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शुक्रवार, 14 अगस्त 2009

लगभग ५० पोस्ट, ५०० टिप्न्नियाँ, १५०० ब्लोग्स दर्शन, .महीने भर की ब्लॉग ड्यूटी



जब इस ब्लॉग्गिंग में घुसे ..तभी से न जाने कितने अरमान पैदा हो गए ..अरे नहीं नहीं जी...वो साहित्यकार कहलाने वाले नहीं...वो तो बड़े स्वाईन फ्लू टाईप के अरमान होते हैं...मेरे तो जो भी थे ...सब एक ब्लॉगर की आत्मा से जुड़े हुए....यार अब भगवान् के लिए ये मत कहना कि ..हिंदी ब्लॉगर की आत्मा भी नहीं होती...क्यूंकि मैं जब भी हिंदी ब्लॉग्गिंग और हिंदी ब्लोग्गेर्स की बात करता हूँ ...कोई न कोई ठुड्डे मार के कहता है ..अबे हिंदी ब्लॉग्गिंग में ये तो नहीं होता ...और जब हिंदी में नकद का ही कोई जुगाड़ तुम सबसे नहीं होता ...तो आत्मा कहाँ से आ गयी.....मेरे मतलब पूछने पर कहते हैं ...आत्मा ..परमात्मा का ही एक तत्त्व है..और परमात्मा ..नकद नारायाण के बिना कहाँ हैं..सो हे भक्त ..फालतू की बहस छोडो और आगे बढो ...तो मैं कह रहा था कि...जितने अरमान ब्लॉगर वाले थे वो सब जाग गए...ऐसे जागे कि कमबख्त खुजली की तरह बढ़ते ही गए ....

कभी पोस्टों की संख्या बढाने का ...तो कभी ..टीपते जाने का....कभी पसंद सूची में ...चमगादड़ की तरह ..हमेशा ही उल्टे लटके रहने का.....कभी अपने उड़नतश्तरी जी की तरह ....सारी पहेलियाँ .....सरे इनाम शिनाम ...एक झटका में जीत जाने का...और क्या क्या बताएं कैसे कैसे अरमान जागे ...कुछ तो पूरे हुए भी ..कुछ पूरे हो जायेंगे ..इसका भी पूरा विश्वास है...बिलकुल वैसे ही विश्वास ...जैसे कि प्रधानमंत्री मंमोहम सिंह पर है ....कि एक दिन वे पकिस्तान से आर पार की लड़ाई जरूर ही करेंगे ...नए ब्लोग्गेर्स को हमने भी खूब उत्साहित किया...खूब टीपा...मगर हाय रे लानत है ...किसी ने भी दोषी नहीं ठराया....देखा कुछ लोग ..दे धनाधन ..सिर्फ विवादों को पैदा कर रहे हैं ..या फिर उन्हें हवा दे रहे ...हमने भी अपना एक अरमान पूरा किया ..और अपनी राय ..बिलकुल उसी तरह दे डाली ..जैसे सलमान ने अपनी राय (ऐश्वर्या ) अभिषेक को दी थी...और किस्मत देखिये...हमारी टिप्पणी तो मुआ लाल कपडा बन गयी...सांड की तरह सब हमारे ही पीछे पड़ गए...

घर का भी मत पूछिए....लैपटॉप लेने के बाद ..बिटिया भी शिकायत करने लगी ..पापा ये आप मेरी जगह इसे गोद में लिए क्यूँ बैठे रहते हो...इसलिए न कि ये आपकी गोद में शुशू नहीं करता ...मैं क्या कहता ...पत्नी पूछ रही थी कि क्या हुआ जी...इत्ता सारा समय लगे रहते हो इस चपटे डिब्बे के साथ ..फिर भी बूथा लटका ही रहता है..के मन नहीं भरता ....मैंने ठंडी सांस भर के कहा .मुझे लगता है ..मैं अभी अपना पूरा .....ब्लॉग्गिंग को नहीं दे पा रहा हूँ.....पत्नी जी घूर कर कहती हैं....वो जो सलमा थी न ..वही साथ वाली गली की ...उसने चार शादियाँ की कुल ग्यारह बच्चे हैं उसके ..अभी परसों मिली थी तो वो भी कह रही थी...क्या बताऊँ बहन सच्चा प्यार नहीं मिला जीवन में......हाय हाय....तो क्या मैं भी सलमा हो गया ..

सोचा ...सोच कर देखूं कि आखिर ..क्या कर रहा हूँ ब्लॉग्गिंग में ....हिसाब लगाया गया...सरकारी कर्मचारी हूँ न सो हर बात का हिसाब महीने के हिसाब से लगाने की आदत सी हो गयी है ...कैलकुलेशन किया तो ये परिणाम निकला

कुल पोस्टें लिख पाता हूँ : लगभग पचास

कुल पोस्टें पढ़ पाता हूँ : लगभग पंद्रह सौ

कुल टिप्न्नियाँ करता हूँ : लगभग छ सौ ,,या नहीं तो पांच सौ से ऊपर ,(पंद्रह बीस प्रतिदिन भी करूँ तो )

ब्लॉग्गिंग में टाईम देता हूँ : खाने, पीने, सोने , पढने , के बाद जो भी बचता है इसे ही देता हूँ,

ब्लॉग्गिंग से आय होती है : अच्छा हुए कि दस लाख से नीचे वालों के लिए सरकार ने टैक्स दस प्रतिशत कर दिया वरना ब्लॉग्गिंग से कमाया सारा पैसा टैक्स में निकल जाता......अजी लानत है....ब्लॉग्गिंग से पैसा ...कैसी बातें करते हो....वैसे ऐसा है नहीं...बस ये है कि ...हमें अभी आता नहीं कमाना ....

तभी तो कहता हूँ ....सच्चा .......प्यार न मिला...
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