बेबाक , बिंदास , बेलौस ,बेसाख्ता सी कुछ बातें ......
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बिखरे आखर
ट्विटर सेंसर को तैयार , गूगल ने किया इनकार ,
उपयोग दुन्नो का अईसा करें , रहे टेंसन में सरकार
मेरे इर्द गिर्द रहकर , तुम जो यूं , अपना ये ...
1 सप्ताह पहले

















अजय भाई अब मै भी यही आपके पास में रहता हु यहाँ से देलही २०० किलोमीटर है लेकिन आज सोमवार को आफिस होने की वजह से आ नहीं आ पाया लेकिन अगर अगली बार आप जब सम्मलेन करेगे तो जरुर कोशिश रहेगी
Mishra Pankaj ने कहा…
24 मई 2010 10:49 अपराह्न
बहुत बढ़िया रिपोर्टिंग...
महफूज़ अली ने कहा…
24 मई 2010 11:06 अपराह्न
इस स्नेह मिलन के लिए आप सभी को बधाई. संगठन के संबंध में कल आपकी चर्चा और आज राजकुमार सोनी जी की पोस्ट दोनों में इस पर विमर्श हुआ है, हम आरंभ से संगठनों की उपादेयता को स्वीकार करते रहे हैं. ऐटो घेटों वालों को पसंद आये कि ना आये.
मिलन रिपोर्ट के लिए धन्यवाद.
संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari ने कहा…
24 मई 2010 11:14 अपराह्न
संगठन की तो जरूरत है। सामाजिक रूप से आपत्तिजनक पर सत्ता का हमला कभी नहीं होता उसे तो अनुशासन ही रोक सकता है। लेकिन जब ब्लागर सत्ता के मर्म पर चोट करते हैं तो उन पर हमला होता है। यह बात नई नहीं है। अनेक स्थानों पर ब्लागरों को यह झेलना पड़ा है। अभिव्यक्ति की आजादी की यह लड़ाई तो ब्लागर्स को लड़नी ही होगी और वह संगठन के बिना ल़ड़ी जा सके यह संभव नहीं है।
दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…
24 मई 2010 11:24 अपराह्न
अभी नाइस
कल विस्तार से
गिरीश बिल्लोरे ने कहा…
24 मई 2010 11:40 अपराह्न
याने कि इस बार गहन चिन्तन का विषय उठाया गया ब्लॉगर मीट में. अच्छा है, बढ़िया रहा रिपोर्टिंग पढ़ना.
Udan Tashtari ने कहा…
24 मई 2010 11:42 अपराह्न
बड़ी दिलचस्प रिपोर्ट तैयार की आपने भैया जी... मैं भी तो पहुंचा था, आवाज़ ही सही पर पहुंचा तो..
दीपक 'मशाल' ने कहा…
24 मई 2010 11:48 अपराह्न
बहुत बढिया झा जी, आपने समग्रता से रिपोर्टिंग प्रारम्भ की है. अगली कड़ी का इंतजार रहेगा.
M VERMA ने कहा…
25 मई 2010 12:15 पूर्वाह्न
अभी नाइस
बाकी कल
गिरीश बिल्लोरे ने कहा…
25 मई 2010 12:24 पूर्वाह्न
बहुत सुंदर जी आप की रिपोर्ट, अब अगर संगठन की बात चली है तो इसे सिरे तक पहुचाना भी आप का ही काम है, लोगो की बातो को जो इस के बिरुद्ध बोलेगे आप अन्सुना ही करे... बाकी कल अगली पोस्ट मै मिलते है
राज भाटिय़ा ने कहा…
25 मई 2010 12:31 पूर्वाह्न
बहुत मेहनत से कर रहे हैं अजय जी
जरूर मिलेगी संगठन को विजय जी।
अविनाश वाचस्पति ने कहा…
25 मई 2010 12:39 पूर्वाह्न
मजा आगया वाचस्पति जी का सन्देश भी मिला आशा है यह फोरम रुपी संगठन तेरे मेरे से दूर .................. सब का होगा हम सदस्यता को तै.............यार है खबर पर ओअहुच भी जायेंगे
Ajay Tripathi ने कहा…
25 मई 2010 12:48 पूर्वाह्न
बढ़िया रहा ये तो ...आपको शुभकामनायें
राम त्यागी ने कहा…
25 मई 2010 12:51 पूर्वाह्न
बहुत बढ़िया रिपोर्टिंग..धन्यवाद।
परमजीत सिँह बाली ने कहा…
25 मई 2010 12:53 पूर्वाह्न
badhiya rapat, baki dekhte hain kal....jaisa ki aapne kahaa
Sanjeet Tripathi ने कहा…
25 मई 2010 1:08 पूर्वाह्न
आती तो अवश्य
दूरी की मजबूरी
ब्लोगरों के दर्शन करने की
रह गई अभिलाषा अधूरी
ब्लोगर तो नहीं लिखती भी नहीं पर पढ़ कर अच्छा लगता है
गुड्डोदादी चिकागो अमेरिका से,
गुड्डोदादी ने कहा…
25 मई 2010 1:42 पूर्वाह्न
अच्छी रिपोर्ट पार्ट वन
Arvind Mishra ने कहा…
25 मई 2010 4:43 पूर्वाह्न
पोस्ट में उठाए गए कई सार्थक मुद्दों से सहमत
ब्लॉगर संगठनों पर उठ रही शंका की दृष्टि पर समय रहते स्थिति स्पष्ट हो जाए तो बात आगे ही नहीं बढ़ेगी, लेकिन जो ठान कर ही बैठे हों उनका क्या?
ब्लॉगिंग को सोशल नेटवर्किंग न बनाने की भावना व अपील, मानव के अस्तित्व होने को ही नकारती है।
अगली कड़ी की प्रतीक्षा
बी एस पाबला ने कहा…
25 मई 2010 5:16 पूर्वाह्न
बहुत ही सार्थक और उम्दा प्रस्तुती / आप थोडा पहले सभा में आते तो और भी कई सार्थक मुद्दों पे चर्चा विस्तार से हो सकती थी / आगे से हम लोग इस बात का विशेष ध्यान रखें की समय से पहले पहुंचा जाय /
honesty project democracy ने कहा…
25 मई 2010 6:06 पूर्वाह्न
HAAN JI PADH LIYA....
शेफाली पाण्डे ने कहा…
25 मई 2010 6:26 पूर्वाह्न
आप का न आना खल रहा था पर आप की उपस्थिति और खुशी दे गई...बढ़िया रिपोर्ट भैया..नमस्कार
विनोद कुमार पांडेय ने कहा…
25 मई 2010 6:54 पूर्वाह्न
माफ़ी चाहूंगा , फ़ोन से ब्लोग बैठक में शिरकत करने वालों में भाई महफ़ूज़ अली, अनुज दीपक मशाल और अदा जी भी रहीं , जिनका नाम रिपोर्ट में छूट गया है , भूलवश । क्षमाप्रार्थी ।
अजय कुमार झा ने कहा…
25 मई 2010 8:46 पूर्वाह्न
मीटींग की विषयवस्तु से काफ़ी उम्मीदें जागी हैं कि कुछ सुखद दूरगामी परिणाम निकलेंगे.
रामराम
ताऊ रामपुरिया ने कहा…
25 मई 2010 9:28 पूर्वाह्न
sundar reporting ke liye badhai. itana achchha tha sabke liye. miulana, batiyana, ek ghatana hai.
mera ek sher hai
girati hai deevar dheere-dheere
jor lagao yaar dheere-dheere
milane-jalane mey kasar n chhodana
ho jayega pyar dheere-dheere
girish pankaj ने कहा…
25 मई 2010 9:29 पूर्वाह्न
मैं हमेशा से कहता रहा हूं अब भी कह रहा हूं कि जब दुनिया के आड़े-तेड़े लोग संगठन बना लेते हैं तो फिर पढ़ने-लिखने और सोचने वालों का संगठन क्यों नहीं हो सकता।
लेखकों के तीन संगठन देश में सबसे ज्यादा सक्रिय है- प्रगतिशील लेखक संघ, जनवादी लेखक संघ और जनसंस्कृति मंच। उक्त सभी संगठन अपने स्तर पर शायद ठीक काम ही कर रहे हैं लेकिन इन संगठनों के झंडे का कलर लाल ही है। क्यों न एक ऐसा संगठन बने जिसमें सभी विचारधारा के थोड़े उदार लोगों की हिस्सेदारी हो। आज दुनिया बहुत आगे बढ़ चुकी है। एकता- ताकत की बात तो ठीक है। हमें यह भी मानना होगा कि संगठन आपकी पहचान का काम भी करता है। दुनिया का हर समझदार आदमी एक न एक बार यह जरूर पूछता है कि आप कहां से है और किससे जुड़े हैं। किसी भी ख्यातिप्राप्त संस्था से जुड़ाव होने पर आदमी की इज्जत कम नहीं होती बल्कि बढती ही है। यदि व्यक्ति एक ईकाई है तो उसे अपने आसपास बेहतर समाज के निर्माण के लिए प्रयास करना ही होगा और बेहतर समाज का निर्माण तभी हो सकता है जब प्रयास सामूहिक होता है। किसी गांव में तालाब भी तभी बन पाता है जब गांव वाले खुद कुदाल-फावड़ा लेकर श्रमदान करते हैं।
इस दिशा में आप लोग आगे बढिए और मुझसे क्या हो सकता है यह बताए। वैसे हमारे यहां पाबला जी, संजीव भाई और हमारे कुछ मित्रों ने इस दिशा में प्रयास प्रारभ कर दिया है। मुझे आपकी दूसरी किश्त का इन्तजार रहेगा।
राजकुमार सोनी ने कहा…
25 मई 2010 9:41 पूर्वाह्न
ब्लोगर्स संगठन तो बनना ही चाहिये। पर सबसे पहला काम है सार्थक लेखन जो कि सामान्य पाठकों को आकर्षित करे, महज ब्लोगर्स को नहीं।
जी.के. अवधिया ने कहा…
25 मई 2010 9:52 पूर्वाह्न
अच्छा लगा जान कर कि मीट में काफ़ी सार्थक मु्द्दे उठाये गये। आगे की रिपोर्ट का बेसब्री से इंतजार
anitakumar ने कहा…
25 मई 2010 9:53 पूर्वाह्न
nice reporting ...safal blogger sammelan kee hardik badhayee ..
वाणी गीत ने कहा…
25 मई 2010 11:02 पूर्वाह्न
लाल टी शर्ट की जगह आप मैरून शर्ट में जलवा-अफ़रोज़ हुए...लेकिन महफ़िल में रौनक आपके आने से ही आई...नहीं आते तो कसक रह जाती...
जय हिंद...
खुशदीप सहगल ने कहा…
25 मई 2010 11:27 पूर्वाह्न
दिल्ली ब्लोग्गेर्स मीट की रिपोर्ट पढ़ कर लग रहा है की हम भटके हुए रास्ते से सब को सही मार्ग पर लाने की दिशा में जा रहे हैं. संख्या में हम बहुत हैं और अगर सही दिशा में हमारी पहल हो तो हम बहुत कुछ बदलने की ताकत रखते हैं बशर्ते की हम नियमबद्ध हों और वह संगठन के द्वारा ही हो सकता है. कोई तो वरिष्ठ होगा जो परिवार के मुखिया की तरह से गलत को गलत कहने का अधिकारी हो और गलत करनेवाला उसी के सामने स्वीकार करने वाला हो. इन्तजार है जब हम इस पारिवारिक संगठन के झंडे तले बैठे होंगे.
झा जी बहुत बहुत धन्यवाद हम दूर बैठे लोगों को सचित्र जानकारी लेने के लिए.
रेखा श्रीवास्तव ने कहा…
25 मई 2010 2:32 अपराह्न
इसे कहते हैं रिपोर्ट,
सारी बाते सिलसिलेवार ढंग से बताई आपने... और कुछ आगे पोस्ट में.
सुलभ § Sulabh ने कहा…
25 मई 2010 3:03 अपराह्न
ब्लौगर संगठन क्या करेगा और क्या नहीं?
क्या यह संगठन लोगों को सदस्यता देगा? संगठन बनेगा तो सदस्य भी बनेंगे.
ऐसे में यदि कोई ब्लौगर उस संगठन से नहीं जुड़ना चाहेगा तो क्या उसका बायकाट किया जा सकता है?
एक संगठन बनेगा तो विरोधी संगठन बनने में देर नहीं लगेगी. क्या इसे भी राजनीति का मैदान बनायेंगे?
संगठन होगा तो पदाधिकारी भी होंगे. उनके चयन के लिए चुनाव भी होंगे.
चुनाव होगा तो फिर गुटबाजी, कलह और भितरघात भी होगी.
कुल मिलकर इससे बहुत कुछ लाभ होना नहीं है.
सरकार को तो संगठन का रौब डालकर दबाया नहीं जा सकता.
जब सरकार अपनी करनी पर आती है तो उसके आगे किसी की नहीं चलती.
बेहतर होगा कि इन सब फालतू की बातों की ओर से अपना ध्यान हटाकर अपना समय अच्छा पढने और अच्छा लिखने में लगायें.
मानता हूँ कि एकता में बड़ी शक्ति होती है, लेकिन आप यहाँ पर अपनी नेटवर्किंग करने आये हों या अपने समय और रचनात्मकता का बेहतर सदुपयोग करने?
आप सब समझदार ब्लौगर हैं, ज़रा कायदे से सोचें. हमें किसी संगठन की ज़रुरत नहीं है.
Hindiblog Jagat ने कहा…
25 मई 2010 4:03 अपराह्न
हिंदी ब्लोग जगत ,
आपकी आशंकाओं का स्वागत है , मगर मुझे बेहद खुशी होती यदि ये बात आप अपने मूल परिचय के साथ । मुझे नहीं लगता कि ये बातें ऐसी हैं कि इन्हें कहने के लिए आपको किसी ओट या पर्दे की जरूरत महसूस हुई । आखिर आप खुद हिंदी ब्लोग जगत का भला चाहने वाले हैं ? क्यों हैं न ?
हम आपको विश्वास दिलाते हैं कि ये प्रयास किया जाएगा कि आपकी आशंकाओं को निर्मूल साबित किया जा सके । मगर आपने कुछ ज्यादा ही जल्दी निष्कर्ष वो भी नकारात्कम जाहिर कर दिए । आप जो भी हैं हम ब्लोग्गर्स में से एक ही हैं । मगर जिस तरह से पिछली दो पोस्टें लिख कर आप मिटा चुके हैं और जिस तरह से विवादास्पद बातों की तरफ़ आपका आकर्षण बढा है , उससे आप भी अब संदेह के दायरे में ही हैं । स्पष्ट नहीं हैं ।और मुझे लगता है कि यदि आपमें अपने मूल नाम से इतनी सारी बातों को कहने की हिम्मत नहीं है तो फ़िर आपके अन्य प्रयासों पर प्रश्न चिन्ह सा लगता महसूस होता है । उम्मीद है कि आप मेरे उत्तर को अन्यथा नहीं लेंगे ।
अजय कुमार झा ने कहा…
25 मई 2010 5:58 अपराह्न
सर फ़ोन के माध्यम से आपके बीच में उपस्थित होने वालों में मैं भी थी, शोभना चौधरी. सुश्री शोभना चौरे जी का नाम था, फिर इस शोभना को क्यों छोड़ दिया?
Shobhna Choudhary ने कहा…
25 मई 2010 7:37 अपराह्न
माफ़ी चाहता हूं शोभना चौधरी जी , ये मेरे पहुंचने से पहले की बात थी इसलिए तरीके से दिमाग के कंप्यूटर सेव नहीं हो पाया । उम्मीद है कि आप समझ सकेंगी । आप लोगों के प्रोत्साहन के लिए धन्यवाद ।
अजय कुमार झा ने कहा…
25 मई 2010 7:43 अपराह्न
रिपोर्टिंग बहुते बढ़िया रही आपकी....
बेटे माणिक को बहुत सारा आशीर्वाद....पूरे ब्लॉग जगत की ओर से....
फ़ोन से हम भी उपस्थित हो ही गए थे....
हाँ नहीं तो...!!
'अदा' ने कहा…
25 मई 2010 8:40 अपराह्न
जलजला दर्शन न होने से इस बैठक की सार्थकता पर अजय कुमार झा जी कुछ प्रकाश डालेंगे ?
साथ ही यह अवलोकन भी आवश्यक है कि एक बिना धड़ के धूमकेतु बेनामी से कतिपय लोगों के दिल-ओ-दिमाग क्यों इतना दहल जाता है, कि वह भूल जाते हैं कि ई बेनमिया हमारे बीच का ही होता है, अँतरिक्ष से नहीं आया होता ।
इनकी चर्चा वहाँ न उठी हो ऎसा नहीं हो सकता !
क्या कहवैं हैं, " हमीं से मोहब्बत... हमीं से लड़ाई.... अरे मार डाला, दुहाई है दुहाई !"
डा० अमर कुमार ने कहा…
25 मई 2010 9:30 अपराह्न
हम भी दिल्लिए में हैं अऊर सूचना मिला त हम भी भाग ले सकते हैं... एगो बात स्पष्ट पूछना चाहते हैं..कनफ्युजन के अलावा आपको हमसे कोनो नाराजगी है त हम बिना पूछे क्षमा माँग लेते हैं... लेकिन जानने का अधिकार त हईये है हमरा... जेतना साफ हम पूछ लिए हैं, ओतना साफ आप भी बोलिएगा त हमको खुसी होगा... बाकी ई टाईप का कोनो मीट होने से हमको भी लिस्ट में रखिएगा...
चला बिहारी ब्लॉगर बनने ने कहा…
26 मई 2010 12:50 पूर्वाह्न
@ चला बिहारी ब्लॉगर भरने
हम रखते नहीं हैं, न किसी मीट में, न किसी सूची में,
खुदे ही शामिल होना पड़ता है
अभिव्यक्ति की इस आजादी के माहौल में
बंदिश का कोई रोल नहीं।
अविनाश वाचस्पति ने कहा…
26 मई 2010 12:53 पूर्वाह्न
बहुत बढ़िया रिपोर्टिंग है जी।
हर्षिता ने कहा…
26 मई 2010 1:54 पूर्वाह्न
वाह जी बहुत बढ़िया, अगर सार्थक मुद्दे हों तो बात ही कुछ ओर होती है, बधाई आप सबको।
Vivek Rastogi ने कहा…
26 मई 2010 8:19 पूर्वाह्न