बहुत दिनों बाद जैसे ही मित्र चिट्ठा सिंग....(ओहो..फ़िर गड्बड हो गयी...अच्छा चिट्ठा झा...चिट्ठा मिसर..या चिट्ठा शुकल कह लिजीये.....अरे क्यों नहीं कहेंगे...नहीं तो फ़िर अपने विवेक बाबू...को लगेगा कि जरूर हमने उनका ही सिंग तोड के ..चिट्ठा बाबू के चिपका दिया है....) तो मैं कह रहा था...कि जैसे ही वे मिले...कहने लगे...और झाजी...सुने हैं..बडे हौवा हौवा के पोस्ट ठेल रहे हैं..ऐसा लग रहा है जैसे आपको ही सबसे जादे भकभका के लगा है...और भी लोग हैं..कोइ इत्ता नहीं भडकता...आप तो बस घुस जाते हैं...एक दम ताऊ वाला लट्ठ ले के..उ के घर के भीतर तक...ई कोनो बात हुआ.....अरे ऊ जो सोच रहे हैं..जो लिख रहे हैं..ऊ उनका अपना निजि .(.निजि समझते हैं न....अरे निजि माने कि जो बात खुल्लम खुल्ला बताने के लिये आपको कौनो चैनल वाला पैसा दे ....तो समझिये वही निजि है...बांकी सब तो खाम्खा का बिजी है...)...मामला है....तो आपको काहे एतना मिर्चाई लग जाता है...का पूरा ब्लोग जगत का ठिकेदार बन गये हैं का....हमको तो लगता है ...आप एकदम से ...मेंटल हैं....
हम बौखला कर चौंकने वाला एक्स्प्रेशन देते...इससे पहले ही बोल पडे.....मेरा मतलब ....खाली मेंटल नहीं.....सेंटीमेंटल.....ओह...अब आपको कैसे समझाये.....अच्छा चलिये आपसे कुछ प्रश्न करते हैं...आप जवाब देते जाइये.....बकिया अपने आप पता चल जायेगा..कि आप हैं का ..सेंटी...कि मेंटल.....हम कहे कि ठीक है...अभी हमने कौन सा ताऊ को ....इंटरव्यू के लिये टाईम दिया हुआ है...तब तक यदि चिट्ठा सिंग कुछ ले रहे हैं .....तो हर्ज़ ही क्या है....शुरू हो जाईये.....
अच्छा बताइये कि क्या अब आपको दुनिया में सबसे प्यारा अपना लैपटौप लगता है....अपनी नौकरी और अपनी छोकरी से (छोकरी माने पत्नी )...से भी...
हां....कम से कम इन दोनों से ज्यादा तो जरूर करता हूं.....क्योंकि दोनों ही दुश्मन समझते हैं..मेरे बेचारे इस चपटे दोस्त को.......
आप सेंटी हैं.......
क्या आपको महसूस होता है....जैसे ब्लोग जगत में..कुछ दिन आप अनियमित होते हैं..तो लोग आपको मिस करने लगते हैं....
हां...हां.....कई लोग तो कहते भी हैं....क्या बात है भई...आजकल तो तुम भी पढने नहीं आते....अमा ब्लोग जगत के इतने काम तो आ ही सकते हो...यदि कुछ ढंग का लिखते नहीं तो ...टीपने के काम ही आ जाया करो....
अच्छा इसके बाद भी लगता है कि वे मिस करते हैं......मेंटल हो...
क्या ऐसा होता है...किसी ब्लोग पर को पढा...और बिना टीपे यदि किसी कारण से निकलना पडा तो मन उचाट सा हो जाता है.....
हां हां....होता है...कई बार होता है......सेंटी हुआ न..मैंने हुलस कर पूछा...हां...
अच्छा ...कभी ऐसा होता है..कि किसी पोस्ट में घुसे टीपने...टीप आये...फ़िर दोबारा जाकर देखा..कि कौन क्या क्या टीप रहा है....फ़िर किसी की टिप्प्णी को इस तरह से लिया ...जैसे....महाभारत सीरियल में......भीष्म कहते थे....आक्रमण......और सारे तीर कमान.....ले कर तैयार......
कभी ...हमेशा ऐसा ही होता है......और क्या बताऊं...होता ही रहता है....होता ही जाता है.......इसके साथ ही ..पता नहीं क्या क्या और भी होता है.....
बस बस....समझ गया.......ये सब मेंटल की निशानी है......
मेरा लटका बूथा देख कर ...चिट्ठा दिलासे देने वाले अंदाज़ में बोले.....अरे काहे उदास होते हो भैया....मेंटल लोग भी बहुत काम आते हैं ..कभी कभी....वैसे ..प्रशनों का एक राउंड और भी पूछा जायेगा...
चलिये ...तब तक हम भी और मित्रों से सलाह करते हैं.......कि हम सेंटी हैं कि मेंटल.....