लिजीये जी देखते देखते दो साल पूरे कर लिये इस ब्लोग्गिंग की दुनिया में। कहने वाले कहते हैं कि आभासी दुनिया है। कैसे मान लूं ..जब भी कोई खुशी गम हो तो सबसे पहले से सबसे बाद तक तो आप ही रहते हैं साथ। देखता हूं कि कोई बीमार पडता है..या किसी के यहां कोई उत्सव का अवसर आता है तो मन में मेरे भी स्पंदन तो होता ही है।
जब ये सफ़र शुरू हुआ था तो वो एक अकस्मात घटना थी । लिखते पढते और छपते हुए भी काफ़ी समय हो चला था मगर ब्लोग या कहें कि चिट्ठा से तो परिचय दूर ..उतना सुना भी नहीं था । क्या कैसे हुआ आप मेरी दो साल पहले लिखी इस पोस्ट से खुद ही अंदाजा लगा लिजीये।
मेरी दो साल पहले लिखी और ब्लोग के लिये लिखी पहली पोस्ट
यूं तो ब्लोग के बारे में काफी पहले रेडियो पर कुछ कुछ सुना था मगर पिछले दिनों कादम्बिनी के ताज़ा अंक में पूरी जानकारी मिली । अब जब कि ये पता चल गया है कि इसमे मुझे बार बार पेन चलाने कि जरूरत नहीं पड़ेगी तो समझ गया कि यही है वह जगह जिसके लिए मैं पिछले दिनों मन ही मन सोच रह था।सुना है कि इसका नाम है चिटठा , मगर किसी ने ये नहीं बतया कि कैसा चिटठा ,फिर सोचा कि जाहिर सी बात है कि चिटठा पका हुआ ही तो लिखना होगा वरना कच्चा चिटठा तो खबर बन जायेगी और एक्सक्लूसिव न्यूज़ के रुप में किसी खबरिया चैनल पर पहुंच जायेगी और ये ब्लॉगर तो रिपोर्टर बन जाएगा। या फिर शायद ऐसा होता हो कि आप कुछ भी अपने झोली से निकालो ,उछालो ,घुमा लो, फिरा लो और उदेल दो ब्लोग कि दुनिया में बाकी भाई बंधू खुद ही उसे घिस घिस कर पका देंगे । भाई, हर कोई कुछ ना कुछ कहीं ना कहीं पका ही तो रहा है । आप सोच रहे होंगे कि आख़िर मैं चाहता क्या हूँ। कुछ नहीं । बस आपको इतना बताना चाहता हूँ कि मैं भी आ गया हूँ आपके बीच अब तैयार रहे , मैं कभी भी कुछ भी , आपको परोस दूंगा पकने के लिए या पकने के लिए ये तो आप ही तय करना हाँ फिहाल इतना जरूर कहूँगा कि मेरे साथ आप गंभीर भी होंगे और खुश भी, कभी परेशान भी होंगे और हैरान भी मगर भी मैं तो लिखता रहूंगा कभी भी कुछ भी। लिखूंगा क्या सब कुछ कहानी , कविता , लेख , चिट्ठी , और ढेर सी वो बातें जो किसी को भाषण लगती हैं तो किसी को फालतू बात।चलिए आज इतना ही
अब जबकि दो साल बीत गये हैं तो निश्चित तौर पर बहुत से खट्टे मीठे अनुभवों के बावजूद अब ये मेरी दिनचर्या का एक अनिवार्य अंग बन चुकी है । और मेरा परिवार बढता ही जा रहा है। कुछ तो इतनी करीब आ चुके हैं कि यदि एक दो दिन में उनसे सीधे सीधे संवाद न स्थापित हो तो कुछ अधूरा सा लगता है। कुछ दिलचस्प बातें भी रही इस दौरान जो मैं आपसे बांटना चाहूंगा । जब ब्लोग्गिंग शुरू की तो कुछ लोगों ने बताया या कहूं कि चेताया कि आप सरकारी सेवा में हो न तो इसलिये अपने सही नाम और पहचान से न लिखें। हमने भी आदेश माना और झोलटनमा जी ..हां गांव में सुना हुआ एक नाम झोलटन ..या झोलटनमा....के नाम से लिखने लगे..मेरा एक अन्य ब्लोग अभी भी उसी यू आर एल से दर्ज़ है ।थोडे दिन तक अपना ये बूथा भी छुपा के रखा गया। मगर अजी हम छुपने और छुपाने में कब तक यकीन रखते ।सो जारी हो गये धडाधड।
फ़िर तो ब्लोग दर ब्लोग सिलसिला बढता गया। अभी कुछ दिनों पहले ही किसी अजीज ने पूछा ..अजी कितने ब्लोग पर लिखेंगे ..आप? मैंने कहा आप तो बस देखते जाईये और पढते जाईये। जिस दिन खराब लिखने लगें कहियेगा...उस दिन सिर्फ़ पढना ..जी सिर्फ़ पढना शुरू कर देंगे। चलिये आज के लिये इतना ही। जब इतना कह ही दिया है तो एक वादा जो बहुत पहले किया था,..और न जाने क्यों अब तक नहीं पूरा कर पाया हूं....अरे आपसे नहीं अपने आप से जी....मेरा पहला औन लाईन उपन्यास..मंदाकिनी ...जिसे जल्दी ही शुरू करूंगा ..उम्मीद है कि मेरे हर प्रयास की तरह मेरी ये कोशिश भी आपका स्नेह जरूर बटोरेगी।
तो दिवाली इस बार मेरे लिये दोहरी खुशी लेकर आई है.....आप सबको एक बार फ़िर से दीपावली की बहुत बहुत बधाई और शुभकामना।