सही है गांव की हरियाली के कहने ही क्या हैं? अब हमारा गांव भी हरियाली खोते जा रहा है। क्योकि नयी राजधानी के कारण भु माफ़ियों की जद मे आ गया है। बस अब जमीन बेचो, बाईक, दारु, मुर्गा, जुआ और फ़िर कोर्ट कचहरी। सारे ही तो रोग आ गए विकास के साथ, पता नही कैसा विकास है विनाश जैसा।
बिल्कुल सही कहा आपने कही ना कही तो यह पेड़ पौधे शहर के पर्यावरण को भी सुरक्षित कर रहे है..शहर वालों का ध्यान ही नही जाता जबकि आज भी गाँव वाले पेड़ पौधों के प्रति अपना प्रेम बनाए रखे है..और यह निरंतर चलता भी रहेगा...
nav varsh ki mangal shubhkaamnaaye ,aapke vichar aur karm dono uttam hai ,sahi kaha aapne ped har kisi ko lagana chahiye ,ye saari tasvir hame bahut kuchh sikh de rahi hai .
मैंने तो जो कहना था कह दिया...और अब बारी आपकी है..जो भी लगे..बिलकुल स्पष्ट कहिये ..मैं आपको भी पढ़ना चाहता हूँ......और अपने लिखे को जानने के लिए आपकी प्रतिक्रियाओं से बेहतर और क्या हो सकता है भला
सुंदर पोस्ट ,नव वर्ष की मंगल मय शुभकामनायें .
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर चित्र हैं। हम तो इन का इंतजार ही कर रहे थे।
जवाब देंहटाएंसभी चित्र बहुत सुंदर, धन्यवाद
जवाब देंहटाएंसच है "चुप खडे घने जंगलों से गुफ़त्गू करने का जो आनंद है, वो अलौकिक होता है।"
जवाब देंहटाएंआपकी संताने तो खासी बड़ी हो गई हैं :-)
बी एस पाबला
सही है गांव की हरियाली के कहने ही क्या हैं? अब हमारा गांव भी हरियाली खोते जा रहा है। क्योकि नयी राजधानी के कारण भु माफ़ियों की जद मे आ गया है। बस अब जमीन बेचो, बाईक, दारु, मुर्गा, जुआ और फ़िर कोर्ट कचहरी। सारे ही तो रोग आ गए विकास के साथ, पता नही कैसा विकास है विनाश जैसा।
जवाब देंहटाएंबिल्कुल सही कहा आपने कही ना कही तो यह पेड़ पौधे शहर के पर्यावरण को भी सुरक्षित कर रहे है..शहर वालों का ध्यान ही नही जाता जबकि आज भी गाँव वाले पेड़ पौधों के प्रति अपना प्रेम बनाए रखे है..और यह निरंतर चलता भी रहेगा...
जवाब देंहटाएंबहुत ही सुखद लग रहा है चित्रों में हरियाली को देखना...असलियत में देखने को मिले तो कहने ही क्या...
जवाब देंहटाएंबढिया पोस्ट
वाह जी बल्ले बल्ले
जवाब देंहटाएंआनन्द आया देख कर...
जवाब देंहटाएं’सकारात्मक सोच के साथ हिन्दी एवं हिन्दी चिट्ठाकारी के प्रचार एवं प्रसार में योगदान दें.’
-त्रुटियों की तरफ ध्यान दिलाना जरुरी है किन्तु प्रोत्साहन उससे भी अधिक जरुरी है.
नोबल पुरुस्कार विजेता एन्टोने फ्रान्स का कहना था कि '९०% सीख प्रोत्साहान देता है.'
कृपया सह-चिट्ठाकारों को प्रोत्साहित करने में न हिचकिचायें.
-सादर,
समीर लाल ’समीर’
बहुत अच्छा लगा।
जवाब देंहटाएंचित्र देखकर आनंद आगया और सहसा गांव की यदों मे लौट गये. आपने ये चित्र खींच कर बहुत अच्छा किया.
जवाब देंहटाएंरामराम.
वाह ! इतनी हरियाली. मन ऑक्सीजन से भर गया..
जवाब देंहटाएंगाँव की तो हवा में ही ताजगी होती है।
जवाब देंहटाएंसुन्दर चित्र।
nav varsh ki mangal shubhkaamnaaye ,aapke vichar aur karm dono uttam hai ,sahi kaha aapne ped har kisi ko lagana chahiye ,ye saari tasvir hame bahut kuchh sikh de rahi hai .
जवाब देंहटाएंगीत याद आ गया "गोरी तेरा गाँव बड़ा प्यारा..."
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