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रविवार, 9 नवंबर 2008

दोस्त परेशान है , बताइए क्या करे

जब कोई आपके आसपार परेशान या दुखी हो तो जाहिर है की उसके प्रभाव से आप भी बच नहीं सकते, यदि आप सचमुच इंसान हैं तो , जरूर ही। बातों बातों में ही दोस्त से पता चल की आजकल वो बेहद परेशान चल रहा है , उसे कुछ भी नहीं सूझ रहा की क्या करे और कैसे इस परेशानी से निकले , हलाँकि मैंने उसे सभी मानवीय और कानूनी उपाय और रास्ते भी बता दिए हैं लेकिन मुझे नहीं लगता की वो इसमें से बाहर आ पाया है, जब मैं भी नहीं जानता कि, उसे कौन सा रास्ता अपनाना चाहिए, इश्वर करे उसे ये न पता चले कि मैंने उसकी समस्या यहाँ रख दी।

दरअसल कुछ साल पहले नौकरी की तलाश में गों से शहर आया, खूब भाग दौड़ के बाद एक अच्छी सी नौकरी भी मिल गयी, और किस्मत से अच्छी सी छोकरी भी, जी हाँ अपने दोस्त को या उनकी धर्मपत्नी जी को प्यार हो गया, परिणाम ये कि दोनों अलग क्षेत्र, अलग भाषी, और अलग संस्कृति के बावजूद, बहुत से विरोधों के बावजूद परिणय सूत्र में बाँध गए.दोनों की आपसी समझ भी अच्छी ही है, मगर आजकल स्थिति कुछ ठीक नहीं है। दोस्त के बूढे माँ बाप, जब कुछ दिनों के लिए गाओं से यहाँ शहर में अपने बेटे और बहू के पास रहने आए तो दिक्कत शुरू हो गयी। पता नहीं कौन सही है कौन ग़लत, किसका व्यवहार ठीक है किसका नहीं, दोनों के पास अपने अपने तर्क हैं, और एक लिहाज से दोनों ही कभी ठीक तो कभी ग़लत होते हैं। अब मुश्किल ये है कि दोनों ही एक दूसरे को देखना भी नहीं चाहते, नहीं सहायद मैं ग़लत कह गया, दरअसल हमारी भाभी जी को दोस्त की माताजी से बिल्कुल ही खुन्नस हो गयी है, और इसके लिए उनके पास शायद लाखों तर्क हैं। दोस्त ने प्यार से तकरार से, मान मनौव्वल से , रूठ कर और सख्ती से भी प्रयास कर देख लिया, मगर अफ़सोस कोई बात नहीं बनी। एक बार तो ऐसा समय आ गया कि दोस्त ने माँ बाप के लिए सब कुछ छोड़ने का फैसला कर लिया, मगर फ़िर अपने बच्चों के कारण ऐसा भी नहीं कर पाया।
अब हालात ये हैं कि वो कशमकश में फंसा हुआ , बेचारा सबसे पूछ रहा है कि क्या करे, माँ बाप को इस बुढापे में छोड़ दे या फ़िर बच्चों का भविष्य दांव पर लगा दे।

मुझे तो सिर्फ़ एक ही रास्ता सूझा , वो ये कि , नहीं दोनों में से कुछ भी नहीं कर सकता इस लिए जब तक कर सकता है कोशिश करता रह और अपना कर्म भी , बिना कुछ सोचे और समझे।

अब ये बताइए, विशेषकर महिला समाज से तो जरूर ही जानना चाहूंगा कि दोनों ही औरतें उसकी जिम्मेदारी हैं उसका जीवन भी और दायित्व भी, तो ऐसे में वो क्या करे ..........?

6 टिप्‍पणियां:

  1. Filhaal ke liye to yahi kar sakte hain ki ,prarthna kijiye ishwar se ki dono mahilaon ko sadbuddhi den,sahanshakti den.
    Darasal aham ka takraav jitna striyon ke beech hota hai utna purush ke saath nahi hota.Yahin aham riston ke madhurya ko samapt kar deti hai.Isme tab tak badlaav nahi aa sakta jabtak dono ek doosre me se dosh dhoondhna band na kar den.
    Yadi aapke mitra mandali me koi aur mahila hain(kisi ki maa,bahan ya patni) to unse sampark kar nivedan kijiye ki inkee grihasthi ko bachane me madad karen.Ab mataji ko samjhana to kathin hoga ,kyonki bujurgon ke swabhaav ko badal pana aasan nahi,par apne mitra ki patni ko hi unke bachchon ki taraf dhyaan dilakar samjhaiye ki yadi boodhe hone par unke santaan bhi unse nafrat karenge to kaisa lagega.Yadi yah bhaav unke man me ghar karti hai to nischit hi we apni saasu maa ke kuch baton ko ignore karne lagengi.

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  2. Filhaal ke liye to yahi kar sakte hain ki ,prarthna kijiye ishwar se ki dono mahilaon ko sadbuddhi den,sahanshakti den.
    Darasal aham ka takraav jitna striyon ke beech hota hai utna purush ke saath nahi hota.Yahin aham riston ke madhurya ko samapt kar deti hai.Isme tab tak badlaav nahi aa sakta jabtak dono ek doosre me se dosh dhoondhna band na kar den.
    Yadi aapke mitra mandali me koi aur mahila hain(kisi ki maa,bahan ya patni) to unse sampark kar nivedan kijiye ki inkee grihasthi ko bachane me madad karen.Ab mataji ko samjhana to kathin hoga ,kyonki bujurgon ke swabhaav ko badal pana aasan nahi,par apne mitra ki patni ko hi unke bachchon ki taraf dhyaan dilakar samjhaiye ki yadi boodhe hone par unke santaan bhi unse nafrat karenge to kaisa lagega.Yadi yah bhaav unke man me ghar karti hai to nischit hi we apni saasu maa ke kuch baton ko ignore karne lagengi.

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  3. Filhaal ke liye to yahi kar sakte hain ki ,prarthna kijiye ishwar se ki dono mahilaon ko sadbuddhi den,sahanshakti den.
    Darasal aham ka takraav jitna striyon ke beech hota hai utna purush ke saath nahi hota.Yahin aham riston ke madhurya ko samapt kar deti hai.Isme tab tak badlaav nahi aa sakta jabtak dono ek doosre me se dosh dhoondhna band na kar den.
    Yadi aapke mitra mandali me koi aur mahila hain(kisi ki maa,bahan ya patni) to unse sampark kar nivedan kijiye ki inkee grihasthi ko bachane me madad karen.Ab mataji ko samjhana to kathin hoga ,kyonki bujurgon ke swabhaav ko badal pana aasan nahi,par apne mitra ki patni ko hi unke bachchon ki taraf dhyaan dilakar samjhaiye ki yadi boodhe hone par unke santaan bhi unse nafrat karenge to kaisa lagega.Yadi yah bhaav unke man me ghar karti hai to nischit hi we apni saasu maa ke kuch baton ko ignore karne lagengi.

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  4. मसले की पेचदगी हमारे पकड़ से बाहर है, तो चुप ही रहेंगे.

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  5. तकनीकी और विकास की दौड़ में गावों से शहर में आकर बसे लोगों में ये ऊहापोह लगातार ही बना हुआ है. एक तरफ़ पीढियों के संस्कार और दूसरी तरफ़ भौतिकता की अंध दौड़.

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  6. aap sabkaa shanyavaad. ranjana jee, vistrit pratikriyaa ke liye dhanyavaad. main bhee yahee kar raha hoon sir dua ki sab kuchh theek ho jaye.

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मैंने तो जो कहना था कह दिया...और अब बारी आपकी है..जो भी लगे..बिलकुल स्पष्ट कहिये ..मैं आपको भी पढ़ना चाहता हूँ......और अपने लिखे को जानने के लिए आपकी प्रतिक्रियाओं से बेहतर और क्या हो सकता है भला

साथ चलने वाले

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