पिछली दोनों पोस्टों में दिल्ली ब्लोग बैठकी और पाबला जी , तथा द्विवेदी जी केदिल्ली प्रवास के दौरान हुई चर्चाओं पर मैं काफ़ी कुछ लिख चुका हूं ..। आजउसी को आगे बढाते हुए फ़िर कुछ उन मुद्दों पर लिखने जा रहा हूं जो हमारीबातचीत के दौरान निकल कर सामने आई ॥इनमें से पहला मुद्दा था ..हिंदीब्लोग्गिंग और मीडिया ...इससे जुडी दो बातें मुख्य रूप से हमारे बीच चर्चा केलिये आईं । पहली ये कि क्या सचमुच ही हिंदी मीडिया ..यहां मीडिया से मेरा तातपर्य प्रिंट मीडिया का है ...हिंदीब्लोग्गिंग और ब्लोगर्स को महत्व देने लगा है ....और क्या देर सवेर ये महत्व बढने वाला है ॥
बात जब निकली तो जिक्र हुआ ..विभिन्न समाचार पत्रों, पत्रिकाओं द्वारा नियमित अनियमित रूप् से स्तंभों केमाध्यम से ब्लोग पोस्ट्स को स्थान दिये जाने के बढते हुए चलन की । चूंकि पाबला जी का अनोखा ब्लोग ब्लोगऔन प्रिंट इसी विशेषता को लिये हुए है और हमारी भी भागीदारी उसमें होती है सो जाहिर था कि इस विषय परखुल कर बातें हुई ॥ बैठक के दौरान खुशदीप भाई ने वही बात उठा दी जो कुछ दिनों पहले अविनाश वाचस्पति जीने उठाई थी ...यानि जो भी समाचार पत्र ब्लोग पोस्ट्स को उठा कर छाप रहे हैं उन्हें इसके एवज में कुछ पारिश्रमिकके रूप में ही सही उस पोस्ट के लेखक को भी देना चाहिये । यहां विमर्श के दौरान मैंने अपना वही मत रखा जो मैंपहले भी कहता रहा हूं । इस विचार से अलग मेरा मानना ये था , जिसे मैंने कहा भी कि ....आज यदि ब्लोग पोस्टसका जिक्र हिंदी के समाचार पत्रों में किया जा रहा है तो हर लिहाज से न सिर्फ़ महत्वपूर्ण है बल्कि हिंदी ब्लोग्गिंग केलिये फ़ायदेमंद भी है । आज ब्लोग पोस्ट्स को वही लोग पढ पा रहे हैं जो नेट के माध्यम से जुडे हुए हैं मगर जब येपोस्ट किसी समाचार पत्र या पत्रिका में आ जाती हैं तो इसका दोहरा लाभ होता है । पहला ये कि आपकी कही गयीबात को विस्तार मिल जाता है ..यानि पत्र-पत्रिका के माध्यम से वो लाखों लोगों की पहुंच में आ जाती है ..दूसरा येकि चूंकि उनमें ब्लोग्स का जिक्र भी होता है इसलिये स्वाभाविक रूप से पढने वाले के मन में ब्लोग्स के प्रति , ब्लोग्गिंग के प्रति जो जिज्ञासा पैदा करती है ....वो कालांतर में एक नया ब्लोगर के रूप में सामने आती है ॥
रही बात पारिश्रमिक के रूप में कुछ देने की तो जो पत्र नियमित रूप से ब्लोग पोस्ट्स लगा रहे हैं वे उसे संपादकों केनाम पत्र , या पाठकों की राय ....जैसे स्तंभों के विकल्प के रूप में स्थान दे रहे हैं जिसके लिये जाहिर है कि कोईपारिश्रमिक नहीं दिया जाता । हां जो पत्र पूरी पोस्ट को आलेख के रूप में छाप लेते हैं उन्हें जरूर इस विषय मेंसोचने के लिये कहा जाना चाहिये क्योंकि आखिर उस पोस्ट की जगह छपने वाले आलेख के लेखक को भी तो वेभुगतान करते ही होंगे । हालांकि पाबला जी , और हम सबके बीच इस बात की भी चर्चा हुई कि अधिकांश पत्र ..बारबार एक ही जैसी पोस्टों, बल्कि ब्लोगों , को स्थान देते हैं जिससे उसकी उपयोगिता थोडी कम सी हो गई है ॥ वैसेइसका एक कारण जो मेरी समझ में आया वो ये कि जिस तरह प्रिंट मीडिया में एक बीट से जुडे सभी लोग ..चाहे वोफ़ील्ड में हों या डेस्क पर आपस में तालमेल बनाए रखते हैं ..उसी तरह इन पत्रों में ब्लोग पोस्ट्स को स्थान देनेवाले भी तो आपस में संवाद करते ही होंगे तो सभी पत्रों में एक ही तरह की पोस्टों को स्थान मिलने पर कोई आश्चर्यनहीं होना चाहिये॥
देखिये आज फ़िर बात एक ही मुद्दे पर कितनी लंबी हो गई ..और हां मेरे से फ़ोटुएं किसी तरह रो पीट के एक आधही लोड हो पाती हैं सो पाबला जी से निवेदन कर दिया है ...पोस्ट मैं ठेले जा रहा हूं और भर भर के फ़ोटुएं वे दिखाएंगेऔर विश्वास रखिये ..वो कमाल की होंगी .....॥आगे बात करेंगे ....चलिये जब करेंगे ..तभी करेंगे ........................
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