजी मैंने तो पहले सिर्फ पांच नाम ही जोड़े थे लेकिन आपने ही आग्रह किया कि कुछ और नामों को शामिल कर लूं.. भला बताइए आपके आग्रह को मानकर मैंने कोई अपराध किया है क्या)
आप सभी बुद्धिमान है, विवेक रखते हैं जरा सोचिए देश की सबसे बड़ी साहित्यिक पत्रिका हंस और कथा देश कहानी प्रतियोगिताओं का आयोजन क्यों करती है। क्या इन प्रतियोगिताओं से कहानीकार छोटे-बड़े हो जाते हैं। क्या इंडियन आइडल की प्रतिस्पर्धा के चलते आशा भोंसले और उदित नारायण हनुमान जी के मंदिर के सामने ..काम देदे बाबा.. चिल्लाने लगे हैं।
दुनिया में किसी भी प्रतिस्पर्धा से प्रतिभाशाली लोग छोटे-बड़े नहीं होते वरन् वे अपने आपको आजमाते हैं और जब तक जिन्दगी है आजमाइश तो चलती रहनी है. कभी खुद से कभी दूसरों से. जो आजमाइश को अच्छा मानते है वह अपने आपको दूसरों से अच्छा खाना पकाकर भी आजमाते है और जिसे लगता है कि जैसा है वैसा ही ठीक है तो फिर क्या कहा जा सकता है.
कमेंट को सफाई न समझे. आपको मेरे प्रयास से दुख पहुंचा हो तो क्षमा चाहता हूं (ख्वाबों-ख्यालों वाली क्षमा नहीं)
आपकी एकता को मेरा सलाम
आपके जज्बे को मेरा नमन
मगर आपकी लेखनी को मेरा आहावान
एक पोस्ट इस शीर्षक पर भी जरूर लिखइगा
हम सबने जलजला को मिलकर मार डाला है.. महिला मोर्चा जिन्दाबाद
कानून के जानकारों द्वारा भेजे गई नोटिस की प्रतीक्षा करूंगा
आपका हमदर्द
कुमार जलजला
Kumar Jaljala ने कहा…
18 मई 2010 1:03 पूर्वाह्न
लो जी नाम लिया और शैतान आई मीन जलजला हाजिर :-)
पं.डी.के.शर्मा"वत्स" ने कहा…
18 मई 2010 3:02 पूर्वाह्न
हे हे ..जलजला भाई ,,,जाल तू जलाल तू आयी बाला(ओह सारी ....बला) को टाल तू क्यों हो गए ...? कितना जबरदस्त सम्मान मिला है आपको ....सीना फूल कर अढाई सौ गज हो जाना चाहिए ....
Arvind Mishra ने कहा…
18 मई 2010 6:10 पूर्वाह्न
आप मानें या न मानें
पर यह सच है कि
जलजला जलाने नहीं
जगाने आया है
आग लगाने नहीं
लगी हुई आग को
बुझाने आया है
http://jhhakajhhaktimes.blogspot.com/2010/05/blog-post_18.html
अविनाश वाचस्पति ने कहा…
18 मई 2010 6:52 पूर्वाह्न
अच्छी व्यंग्यात्मक प्रस्तुती के लिए धन्यवाद / अब जब जलजला ने माफ़ी मांग ली है तो उसे हमलोगों को भूल भी जाना चाहिए / वैसे है तो सोचने वाला ब्लोगर नहीं तो माफ़ी नहीं मांगता और उस व्यक्ति की कद्र होनी चाहिए जो अपनी गलती या भूल पर सार्थकता से सोचता हो / आशा है आप लोग भी अब इसे भूल जायेंगे क्योकि हम लोगों के सामने और बहुत साडी चुनौतिया हैं ,जिनका मुकाबला हम सब को एकजुट होकर करना है /
honesty project democracy ने कहा…
18 मई 2010 7:30 पूर्वाह्न
बढ़िया है ...:):)
वाणी गीत ने कहा…
18 मई 2010 7:59 पूर्वाह्न
हिंदी ब्लोगिंग उत्थान पर है । :)
डॉ टी एस दराल ने कहा…
18 मई 2010 8:16 पूर्वाह्न
ओहो... अथ से इति पर पहुँच गये...? बहुत जल्दी...?
सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी ने कहा…
18 मई 2010 9:16 पूर्वाह्न
अजय भाई ,
सच्ची ,इतना तो सोचा ही नहीं कि कित्ता बड़ा नुक्सान हो गया तुम्हारा...उफ़...ज़रा पहले बता दिए होते ......
अब जो होना था हो गया....गुस्सा छोडो और कुट्टा तो मत ही करना..
कभी कभी शांत समुद्र में भी ज्वालामुखी फटने से सुनामी आ जाती है.....क्या करें..प्रकृति का नियम है....
और जलजला नाम के जीव ने भाग १ और भाग २ लिख कर अपनी पहचान का संकेत तो दे ही दिया है....अब सब कह रहे हैं कि उसने माफ़ी मांग ली है तो भैया हम भी सब भूल जाते हैं....
sangeeta swarup ने कहा…
18 मई 2010 9:50 पूर्वाह्न
दैया रे ! इ तो हमको मालूम हे नहीं था ..बैठे बिठाये आपका और हमारा दोनों का नुक्सान हो गया .. आपका कम हमारा ज्यादा :-)
पहले बताये होते तो कुछ कमीशन सेट कर लेते .
@ जलजला भाई .. आपकी कोशिश अच्छी थी पर टाइमिंग एक दम गलत सारे ब्लॉगर राशन पानी लेकर पिल पड़े ,वैसे सब सुलग रहे थे आप पर धधक पड़े ....
Sonal Rastogi ने कहा…
18 मई 2010 1:56 अपराह्न
ha ha ha....
kunwar ji,
kunwarji's ने कहा…
18 मई 2010 2:21 अपराह्न
अब क्या करें अजय जी ! कभी कभी महिलाओं को भी गुस्सा आ ही जाता है :) पर आप कुट्टा न होइए प्लीज़ :) खैर अब तो जलजला पिलपिला हुआ हो या बुलबुला ..अब तक तो फट ही गया होगा..रोचक पोस्ट झा जी !:)
shikha varshney ने कहा…
18 मई 2010 2:25 अपराह्न
हा हा ...बहुत ही रोचक पोस्ट..
rashmi ravija ने कहा…
18 मई 2010 4:10 अपराह्न
बताओ खुद के २१००० के साथ आपके ११००० भी ले डूबे..ये लोग भी न!!
Udan Tashtari ने कहा…
18 मई 2010 4:34 अपराह्न
मेरा हिस्सा भी गया!?
बी एस पाबला ने कहा…
18 मई 2010 8:41 अपराह्न
जय हो ...
राम त्यागी ने कहा…
18 मई 2010 8:55 अपराह्न
जब दोनों का ही नुकसान हुआ तो काहे का कुट्टा…।:) जैसी एकता नारी ब्लोगरस में हैं काश ऐसी एकता नर ब्लोगरस में भी होती तो वो सब न होता जो पिछले दिनों हुआ, है न? उससे सब आहत ही हुए, राहत किसे मिली?
कुट्टा? ये शब्द तो मेरे लिए नया है, हमने तो कुट्टी सुना था, क्या इस शब्द में भी नर और नारी का भेद है?
anitakumar ने कहा…
18 मई 2010 10:29 अपराह्न
अरे इस शेतान का नाम लिया ओर वो हाजिर, काश मैरे पास एक चिराग होता तो इस जिन्न को उस मै केद कर लेता, ओर खुद बेठ कर बीयर पीता इस से सारी टिपण्णीयां लिखवाता:)
वेसे जो कोई बोर होता हो वो ब्लांगरो की दुनिया मै आ जाये रोजाना एक नया मजा अजी दिल बहला रहता है
अजय जी सारा दिन का थका होने पर अब यहां आते ही कोई ना कोई नया मजा फ़िर से नयी ताकत भर देता है... आज का मजा इस जल जले के नाम
राज भाटिय़ा ने कहा…
18 मई 2010 10:33 अपराह्न
मजेदार झा भाई ।
अरुणेश मिश्र ने कहा…
19 मई 2010 8:48 पूर्वाह्न