माँ , तेरी गोद मुझे,
मेरे अनमोल,
होने का,
एहसास कराती है॥
माँ, तेरी हिम्मत,
मुझको,
जग जीतने का,
विश्वास दिलाती है॥
माँ, तेरी सीख,
मुझे ,
आदमी से,
इंसान बनाती है॥
माँ, तेरी डाँट,
मुझे, नित नयी,
राह दिखाती है॥
माँ, तेरी सूरत,
मुझे मेरी,
पहचान बताती है॥
माँ, तेरी पूजा,
मेरा, हर,
पाप मिटाती है॥
माँ तेरी लोरी,
अब भी, मीठी ,
नींद सुलाती है॥
माँ , तेरी याद,
मुझे,
बहुत रुलाती है॥
माँ , माँ है और कोई उस जैसा नहीं होता , है न .
गुरुवार, 6 मार्च 2008
बुधवार, 5 मार्च 2008
में खुद को ही प्यार करने लगा
जब लगे,
दुत्कारने,
मुझको सभी,
परित्यक्त ,
सा हर कोई,
व्यवहार करने लगा॥
खुद को,
उठाया,
गले से,
लगाया,
में खुद ,
खुद को,
ही प्यार करने लगा॥
जीता रहा,
जिस दुनिया को,
अपने,
सीने से लगाए,
मुझे अपने से,
दूर जब ये,
संसार करने लगा॥
खुद को,
सम्भाला,
संवारा-सराहा,
स्नेह से,
पुचकारा,
खुद को ही,
लाड करने लगा॥
उसने इतना,
दिया नहीं मौका,
कि उसे,
कह पाता,
मैं बेवफा,
तो खुद ,
आईने में,
अपने अक्स से,
मोहब्बत का,
इजहार करने लगा।
क्या करता सोचा चलो कोई तो होना ही चाहिए प्यार करने वाला तो मैं खुद ही क्यों ना
दुत्कारने,
मुझको सभी,
परित्यक्त ,
सा हर कोई,
व्यवहार करने लगा॥
खुद को,
उठाया,
गले से,
लगाया,
में खुद ,
खुद को,
ही प्यार करने लगा॥
जीता रहा,
जिस दुनिया को,
अपने,
सीने से लगाए,
मुझे अपने से,
दूर जब ये,
संसार करने लगा॥
खुद को,
सम्भाला,
संवारा-सराहा,
स्नेह से,
पुचकारा,
खुद को ही,
लाड करने लगा॥
उसने इतना,
दिया नहीं मौका,
कि उसे,
कह पाता,
मैं बेवफा,
तो खुद ,
आईने में,
अपने अक्स से,
मोहब्बत का,
इजहार करने लगा।
क्या करता सोचा चलो कोई तो होना ही चाहिए प्यार करने वाला तो मैं खुद ही क्यों ना
में खुद को ही प्यार करने लगा
जब लगे,
दुत्कारने,
मुझको सभी,
परित्यक्त ,
सा हर कोई,
व्यवहार करने लगा॥
खुद को,
उठाया,
गले से,
लगाया,
में खुद ,
खुद को,
ही प्यार करने लगा॥
जीता रहा,
जिस दुनिया को,
अपने,
सीने से लगाए,
मुझे अपने से,
दूर जब ये,
संसार करने लगा॥
खुद को,
सम्भाला,
संवारा-सराहा,
स्नेह से,
पुचकारा,
खुद को ही,
लाड करने लगा॥
उसने इतना,
दिया नहीं मौका,
कि उसे,
कह पाता,
मैं बेवफा,
तो खुद ,
आईने में,
अपने अक्स से,
मोहब्बत का,
इजहार करने लगा।
क्या करता सोचा चलो कोई तो होना ही चाहिए प्यार करने वाला तो मैं खुद ही क्यों ना
दुत्कारने,
मुझको सभी,
परित्यक्त ,
सा हर कोई,
व्यवहार करने लगा॥
खुद को,
उठाया,
गले से,
लगाया,
में खुद ,
खुद को,
ही प्यार करने लगा॥
जीता रहा,
जिस दुनिया को,
अपने,
सीने से लगाए,
मुझे अपने से,
दूर जब ये,
संसार करने लगा॥
खुद को,
सम्भाला,
संवारा-सराहा,
स्नेह से,
पुचकारा,
खुद को ही,
लाड करने लगा॥
उसने इतना,
दिया नहीं मौका,
कि उसे,
कह पाता,
मैं बेवफा,
तो खुद ,
आईने में,
अपने अक्स से,
मोहब्बत का,
इजहार करने लगा।
क्या करता सोचा चलो कोई तो होना ही चाहिए प्यार करने वाला तो मैं खुद ही क्यों ना
मंगलवार, 4 मार्च 2008
बैन करने वालों , बंधुओं यहाँ ध्यान दो न.
हमारी संस्कृति में बैन करने कराने की परम्परा कितनी पुरानी है ये तो मुझे नहीं पता और यदि अंदाजे से कुछ कहूं भी तो इस बात की पूरी संभावना है कि , कहीं मुझे ही बैन न कर दिया जाए। खैर , तो मैं कह रहा था कि ये परम्परा काफी पहले से चली आ रही है मगर इन दिनों मोबाईल, या कहें कि टैलेंट शो, या कहें कि वलेंताईं डे , या फिर कहें कि ऑस्ट्रेलिया द्वारा भारतीय खिलाडियों पर नस्लभेद कि त्तिप्प्न्नी आदि का चलन जिस प्रकार बढ़ गया है उसी प्रकार बैन करने का चलन भी बढ़ गया है। अजी ताजा ताजा दो उदाहरण तो हम आपके सामने रख ही सकते हैं । देखिये अभी हाल ही में रिलीज़ हुई पिक्चर जोधा अकबर को कई जगह बैन कर दिया गया और अभी भी किया जा रहा हैं ये अलग बात है कि इससे अकबर इतना फमोउस हो गया है जितना तो वो इतिहास की किताब से भी नहीं हो पाया था। दूसरा उदाहर तो अपने ब्लॉग जगत का ही है । पिछले दिनों जो मल्ल युद्ध यहाँ लड़ा गया उसमें भी ये बैन करने और कराने की बात खूब जोर शोर से उछली थी। बहुत से उत्साही चिट्ठाकार मित्र लोग इसी प्रकार से बैन बैन खेल रहे थे जैसे मुम्बई के bहाई लोग मुम्बई पुलिस के साथ ताड़ी पार ताड़ी पार खेलते हैं। मैं तो उससे अलग यहाँ उन सभी बैन प्रेमियों के लिए कुछ निवेदन ले कर आया हूँ।:-
पहला आप सभी लोग इन टीवी सीरीयाल्स को बैन कर दीजिये , मगर प्लीज़ प्लीज़ ये बात मेरे घर और मेरी घर की महिलाओं तक ना पहुंचे कि ये मांग मेरी तरफ़ से उठाई गयी है।
उन चिट्ठाकारों को भी बैन कर दिजीये जो यार लिखते तो हैं मगर सिर्फ़ अपनी पोस्ट , अब आप ही बताइये क्या त्तिप्प्न्नी करने के लिए भाडे पर लोग ले कर आयें।
ये कार बनाने वाली कंपनियों को बैन कर दिजीये , खासकर सस्ती कार बनाने वालों को तो जरूर ही, बताओ यार अभी घर की टेंसन ख़त्म नहीं हुई है ऊपर से कार की फरमाईश शुरू हो गयी।
चलिए फिलहाल तो जल्दी में हूँ लिस्ट लम्बी है , आगे और बताता हूँ..............
लघुकथा सफ़ेद चेहरे जल्दी ही लिखूंगा ....
पहला आप सभी लोग इन टीवी सीरीयाल्स को बैन कर दीजिये , मगर प्लीज़ प्लीज़ ये बात मेरे घर और मेरी घर की महिलाओं तक ना पहुंचे कि ये मांग मेरी तरफ़ से उठाई गयी है।
उन चिट्ठाकारों को भी बैन कर दिजीये जो यार लिखते तो हैं मगर सिर्फ़ अपनी पोस्ट , अब आप ही बताइये क्या त्तिप्प्न्नी करने के लिए भाडे पर लोग ले कर आयें।
ये कार बनाने वाली कंपनियों को बैन कर दिजीये , खासकर सस्ती कार बनाने वालों को तो जरूर ही, बताओ यार अभी घर की टेंसन ख़त्म नहीं हुई है ऊपर से कार की फरमाईश शुरू हो गयी।
चलिए फिलहाल तो जल्दी में हूँ लिस्ट लम्बी है , आगे और बताता हूँ..............
लघुकथा सफ़ेद चेहरे जल्दी ही लिखूंगा ....
तेरे बिना
तेरे बिना,
मेरे घर को,
रोशन नहीं,
करतें हैं,
दिन के,
उजाले भी॥
तेरे बिना,
मुझ से,
नहीं संभलती,
खुशियाँ,
मेरे संभाले भी॥
तेरे बिना,
कहाँ सुरूर,
दे पाते हैं,
पैमाने और,
प्याले भी॥
तेरे बिना,
मुमकिन नहीं था,
कि कहलाते , कभी,
बेवफा भी,
दिलवाले भी॥
तेरे बिना,
कहाँ दस्तक
देती है खुशी,
कहाँ टलते हैं,
गम, मुझ अकेले ,
के टाले भी..
तेरे बिना,
पानी का सोता,
प्यास नहीं बुझाता,
भूख नहीं मिटाते,
रोटी के,
निवाले भी॥
मुझे मंज़ूर है,
उससे ,
बगावत भी ,
तेरे बिना,
नहीं करूंगा,
मैं ख़ुद को,
खुदा के,
हवाले भी॥
हाँ सच, तेरे बिना मेरा वजूद ही कहीं नहीं है.........................
मेरे घर को,
रोशन नहीं,
करतें हैं,
दिन के,
उजाले भी॥
तेरे बिना,
मुझ से,
नहीं संभलती,
खुशियाँ,
मेरे संभाले भी॥
तेरे बिना,
कहाँ सुरूर,
दे पाते हैं,
पैमाने और,
प्याले भी॥
तेरे बिना,
मुमकिन नहीं था,
कि कहलाते , कभी,
बेवफा भी,
दिलवाले भी॥
तेरे बिना,
कहाँ दस्तक
देती है खुशी,
कहाँ टलते हैं,
गम, मुझ अकेले ,
के टाले भी..
तेरे बिना,
पानी का सोता,
प्यास नहीं बुझाता,
भूख नहीं मिटाते,
रोटी के,
निवाले भी॥
मुझे मंज़ूर है,
उससे ,
बगावत भी ,
तेरे बिना,
नहीं करूंगा,
मैं ख़ुद को,
खुदा के,
हवाले भी॥
हाँ सच, तेरे बिना मेरा वजूद ही कहीं नहीं है.........................
तेरे बिना
तेरे बिना,
मेरे घर को,
रोशन नहीं,
करतें हैं,
दिन के,
उजाले भी॥
तेरे बिना,
मुझ से,
नहीं संभलती,
खुशियाँ,
मेरे संभाले भी॥
तेरे बिना,
कहाँ सुरूर,
दे पाते हैं,
पैमाने और,
प्याले भी॥
तेरे बिना,
मुमकिन नहीं था,
कि कहलाते , कभी,
बेवफा भी,
दिलवाले भी॥
तेरे बिना,
कहाँ दस्तक
देती है खुशी,
कहाँ टलते हैं,
गम, मुझ अकेले ,
के टाले भी..
तेरे बिना,
पानी का सोता,
प्यास नहीं बुझाता,
भूख नहीं मिटाते,
रोटी के,
निवाले भी॥
मुझे मंज़ूर है,
उससे ,
बगावत भी ,
तेरे बिना,
नहीं करूंगा,
मैं ख़ुद को,
खुदा के,
हवाले भी॥
हाँ सच, तेरे बिना मेरा वजूद ही कहीं नहीं है.........................
मेरे घर को,
रोशन नहीं,
करतें हैं,
दिन के,
उजाले भी॥
तेरे बिना,
मुझ से,
नहीं संभलती,
खुशियाँ,
मेरे संभाले भी॥
तेरे बिना,
कहाँ सुरूर,
दे पाते हैं,
पैमाने और,
प्याले भी॥
तेरे बिना,
मुमकिन नहीं था,
कि कहलाते , कभी,
बेवफा भी,
दिलवाले भी॥
तेरे बिना,
कहाँ दस्तक
देती है खुशी,
कहाँ टलते हैं,
गम, मुझ अकेले ,
के टाले भी..
तेरे बिना,
पानी का सोता,
प्यास नहीं बुझाता,
भूख नहीं मिटाते,
रोटी के,
निवाले भी॥
मुझे मंज़ूर है,
उससे ,
बगावत भी ,
तेरे बिना,
नहीं करूंगा,
मैं ख़ुद को,
खुदा के,
हवाले भी॥
हाँ सच, तेरे बिना मेरा वजूद ही कहीं नहीं है.........................
सोमवार, 3 मार्च 2008
कमजोर हिन्दी नहीं हम हैं ?
मैं ये बातें तब करना चाहता था जब देश में हिन्दी दिवस, हिन्दी पखवाडा या की हिन्दी माह मनाने का दिखावा किया जाता है, क्योंकि हमेशा इसके पीछे सिर्फ़ एक ही तर्क दिया जाता है कि ये सब हिन्दी को उसकी खोई हुई गरिमा दिलाने , या फिर की उसका सही स्थान दिलाने , या यूं कहें की उसे राष्ट्रीय भाषा के रूप में पहचान दिलाने के लिए किया जाता है और ना जाने कब से किया जा रहा है। मगर जब से मैंने होश सम्भाला है तब से तो मैं यही देख रहा हूँ , और तभी से मुझे कभी भी और कैसे भी ये नहीं लगा कि हिन्दी कमजोर है । किससे कमजोर है ? अंग्रेज़ी से , या किसी क्षेतिर्य भाषा से , या फिर अपने आप से ही। यहाँ भी हमारे कई चिट्ठाकारों ने हिन्दी भाषा की दिशा और दशा पर बहुत कुछ लिखा है और कईयों ने तो यहाँ तक उम्मीद जताई है कि एक न एक दिन हम हिन्दी को उसकी इज्ज़त दिला कर रहेंगे। भाई कैसी इज्ज़त और कौन सा स्थान। सब बेकार की बातें हैं।
आज सबसे ज्यादा अखबार किस भाषा के हैं,मनोरंजन हो या समाचार , सबसे ज्यादा टी वी चैनेल्स किस भाषा के हैं,लोग अभी भी पिक्चर देखने के लिए परिवार के साथ कौन सी भाषा की पिक्चर देखने के लिए जाते हैं, मुझे नहीं पता कि ये साक्छात्कार और बड़े बड़े mआंच पर अंग्रेज़ी झाड़ने वाले सभी नेता और अभिनेता अपने नाई से , अपने माली से, अपने धोबी से यहाँ तक कि अपने माँ बाप और बच्चों से किस भाषा में बात करते हैं। आप ख़ुद ही सोचिये कि हममें से कितने लोग ऐसे हैं जो किसी से मिलते हैं तो बात अंग्रेज़ी में करते हैं , एक दूसरे का अभिवादन अंग्रेज़ी में करते हैं , झगडा होने पर कितने ऐसे लोग हैं जो गाली अंग्रेज़ी में देते हैं। सोच कर देखिये जवाब ख़ुद बा ख़ुद मिल जायेगा।
अन्तिम सच तो सिर्फ़ ये है कि आज भी हिन्दी उतनी ही समृद्ध उतनी ही समर्थ और उतनी ही सशक्त है जितनी पहले थी। हाँ यदि कोई ये सोच या समझ रहा है या कि समझाना चाह रहा है कि हिन्दी जल्दी ही अमेरिका वाले और इंग्लैंड वाले बोलेंगे तो ये कभी सम्भव नहीं है। एक और दूसरी जरूरी बात भाषा कोई ख़राब या अच्छे नहीं होती जरूर ये है कि आपका उसके प्रत्ति ज्ञान और नज़रिया क्या है। मैंने ख़ुद अंग्रेज़ी में प्रतिष्ठा के साथ स्नातक की उपाधी ली है, और अंग्रेज़ी में भी ब्लोग्गिंग करता हूँ पर सच यही है किखुद को हिन्दी में जितना सहज पाता हूँ उतना अंग्रेज़ी में नहीं. मैं अंग्रेज़ी या और भी अन्य भाषाओं की इज्ज़त करता हूँ मगर हिन्दी से बेंथा मोहब्बत करता हूँ और ये किसी के समझाने या बताने से कम या ज्यादा नहीं हो सकती.
आज सबसे ज्यादा अखबार किस भाषा के हैं,मनोरंजन हो या समाचार , सबसे ज्यादा टी वी चैनेल्स किस भाषा के हैं,लोग अभी भी पिक्चर देखने के लिए परिवार के साथ कौन सी भाषा की पिक्चर देखने के लिए जाते हैं, मुझे नहीं पता कि ये साक्छात्कार और बड़े बड़े mआंच पर अंग्रेज़ी झाड़ने वाले सभी नेता और अभिनेता अपने नाई से , अपने माली से, अपने धोबी से यहाँ तक कि अपने माँ बाप और बच्चों से किस भाषा में बात करते हैं। आप ख़ुद ही सोचिये कि हममें से कितने लोग ऐसे हैं जो किसी से मिलते हैं तो बात अंग्रेज़ी में करते हैं , एक दूसरे का अभिवादन अंग्रेज़ी में करते हैं , झगडा होने पर कितने ऐसे लोग हैं जो गाली अंग्रेज़ी में देते हैं। सोच कर देखिये जवाब ख़ुद बा ख़ुद मिल जायेगा।
अन्तिम सच तो सिर्फ़ ये है कि आज भी हिन्दी उतनी ही समृद्ध उतनी ही समर्थ और उतनी ही सशक्त है जितनी पहले थी। हाँ यदि कोई ये सोच या समझ रहा है या कि समझाना चाह रहा है कि हिन्दी जल्दी ही अमेरिका वाले और इंग्लैंड वाले बोलेंगे तो ये कभी सम्भव नहीं है। एक और दूसरी जरूरी बात भाषा कोई ख़राब या अच्छे नहीं होती जरूर ये है कि आपका उसके प्रत्ति ज्ञान और नज़रिया क्या है। मैंने ख़ुद अंग्रेज़ी में प्रतिष्ठा के साथ स्नातक की उपाधी ली है, और अंग्रेज़ी में भी ब्लोग्गिंग करता हूँ पर सच यही है किखुद को हिन्दी में जितना सहज पाता हूँ उतना अंग्रेज़ी में नहीं. मैं अंग्रेज़ी या और भी अन्य भाषाओं की इज्ज़त करता हूँ मगर हिन्दी से बेंथा मोहब्बत करता हूँ और ये किसी के समझाने या बताने से कम या ज्यादा नहीं हो सकती.
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