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सोमवार, 11 जनवरी 2010

फ़ूंफ़ां ब्लोग्गिंग बनाम गंभीर लेखकिंग



पिछले साल का अंत हिंदी ब्लोग्गिंग में जितना उठापटक वाला रहा था ,उससे ये तो अंदाजा था कि नये साल मेंबहुत कुछ और बहुत सारा होने वाला है, मगर ये गुमान कतई नहीं था कि समुद्र मंथन की तरह ब्लोग्गिंग मंथन भीशुरू हो ही जाएगा और आजकल तो खूब मजा रहा है, जब ब्लोग्गिंग में ब्लोग्गिंग की बात हो तो उससेमजेदार कुछ भी नहीं लगता , फ़िर बात जब मजे से ज्यादा गंभीरता/विश्लेषण/तर्क चिंता तक पहुंच जाए तो समझजाना चाहिए कि अब वास्तव में परिवर्तन की चाहत दिख रही है सबसे ज्यादा खुशी मुझे इस बात की हुई कि , इस बहस में, हालांकि ये कोई आयोजित/ प्रायोजित बहस नहीं थी , नये पुराने, बडे छोटे, नवोदित , नियमित/अनियमित ...कहने का मतलब कि सभी ब्लोग्गर्स ने अपने अपने विचार एक दम ठां करके रख दिए और यही तो खासियत है इस ब्लोग्गिंग की इसी संदर्भ में कहीं पढा कि फ़ूंफ़ां ब्लोग्गिंग से ब्लोग्गिंग का स्तर गिर रहा है और अच्छा होगा, बल्कि कहें कि कहा तो ये गया कि ब्लोग्गिंग की बेहतरी इसी में है कि सिर्फ़ गंभीर लेखकिंग की जाए देखिए अब ये मत कहिएगा कि ये क्या लेखकिंग ..अजी गंभीरता आएगी तो शोध तो होंगे ही नवशब्दावेषण नहीं हुए तो काहे कि गंभीरता जी

तो फ़िर वही चिर प्रश्न सामने आके खडा हो गया , यक्ष प्रश्न की तरह , कि आखिर तय कौन करेगा अब तो स्थापित और मान्य स्तंभ भी अपनी जडें बचाने में लगे हैं जाने किन निरे तूफ़ानों ने उनकी जडों को हिला कररख दिया या शायद इसलिए भी कि बरगद सरीखे उन वृक्षों को नई पौध की लंबाई से भय का एहसास होने लगा था जबकि उन्हें तो अपने ऊपर ये भरोसा रखना चाहिए था कि वे वट वृक्ष हैं खैर ये तो वैसे भी क्षरण का दौर है , प्रकृति के लिए भी और शायद साहित्य के लिए भी मगर इस क्षरण के लिए हिंदी ब्लोग्गिंग को ही जिम्मेदार ठहराने का कोई वाजिब कारण अभी तो मुझे नहीं मिला है इसलिए यदि आज ब्लोग्गिंग में सक्रिय और असक्रिय हजारों ब्लोग्स में से किसी एक को भी फ़ूंफ़ां ब्लोगर नहीं कहा जा सकता तब भी नहीं जब खुद प्रेमचंद आकार ब्लोग लिखने लगें हालांकि मुझे लगता है कि यदि प्रेमचंद ब्लोग लिखते तो वे भी बहुत सफ़ल नहीं होते ...उतनेतो कतई नहीं जितने कि सफ़ल वे साहित्य में हुए और ये भी हो सकता था कि कोई फ़ूंफ़ां ब्लोग्गर उन्हें कई मायनों में पीछे छोड जाता मगर इसके बावजूद प्रेमचंद तो वे रहते ही क्योंकि असली प्रेमचंदत्व तो उनमें इसलिए नहीं निकल जाता कि वे ब्लोग्गिंग कर रहे हैं

वैसे भी ब्लोग्गिंग का एक सबसे शक्तिशाली पहलू जिसे अक्सर इस बहस में दरकिनार कर दिया जाता है वो है ब्लोग्गिंग का निरंकुश होना हां निरंकुश ही तो है ब्लोग्गिंग , तभी तो कभी कोई मनोज वाजपेयी , या रवीशकुमार को कंमेंटियाते वक्त ये नहीं सोचता कि वो सीधा उनसे रूबरू है जिनसे यथार्थत: अपने जीवन में शायद ही वोसब कह पाए इस निरंकुशता की कोई हद भी नहीं है , हालांकि अभी गनीमत ये तो है ही कि हमारे संकलक उनबहुत से बेकार /अश्लील /अधकचरे ब्लोग्स ( जो कि बदकिस्मती से हिंदी में भी हैं ) को हम तक पहुंचने देकरएक छन्नी का काम तो कर ही रहा है मगर इसका दूसरा पक्ष ये भी है कि इस निरंकुशता की ताकत को पाकरकई बंधु ब्लोग्गर ठीक उसी तरह उन्मादित हो जाते हैं जिस तरह से कोई रिपोर्टर उस समय हो जाता है जब उसेकिसी एक्सक्लुसिव खबर लाने को कहा जाता है जिस पर शायद उसका स्थाईकरण या इंसेंटिव टिका होता है औरफ़िर सिलसिला शुरू होता है खबर लाने के बदले खबर बनाने का ठीक इसी तरह कभी किसी का नाम लेकर / तोकभी किसी की टिप्पणी को मुद्दा बना कर/ कभी किसी की पोस्ट को ही मुद्दा बना कर धूम धडाम लिखने कीकोशिश की जाने लगती है मुझे लगता है कि निरंकुशता में भी ये गलत परंपरा तो है ही

मुझे लगता है कि एक ही ब्लोग्गर में फ़ूंफ़ां और गंभीर टाईप के लेखन दोनों के स्वाभाविक जीवाणु होते हैं और जबजो हावी होता है , उसका प्रतिफ़ल पोस्ट के रूप में हमारे सामने आता है हां मेरे जैसे लिखने पढने और सच कहूंतो इसे गीजने की हद तक घुसने वाले के लिए जब एक साथ कई मूडों और एक साथ ही कई बातों को अलग अलगअंदाज, और अलग अलग सवरूप में कहना हो तो फ़िर वो ढेरों ब्लोग बना के उन्हें उडेलता रह सकता है मुझे तोकभी कभी लगता है कि आखिर कर क्या रहा हूं मैं , जाने कितने ब्लोग बनाता जा रहा हूं , अलग अलग विषय औरअलग अलग फ़्लेवर के लिए , मगर हर लिहाज से वो हैं तो ब्लोग्गिंग के दायरे में ही और फ़िर मैं क्यों बांटूं उन्हेंफ़ूंफ़ां कैटेगरी या कि गंभीरनेस वाले चोले में ????, फ़िर रिटायरमेंट के बाद जब असली ब्लोग्गिंग शुरू होगी वो फ़ुल टाईम जौब वाली तब तो इतने भी कम पडेंगे ।


कभी कभी ....कुछ यूं भी कहने लिखने का मन करता है सो कह दिया ......ठीक किया न ???

सोमवार, 24 अगस्त 2009

जी हां...ऐसा सिर्फ़ हिन्दी ब्लोग्गिंग में होता है....


कल तक यही लिख रहा था कि..... जो लोग हिन्दी ब्लोग्गिंग पर प्रश्न चिन्ह लगा रहे हैं...उन्हें इससे पहले अपने अन्दर झांक कर देखना चाहिये....और ये भी कि हिन्दी ब्लोग्गिंग पर उंग्लियां उठाने से पहले उसे जानना बहुत ही जरूरी है...कम से कम उसका वो पहलू तो जरूर ही ...जिसे जाने अनजाने वे दरकिनार कर देते हैं...मैंने ये वादा किया था कि ...हिन्दी ब्लोग्गिंग में अब तक मुझे मिली और दिखी ...वो खास ..बात मैं सबके सामने जरूर ही रखूंगा ...तो फ़िलहाल तो जो भी मन में आ रहा है ...वो आपके सामने है....

मुझे ये तो नहीं पता कि ...इसे क्या नाम दिया जाये...मगर ये खासियत निश्चित रूप से मुझे अद्वितीय लगती है....और जहां तक कुछ अन्य भाषा की ब्लॉग्गिंग को मैं समझ पाया हूँ वहाँ तो कम से कम इसका नितांत अभाव ही दिखता है...वो खासियत है ..यहाँ पर जुड़े, जुड़ रहे रिश्ते...ये हो सकता है की ..कई लोगों को इस बात पर बहुत ही आपात्ति हो ..या होती है की यहाँ ब्लॉग्गिंग करने आये हैं रिश्ते बनाने नहीं..मगर मुझे नहीं लगता की ..हम यहाँ कुछ भी बनाते हैं...न ही अपनी छवि...न ही कोई रिश्ते...न ही कोई विशेष ..अच्छा या बुरा स्थान...सब कुछ अपने आप होता है...हमारी लेखनी,हमारे शब्द...हमारी अभिव्यक्ति ही वो माध्यम है ..जो ये सब करता है...और चाहे ना चाहे , जाने अनजाने रिश्ते तो जुड़ ही जाते हैं...जब मैंने ब्लॉग्गिंग शुरू की थी ..तो अगर मैं सही हूँ तो उस समय कुल हजार ब्लोग्गेर्स भी नहीं थे...हिंदी में...उस वक्त भी बहुत से लोग आपस में जुड़े हुए थे....आज ये संख्या दस हजार को पार कर रही है..और दायरा बढ़ता जा रहा है..यदि कुछ ब्लोग्गेर्स की अनियमितता के कारण संवाद में थोडा अन्तराल पड़ने से दूरी बढ़ जाती है ..तो स्वमेव रूप से उस स्थान पर कोई न कोई आ ही जाता है.....

आप खुद ही बताइये न...उड़नतश्तरी जी का ..सिर्फ ये भर कह देना की लगता है अब हार गया ..पूरे हिंदी ब्लॉगजगत को क्यूँकर उदास कर गया....राज भाटिया जी के स्वास्थय की मंगलकामना सब मिल कर क्यूँ कर रहे हैं...जब मेरे जैसा कोई ब्लॉगर टंकी पर चढ़ जाता है....या विवेक भाई जैसा कोई रूठ जाता है...या अलबेला जी से नाराजगी दिखानी होती है ..तो फिर क्यूँ सब सारे काम धाम छोड़ कर ..उस एक ब्लॉगर के खैरख्वाह में लग जाते हैं.....आखिर मेरे, आपके..किसी एक या दो ब्लोग्गेर्स के जाने , न लिखने से इतने बड़े ब्लॉग्गिंग परिवार में क्या घट जाता है....मगर नहीं ,.....एक कमी महसूस होने लगती है न ...दिल दुखता है न ..वो किस रिश्ते से ...किस कारण से ...मेरे ब्लॉग्गिंग न करने के निर्णय से ..पाबला जी की सेहत पर क्या फर्क पड़ जाता जो उन्होंने .. इतनी कोशिशों के बावजूद ,..मेरी श्रीमती जी को उलाहना, डांट,,सलाह ,,जो भी समझें..मुझे इस ब्लॉगजगत को छोड़ने नहीं दिया....और आगे बढ़ते हैं...यहाँ हम एक दुसरे को न सिर्फ सभी पर्व त्योहारों पर...बल्कि किसी के पुत्र/पुत्री के जन्मदिन पर , शादी की सालगिरह पर ..और खुद उनके जन्मदिवस पर बधाई दे रहे हैं....ऐसा तो आम तौर पर एक समाज , एक परिवार में ही होता है न ....शायद इसी बात को समझते हुए ..हिंदी का दैनिक समाचार पत्र आज समाज ...जब ब्लोग्स को कवर करता है तो शीर्षक देता है ...ब्लॉग समाज ...और अन्दर की बात तो ये है की ..जो सामने से ये कहते हैं की हम तो कोई रिश्ते नाते नहीं बनाते..यहाँ ..उन्हें भी कई बार अपने ब्लॉगर साथियों का अपना, और उनके किसी का हाल चाल पूछते हुए पाया है.......तो क्यूँ नहीं कहूँ .....हाँ जी....ऐसा तो सिर्फ हिंदी ब्लॉग्गिंग में ही होता है ....

यहाँ हिंदी ब्लॉग्गिंग में लिख रहा हरेक व्यक्ति ...कम से कम हिंदी , अंगरेजी के अलावा भी एक और एक से ज्यादा भाषा का जानकार तो जरूर है...और नहीं तो अपनी मातृभाषा का तो है ही ....यानि ...देवनागरी के अलावा...गुरमुखी, मैथिलि, भोजपुरी, गुजराती आदि भाषाओं में जानकारी के बावजूद ..अपनी अपनी भाषाओं में लिखते रहने और बहुत अच्छा लिखते रहने के बावजूद .....हिंदी भाषा में लिख रहे हैं ....क्यूँ ..बहुत से कारण हैं..जिनमें पहला है ...और कम से कम ये तो है ही.....हिंदी से अटूट प्रेम....हिंदी के प्रति सम्मान...बताइये है किसी भाषा में ऐसा और .....

आपमें से बहुतों ने अन्य बहुत सी भाषाओं के ब्लोग्स को पढा होगा..या नियमित/अनियमित रूप से पढ़ते होंगे..बहुत से विद्वान् लोग तो लिखते भी होंगे....क्या आपने ऐसा देखा है की वहाँ लोग पढने के बाद...हिंदी में,,,देवनागरी में अंगरेजी लिख कर टीप रहे हैं ....नहीं न..मैंने भी नहीं...अजी ये हमारी हिंदी ब्लॉग्गिंग ही है की ..आप अपनी टूटी फूटी हिंदी में ही नहीं ..अंगरेजी में...रोमन में हिंदी लिख कर ...जैसा मन चाह रहा है ..उसमें टीप रहे हैं..और उसे भी उसी भाव से उसी प्रेम से स्वीकार किया जा रहा है...और तो और हिंदी में ब्लॉग्गिंग करते हुए ..हिंदी ब्लॉग्गिंग को आप रोमन हिंदी में या खुल्लम खुल्ला अंगरेजी में, या अंग्रेजियत झाड़ झाड़ के गलिया रहे हैं...सब चल रहा है...हिंदी ब्लॉग्गिंग है न ....

ये हिंदी ब्लॉग्गिंग ही है ...की कोई आपके लिए अपनी पता नहीं कितने दिनों की/ कितने महीनो की मेहनत से... कभी तिरेंगे का, कभी गणेश जी का, कभी चूहे का, कभी ब्लॉग सजाने के लिए...कभी आपकी किसी समस्या को दूर करने के लिए विजेट तैयार करता है...कोई ब्लॉग बुखार..कोई ब्लॉग टिप्स ..तो कोई किसी और नाम से लिख और पोस्ट कर रहा है.....इसके अलावा न जाने कितने ब्लोग्गेर्स ...नए ब्लोग्गेर्स का उत्साह बढाने को ..कितने मुझ जैसे अनाडियों को कभी लिंक बनाना सिखाने को तो कभी स्नैप शोट लेने के लिए...कभी किसी और कुछ करने के लिए मदद करने को चौबीसों घंटे तैयार रहता है.......क्यूँ है किसी और भाषा की ब्लॉग्गिंग में ऐसा.......

सोचिये सोचिये.....आप भी सोचिये ...अभी तो जितना मन में आया , जो ध्यान रहा लिख दिया....बाँकी आप जोड़ते रहे.....जो शेष रहा ....वो अगले और अंतिम भाग में लिखूंगा ...

गुरुवार, 20 अगस्त 2009

हिंदी ब्लॉग्गिंग पर प्रश्नचिन्ह लगाने से पहले .......?



हिंदी ब्लॉग्गिंग या ब्लोग्गेर्स पर जब भी कोई सकारात्मक आलेख पढता हूँ तो खुशी होती है , विशेषकर जब हम ब्लोग्गेर्स खुद भी इन विषयों पर लिखते हैं . ये कुछ कुछ आत्म मंथन करने जैसा होता है . सबसे अच्छी बात ये होती है की विषय एक होने के बावजूद सबका दृष्टिकोण अलग अलग होता है. अन्य पाठक (ब्लोग्गर्स ) भी इसे खूब रूचि लेकर पढ़ते हैं ....

लेकिन पिछले कुछ समय से देख रहा हूँ कि........ कुछ ब्लोग्गेर्स अकारण ही (मुझे अब तक ऐसी पोस्टों को लिखे जाने का ना तो एक भी सार्थक कारण दिखा और न ही कोई परिणाम ) कभी हिंदी ब्लॉग्गिंग पर निशाना साध रहे हैं तो कुछ उससे आगे जाकर सीधे -सीधे किसी का नाम लेकर कोई पोस्ट डाल रहे हैं ...जिसका कम से कम एक उद्देश्य .....सिर्फ विवाद पैदा करना तो है ही ...... आलोचना उचित है , किसी का विश्लेषण करना भी तार्किक बात है .....मगर उससे पहले कुछ सीमाएं ..कुछ अहर्ताएं भी तय होनी चाहिए....किसी भी परिस्थिति में किसी भी ब्लॉगर को दुसरे पर निजी आक्षेप तब तक करना सर्वथा अनुचित है (कम से कम सार्वजनिक रूप से तो जरूर ही ) जब तक यह एक मात्र और अंतिम विकल न हो . मैं अब सीधे सीधे कुछ प्रश्न उन तमाम ब्लोग्गेर्स से पूछना चाहूँगा ....इसलिए नहीं कि वे यहाँ जवाब दें,(क्यूंकि ब्लॉग्गिंग में यदि आप किसी के प्रति उत्तरदायी हैं ...तो खुद के ) ..उन सबसे जो लगातार हिंदी ब्लॉग्गिंग या ब्लोग्गर्स को अपने उपहास के निशाने पर रखे हुए हैं ....

आप कितने समय से ब्लॉग्गिंग कर रहे हैं....? तात्पर्य सिर्फ यह है कि ...क्या आपको लगता है कि आपने हिंदी ब्लॉगजगत पर इतना समय बिता दिया है कि ..इसकी अच्छाई/बुराई ...दशा/दिशा ..को समझ गए हैं .

क्या आपको नियमित रूप से हिंदी ब्लॉग्गिंग में बुराई ही दिख रही है...मेरा मतलब जैसा कि ..बहुत से लोग ..सिर्फ चाँद लाईनों की पोस्ट में फटाक से लगातार आरोप पर आरोप मढ़ते जा रहे हैं....यदि हाँ, तो क्या आलोचना करते समय अन्य जिस भाषा की ब्लॉग्गिंग में वो बात हिंदी से बेहतर है उसका उल्लेख आपने किया .....

क्या आलोचना से पहले हिंदी ब्लॉग्गिंग की विशिष्टता, विकास ,उपलब्धि,दिशा, जैसी बातों पर भी आपका ध्यान गया है और आपने उन पर भी कुछ लिखा है. ...तात्पर्य सिर्फ यह कि ...कहीं ऐसा तो नहीं कि आप किसी पूर्वाग्रह से ग्रस्त होकर ऐसा लिखने को प्रेरित हुए हैं...या किसी अन्य बात से नाराज होकर सारा गुस्सा ...हिंदी ब्लॉग्गिंग पर ही उतार दिया....

सबसे जरूरी बात ...ये कि ...जब आप आलोचना कर रहे हैं तो क्या आपकी भाषा /शैली संयत है. शालीनता की हद में है. कहीं आप किसी का मजाक तो नहीं उड़ा रहे हैं...या जाने अनजाने ..आपकी पोस्ट उनके लिए अपमान का / दुःख का बायस तो नहीं बन रहे ..

बातें और भी बहुत सी हैं...मगर फिलहाल तो मेरे कहने का आशय सिर्फ इतना है कि .....सिर्फ उंगली उठाना.....आरोप लगा देना...सारा दोष मढ़ देना ...या गलतियां ढूँढना ...आपत्ति दर्ज करवा देना ....सिर्फ इन दायरों में अपनी लेखनी को अपने विचारों को प्रतिबंधित न करें....

उम्मीद है कि ..हिंदी ब्लॉग्गिंग के प्रति सम्मान को बरकरार रखने में आप सब मेरा साथ देंगे ....

शुक्रवार, 7 अगस्त 2009

जाओ जी हमें भी घोर आपत्ति है ......



किसी ने बताया कि.....हम हमेशा या तो किसी दौर में जीते हैं ....या फिर दौरे में..मतलब ..तरह तरह के दौर..पहले ब्लैक एंड व्हाईट ..का दौर...अब रंगीन ..अजी रंगीन क्या थ्री डी...का दौर..पहले पेजर का दौर..अब मोबाईल का...और यदि दौर से आपको कोई इत्तेफाक नहीं तो फिर ..दौरे से होगा..अरे नहीं नहीं वो सरकारी दौरा नहीं..फायदे वाला टूर...मैं तो उस दौरे की बात कर रहा हूँ जो मुझ सहित आपको उठता है..तो कभी आप ब्लॉग्गिंग कर बैठते हैं..कभी दौरा उठता है तो पोस्ट ठेल देते हैं..कभी उठा तो कमेन्ट पर कमेन्ट ...और कभी उठा तो आपत्ति ..ओह हो मुद्दे पर आ ही गया ...

तो मैं कह रहा था कि...आजकल ...आपत्ति का दौर है...हालांकि ..इस बात पर मुझे बहुत घोर आपत्ति है कि ...पहले पति का दौर होना चाहिए था ..फिर आपत्ति की बारी आनी चाहिए थी...और चलो पति की बारी न भी आयी तो न सही..मगर इस महंगाई के दौर में ..चायपत्ती का तो पूरा हक़ बँटा है कि उसका नाम आपत्ति से पहले लिया जाए..मगर न जी..पता नहीं कहाँ से ..या कहूँ कि कहाँ कहाँ से ..कितनी कितनी बार आपत्ति का दौर आ ही पहुंचा है..कमबख्त ने राखी (यहाँ मेरा आशय दोनों ही राखी से है ...यार कमाल है अब ये भी बताना पडेगा कि दोनों राखी कौन से ..राखी सावंत और ..रक्षाबंधन ..) के बाद अब पंद्रह अगस्त की पोस्टों को भी पछाड़ दिया है....सब तरफ आपत्ति ही आपत्ति है..अमा ये कौन सी विपत्ति है..

मैंने सोचा कि अब जबकि आपत्तियों की जनगणना चल ही रही है तो मैं भी अपनी सूची सौंप ही दूँ......क्या पता कौन सी आपत्ति हिट हो जाए ....मुई पोस्टें हिट हों न हों...टिप्प्न्नी हिट हो न हो..चर्चा भी शायद फ्लॉप हो जाए..और चिट्ठों का क्या कहूँ ..बेचारे हिट का तो पता नहीं..चित जरूर पड़े हैं....खैर ..तो मैं कह रहा था कि ..चाहे ब्लॉग ओफ्फिस (जैसे बॉक्स ऑफिस होता है न ) पर सब कुछ फ्लॉप हो जाए ...मगर आपत्ति बिलकुल हिट हो जाती है..अरे हो रही है..आप मानते ही नहीं..चलिए मैं पहले सूची तो भेजूं

मुझे घोर आपत्ति है..किसी भी ब्लॉगर को ये जानकार माफी मिल सकती है कि..वो पिछले दिनों इस लिए बीमार रहा क्योंकि वो बीमार था ..मगर ये बात किसी भी सूरत में ..एक एलियन..(वो भी इकलौते एलियन जो ब्लॉग्गिंग करते हैं )..पर बिलकुल भी
नहीं लागू होती है..तो आपत्ति दर्ज की जाए..सुन रहे हैं न ..उड़नतश्तरी जी ..

मुझे घोर आपत्ति है...ताऊ हमेशा अकेले पता नहीं अपनी बिल्लन के साथ कहाँ कहाँ घूमने चले जाते हैं..पता नहीं कैसी कैसी फोटुएं खींचने लगते हैं..और पूरे शनिवार ..हम शनि की साढ़े साती पर फंस कर रह जाते हैं....ये क्या बात हुई ..ताऊ कभी ..हमें भी साथ ले जाया करो....फिर पूछो पहेली...देखो क्या नंबर पाते हैं ...ताऊ ..बिल्लन को भी सूचित करें..

हमें घोर आपत्ति है..ये विवेक भाई...पता नहीं कैसे कैसे सपने देखते हैं....जब भी लिखता हैं पसंद की सूची में सबसे ऊपर टंगे होते हैं...अजी आपत्ति इस बात पर नहीं हैं..आपत्ति तो ये है ...कि कभी हमारे सपने में नहीं आते...जबकि कित्ती बार कहा है ..आ जाओ प्रभु ....नींद में सारी निजी बातें करेंगे...और आप हनन करना ....आप जब हनन करते हो न ..तभी जाकर तो हमें उस पर मनन करने का मन करता है..

हमें आपत्ति है अलबेला जी पर भी..क्या अलबेला जी ..आपने तो ना पोस्टों के लिए जगह छोडी है ..न ही तिप्प्न्नियों के इनलिए...ऐसे ही टीपते रहे ..तो सबका आदत नहीं खराब हो जाएगा..अरे हम लोग हिंदी ब्लॉगर हैं ..जिनको टिप्प्न्नी मिलने का कोई हक़ नहीं है ( हाय इस बात से किसी को कितनी खुशी हुई होगी ,,जब भी हिंदी ब्लॉग्गिंग को लेकर खराब खराब बात लिखो ..उन्हें बड़ा अच्छा लगता है ....अरे हम जानते हैं न ) अलबेला जी..नए नए में इत्ता सब झेल लिए...इत्ता आपत्ति भी मिल गया..इसी बात पर घोर आपत्ति है..हमें नहीं मिली आज तक इत्ती आपत्ति ...अब मिल जाए तो ..ब्लॉगर जन्म सार्थक है....

लीजिये का आज ही सब आपत्ति गिना दें..अरे छोडिये बुद्धू समझें हैं क्या,,,..कई लोग इसी के सहारे ..अपनी ब्लॉग्गिंग चला रहे हैं...हमको भी तो कुछ दिन सेवा का अवसर दीजिये......और प्लीज ई मेल करके ...टिप्पी करके ..पोस्टकार्ड से ,,जैसे भी हो अपनी निजी बात बताइये..नहीं तो हम आपकी निजता का उल्लंघन कैसे करेंगे ..और फिर आप हमरी तरह आपत्ति कैसे करेंगे....ठीक है न


अब कुछ ऊ का कहते हैं अक्सर ..हाँ डिस्क्लेमर ..ई होता का है ..हमको आज तक नहीं पता चला ..

ई पोस्ट से बहुतों का ..बहुत कुछ लेना देना है.....और जिनका भी लेना देना हो ..ऊ ले लें ..और देना हो तो टिप्पी दे दें ......एक और घोषणा ..हम तीसरा खम्भा के छाँव तले ...अदालत और कोर्ट कचहरी ..में घुमते रहते हैं..वकालत भी कर सकते हैं और वकील हमारे मित्र भी हैं.....ई सब ...जर्मन. जापानी. फ़्रांसीसी..चायनीज...चाहे किसी भी ब्लॉग्गिंग की दें हो.....हिंदी की नहीं है .....अरे नहीं है..आप मानते क्यूँ नहीं है...
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