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मंगलवार, 4 नवंबर 2008

सूर्य उपासना के दिन सूर्यपुत्री उपेक्षित

ऊर्जा के अक्षय श्रोत भास्कर देव यानि सूर्य की उपासना का शायद ये सबसे बड़ा पर्व होता है। इसे मडिया के जमाने की देन कहिएं या कुछ और , ये तो पता नहीं मगर बढ़ती मान्यताओं और विरोध के कारण ही सही छठ आज पटना- बनारस के गंगा तटों और बिहार उत्तर प्रदेश के पोखर तालाब से निकल कर दिल्ली के यमुना तट , मुंबई के जुहू बीच और कई स्वीमिंग पूलों तक पहुँच गयी है। मगर इन सबके बावजूद जो मौलिक रहा और शायद हमेशा रहेगा वो छठ पर्व की पवित्रता, सादगी और शुद्धता ।
जहाँ तक हमारी छठ की यादों की बात है तो कुछ बातें तो जरूर याद हैं, गन्ने की लम्बी छडों के साथ, माथे पर फल प्रसाद की टोकरी लेकर दादी के साथ घाट पर जाना, शारदा सिन्हा की अमृत्भारी अनोखी आवाज और शाम को पतन तो सुबह पटाखों की मौज। मुझे नहीं पता की अब गाओं में भी कितना कुछ बदल गया है, जब लोग ही नहीं रहे तो शायद कुछ तो बदला ही होगा /
इन सबसे अलग जिन बातों पर मेरा ध्यान इस बार यूँ ही चला गया वो शायद आपके जानने लायक भी हों। दिल्ली में छठ पूजन के लिए स्वाभाविक तौर पर यमुना के तटों का इस्तेमाल होता है, कहते हैं की यमुना सूर्य की पुत्री हैं, इस लिहाज़ से तो छठ का रिश्ता यमुना से और गहरा हो जाता है, और अपने तथाकथित वोट बैंक के कारण या श्याद कोई और भी कारण हो, सुना है की जल्दी ही यमुना नदी के तट पर एक सूर्य मन्दिर , खूब विशाल , बनेगा, मगर इससे विपरीत ये जानकर दुःख हुआ की ,यमुना नदी का जल इतना जहरीला हो गया है, खासकर उन इलाकों में जहाँ आबादी रहती है, और पूजा भी करती है, वहां इस बार प्रशाशन को ख़ुद ही घोषणा करनी पडी की कृपया यमुना नदी में दुबकी न लगायें, अन्यथा, कई प्रकार के असाध्य रोग हो सकते हैं, इसका ही प्रभाव ये था की केन्द्रीय शहरी राज्य मंत्री राजकुमार चौहान ने अपने क्षेत्र , पश्चिमी दिल्ली में लगभग पच्चीस करोड़ की लागत से एक कृत्रिम घाट बनवा दिया । सूर्य की उपासना के दिन , सूर्यपुत्री की इस दुर्दशा पर शायद ही कभी कोई गंभीर चिंतन होगा, क्योंकि फ़िर इसकी बात अगले छठ पर ही उठेगी। और माँ गंगा के बारे में क्या कहें, सिर्फ़ इतना की जरूर कोई देव योग की कृपा है , वरना हम इंसानों ने तो कब का उनकी मौत का इंतजाम कर दिया था।

इन त्योहारों पर यदि हम कम से कम कुछ सकारात्मक कार्य, या कोई प्रयोजन, या कोई संकल्प सिद्ध कर पाते तो शायद इन त्योहारों की सार्थकता अधिक हो जाती .

3 टिप्‍पणियां:

  1. अच्छा आलेख एवं जानकारी!!

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  2. ॐ सूर्य देवो सहस्त्रांशो तेजोराशि जगत्पते ।
    अनुकम्पय मां भक्त्यां गृहाणाऽर्घ्य दिवाकर ॥
    ॐ सूर्याय नमः आदित्याय नमः भास्कराय नमः

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मैंने तो जो कहना था कह दिया...और अब बारी आपकी है..जो भी लगे..बिलकुल स्पष्ट कहिये ..मैं आपको भी पढ़ना चाहता हूँ......और अपने लिखे को जानने के लिए आपकी प्रतिक्रियाओं से बेहतर और क्या हो सकता है भला

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