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बुधवार, 18 नवंबर 2009

कौन कहता है ये आभासी दुनिया है ,दिल्ली में ब्लौग बैठकी के बहाने ,


ब्लौगिंगि में रहते हुए हम चाहे अनचाहे एक दायरा , एक रिश्ता कायम कर ही लेते हैं और इसके बनने केबाद फ़िर सिलसिला शुरू होता है निरंतर संवाद का ।ये संवाद सिर्फ़ ब्लोग्गिंग और उसके विषयों तक हीनहीं सिमित रहता , धीरे धीरे इसमें परिवार, हमारेअपने उनके अपने, उनका सुख दुख सब शामिलहोता जाता है । ये बात मानता तो मैं शुरू से ही थामगर इस बात का प्रमाण मिल गया पिछले चारपांच दिनों में ही । पाबला जी से लगभग नियमित संवाद होते रहने के कारण मन में अब ये हूक उठनेलगी थी कि कब उनसे मिला जाए। लगता था कि बस अब बहुत हुआ अब तो एक बार उनकाआशिर्वाद लेकर उनके गले लगने का समय आ ही गया है । सो इच्छा जाहिर कर दी गयी। आगे कीकहानी तो पाबला जी खुद बता ही चुके हैं । मेरे आग्रह को बिल्कुल टाल नहीं सकने की स्थिति में उन्हेंमेरे घर में ही रहने का मेरा अनुरोध मानना ही पडा। भिलाई से निकलते हुए संदेश छोडा जा चुका थाकि कब पहुंच रहे है । बस इसके बाद इंतज़ार की घडियां शुरू हो गई । ट्रेन कुछ विलंब से पहुंची ॥


श्रीमती जी भी पहले से ही पाबला से से परिचित थी ...मेरी तरह हीनेट के माध्यम से ..सो वे भी काफ़ी उत्साहित थी ..आखिर उनकीपार्टी बडी होने वाली थी ।पाबला जी के साथ पहली बार आमनासामना हुआ तो जादू की झप्पी ने मीठी ठंड के बीच जिस नर्मउष्मा का एहसास कराया उसे मैं शब्दों में नहीं ढाल सकता ।पाबला जी के घर पहुंचते ही ..वही हुआ जिसकी मुझे आशंका थी ...श्रीमती जी को जहां उनमें अपनेमिंटू पाजी दिख रहे थे ..वहीं पाबला जी को भी ......वे अपनी छोटी बहन सी लगीं । ऊपर से सोने पेसुहागा ये कि दोनों ही दनदनाती पंजाबी में शुरू हो गये...और हम हो लिये किनारे । जैसा कि पहले हीतय कर चुके थे कि ..पाबला जी और द्विवेदी जी दिल्ली आगमन के शुभ अवसर को यूं तो खाली हाथसे जाने नहीं देंगे सो आनन फ़ानन में एक ब्लोग बैठक आयोजन करने का निर्णय लिया मैंने ।फ़टाफ़ट जहां भी जो उपयुक्त स्थान मिला उसे बुक किया गया और पोस्टों के माध्यम से सूचना भीपहुंचाई गई..मेरे पास जिनका संचार संपर्क था उन्हें निजि रूप से भी सूचित किया गया ।


पाबला जी के दिल्ली प्रवास के दौरान जो चर्चा और बातें हुई वो तोमैं आपसे अलग अलग पोस्टों के माध्यम से बांटूंगा ही फ़िलहालतो आप ब्लोग बैठक का हाल जानिये । समय ११ बजे से तय थासो मैं और पाबला जी समय से पहले ही वहां पहुंच चुके थे । सबसेपहले आने वाले मित्र ब्लोग्गर थे श्री राजीव तनेजा जी जो अपनेवादेनुसार सपत्नीक श्रीमती संजू तनेजा जी के साथ पधारे , उन्हें भी फ़टाक से पाबला जी की झप्पीमिली..। भाभी जी को साथ आये देख हमारा तो हौसला और बढ गया , हम उनसे फ़रीदाबाद में भीमिल चुके थे , । आखिर हमने उन्हें कह ही दिया कि जब भी ब्लोगजगत में किसी ब्लोग्गर को पत्नीसंकट का सामना करना पडा तो वो बेधडक राजीव भाई और संजू भाभी का उदाहरण दे कर अपनाबचाव कर सकता है ॥ इसके बाद आये खुशदीप भाई ...अब जब चार यार जमा हो ही चुके थे तो फ़िरतो सब्र कहां और चैन कहां ..इरफ़ान भाई के चुटीले कार्टूनों और उनकी मार , खुशदीप भाई के स्लौगओवर , और राजीव भाई की पहेली की आपसी नोंक झोंग होती रही । हम राजीव भाई से मनवाने मेंलगे थे कि अब उनकी पोस्टों की लंबाई सिर्फ़ पौने दो किलोमीटर ही होनी चाहिये ..वे डेढ पर अडे थे ..।इस बीच द्विवेदी जी जिनके वल्ल्भगढ से निकल पडने की सूचना हमें मिल चुकी थी ..उनका इंतजारलंबा ही होता जा रहा था ..खैर हमारे नाशते ..(अरे स्नैक्स फ़्नैक्स जी ), को निपटाते निपटाते उनकीआवक भी हो गई । समय बीत रहा था ..कैसे किसी को पता नहीं चल रहा था ॥

बीच बीच में , मित्र ब्लोग्गर्स के नहीं पहुंच पाने और नहीं आ सकने के फ़ोन संवाद भी मिल रहे थेमगर जब सारे दिग्गज बैठे ही थे तो फ़िर सिलसिला रुकने वाला कहां था ...। खाना पीना निपटातेनिपटाते ..भाई .विनीत उत्पल भी पहुंच गए ...। हमारे बीच जिन जिन मुद्दों पर बात हुई वे थे ..हिंदीब्लोग्गिंग में एक अघोषित आचार संहिता की जरूरत, हिंदी ब्लोग्गिंग और तकनीक , अंग्रेजी औरहिंदी ब्लोग्गिंग में फ़र्क , नकारात्मकता और सकारात्मकता , मीडिया और ब्लोग्गिंग , और्ब्लोग्गिंग और पाठक , टिप्पणियां उनका महत्व और चरित्र , और बहुत सारे विषय ..जिन परविस्तार से अगली पोस्ट में लिखूंगा ॥ ...
शाम होने लगी थी और सबके विदा होने की बारी भी ।धीरे धीरे सब इस बैठकी को उसके अंजाम तकपहुंचा रहे थे । मगर मन मान कहां रहा था । सो वहां से उठे तो सब बाहर खडे हो लिये । और फ़िरचला गप्पों और फ़ोटूओं का दौर ।इस बीच पहुंचे पहुंचे हमारे मीडिया मित्र भी अपने वादेनुसार पहुंचचुके थे और अपना काम कर चुके थे ॥

द्विवेदी जी , पाबला जी, और मैं, ..यानि अदालत, तीसरा खंबा ......तीनों रात्रि में एक ही साथ रहे ...।घूमने फ़िरने खाने पीने के दौरान बहुत सा विचार विमर्श हुआ ।जाहिर है कि ब्लोग्गिंग के अलावा भीऔर न्यायिक व्ययवस्था ,महानगरीय जीवन ..आदि पर । अगला दिन भाई खुशदीप जी औरइरफ़ान जी के नाम आरक्षित था ॥ ... ..

पाबला जी घर वापसी के लिए विदा हो गए.....मुझे नहीं पता कि उन्हें विदा करते समय मेरा कुछ छूटाजा रहा था कि उनका ....मगर मूक भाषा ने तय कर दिया था कि जल्दी ही एक दूसरी मुलाकात होगीआपस में ...किस किस की...कहां पर ....कब ..ये तो सब तो नियति तय कर ही देगी ॥
वैसे भी पाबला जी ने जब जब मेरी खिंचाई की तो मैंने उन्हें हर बार यही कहा...

जो ट्रेन भिलाई से दिल्ली आती है ............वही ट्रेन दिल्ली से भिलाई भी ...........

शुक्रवार, 31 जुलाई 2009

मेरी ब्लॉग्गिंग, मेरी श्रीमती जी ...और मेरे पाबला जी...


कुछ दिनों के अन्तराल के बाद ....एक पोस्ट...वो ही इस शीर्षक से ..कमाल है..आप सोच रहे होंगे...ये क्या चल रहा है भाई...कहाँ हमारी ब्लॉग्गिंग..कहाँ श्रीमती जी ..और इन सबके बीच पाबला जी ...यार कोई तालमेल नजर ही नहीं आ रहा ..सुनिए पूरी बात ..फिर बताइयेगा की ..कहाँ ताल है कहाँ मेल ....?

ये तो आपको बताया ही था की ..लगातार डेढ़ सालों तक कैफे के भरोसे ब्लॉग्गिंग करने के बाद ...जब रहा नहीं गया ..तो आखिरकार घर पर ही लैपटॉप खरीदने का पूरा प्रोग्राम बन गया...अभी कुछ माह पहले ही..बड़े मनोयोग से खरीद भी लिया गया.....आप माने या न माने हमें तो ये उपलब्धि ..बिलकुल वैसी ही लगी ..जैसे ...टाटा जी को अपनी नैनो देखने की बाद लगी होगी...खैर....उस पर से सोने पे सुहागा ये की ..उन दिनों लम्बी छुट्टियों का दौर चल रहा था...इसके बाद ग्रीष्मकालीन अवकाश ...बस समझिये ..अंधे के हाथ बटेर ..अजी हाथ क्या ..पैर, सर ..और पता नहीं कहाँ कहाँ..बटेर..वो भी मंदी के इस दौर में....

अजी दिन क्या रात ...हमने कंप्यूटर पर ऐसी हरी बत्ती जलाई....की समजिये ..ट्रैफिक बिलकुल फ्री ही कर दिया..जब देखो हरी बत्ती aun ....मगर हमें क्या पता था की ये ट्रैफिक रूल्स का जबर्दस्त उल्लंघन है ....अरे भाई घर के ट्रैफिक रूल्स का....बस ..पहले छोटे मोटे चालान हुए...यानि नोक झोंक ...और फिर वाद विवाद..हमने सोचा ये तो हर ब्लॉगर के घर में हो रहा है...और फिर कल को यही बलिदान तो हिंदी ब्लॉग्गिंग के संघर्ष का सुनहरा अध्याय कहलायेगा..सो शहीदों की तरह ...सब कुछ झेलते चलते जा रहे थे.......मगर कब तक जी आखिर कब तक....एक दिन ..हमने भी ...सरफरोशी की ..तमन्ना वाले अंदाज में ..बंद कर दिया ..सब कुछ...अंतिम फैसला...लो जी अब नहीं ...नहीं करेंगे ब्लॉग्गिंग...अरे ब्लॉग्गिंग क्या ..इस कंप्यूटर को भी हाथ नहीं लगायेंगे ...आननं फानन में सभी मित्रों को सन्देश भेज दिया गया ...जाओ जी ..अब तुम्हारे हवाले ये ..ब्लॉग्गिंग साथियों....सन्देश मोबाईल पर टाईप करके सबको भेज दिया गया ....और इस चक्कर में उनके पास भी चला गया जो हमें तो जानते थे..हमारे नंबर को भी पहचानते थे ..मगर ये ब्लॉग्गिंग क्या बाला है..उन्हें क्या पता.....बेचारे घबरा गए.....
फटाफट ..संवाद हुआ....बेटा ..ये कौन सी चीज थी ..तुमने कब पकडी थी..और कब छोड़ दी..क्यूँ छोड़ दी..कोई नौकरी थी..अरे तो काहे छोड़ दी बबुआ...का पैसे कम मिल रहे थे...अब उन्हें क्या बताते...

बस ..यही सन्देश ..पहुंचा पाबला जी के पास...जो पिछले दिनों मेरे इतने कराब हो चुके हैं..की कब सखा होते हैं..कब मार्गदर्शक ..और कब अभिभावक ..मैं खुद ही नहीं जानता..मगर ये है की ..मेरे सभी ..तकनीकी ..ब्लॉग्गिंग से जुडी समस्याओं का हल उनके पास मुझे मिल ही जाता है..उन्होंने संक्षेप में पूछा..और अनुभव के आधार पर ही बिना कुछ कहे सब कुछ समझ गए ...हम भी उन्हें बता कर ...मौन धारण करके बैठ गए...हमारे विरोध का ये अंदाज जरा जुदा है....कोई हल्ला गुल्ला ..कोई हंगामा ..नहीं..चुप रह कर जो विरोध होता है...उसकी मारक क्षमता कितनी होती है....इसका अंदाजा मुझे पहले से ही था....मगर सच पूछिए तो ...अन्दर ही अन्दर तो ऐसा लग रहा था ...जैसे किसी अज्ञातवास में जीवन बीत रहा है..मगर हमने भी व्रत जारी रखा...अब घबराने की बारी श्रीमती जी की थी....उन्हें समझ आ गया था की ..सूर्यग्रहण का कोई असर हुआ या नहीं ये तो पता नहीं ..मगर उनके चाँद (अजी हम ) को ग्रहण टाईप का लग सा गया है....

उन्होंने ..न जाने कैसे पाबला जी को फोन किया ..और चूँकि श्रीमती जी भी पंजाबी भाषी हैं...बस पाबला जी ने बड़े भाई की तरह पता नहीं उन्हें कौन सी घुट्टी पिलाई...की डांट मिली ..या पता नहीं ..बस हमें आजीवन ब्लॉग्गिंग का परमिट मिल गया ......साथ ही ...ये वादा भी ..की अब इस ब्लॉगर पर अधिक बंधिश नहीं ;लगाई जायेगी ..

सो हे ...सखाओं..इस अभय वरदान के साथ ..ब्लॉगजगत में दोबारा वापसी हो रही है.....
चलते चलते एक बात और...यदि सब ठीक ठाक योजना अनुसार रहा तो जल्दी ही आपको ..झा जी कहिन...पर एक नए अंदाज में नियमित रूप से चिट्ठाचर्चा पढने को मिलेगी....
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