जानता हूँ, आप कहेंगे, कमाल है यार अभी तो कल ये बात छोडी थी की , दुनिया के सबसे अमीरों की सूची में एक ब्लॉगर का नाम आ गया है , और फ़िर अपना नाम बता दिया, आज टूल गए उन्हें सेलेब्रेटीज बनाने पर । आप लोग ब्लॉगर हैं न, कबी भी सीधा और सच्चा सोच ही नहीं सकते, आप लोग भावनाओं को नहीं समझ सकते हैं न, इसलिए। दरअसल ये बात कुछ और है, आप ख़ुद ही देखिये........
कल जैसे ही बेटे को स्कूल से लेकर निकला, उसने प्रश्न दागना शुरू कर दिया (वैसे यहाँ बता दूँ की मुझे अब तक ठीक ठीक नहीं पता चल है की दागने में वो आगे रहता है या उसकी अम्मा, बस इतना पता है की दोनों मिलकर मुझे पर दागते हैं )पापा, मेरे स्कूल के सारे बच्चों के पापा सेलेब्रेटीज हैं, आज मुझसे टीचर ने पूछा तो मैंने कहा की कल बताउंगा , वैसे मुझे इतना पता है की वे कोई गर हैं, शायद अजगर नहीं बाजीगर .........
अबे चुप, क्या बक रहा है तुझे कितनी बार तो बताया है की ब्लॉगर हैं, ये अजगर और बाजीगर से बिल्कुल अलग होता है बेटे, और क्या कहा सेलेब्रेटी , बेटा सही मायने में तो सबसे बड़ा सेलेब्रेटी आज ब्लॉगर ही है।
ठीक है पापा, लेकिन हो तो आप गर नस्ल के ही प्राणी न , और सेलेब्रेटीज कैसे हो ?
मैंने उसके गर -मगर पर बिना ध्यान दिए, बताना शुरू किया, देख, आज भारत की जनसख्या कितनी है, सवा अरब से भी ज्यादा, उसमें से हिन्दी बोलने, पढने, लिखने और समझने वाले कितने होंगे, करोड़ों में , उसमें से ब्लॉग्गिंग करने वाले कितने हैं सिर्फ़ हजारों में, अबे, हजारों में क्या सिर्फ़ कुछ हजार, और नियमित लिखने वाले, सिर्फ़ पाँच सौ, उसमें से एक तेरे पापा भी हैं। और ये जो तेरे, अमिताभ बच्चन, आमिर खान , जैसे लोग हैं न , वे तो सिर्फ़ अपने कुत्ते बिल्लियों के नाम बताने के लिए ब्लॉग्गिंग कर रहे हैं, हम उनमें से नहीं हैं। हम लिखते है, उसे पढ़ते हैं, लोग हमारी प्रशंशा करते हैं, फ़िर हम प्रशंसा करते हैं, और ये सिलसिला चलता रहता है। और तो और ये तेरे सेलेब्रिटीज लोग तो एक दूसरे से कैसे लड़ते हैं, खुलमखुल्ला, सबके सामने, यहाँ हम किसी की आलोचना भी बड़ी ही शिष्टता से करते हैं, और कई लोग तो बेचारे इतने भद्र हैं की यदि किसी को गलियाने का मन करे तो बेनाम बन कर गलियाते हैं, ताकि दुःख न हो ये जान कर की अमुक आदमी गरिया रहा है।
बेटा बिल्कुल शुक मुनो की तरह ध्यान लगा कर सुन रहा था, " लेकिन पापा आप लोगों की चर्चा तो कहीं नहीं होती "
बेटा गए वो दिन जब हम ख़ुद ही लिखते थे और ख़ुद ही पढ़ते थे, अब तो हरेक समाचार पत्र, कोई प्रतिदिन, तो कोई साप्ताहिक रूप से हमारी और हमारे पोस्टों की चर्चा कर रहा है ,(मैंने उसे बिल्कुल भी नहीं बताया की कभी किसी ने भी मेरी चर्चा नहीं की,) और यहाँ ब्लॉगजगत पर तो हमारे पाठक कितने हैं कह ही नहीं सकते।
लेकिन हमेशा ही मैंने देखा है की जब आप पाठकों की संख्या देखते हो तो वो तो महज ४ या ५ होती है
क्या बात कर रहा है, तुझे नहीं पता, कंप्युटर हमेसा लास्ट वाला जीरो नहीं दिखाता, मतलब पचास साठ लोग रोज पढ़ते हैं, और पसंद भी करते हैं (यहाँ भी मैंने उसे बिल्कुल नहीं बताया की हम कुछ दोस्तों ने कसम खा राखी है की एक दूसरे की पोस्ट छपते ही उसपे पसंद का घंटा जरूर बजा कर आयेंगे , फ़िर बाद में उसे खूब बुरा भला कहें। )
तो बता अब कोई कह सकता है की तेरे पापा सेलेब्र्तितिज नहीं हैं।
बिल्कुल ठीक कहा पापा , कम से कम कहने पर कोई चाहे कुछ न समझे इतना तो समझ ही जायेगा की आप भी अजगर और बाजीगर की तरह के कुछ भारी भरकम और अनोखे हो.
सोमवार, 17 नवंबर 2008
रविवार, 16 नवंबर 2008
मुबारक हो , दुनिया के सर्वाधिक अमीरों की सूची, फोर्ब्स में एक ब्लॉगर भी
वाह, भाई, क्या धाँसू ख़बर आए आज तो, आखिरकार मेरा सपना सच हो ही गया, हाल ही में दुनिया के सर्वाधिक अमीरों की सूची जारी करने वाली पत्रिका , फोर्ब्स, ने जो सूची जारी की है, उसमें एक ब्लॉगर का भी नाम है। पहले तो एक ये बात मेरी समझ में नहीं आती कि, ये इन पत्रिका वालों को आख़िर दूसरे की कमी के बारे में पता कैसे चल जाता है, और वो भी बिल्कुल शत प्रतिशत, कमाल है मुझे आज तक अपना हिसाब किताब ठीक से समझ में नहीं आता। इस सूची में दुनिया भर के, एशिया के , भारत के , इस प्रकार से नाम दिए गए हैं, पता चला कि इसमें चौथे नंबर पर एयरटेल वाले भाईसाहब मित्तल बाबु का नाम भी है, मुझे खुशी हुए, कि धोखे से ही सही, कभी किसी डाऊनलोड के नाम पर , तो कभी रिंग टन के नाम पर हर महीने जो अंट शंट, पैसे वे काटते हैं उसका फल कहीं तो जा कर मिलता है, वरना क्या फायदा कि आदमी इतनी धोखाधड़ी भी करे और हाथ भी कुछ न लगे, खैर में तो ब्लॉगर की बात कर रहा था।
विश्वस्त सूत्रों , ( प्लीज सूत्रों के बारे में कभी ना पूछें ), से पता चला है कि , कुल सत्ताईस लाख पेज की इस किताब के आखिरी पन्ने पर और ९९७६९८४३२७६५६८०९८७७६८०६४४५७६८९७५९ वें स्थान पर हमारा अपने एक हिन्दी ब्लॉगर है । हाँ , हाँ मैं जानता हूँ कि आप सोच में पड़ गए होंगे कि आख़िर कौन है वो टैलेंटेड ब्लॉगर जिसने इतना प्रतिष्ठित स्थान हासिल किया, अब मैं अपने मुंह से अपना नाम कैसे लूँ समझ नहीं पा रहा हूँ, लेकिन लेना भी जरूरी है, वरना आप हमारे वरिष्ठ भाइयों के नाम से कन्फुज हो जायेंगे तो।
मुझे ये तो नहीं पता कि इस सूची में नाम आने के बाद किसी के ऊपर क्या फर्क पड़ता है, ये भी नहीं कि kahin इसके बाद मुझे सब्जी वाला सब कुछ सोने के भाव न देना शुरू कर दे, मगर फक्र तो होता ही है न। हाँ , हाँ मुझे मालूम है कि इसके बाद कुछ लोगों को, अनाम और बे नाम लोगों को ये शिकायत हो रही होगी कि हुंह ये क्या बात हुई आख़िर पेज पे इतने बाद नंबर आया है , उसे लेकर हाय तोबा क्यूँ मचाया जा रहा है, तो उन लोगों को मैं बता दूँ कि जब भी कोई व्यक्ति किसी भी किताब को उठाता है तो उसका पहला और आख़िरी पन्ना जरूज ही पढता है , तो जिसे, बिल गेट्स, का नाम पता होगा वो झा जी को जरूर ही जानता होगा, क्यों ठीक है न, एक और जरूरी बात ये कि इन कमबख्त बड़े लोगों, अरे जिनका नाम ऊपर है उन्हें तो हर वक्त अपने बोलीवुड के खानों की तरह अपने नंबर बढ़ने और काटने की चिंता लगी रहती है, एक हम ही हैं जिसे पता है कि चाहे जितनी तबदीली आ जाए अपना स्थान तो स्त्तेस लाखवें पेज पर फिक्स है ही।
तो बधाई हो मुझे भी और आप सबको भी आख़िर आप सबके बीच रह कर ही तो ये नामुमकिन काम मैं कर पाया वरना क्या मैं भी चाँद पर सायकल लेकर नहीं चला जाता।
मेरा अगला पन्ना :_ सेलेब्रिटी होते हैं ब्लॉगर , (आपको शक है क्या, मैं साबित कर दूंगा )
विश्वस्त सूत्रों , ( प्लीज सूत्रों के बारे में कभी ना पूछें ), से पता चला है कि , कुल सत्ताईस लाख पेज की इस किताब के आखिरी पन्ने पर और ९९७६९८४३२७६५६८०९८७७६८०६४४५७६८९७५९ वें स्थान पर हमारा अपने एक हिन्दी ब्लॉगर है । हाँ , हाँ मैं जानता हूँ कि आप सोच में पड़ गए होंगे कि आख़िर कौन है वो टैलेंटेड ब्लॉगर जिसने इतना प्रतिष्ठित स्थान हासिल किया, अब मैं अपने मुंह से अपना नाम कैसे लूँ समझ नहीं पा रहा हूँ, लेकिन लेना भी जरूरी है, वरना आप हमारे वरिष्ठ भाइयों के नाम से कन्फुज हो जायेंगे तो।
मुझे ये तो नहीं पता कि इस सूची में नाम आने के बाद किसी के ऊपर क्या फर्क पड़ता है, ये भी नहीं कि kahin इसके बाद मुझे सब्जी वाला सब कुछ सोने के भाव न देना शुरू कर दे, मगर फक्र तो होता ही है न। हाँ , हाँ मुझे मालूम है कि इसके बाद कुछ लोगों को, अनाम और बे नाम लोगों को ये शिकायत हो रही होगी कि हुंह ये क्या बात हुई आख़िर पेज पे इतने बाद नंबर आया है , उसे लेकर हाय तोबा क्यूँ मचाया जा रहा है, तो उन लोगों को मैं बता दूँ कि जब भी कोई व्यक्ति किसी भी किताब को उठाता है तो उसका पहला और आख़िरी पन्ना जरूज ही पढता है , तो जिसे, बिल गेट्स, का नाम पता होगा वो झा जी को जरूर ही जानता होगा, क्यों ठीक है न, एक और जरूरी बात ये कि इन कमबख्त बड़े लोगों, अरे जिनका नाम ऊपर है उन्हें तो हर वक्त अपने बोलीवुड के खानों की तरह अपने नंबर बढ़ने और काटने की चिंता लगी रहती है, एक हम ही हैं जिसे पता है कि चाहे जितनी तबदीली आ जाए अपना स्थान तो स्त्तेस लाखवें पेज पर फिक्स है ही।
तो बधाई हो मुझे भी और आप सबको भी आख़िर आप सबके बीच रह कर ही तो ये नामुमकिन काम मैं कर पाया वरना क्या मैं भी चाँद पर सायकल लेकर नहीं चला जाता।
मेरा अगला पन्ना :_ सेलेब्रिटी होते हैं ब्लॉगर , (आपको शक है क्या, मैं साबित कर दूंगा )
शुक्रवार, 14 नवंबर 2008
पांडे V/S ठाकरे ( राजनीति का २०-२० )
अब क्षेत्रवाद का मैच ये,
और भी रोचक होगा,
नारे-दंगे, लाठी- डंडे,
सभी कहेंगे , बाप रे॥
मंजे हुए दोनों कप्तान,
इक पांडे, इक ठाकरे॥
अब जलने को तैयार रहो,
तिल तिल कर हर बार मरो,
इक डालेगा पैट्रोल, दूजा,
लगवाएगा आग रे ॥
पांडे बोले , जो बिदके,
अबकी उलटा सीधा,
तो न ताज रहें न राज रे॥
भागी सेना, पहुँची थाने,
डर और चिंता, लगी सताने,
गाने लगे, सब,
सुरक्षा का राग रे॥
गरीब भला ये क्या जाने,
आया था दो रोटी कमाने,
पीछे पड़ा , बोली-भाषा का नाग रे॥
चलिए , भगवान् करे पांडे ठाकरे टीम के इस मैच में किसी निर्दोष का विकेट न गिरे, मगर मुझे डर है की ऐसा ही होगा...
और भी रोचक होगा,
नारे-दंगे, लाठी- डंडे,
सभी कहेंगे , बाप रे॥
मंजे हुए दोनों कप्तान,
इक पांडे, इक ठाकरे॥
अब जलने को तैयार रहो,
तिल तिल कर हर बार मरो,
इक डालेगा पैट्रोल, दूजा,
लगवाएगा आग रे ॥
पांडे बोले , जो बिदके,
अबकी उलटा सीधा,
तो न ताज रहें न राज रे॥
भागी सेना, पहुँची थाने,
डर और चिंता, लगी सताने,
गाने लगे, सब,
सुरक्षा का राग रे॥
गरीब भला ये क्या जाने,
आया था दो रोटी कमाने,
पीछे पड़ा , बोली-भाषा का नाग रे॥
चलिए , भगवान् करे पांडे ठाकरे टीम के इस मैच में किसी निर्दोष का विकेट न गिरे, मगर मुझे डर है की ऐसा ही होगा...
पांडे V/S ठाकरे ( राजनीति का २०-२० )
अब क्षेत्रवाद का मैच ये,
और भी रोचक होगा,
नारे-दंगे, लाठी- डंडे,
सभी कहेंगे , बाप रे॥
मंजे हुए दोनों कप्तान,
इक पांडे, इक ठाकरे॥
अब जलने को तैयार रहो,
तिल तिल कर हर बार मरो,
इक डालेगा पैट्रोल, दूजा,
लगवाएगा आग रे ॥
पांडे बोले , जो बिदके,
अबकी उलटा सीधा,
तो न ताज रहें न राज रे॥
भागी सेना, पहुँची थाने,
डर और चिंता, लगी सताने,
गाने लगे, सब,
सुरक्षा का राग रे॥
गरीब भला ये क्या जाने,
आया था दो रोटी कमाने,
पीछे पड़ा , बोली-भाषा का नाग रे॥
चलिए , भगवान् करे पांडे ठाकरे टीम के इस मैच में किसी निर्दोष का विकेट न गिरे, मगर मुझे डर है की ऐसा ही होगा...
और भी रोचक होगा,
नारे-दंगे, लाठी- डंडे,
सभी कहेंगे , बाप रे॥
मंजे हुए दोनों कप्तान,
इक पांडे, इक ठाकरे॥
अब जलने को तैयार रहो,
तिल तिल कर हर बार मरो,
इक डालेगा पैट्रोल, दूजा,
लगवाएगा आग रे ॥
पांडे बोले , जो बिदके,
अबकी उलटा सीधा,
तो न ताज रहें न राज रे॥
भागी सेना, पहुँची थाने,
डर और चिंता, लगी सताने,
गाने लगे, सब,
सुरक्षा का राग रे॥
गरीब भला ये क्या जाने,
आया था दो रोटी कमाने,
पीछे पड़ा , बोली-भाषा का नाग रे॥
चलिए , भगवान् करे पांडे ठाकरे टीम के इस मैच में किसी निर्दोष का विकेट न गिरे, मगर मुझे डर है की ऐसा ही होगा...
पढियेगा जरूर , सब एक्सक्लूसिव है
का बात है झा बाबु, सब कुछ एक्सक्लूसिव है ,लगता है आप भी इंडिया टी वी से इंस्पायर हो गए हैं, जहाँ कभी भगवान् अवतार ले लेते हैं, तो कभी भूत प्रकट हो जाते हैं, और वो भी एक्सक्लूसिव, बस बेचारों को इंसानों से जुडी कोई ख़बर ही नहीं मिलती, क्यों ? कहिये क्या क्या ख़बर है आज, सुना है की आज तो आप लोगों पर एक और टैप जारी हुआ है जिसमें राज फाश किया गया है की आप भैया लोगों को केक बना कर काटा जा रहा है , ऊ भी चाकू लहरा लहरा के।
अरे नहीं भाई, इस बात को इतना सेरिअस्ली लेने का कौनो जरूरत नहीं है, दरअसल हम लोग बहुत पहले से ई बात सोचे थे की अपना प्रेम किसी न किसी माध्यम से जरूर दिखाएँगे। जैसे अब लीजिये हमारे प्रोग्राम सुनिए, हम लोग जल्दी ही एक लिट्टी बनाने जा रहे हैं, ( भैया लोग लिट्टी समझ गए होंगे ) जिसके अन्दर सुआ घुसा घुसा कर उसको इतनी देर तक आग पर पकाएंगे की पूरा प्रेम जग जाहिर हो जायेगा, मगर उसका टैप सिर्फ़ इंडिया टी वी को ही मिलेगा, आख़िर ऊ हमारे मीडिया पार्टनर हैं न।
सीरियल पिक्चर खुलवाओ न राज भाई
सर सुना है कि, कुछ सीरियल पिक्चर को लेकर भी आपकी कोई कहबर एक्सक्लूसिव नेउस है,
हाँ , भाई, दरअसल हमरे मित्र बालाजी यादव ( अरे टेली फिल्म्स वाले नहीं ) बहुत परेशान हैं भाई, आकर कहने लगे, का बताएं भैया झाजी, ई ससुरा सेरिअल्वा सब जब से बाद हुआ है घर में रोज ही क्लेश रहने लगा है,
हमें आश्चर्य हुआ, हमने कहा , क्यों अब तो उल्टे शांती रहेनी चाहिए थी।
अरे कहाँ, दरअसल पहले माता जी और श्रीमती जी सीरियल की कहानी और पात्रों को लेकर, उनके चक्कर और शादी वैगेरह को लेकर ही बात करती थी, अब कुछ आ नहीं रहा इसलिए आपस में भिड जाती हैं जब तब। हमने तो इसका उपाय भी निकाला और सबको लेकर चले गए पिक्चर देखने, कोई विद्रोही, वतन द्रोही नाम की ;पिक्चर लगी थी,
कमाल है , हाँ भाई अब इस समय कोई देशभक्त , और क्रांतिकारियों पर पिक्चर तो बनने से रहा।
अरे सुनिए तो , पिक्चर भी नहीं देख पाये, सुना है किसी ने बंद करवा दी है। पता चला कि ई सब आपके मित्र का किया धारा है, काहे , ई सब राज की बात है।
देखिये, हमें तो नहीं लगता कि ऊ ई सीरियल और पिक्चर सब खुलवा पायेंगे।ई सब से उन्क्य क्या लेना देना ?
ई तो आप हमें ठग रहे हैं, आप ही बताइये, जेट वाला हड़ताल से उनका का लेना देना था, वही खुलवाये थे न, हमें तो पता चला है कि हड़ताल खुलवाने में वो इतने एक्सपर्ट हो गए हैं कि सरकार उनको औथोराईज्द हड़ताल खोलू का लाईसंस देने जा रही है।
देखिये हम सीरियल सब तो चालू करवा देंगे ,मगर ऊ सब हिन्दी में नहीं होगा, दोस्त को हिन्दी समझ में नहीं आती है इसलिए कहिये तो मराठी में चालू करवा दें.............
बाल दिवस पर लकी नहीं लखी
इतने में मीडिया पार्टनर आ गए, कहे झा जी आज बाल दिवस पर कुछ नहीं कहे आप, देखिये तो बच्चा सब कितना लकी है आज, कितना सारा सुविधा, कितना ग्लैमर, पैसा मिल रहा है, है कि नहीं लकी।
बस बेटा बहुत हुआ, लकी नहीं लखी है ( आपको बताते चलें कि लखी एक नाबालिग बच्ची है जिसे हाल ही में उसके मालिक और मालकिन ने बुरी तरह मारा पीता, ख़बर भी सब तरफ़ आयी मगर उनका कुछ हुआ नहीं, हमेशा कि तरह ), तुम लोगों को हर घर में एक लकी के साथ बुधिया, चम्पू, छोटू, ननकू, जैसे लखी भी मिल जायेंगे।
मगर सर, आख़िर क़ानून को ये बाल मजदूर दिखाई क्यों नहीं देते ?
यार तुम भी कमाल करते हो, जब कानून को लंबे चौडे, तगडे , मुजरिम दिखाई नहीं देते तो फ़िर इन बेचारे बाल मजदूरों का तो साईज ही छोटा है।
चलिए अब बंद कीजिये ई अपना ब्रेकिंग न्यूज़
अरे नहीं भाई, इस बात को इतना सेरिअस्ली लेने का कौनो जरूरत नहीं है, दरअसल हम लोग बहुत पहले से ई बात सोचे थे की अपना प्रेम किसी न किसी माध्यम से जरूर दिखाएँगे। जैसे अब लीजिये हमारे प्रोग्राम सुनिए, हम लोग जल्दी ही एक लिट्टी बनाने जा रहे हैं, ( भैया लोग लिट्टी समझ गए होंगे ) जिसके अन्दर सुआ घुसा घुसा कर उसको इतनी देर तक आग पर पकाएंगे की पूरा प्रेम जग जाहिर हो जायेगा, मगर उसका टैप सिर्फ़ इंडिया टी वी को ही मिलेगा, आख़िर ऊ हमारे मीडिया पार्टनर हैं न।
सीरियल पिक्चर खुलवाओ न राज भाई
सर सुना है कि, कुछ सीरियल पिक्चर को लेकर भी आपकी कोई कहबर एक्सक्लूसिव नेउस है,
हाँ , भाई, दरअसल हमरे मित्र बालाजी यादव ( अरे टेली फिल्म्स वाले नहीं ) बहुत परेशान हैं भाई, आकर कहने लगे, का बताएं भैया झाजी, ई ससुरा सेरिअल्वा सब जब से बाद हुआ है घर में रोज ही क्लेश रहने लगा है,
हमें आश्चर्य हुआ, हमने कहा , क्यों अब तो उल्टे शांती रहेनी चाहिए थी।
अरे कहाँ, दरअसल पहले माता जी और श्रीमती जी सीरियल की कहानी और पात्रों को लेकर, उनके चक्कर और शादी वैगेरह को लेकर ही बात करती थी, अब कुछ आ नहीं रहा इसलिए आपस में भिड जाती हैं जब तब। हमने तो इसका उपाय भी निकाला और सबको लेकर चले गए पिक्चर देखने, कोई विद्रोही, वतन द्रोही नाम की ;पिक्चर लगी थी,
कमाल है , हाँ भाई अब इस समय कोई देशभक्त , और क्रांतिकारियों पर पिक्चर तो बनने से रहा।
अरे सुनिए तो , पिक्चर भी नहीं देख पाये, सुना है किसी ने बंद करवा दी है। पता चला कि ई सब आपके मित्र का किया धारा है, काहे , ई सब राज की बात है।
देखिये, हमें तो नहीं लगता कि ऊ ई सीरियल और पिक्चर सब खुलवा पायेंगे।ई सब से उन्क्य क्या लेना देना ?
ई तो आप हमें ठग रहे हैं, आप ही बताइये, जेट वाला हड़ताल से उनका का लेना देना था, वही खुलवाये थे न, हमें तो पता चला है कि हड़ताल खुलवाने में वो इतने एक्सपर्ट हो गए हैं कि सरकार उनको औथोराईज्द हड़ताल खोलू का लाईसंस देने जा रही है।
देखिये हम सीरियल सब तो चालू करवा देंगे ,मगर ऊ सब हिन्दी में नहीं होगा, दोस्त को हिन्दी समझ में नहीं आती है इसलिए कहिये तो मराठी में चालू करवा दें.............
बाल दिवस पर लकी नहीं लखी
इतने में मीडिया पार्टनर आ गए, कहे झा जी आज बाल दिवस पर कुछ नहीं कहे आप, देखिये तो बच्चा सब कितना लकी है आज, कितना सारा सुविधा, कितना ग्लैमर, पैसा मिल रहा है, है कि नहीं लकी।
बस बेटा बहुत हुआ, लकी नहीं लखी है ( आपको बताते चलें कि लखी एक नाबालिग बच्ची है जिसे हाल ही में उसके मालिक और मालकिन ने बुरी तरह मारा पीता, ख़बर भी सब तरफ़ आयी मगर उनका कुछ हुआ नहीं, हमेशा कि तरह ), तुम लोगों को हर घर में एक लकी के साथ बुधिया, चम्पू, छोटू, ननकू, जैसे लखी भी मिल जायेंगे।
मगर सर, आख़िर क़ानून को ये बाल मजदूर दिखाई क्यों नहीं देते ?
यार तुम भी कमाल करते हो, जब कानून को लंबे चौडे, तगडे , मुजरिम दिखाई नहीं देते तो फ़िर इन बेचारे बाल मजदूरों का तो साईज ही छोटा है।
चलिए अब बंद कीजिये ई अपना ब्रेकिंग न्यूज़
मंगलवार, 11 नवंबर 2008
इसका मतलब राहुल राज, अफज़ल से भी ज्यादा खतरनाक था !
आज सुबह ही ख़बरों में देखा , पढा और सुना कि, राहुल राज, उम्मीद है कि आप इस नव युवक की जिंदगी नहीं तो मौत की कहानी से वाकिफ जरूर होंगे, के माता पिता, और रिश्तेदार आज राष्ट्रपती से मुलाक़ात करेंगे। उनसे दरख्वास्त की जायेगी, कि उनके बेटे की मौत के पीछे के सच का पता लगाया जाए, ताकि उन्हें इन्साफ मिल सके।
बताइये, ये भला कोई बात हुई, राष्ट्रपति के पास फिलहाल इतना तो वक्त ही नहीं होगा, आख़िर उन्हें दूसरों को भी तो इन्साफ देना है, दूसरे कौन, भूल गए आप, राष्ट्रपति के पास अफजल , वही अफजल जिसने अपने साथियों के साथ मिलकर संसद पर हमला बोल दिया था, देश की छोटी बड़ी, सभी अदालतों से फांसी की सजा के बाद अब उसकी माफी की याचिका राष्ट्रपति के पास लंबित पडी है, और फ़िर संसद जैसी छोटी मोटी जगह पर हमला करना, वहां तैनात कुछ पुलिस वालों, जिनके सर पर खामख्वाह ही देशभक्ति का भूत चढा था, को जान से मार देने के बावजूद उसका गुनाह इतना बड़ा नहीं था जितना कि राहुल राज का था। बताइए तो एक खाली बस को हाईजैक करने का अभूतपुर्व गुनाह किया था उसने, शायद आज तक किसी भी गुंडे , डकैत, और आतंकी ने इतना शानदार हाईजैक नहीं किया होगा, सुना है कि उसने अंधाधुंध गोलियाँ भी चलायी, कमाल है कि एक भी किसी पुलिस वाले को नहीं लगी, या शायद उसने मारे नहीं।
जो भी हो, इस घटना से दो बातें तो तय हैं, पहली ये कि राष्ट्रपति के पास इन्साफ के लिए जाने से पहले जरूरी है कि अपराध , संसद पर हमले जैसा ही और सजा फांसी जैसी छोटी ही होनी चाहिए। दूसरी , ये कि किसी भी परिस्थिति में खाली बस को हाईजैक करना सबसे बड़ा अपराध है, जो बेचारे राहुल राज से हो गया। देखना ये है कि इन्साफ किसे मिलता है ?
सुना है कि इस बार टिकट बिके हैं :- अजी किसी और के मुंह से सुना होता तो शायाद यकीन नहीं होता, हालाँकि सच होता है हमेशा , मगर फ़िर भी यकीन नहीं होता मगर इतनी वरिष्ठ महिला राजनीतिज्ञ, वो भी संगठन के इतने महतवपूर्ण पद पर बैठी हुई जब कहें, और ऐसा कहने के लिए उन्हें उसके बाद इस्तीफा तक देना पड़ जाए तो यकीन नहीं करने का तो कोई कारण ही नहीं बचता है न।
मगर सबसे महत्वपूर्ण सवाल तो ये है कि , क्या चुनाव के लिए बिके हुए टिकटों की कीमत आलो प्याज और टमाटर के कुल कीमत से भी ज्यादा था, यदि कम थी तो भी और ज्यादा थी तो भी किसी भी सूरत में ये बिल्कुल ही अन्याय था, और हाँ जिन्हें आलू, प्याज और टमाटर वाली बात से ऐतराज होगा वे निश्चित रूप से घर की सब्जी श्रीमती जी से ही मंगवाते होंगे।
संस्कृति मंत्री के संस्कार :- लीजिये अभी तो चुनाव शुरू भी नहीं हुए और हमारे जनप्रतिनिधियों, समाज सेवकों का असली चरित्र हमारे सामने आने लगा है। सुना है कि मध्य प्रदेश के संस्कृति मंत्री ने हाल ही में चुनाव दफ्तर में एक महिला अधिकारी के साथ इतने शिष्ट, सुलभ, सु संस्कृत, तरीके से व्यवहार किया कि , उन बेचारी को इसकी बाकायदा शिकायत तक दर्ज करवानी पड़ गयी। इस चुनाव में जीतने के बाद तो हर हाल में उन्हें ही संस्कृति मानती बनाया जाना चाहिए, आखिरकार राजनेताओं की सच्ची संस्कृति को उन्होंने ही तो जीवित रखा है.
बताइये, ये भला कोई बात हुई, राष्ट्रपति के पास फिलहाल इतना तो वक्त ही नहीं होगा, आख़िर उन्हें दूसरों को भी तो इन्साफ देना है, दूसरे कौन, भूल गए आप, राष्ट्रपति के पास अफजल , वही अफजल जिसने अपने साथियों के साथ मिलकर संसद पर हमला बोल दिया था, देश की छोटी बड़ी, सभी अदालतों से फांसी की सजा के बाद अब उसकी माफी की याचिका राष्ट्रपति के पास लंबित पडी है, और फ़िर संसद जैसी छोटी मोटी जगह पर हमला करना, वहां तैनात कुछ पुलिस वालों, जिनके सर पर खामख्वाह ही देशभक्ति का भूत चढा था, को जान से मार देने के बावजूद उसका गुनाह इतना बड़ा नहीं था जितना कि राहुल राज का था। बताइए तो एक खाली बस को हाईजैक करने का अभूतपुर्व गुनाह किया था उसने, शायद आज तक किसी भी गुंडे , डकैत, और आतंकी ने इतना शानदार हाईजैक नहीं किया होगा, सुना है कि उसने अंधाधुंध गोलियाँ भी चलायी, कमाल है कि एक भी किसी पुलिस वाले को नहीं लगी, या शायद उसने मारे नहीं।
जो भी हो, इस घटना से दो बातें तो तय हैं, पहली ये कि राष्ट्रपति के पास इन्साफ के लिए जाने से पहले जरूरी है कि अपराध , संसद पर हमले जैसा ही और सजा फांसी जैसी छोटी ही होनी चाहिए। दूसरी , ये कि किसी भी परिस्थिति में खाली बस को हाईजैक करना सबसे बड़ा अपराध है, जो बेचारे राहुल राज से हो गया। देखना ये है कि इन्साफ किसे मिलता है ?
सुना है कि इस बार टिकट बिके हैं :- अजी किसी और के मुंह से सुना होता तो शायाद यकीन नहीं होता, हालाँकि सच होता है हमेशा , मगर फ़िर भी यकीन नहीं होता मगर इतनी वरिष्ठ महिला राजनीतिज्ञ, वो भी संगठन के इतने महतवपूर्ण पद पर बैठी हुई जब कहें, और ऐसा कहने के लिए उन्हें उसके बाद इस्तीफा तक देना पड़ जाए तो यकीन नहीं करने का तो कोई कारण ही नहीं बचता है न।
मगर सबसे महत्वपूर्ण सवाल तो ये है कि , क्या चुनाव के लिए बिके हुए टिकटों की कीमत आलो प्याज और टमाटर के कुल कीमत से भी ज्यादा था, यदि कम थी तो भी और ज्यादा थी तो भी किसी भी सूरत में ये बिल्कुल ही अन्याय था, और हाँ जिन्हें आलू, प्याज और टमाटर वाली बात से ऐतराज होगा वे निश्चित रूप से घर की सब्जी श्रीमती जी से ही मंगवाते होंगे।
संस्कृति मंत्री के संस्कार :- लीजिये अभी तो चुनाव शुरू भी नहीं हुए और हमारे जनप्रतिनिधियों, समाज सेवकों का असली चरित्र हमारे सामने आने लगा है। सुना है कि मध्य प्रदेश के संस्कृति मंत्री ने हाल ही में चुनाव दफ्तर में एक महिला अधिकारी के साथ इतने शिष्ट, सुलभ, सु संस्कृत, तरीके से व्यवहार किया कि , उन बेचारी को इसकी बाकायदा शिकायत तक दर्ज करवानी पड़ गयी। इस चुनाव में जीतने के बाद तो हर हाल में उन्हें ही संस्कृति मानती बनाया जाना चाहिए, आखिरकार राजनेताओं की सच्ची संस्कृति को उन्होंने ही तो जीवित रखा है.
सोमवार, 10 नवंबर 2008
सड़कें हमें खा गयी या हम सड़कों को ? (परिवहन दिवस पर विशेष )
आज परिवहन दिवस है, ऐसा मैंने पढ़ा है , मुझे नहीं पता की इससे किसकी सेहत पर क्या फर्क पड़ा, ये भी नहीं की आज किसी को बस में दिक्कत हुई या नहीं, या कि, कोई ट्रैफिक जाम तो नहीं लगा, मगर चूँकि पढा था तो लग रहा था कि जरूर होगा। वैसे भी सिर्फ़ प्रेम दिवस (वैलेंताईं डे ) को छोड़ कर बांकी सभी दिवस तो महज खानापूर्ती ही बन कर रह गए हैं सो ज्यादा सोचा विचारा नहीं और लगे रहे। घर पहुंचे तो अजीब माजरा देखा।
एक पक्की काली, मोटी, मजबूत , सड़क मेरे आँगन में आकर खादी थी, पहले तो मैं समझा कि शायद पत्नी ख़ुद ये उनकी कोई मित्रानी होंगी, मगर पास पहुंचा तो देखा कि सड़क थी। मैंने सोचा शायद परिवहन दिवस मानाने के लिए इस बार कोई नया आयोजन किया जा रहा है, सो औपचारिकता वश मैंने पहले यही कहना ठीक समझा ,' मुबारक हो जी, परिवहन दिवस की बहुत बहुत बधाई।"
" चुप रहो, जले पर नमक मत छिड़को, कहे की मुबारकबाद, तुम लोगों ने हमारा जीना हराम कर दिया है। एक बात बताओ ये सड़कें तुमने क्यों बनाई हैं, विकास के लिए न, परिवहन के लिए न, तो ये कौन सा नया धंधा सीख लिए है, जब भी कोई बात होती है, या नहीं भी होती है, बीवी मारे, बिजली नहीं आ रही, पानी नहीं आ रहा, तुम्हारा नेता नहीं आ रहा, पिक्चर पसंद नहीं, आरक्षण चाहिए, अमा सब के विरोद के लिए तुम लोग सारे इक्केट्ठे होकर हम सड़कों की छाती पर ही मूंग डालने आ जाते हो , तुम्हें और कोई जगह नहीं मिलती।
मैंने देखा ये क्या , आज परिवहन दिवस है तो क्या , और मेहमान है तो क्या, या तो कतई नहीं हो सकता कि कोई घर घुस कर मेरी बेईज्जत्ति ख़राब करे ,बहार से और बात है, मैं भी भड़क गया।, " रहने दो, रहने दो, तुम्हे पता है तुमाहरी वजह से हमारी जिंदगी कितनी कम हो गयी है, लो सुनो , आंकडों के मुताबिक सिर्फ़ इसी शहर में हर महीने करीब ४२ करोड़ घंटे ट्रैफिक जाम में फंस कर लोग अपना समय बरबाद कर देते हैं। सोचो कि कितनो का तो जीवन ही बचारा तुम्हारे साथ मुंह काला करते बीत जाता है।
सड़क फ़िर भड़क गयी, इसके लिए भी तो तुम ही जिम्मेदार हो, मैं तो कहती हूँ कि हम तुम्हें नहीं बल्कि तुम हमें खा रहे हो। अब मेरे आंकडे सुनो, तुम्हारे इसी शहर में रोजाना १००० -१५०० नए वाहन मेरी छाती पर उतर रहे हैं, सड़कों की कुल लम्बाई में से ७५ प्रतिशत से भी ज्यादा पर हमेशा कोई न कोई वाहन रेंग ही रहा होता है .इतने पर भी तुम मर्दूदों को चैन नहीं , अपने छोटे बच्चों को और कई बार तो ख़ुद भी, कभी पीकर, तो कभी छुट्टे सांड बन कर एक दूसरे को टक्करें मार मार कर मेरे शरीर पर अपना गंदा खून बिखेरते हो। जो ये नहीं कर पाते, तो मुंह में न जाने कौन कौन सा जहर कचरा (पान - गुटखा )खा खा कर पूरे रास्ते पिच -पिच करते रहते हो।
अब बताओ काहे का परिवहन दिवस भाई, सोचो यदि रास्तों ने बगवात कर दी तो तुम मनुष्यों को मंजिल कहाँ मिलेगी, इसलिए अब भी समय है, हमारी क़द्र करना सीखो.
एक पक्की काली, मोटी, मजबूत , सड़क मेरे आँगन में आकर खादी थी, पहले तो मैं समझा कि शायद पत्नी ख़ुद ये उनकी कोई मित्रानी होंगी, मगर पास पहुंचा तो देखा कि सड़क थी। मैंने सोचा शायद परिवहन दिवस मानाने के लिए इस बार कोई नया आयोजन किया जा रहा है, सो औपचारिकता वश मैंने पहले यही कहना ठीक समझा ,' मुबारक हो जी, परिवहन दिवस की बहुत बहुत बधाई।"
" चुप रहो, जले पर नमक मत छिड़को, कहे की मुबारकबाद, तुम लोगों ने हमारा जीना हराम कर दिया है। एक बात बताओ ये सड़कें तुमने क्यों बनाई हैं, विकास के लिए न, परिवहन के लिए न, तो ये कौन सा नया धंधा सीख लिए है, जब भी कोई बात होती है, या नहीं भी होती है, बीवी मारे, बिजली नहीं आ रही, पानी नहीं आ रहा, तुम्हारा नेता नहीं आ रहा, पिक्चर पसंद नहीं, आरक्षण चाहिए, अमा सब के विरोद के लिए तुम लोग सारे इक्केट्ठे होकर हम सड़कों की छाती पर ही मूंग डालने आ जाते हो , तुम्हें और कोई जगह नहीं मिलती।
मैंने देखा ये क्या , आज परिवहन दिवस है तो क्या , और मेहमान है तो क्या, या तो कतई नहीं हो सकता कि कोई घर घुस कर मेरी बेईज्जत्ति ख़राब करे ,बहार से और बात है, मैं भी भड़क गया।, " रहने दो, रहने दो, तुम्हे पता है तुमाहरी वजह से हमारी जिंदगी कितनी कम हो गयी है, लो सुनो , आंकडों के मुताबिक सिर्फ़ इसी शहर में हर महीने करीब ४२ करोड़ घंटे ट्रैफिक जाम में फंस कर लोग अपना समय बरबाद कर देते हैं। सोचो कि कितनो का तो जीवन ही बचारा तुम्हारे साथ मुंह काला करते बीत जाता है।
सड़क फ़िर भड़क गयी, इसके लिए भी तो तुम ही जिम्मेदार हो, मैं तो कहती हूँ कि हम तुम्हें नहीं बल्कि तुम हमें खा रहे हो। अब मेरे आंकडे सुनो, तुम्हारे इसी शहर में रोजाना १००० -१५०० नए वाहन मेरी छाती पर उतर रहे हैं, सड़कों की कुल लम्बाई में से ७५ प्रतिशत से भी ज्यादा पर हमेशा कोई न कोई वाहन रेंग ही रहा होता है .इतने पर भी तुम मर्दूदों को चैन नहीं , अपने छोटे बच्चों को और कई बार तो ख़ुद भी, कभी पीकर, तो कभी छुट्टे सांड बन कर एक दूसरे को टक्करें मार मार कर मेरे शरीर पर अपना गंदा खून बिखेरते हो। जो ये नहीं कर पाते, तो मुंह में न जाने कौन कौन सा जहर कचरा (पान - गुटखा )खा खा कर पूरे रास्ते पिच -पिच करते रहते हो।
अब बताओ काहे का परिवहन दिवस भाई, सोचो यदि रास्तों ने बगवात कर दी तो तुम मनुष्यों को मंजिल कहाँ मिलेगी, इसलिए अब भी समय है, हमारी क़द्र करना सीखो.
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