बेबाक , बिंदास , बेलौस ,बेसाख्ता सी कुछ बातें ......
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बिखरे आखर
ट्विटर सेंसर को तैयार , गूगल ने किया इनकार ,
उपयोग दुन्नो का अईसा करें , रहे टेंसन में सरकार
मेरे इर्द गिर्द रहकर , तुम जो यूं , अपना ये ...
1 सप्ताह पहले















sundar aalekh bhai ki qalam se fir ekbaar.. lekin naya ye laga ki abhi tak koi plane hijack nahin hua use chhudane ko.. :)
दीपक 'मशाल' ने कहा…
7 मई 2010 12:34 पूर्वाह्न
अजय भाई, बीच चौराहे पर तो नहीं पर हाँ कुछ क़ानूनी प्रावधान कर के कसाब को फ़ांसी जल्दी ही हो जानी चाहिए यह मेरा भी मानना है |
शिवम् मिश्रा ने कहा…
7 मई 2010 12:43 पूर्वाह्न
फ़ांसी तो इस दरिंदे के लिये बहुत कम है, जिन लोगो के परिवार के लोग मरे है, इसे उन के हवाले कर दो... जो इसे इस तरह मारे की शेतान भी दस बार सोचे निहथो को मारने से पहले
राज भाटिय़ा ने कहा…
7 मई 2010 1:22 पूर्वाह्न
कैसी व्यवस्था है कि फांसी की सजा होती है मगर फांसी देने वाला कोई नहीं, हद है.
बहुत बढ़िया आलेख.
Udan Tashtari ने कहा…
7 मई 2010 1:33 पूर्वाह्न
aap ki baat bilkul sahi hai.
Tej Pratap Singh ने कहा…
7 मई 2010 1:59 पूर्वाह्न
कैसी व्यवस्था है कि फांसी की सजा होती है मगर फांसी देने वाला कोई नहीं, हद है.
बहुत बढ़िया आलेख.
महफूज़ अली ने कहा…
7 मई 2010 2:04 पूर्वाह्न
एकदम सही लिखा अपने. ऐसे लोगों के लिए रहम की कोई ज़रूरत नहीं
Shobhna Choudhary ने कहा…
7 मई 2010 7:49 पूर्वाह्न
Indira Gandhi ke hatyaron ko Ram Jethmalaniki kripase faansi chadhane me 10 saal lag gaye..chashmdeed gawahon ke baawjood..to maujooda nyawyawasthame kuchhbhi ho sakta hai!
kshama ने कहा…
7 मई 2010 8:15 पूर्वाह्न
जी हाँ ...इस रूटीन फैसले पर इतना उत्साह मुझे भी समझ नहीं आ रहा ...जैसे कोई अनहोनी हो गयी हो ...!!
वाणी गीत ने कहा…
7 मई 2010 10:04 पूर्वाह्न
अभी तो फैसला ही आया है....आगे होता क्या है..देखने वाली बात तो ये है
sangeeta swarup ने कहा…
7 मई 2010 1:29 अपराह्न
राष्ट्रपति के पास भी समय सीमा होनी चाहिए जिसके भीतर राष्ट्रपति को फांसी की सजा प्राप्त अपराधियों की दरख्वास्त पर हां या ना की मोहर लगानी जरूरी हो।
और ऐसे अपराधों के लिये तो कम से कम कानून में अलग से प्रावधान हों जिसमें तुरन्त सजा दी जा सके।
अभी तो हाईकोर्ट, सुप्रिमकोर्ट में जायेगा।
मुझे तो लगता है ये भी अपनी मौत यानि बूढा होकर ही मरेगा।
तबतक जाने कितनी कमाई खा जायेगा ये गरीब जनता की
प्रणाम
अन्तर सोहिल ने कहा…
7 मई 2010 2:11 अपराह्न
अरे फैसला होने से क्या होता है अमल मैं आये तब न ...अभी कोई और देश होता तो कब का गोली से भून दिया गया होता कसाब ...पर हम तो उदारवादी हैं न ..अपराध कितना भी संगीन क्यों न हो ...हमारे कानून की इंसानियत उन्हीं के लिए जगती है बस.
shikha varshney ने कहा…
7 मई 2010 5:42 अपराह्न
प्रजातांत्रिक देश में इस तरह की गड़बड़िया भी हैं। जिसके बारे में सबको पता है, कोर्ट को उसे भी सजा दिलाने में इतना समय लगता है।
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पड़ोसी की गई क्या?
गूगल आपका एकाउंट डिसेबल कर दे तो आप क्या करोगे?
ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…
7 मई 2010 6:43 अपराह्न
फंसी की सजा मिली छै बार
फंसी हुई नहीं एक बार
अब इंतजार करो छै साल
ये तो कमाल है कमाल ।
डॉ टी एस दराल ने कहा…
7 मई 2010 8:53 अपराह्न