
बहुत पहले से सोच रहा था.....कि आपको अपने परिवार से मिलवाया जाये.....मगर कुछ तो अपना आलस.....और कुछ तस्वीरों की अनुपलब्धता के कारण ऐसा संभव ही नहीं हो पा रहा था....
फ़िर इसके लिये खास तौर पर आधुनिक सुविधा से युक्त मोबाईल फ़ोन खरीदा गया...फ़्लाई...ई १०५...बस इसके बाद इससे तस्वीरों को खींचने का सिलसिला...जब शुरूआत करने का फ़ैसला किया तो ...निर्णय हुआ कि ..हमारे घर के सबसे कमाल के सदस्य से ही शुरूआत की जाये...और निर्विवाद रूप से वो है ..हमारी बिटिया रानी...बुलबुल ...यानि ..अदिति ...
जब हमारे घर में .....पुत्र आयुष के बाद .. दूसरी बार खुशी आने वाली थी......तो जैसा कि महिलाओं में ही अधिक जिज्ञासा रहती है...यही चलता था ....कि अबकी बार गोलू जी (मेरे पुत्र आयुष का घर का नाम ) का भाई आयेगा या बहन .....मगर मुझे अपने घर में ...दीदी के बाद यही ..इच्छा थी कि ...एक छोटी सी ...दीदी का रूप आ जाये...मगर प्रत्यक्षतः मैं आज के माहौल को देख कर ..थोडा सशंकित था...श्रीमती जी से यही बात कही ..तो आप भी सुनिये कि उन्होंने क्या कहा....बेटियां आदमी को इंसान बनाती हैं...और मकान को घर ....
और उनके इसी विशवास ने ...मुझे एक आत्मविशवास से भर दिया...जब हमारी ये बुलबुल जी घर में आयीं...तो बस जैसे सारा घर चहक उठा ...कहते हैं छोटी संतान चंचल होती है...जो कहते हैं बिल्कुल ठीक कहते हैं....अब ये बुलबुल जी हमारे पूरे घर को अपनी किलकारियों से गुंजायमान रखती हैं...जब भी लैपटौप पर काम करने बैठता हूं...बस जी हमारी गोद में इनकी सीट रिज़र्व हो जाती है...और तो और ...ये बुलबुल जी सोती भी हमारे पेट पर ही हैं..सुबह की सैर हो ...या रात की घुमाई...और कोइ जाये न जाये इनका जाना पक्क होता है...तो सोचा कि आपको भी मिलवा ही दूं अपनी इस बुलबुल से ..जो मुझे आदमी से इंसान बनना सिखा रही है...
अगली पोस्टों में हम आपको अपने ..गोलू जी और श्रीमती जी से भी मुलाकात करवायेंगे..फ़िर उनको दिखायेंगे..शायद इसी बहाने हमें भी ...डाक्टर साहब की तरह ज्यादा टाईम सैंक्शन हो जाये...