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रविवार, 20 जनवरी 2008

बिल की भाषा

सुना है कि बिजली के बिल अब हिन्दी में आएंगे। चलिए अच्छा है हिन्दुस्तान में बिजली बिल के माध्यम से भी हिन्दी पढ़ने समझने को मजबूर करके ही शायद हिन्दी का कुछ भला हो जाये। हाँ, मगर बिजली विभाग का इसके पीछे क्या तर्क है ये नहीं पता है? हो सकता है कि बिजली विभाग ने सोचा हो कि हिन्दी में बिल भेजने से जल्दी से लोगों के पल्ले तो पडेगा नहीं और मजे से भारी भरकम बिल भेजते रहेंगे।

वैसे मेरे दिमाग में इससे अलग बात ये चल रही है कि एक तरफ बिजली की माँग से उसकी कम उत्पादकता की बात चल रही है । हमेशा ही घटे उर्जा, विशेषकर विद्युत उर्जा संसाधनों का रोना रोया जाता रहा है तो दूसरी तरफ लगभग रोज़ खुल रहे नए नए , बडे बडे शॉपिंग मॉल्स , मुल्तिप्लेक्स आदि के लिए भारे मात्रा में दी जा रहे बिजली आख़िर कहाँ से आ रही है और ना ही कोई अन्य वैकल्पिक पॉवर प्लांट की स्थापना हो रही है और ना ही किसी अन्य स्रोत की खोज । तो भैया सरकार और बिजली विभाग ऐसे कौन से अनोखे पॉवर हौस से इनके लिए बिजली दुह रहे हैं।


क्या आपको कुछ पता है.?

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मैंने तो जो कहना था कह दिया...और अब बारी आपकी है..जो भी लगे..बिलकुल स्पष्ट कहिये ..मैं आपको भी पढ़ना चाहता हूँ......और अपने लिखे को जानने के लिए आपकी प्रतिक्रियाओं से बेहतर और क्या हो सकता है भला

साथ चलने वाले

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