नई दुनिया लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
नई दुनिया लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

रविवार, 7 मार्च 2010

ब्लॉग दुर्बुद्धि जमात का कूड़ा-कचरा है...




जी हां ये उदगार होली से ठीक पहले नई दुनिया दिल्ली के संपादक श्री आलोक मेहता जी ने अपने एक आलेख में लिखे थे । हालांकि इसे उन्होंने बुरा न मानो होली है के बुलेट प्रूफ़ आवरण ओढा कर लिखा था । और बेशक किसी को लगा हो न हो मगर मुझे यदि बुरा न कहूं तो अच्छा भी कतई नहीं लगा । इसलिए अपने इस आलेख पर मैंने अपनी बात कह दी थी । मगर फ़िर इधर देखा तो पाया कि कुछ मित्रों ने उस आलेख पर अपने विचार दिए । कईयों ने इसे मात्र व्यंग्य मानना उचित समझा तो कईयों ने परोक्ष प्रत्यक्ष रूप से कहा कि हिंदी ब्लोगजगत की वाकई ऐसी ही स्थिति है जैसा कि श्री आलोक मेहता जी ने अपने आलेख में फ़रमाया था , यानि कि वे सच ही कह रहे थे । पोस्टों को पढने के दौरान एक ब्लोग्गर ने टिप्पणी में शायद मेर उस पहले लिखे गए आलेख का ईशारा करते हुए आरोप लगाया कि कुछ लोग यहां आलोक मेहता के आलेख का विरोध करते हैं और फ़िर वही लोग कुछ समय बाद अपने आलेख छपने की बात या अपने किसी ब्लोग पोस्ट के छपने की बात कहते हैं । जब ये सब पढा देखा तो लगा कि शायद अभी और लिखना चाहिए इस पर । मुझे आलोक जी का ये व्यंग्य कम से कम स्वस्थ व्यंग्य की श्रेणी का तो कतई नहीं लिखा । इसकी दो वजह हैं मेरे पास । पहली ये कि यदि वे सचमुच ही ब्लोग्गिंग पर लिखना चाहते थे तो यही व्यंग्य वो अपने ब्लोग पर भी लिख सकते थे मगर बाद में तो पता चला कि इस आलेख के बाद उनकी ब्लोग पोस्ट भी गायब हो चुकी थीं । खैर , दूसरी वजह ये कि क्या ऐसा ही व्यंग्य वे अपने कार्यक्षेत्र के लिए भी लिखने की हिम्मत कर सकते हैं । ओह ! नहीं , मगर शायद उनकी नज़र में तो ये सारी खासियतें सिर्फ़ हिंदी ब्लोग्गिंग में ही हैं । मुझे नहीं पता कि जिन मित्रों ने इसे सही ठहराया वे इस निम्न बातों पर अपनी कैसी राय रखते हैं ..मगर जो मैं सोचता हूं ..वो तो बताता ही चलूं ।

ब्लॉग दुर्बुद्धि जमात का कूड़ा-कचरा है...

दुर्बुद्धि जमात ...आलोक जी , आप जिस जमात की बात कर रहे हैं , मुझे ठीक ठीक नहीं पता कि कोई गुंडा, मवाली, मजनू, सडकछाप , उठाईगीरा ,अपराधी भी ब्लोग्गिंग कर रहा है कि नहीं मगर अब तक मैंने , समाज का कोई ऐसा वर्ग , कोई ऐसा क्षेत्र ऐसा नहीं है जिसके प्रतिनिधि आज ब्लोग्गिंग न कर रहे हों , और हां हिंदी में भी । अरे आगे तो सुनिए ..ये जो आपकी जमात है ...पत्रकारों वाली , हमारे बहुत से ब्लोग्गर मित्र आपही की जमात से हैं श्रीमान ...हां मगर शायद .....छोडिए .....आपके कारण अन्य मित्र पत्रकार ब्लोग्गरों को क्यों कटघरे में खडा करूं ?

हरेक ने ब्लॉग की अपनी दुकान खोल रखी है...

आलोक जी दुकान तो आप लोगों ने भी खोल रखी है , और अपने अपने हिसाब से उसमें माल भी बेच रहे हैं । जैसे हिंदुस्तान ..कांग्रेस का माल बेच रहा है ..तो दैनिक जागरण ..बीजेपी का ..राष्ट्रीय सहारा समाजवादी पार्टी का ..इसी तरह आप सबके प्रोपराईटर्स तो अलग अलग हैं और आप तो सेल्स मैन हैं जी । ब्लोग की दुकान कम से कम किसी के लिए आयोजित प्रायोजित / नफ़े नुकसान जैसी अखबारी नीतियों से तो ऊपर हैं ही ॥
ब्लॉग में कोई कितनी ही भद्दी-गंदी बकवास-सी गालियां उलच दे, कोई सरकार, कोई मालिक, कोई पुलिस या सेनातक कुछ नहीं बिगाड़ सकती...

आलोक जी आपसे किसने कह दिया ऐसा ...आप भी शायद मुगालते में हैं , और यहां तो मैं कई बार ये बता चुका हूं आपको भी बताता चलूं कि अभी बहुत समय नहीं बीता है जब मात्र एक टिप्पणी को अपने यहां पर लगे रहने देने के कारण एक ब्लोग्गर को सर्वोच्च न्यायाल से भी राहत नहीं मिली । और हां आप देकर देखि न किसी को गाली ..सरकार म सेना ,पुलिस तो दूर .....ब्लोग्गर ही ....????

ब्लॉग पर लिखने वाला नाली साफ करने वाली स्टाइल में बदबूदार सामग्री दुनिया-जहां में फैला दे, कोई बाल बांकानहीं कर सकता...

मुझे ये तो नहीं पता ...कसम से आपने अपने उस ब्लोग पर ..किस स्टाइल में ...कितना सुंगधित या बदबूदार ....क्या क्या फ़ैलाया ....मगर हिंदी ब्लोग्गिंग में तो अभी चाहे ...खींचतान की पराकाष्ठा पहुंच चुकी हो, चाहे वैचारिक मतभेद व्यक्तिगत आक्षेप तक पहुंच चुका हो , कुंठा हो , पूर्वाग्रह हो , और भी मानवीय दुर्गुण भी हों ., मगर आपके टेस्ट वाली सामग्री नहीं पहुंची है ।

ब्लॉग प्रभुओं का एक शब्द, अमेरिकी, चीनी राष्ट्रपति या ब्रिटिश प्रधानमंत्री तक, नहीं कटवा सकता है...खासकरहिंदी ब्लॉग पर उनका बस ही नहीं चल सकता...

कटवा तो आपसे भी कोई कुछ नहीं सकता आलोक जी , क्योंकि आखिर उसके लिए इन महान लोगों को हमारा ब्लोग और ऐसे ही आपकी नई दुनिया पढना भी तो जरूरी है । हमारा तो फ़िर भी अमेरिकी, चीनी या ब्रिटिश प्रधानमंत्री न सही वहां के लोग तो पढते ही हैं । मगर नई दुनिया का क्या कहूं ..दिल्ली में हूं सो जानता हूं कि , दैनिक जागरण , नवभारत टाईम्स, हिंदुस्तान, अमर उजाला के बाद भी कोई किसी अखबार की मांग करता है तो वो राष्ट्रीय सहारा , पंजाब केसरी या और कोई होता है , सब पुरानी दुनिया में ही खुश हैं ....हां हमारे जैसे ..कुछ सनकी पाठक जो आज भी आठ दस अखबार चाट जाते हैं वे जरूर झांकते हैं आपकी नई दुनिया में .....

ऋषि-मुनियों की परंपरा में हिंदी के ब्लॉग बाबाओं को मुदित, क्रोधित, आनंदित होने का अधिकार सुरक्षित...

अधिकारों का क्या कहें वो भी बाबाओं के । मगर फ़िर भी लगता है कि और देखा भी है कि यहां हमारे ब्लोग बाबा , कुछ हल्के फ़ुल्के हास्य , हंसी मजाक , कुछ खुशी ही बांटते हैं । आपकी बाहरी दुनिया के बाबाओं के चमत्कार तो आजकल आपका समाचार पत्रों के पेज भर रहे हैं , अपने कारनामों से ,....अब ये भी बताना पडेगा कि कौन से कारनामों से

वे कुपित होकर ब्लॉग में बड़े से बड़ा शाप दे सकते हैं...
महाभारत के चरित्रों की तरह कोई भी झूठ फैला सकते हैं...
इसके लिए तो पहले आपको साबित करना पडेगा कि महाभारत ही झूठा था , उसके चरित्र भी काल्पनिक थे , और उनका काम सिर्फ़ झूठ फ़ैलाना ही था ....मगर क्या करूं दिल्ली से बाहर निकलते ही एक शहर पडता है ....जिसका नाम है कुरूक्षेत्र .....महाभारत के लिए कहा जाता है कि वह कुरुक्षेत्र में ही हुआ था ....अब क्या करूंगा ज्यादा प्रमाण जुटा के ।आप भी निकलिए न कभी दिल्ली से बाहर ....और हां महाभारत ही क्यों आप भारत को ही झूठ साबित कर डालिए न .....

अपना ब्लॉग बना भद्दी गाली का जवाब भद्दी गाली से दे सकते हैं लेकिन जरूरी नहीं कि उसे कोई पढ़े…
ब्लॉग की बकवास का जवाब बकवास से क्यों नहीं दे सकते हैं?

हां सो तो है जी बिल्कुल , मगर आलोक जी अब इसका क्या किया जाए कि इतने बडे बडे संपादक भी जब अपनी बकवास ब्लोग जगत पर अपना ब्लोग रहते हुए अपने अखबारों में कर जाते हैं , तो उनका जवाब देने के लिए अब ब्लोग्गर अखबार कहां से निकाले और निकाल कर उस पर आपही को जवाब क्यों देता फ़िरे ..इसलिए यहीं पर हाजिर हैं ,,,,,ठीक है न

आकाश लोक के रास्ते आ रहे ब्लॉग पढ़कर अपनी आंखें खराब क्यों करते हैं
इस लेख में बताया गया है कि
इनके स्तर का आनंद लीजिए, जानिए-पहचानिए और फिर भूल जाइए
संभव है, यहां उनकी सामग्री छपने के बाद वे अपने ब्लॉग से यह सामग्री गायब ही कर दें

लो कल्लो बात ये क्या खुद ही लिखा और फ़टाक से खुद ही इंप्लीमेंटेशन भी कर डाला , कमाल है प्रभु । चलिए अब ज्यादा क्या कहें जो बात कहनी थी वो कह दी ।मैं नहीं जानता कि इस बात से कितने लोग इत्तेफ़ाक रखते होंगे और कितने लोग मेरे जैसा ही सोचते होंगे या ऐसा ही अनुभव किया होगा , बस इसलिए लिख दिया है ...बांकी तो ब्लोग्गर्स खुद तय कर देंगे । हां चलते चलते एक बात और मैंने कहीं भी प्रिंट मीडिया उससे जुडे पत्रकारों , विभिन्न समाचार पत्रों द्वारा ब्लोग पोस्ट्स को पढने छापने का विरोध नहीं किया है ..मैं खुद आज भी जाने कितने आलेख लिख और छप रहा हूं । हां , मगर उस मानसिकता का कि हिंदी ब्लोगजगत कूडा कचरा है , उस मानसिकता का ,,,चाहे वो नई दुनिया के संपादक हों या , कोई बलोग्गर खुद हों , उसका विरोध किया है और करता रहूंगा ।


मंगलवार, 2 मार्च 2010

अमां आलोक मेहता जी ...बाशिंदे नई दुनिया के ...मगर सोच वही दकियानूसी . यार इत्ता अपने ब्लोग पर लिखा होता तो ..........




हाल ही में होली में रंग गुलाल की गोली बम बारूद सभी बरसाने में लगे हुए थे । ऐसा लग रहा था कि जैसे हर किसीको ..हर किसी को बधाई देनी है ..सभी दे भी रहे थे ..मुझे तो लग रहा था कि पोस्टें हुलस हुलस के एक दूसरे से गलेमिल रही हैं और कह रही हैं ....अजी हमें पता है ..तुम्हें पता है ..माना कि सभी ब्लोग्गर्स को पता है ..कि ये आभासीदुनिया है ....मगर होली को थोडी पता है ...ये सब तो बस होलियाते जाओ ...। मगर अचानक ही उस दिन
यहां पर पढने को मिला कि नई दुनिया के संपादक श्रीआलोकमेहता जी हिंदी ब्लोग्गिंग को लेकर अपने उद्गगार व्यक्त किएहैं हालांकि इसमें उन्होंने वो कला भी दिखाई कि होली के बहाने कई अपने मन की बात को कह जाते हैं और साथसाथ कह देते हैं कि बुरा न मानो होली है । जैसे कि आप किसी को भर भर के गलियाईये और साथ साथ में ये कहतेजाईये कि बुरा न मानो होली है ...तो चाहे अगली होली से पहले ..हो सके तो दिवाली तक आपको ही फ़ूंक डालने कामन बना चुका हो मगर ..बुरा तो नहीं मानेगा । सो हम कैसे मानते ..बावजूद इसके कि उन्होंने ये सुंदर विचार रखेहिंदी ब्लोग्गिंग के बारे में ...साभार पाबला जी की इस पोस्ट से

ब्लॉग दुर्बुद्धि जमात का कूड़ा-कचरा है...
हरेक ने ब्लॉग की अपनी दुकान खोल रखी है...
ब्लॉग में कोई कितनी ही भद्दी-गंदी बकवास-सी गालियां उलच दे, कोई सरकार, कोई मालिक, कोई पुलिस या सेनातक कुछ नहीं बिगाड़ सकती...
ब्लॉग पर लिखने वाला नाली साफ करने वाली स्टाइल में बदबूदार सामग्री दुनिया-जहां में फैला दे, कोई बाल बांकानहीं कर सकता...
ब्लॉग प्रभुओं का एक शब्द, अमेरिकी, चीनी राष्ट्रपति या ब्रिटिश प्रधानमंत्री तक, नहीं कटवा सकता है...खासकरहिंदी ब्लॉग पर उनका बस ही नहीं चल सकता...
ऋषि-मुनियों की परंपरा में हिंदी के ब्लॉग बाबाओं को मुदित, क्रोधित, आनंदित होने का अधिकार सुरक्षित...
वे कुपित होकर ब्लॉग में बड़े से बड़ा शाप दे सकते हैं...
महाभारत के चरित्रों की तरह कोई भी झूठ फैला सकते हैं...
अपना ब्लॉग बना भद्दी गाली का जवाब भद्दी गाली से दे सकते हैं लेकिन जरूरी नहीं कि उसे कोई पढ़े…
ब्लॉग की बकवास का जवाब बकवास से क्यों नहीं दे सकते हैं?
आकाश लोक के रास्ते आ रहे ब्लॉग पढ़कर अपनी आंखें खराब क्यों करते हैं

इस लेख में बताया गया है कि
इनके स्तर का आनंद लीजिए, जानिए-पहचानिए और फिर भूल जाइए
संभव है, यहां उनकी सामग्री छपने के बाद वे अपने ब्लॉग से यह सामग्री गायब ही कर दें

बताईये भला आप में से कितने ब्लोग्गर्स हैं जिन्हें ये दिव्य ज्ञान हुआ है अब तक हिंदी ब्लोग्गिंग के बारे में औरदेखिए हमारी नई दुनिया के इन महान कलम के सिपाही को कि इन्होंने ..इतनी जल्दी ..जल्दी इसलिए कि बाद मेंपता चला कि मेहता जी हिंदी ब्लोग्गिंग में भी अपना आलोक फ़ैला रहे थे ..मगर जैसा कि अक्सर होता है ..हमआप जैसे बेहद तुच्छ ब्लोग्गर्स ..इन जैसे स्टार ब्लोग्गर्स को दाल तो दाल मुर्गी का भाव भी नहीं देते ...दें भी कैसेयदि पहले ही पता हो कि पट्ठा एक दिन ..इसकी खुन्नस अपने अखबार के माध्यम से निकाल लेगा और पूरीदुनिया को बता देगा कि देखो जी हिंदी ब्लोग्गिंग ये है ....और फ़िर सब मानेंगे कैसे नहीं ...अरे हद है यार ...कौन साकोई सर्टिफ़िकेट दिखाना है इसके लिए संपादक महोदय को तभी तो ..जाने कौन दुनिया से दो नाम निकाला औरअपने मन का सब चेप मारा ....करते भी क्या ऐसा मौका भी कौन सा बार बार आता है जिंदगी में ....और साल में भी तो ये कम्बख्त होली एक ही बार आती है ...यदि दो चार बार और आती तो ...फ़िर तो ब्लोग्गिंग के साथ साथ सभीब्लोग्गर्स पर भी हाथ साफ़ कर लेते मजे में ...।

अब उनसे हम वो वाकये कैसे बांटें कि हमने भी जब जिंदगी में कुछ कर गुजरने की सोची थी और पत्रकारिता कीडिग्री लेने के बाद जब चप्पलें चटका रहे थे ( देखिए जी चप्पलें चटकाना उस समय पत्रकारिता का मौलिक संघर्षटाईप का होता था ) तो उसी दौरान हमें एक बडे ही अजीज से वरिष्ठ मित्र का साथ मिला ..उन्होंने कहा झाजी आपलिखते ही हो कभी छपा भी करो न ..हमने कहा कि छपें कैसे अब इस जनम में तो बाबूजी की प्रिंटिंग प्रेस लगने सेरही ..उन्होंने तपाक से .कहा अरे आप हमें दे देना हम कब काम आएंगे । हमने भी ऐसा ही किया ...थोडे से थोडेज्यादा दिनों तक इंतजार किया ..फ़िर मन को मना लिया सोचा ...लगता है कि उन भाई की भी कुछ खास नहीं चलीअपनी तो खैर क्या चलती .....मगर एक दिन अचानक उस छोटे से आलेख को छपा हुआ देखा ..बडा मन प्रसन्नहुआ .....बस प्रसन्नता में थोडी सी कमी इसलिए हुई कि ..भाई साहब ने कुछ ज्यादा चलाते हुए ..उस आलेख कोअपने नाम से छपवा दिया या लिया था ....आखिर इतने बडे बैनर राष्ट्रीय सहारा में हम कैसे छपते ....बाद में सुनाकि बहुत तरक्की की उन्होंने .....उन्हें भी देर सवेर कोई पुरस्कार तो मिल ही जाएगा ..और फ़िर हिंदी ब्लोग्गर्स कोगरियाने के लिए ..कौन सा उनके पुरस्कार पर कोई सेंध लगने वाली है ???

मेरे पल्ले एक बात और नहीं पडी कि .आखिर आलोक जी को हिंदी ब्लोग्गिंग में वो सब नहीं दिखा जो आजकलअमर उजाला , दैनिक जागरण , जनसत्ता , हरिभूमि , और अन्य अखबारों को दिखता है .....दूसरी बात ये लगी कियदि उन्हें हिंदी ब्लोग्गिंग के बारे में इतनी सच्ची सच्ची जानकारी और अनुभव प्राप्त हो गए थे ...हालांकि मुझे अभीभी उस वटवृक्ष की तलाश है ..जिसके नीचे बैठ कर उन्हें इस दिव्य ज्ञान की प्राप्ति हुई ...तो फ़िर पूरे दमखम के साथउन्हें ये बात अपने उस ब्लोग पर कहनी चाहिए थी । अजी कहते क्या खाक ..सुना कि चौबीस घंटे के अंदर हीअपना बोरिया बिस्तर समेट कर निकल लिए भाई नई दुनिया में ।

मानता हूं कि बेशक दिल्ली में दैनिक जागरण , हिंदुस्तान , अमर उजाला , नवभारत टाईम्स के पाठकों के बीचउन्हें हम जैसे कुछ ऐसे पाठक तो मिल ही गए होंगे कि वे बता सकें कि देखो जी नई दुनिया को इत्ते ढेर सारे पाठकतो मिल ही गए हैं कि ......और किसी को न सही हिंदी ब्लोग्गिंग को तो गलिया ही सकते हैं । मगर बेचारे गलियातेगलियाते भी ..यदि ये बताने का कष्ट कर जाते कि आखिर वो कौन सी बात थी जिसने उन्हें होली के दिन ..होलिकादहन पर ज्यादा कंस्ट्रेट करा दिया ।

आज तो बस इतना ही अभी तो कुछ दिनों तक के लिए अच्छा काम मिल गया है ..कल सोचते हैं जरा अपने निरीहकलाकर बेचारे बेसहारा ..........मकबूल फ़िदा हुसैन जी .. ... ..

पिक्चर अभी बांकी है मेरे दोस्त
................
Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...