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शनिवार, 20 नवंबर 2010

यहां दिमागदार है सभी यकीनन , मगर पढो यूं कि , कभी दिल को भी चशमा चढाया करो यारों ....आज झाजी यूं ही बोल गए .


पिछले कुछ दिनों में ब्लॉगर साथियों को पारिवारिक निजि मानसिक आघात का जो सिलसिला बना हुआ उसने जितना अधिक मन को बोझिल और अंत:करण को खंडित किया उससे अधिक उसके बाद कुछ पोस्टों पर आए साथियों की श्रद्धा और संवेदना से भरी हुई स्नेहिल टिप्पणियों का बोझ तो जैसे अधार्य हो गया । किसी से कोई शिकायत नहीं , और कोई अफ़सोस भी नहीं , जाने आज मन ये कह रहा है , क्यों ..अरे मैंने तो कह ही रखा है भाई साहब ...ये दिल तो पागल है ...कुछ भी कभी कहता है ..और हां मैं साहित्य नहीं जानता , शेर गजलों की पहचान भी मुझे नहीं है , मैं न अंतरा समझता हूं न ही सुर ...बस कलम को पता है कि


चाहे नकली ही सही ,बांटो सिर्फ़ खुशियां यहां ,
ये आभास की दुनिया है ,गम बांटना यहां अपराध है यारों ॥

रोज देखते हैं यूं तो ,वही चेहरे अपने पराए से ,
हर राज खुला है कहने को ,हर चेहरे के पीछे एक राज है यारों ॥

लिखे पढे को देख सुन के ,कब किसे शिकायत होती है यहां ,
जो लिखी नहीं गई , मगर समझी गई ,हर झगडे की वही एक बात है यारों ॥

कभी गिने जाते थे उंगलियों पे ,आज एक कौम कही जाती है ,
आज जिसे सब मान रहे बगावत ,वो बारूद की पहली लडी , मुझे याद है यारों ॥





मैं जानता हूं कि , यहां दिमागदार है सभी यकीनन ,
मगर पढो यूं कि , कभी दिल को भी चशमा चढाया करो यारों ..॥


कि क्या कहूं अब तुमसे ज्यादा मेरे दोस्तों ,
रोने की यूं ही कम नहीं हैं वजहें , इस पर तुम भी न रुलाया करो यारों ॥


क्या जरूरी है कि हर बात समझाई ही जाए हमेशा,
अब तो अजीज हो , कुछ बिना कहे भी समझ जाया करो यारों ॥


ओह जाने क्या क्या लिखता चला गया हूं ...................

18 टिप्‍पणियां:

  1. बिन कहे समझने की कला सीखनी है हमें भी।

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  2. बिन कहे समझने की कला हमें भी नहीं आती
    हर किसी के पास मन की बातें समझने वाला यंत्र नहीं तो बातें जरा खुल कर बताया करो यारों

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  3. मुझे मालूम है कि तुम जानते हो सब कुछ , बिना यंत्र मंत्र के ही ,
    यूं हर बात से अनजान हर वक्त रहकर ,खुद को न दिखाया करो यारों .....।

    सब कहा तो क्या कहा ...और सब कहा तो क्या रहा

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  4. सबकी समझ इतनी बड़ी हो ये जरुरी नहीं की बिना कहे ही सब समझ ले |

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  5. हमारा देश भारतवर्ष अनेकता में एकता, सर्वधर्म समभाव तथा सांप्रदायिक एकता व सद्भाव के लिए अपनी पहचान रखने वाले दुनिया के कुछ प्रमुख देशों में अपना सर्वोच्च स्थान रखता है, परंतु दुर्भाग्यवश इसी देश में वैमनस्य फैलाने वाली तथा विभाजक प्रवृति की तमाम शक्तियां ऐसी भी सक्रिय हैं जिन्हें हमारे देश का यह धर्मनिरपेक्ष एवं उदारवादी स्वरूप नहीं भाता. .अवश्य पढ़ें धर्म के नाम पे झगडे क्यों हुआ करते हैं ? हिंदी ब्लॉगजगत मैं मेरी पहली ईद ,इंसानियत शहीद समाज को आज़ाद इंसान बनाया करते हैं
    ब्लोगेर की आवाज़ बड़ी दूर तक जाती है, इसका सही इस्तेमाल करें और समाज को कुछ ऐसा दे जाएं, जिस से इंसानियत आप पे गर्व करे.

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  6. ह्म्म्म्म्म.....समझ ,समझ के समझ को समझो...
    वरना बस- यूँ ही पढ़ लेना, तो बेकार है यारों......

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  7. मैं जानता हूं कि , यहां दिमागदार है सभी यकीनन ,
    मगर पढो यूं कि , कभी दिल को भी चशमा चढाया करो यारों

    -बहुत कुछ कह गये...

    उत्तर देंहटाएं
  8. यकीनन दिल को भी यदा-कदा चश्मा चढाने की जरूरत है

    उत्तर देंहटाएं
  9. कि क्या कहूं अब तुमसे ज्यादा मेरे दोस्तों ,
    रोने की यूं ही कम नहीं हैं वजहें , इस पर तुम भी न रुलाया करो यारों ॥
    समझे !
    समझे?

    उत्तर देंहटाएं
  10. चाहे नकली ही सही ,बांटो सिर्फ़ खुशियां यहां

    बिल्कुल सही, सब एक से बड़कर एक

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  11. अजी दिल के लिए तो बाय-पास कराया जा रहा है, यह चश्‍मे चढ़ाने की बात तो एकदम से नवीन है।

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  12. चश्‍मा नहीं फूटना चाहिए आंखों से
    बहे पानी भी तो दिखना नहीं चाहिए
    चश्‍मा आंखों पर इसीलिए तो चढ़ाइये।

    शनिवार को गोवा में ब्‍लॉगर मिलन और रविवार को रोहतक में इंटरनेशनल ब्‍लॉगर सम्‍मेलन

    उत्तर देंहटाएं
  13. चश्‍मा नहीं फूटना चाहिए आंखों से
    बहे पानी भी तो दिखना नहीं चाहिए
    चश्‍मा आंखों पर इसीलिए चढ़ाइये।

    शनिवार को गोवा में ब्‍लॉगर मिलन और रविवार को रोहतक में इंटरनेशनल ब्‍लॉगर सम्‍मेलन

    उत्तर देंहटाएं
  14. आखरी लाइन यह होना चाहिये
    जो भी लिखूँ पढते चले जाया करो यारों

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  15. `मैं जानता हूं कि , यहां दिमागदार है सभी यकीनन 'मैं भी मानता हूं, यहां दागदार नहीं सभी यकीनन :)

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  16. 'बिना कुछ कहे' भी पूरी बात कह गए, झा जी.

    उत्तर देंहटाएं

मैंने तो जो कहना था कह दिया...और अब बारी आपकी है..जो भी लगे..बिलकुल स्पष्ट कहिये ..मैं आपको भी पढ़ना चाहता हूँ......और अपने लिखे को जानने के लिए आपकी प्रतिक्रियाओं से बेहतर और क्या हो सकता है भला

साथ चलने वाले

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