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सोमवार, 9 नवंबर 2009

हमारे और्कुटिया दोस्तों की संख्या तीन सौ के पार हुई ...


जब से इस तथाकथित आभासी दुनिया से जुडा ...इसके बारे में बहुत सी अलग अलग बातें सुनी। कई तरह की मसलन यहां के रिशते नाते, दोस्ती दुश्मनी ...सब कुछ आभासी ही है । आभासी ..यानि जिसका आभास भर होता है ..मगर आभास तो मुझे अपनी मां के आशिर्वाद का भी होता है .जो अब मुझे छोड के जा चुकी हैं ॥ और यदि यही आभास है ....तो फ़िर तो ये अहसास कम से कम उस एहसास तो लाख गुना ..सुखद है ..जो एहसास मुझे अपने पुश्तैनी मकान में जाने के बाद होता है । जब देखता हूं कि ..किस तरह मेरे पिताजी को उनके अपने भाईयों ने उनका सर्वस्व लूट कर ..किनारे लगा दिया । खैर ..ये अलग मसला है ..तो मैं कह रह था कि ..इसी आभासी सफ़र के दौरान मुझे मेरे एक युवा ..रिशतेदार ने बताया कि ..और्कुट नामकी एक सोशल नेटवर्किंग साईट होती है ॥


मैं सुन कर भी बहुत ही उदासीन रहा , कारण स्पष्ट और साफ़ था ..अपने संबंधो रिश्तेदारियों में इतना अनसोशल ..मशहूर था कि ..लगा कि यहां अपने मतलब का कुछ भी नहीं है । मेरे उस युवा मित्र/रिश्तेदार ने एक नया पत्ता खोला .....आप जानते हैं ..इस सोशल साईटस के जरिये लोगों को पता नहीं कितने पुराने ..बिछडे हुए मित्र , दोस्त, और सहेलियां मिल गयी। यहां भी हमारे लिये दाल नहीं गलने वाली जैसी पोजीशन थी ..जो सहेली हमें पढते समय नहीं मिली ..वो अब क्या खाक मिलती ..और जो सहेली हमें नौकरी के साथ मिली ..वो नौकरी के साथ साथ पहले से ही हमारे घर में भी ..सहकर्मी के साथ साथ ..घरकर्मी बन चुकी थीं । अलबत्ता ..दोस्त ढूंढने मिलने वाली बात ने थोडा रोमांचित सा जरूर कर दिया । हमने उसीसे कहा ..फ़िर क्या किया जाए । उसने सलाह दी ....और्कुट पर आपकी प्रोफ़ाईल बना दें । हम डर गये ..दरअसल उन दिनों ....और्कुट पर लोगों के प्रोफ़ाईल से छेडछाड की बहुत सी घटनाएं सुनने पढने को मिल रही थीं ...मगर फ़िर खुद ही सोचा ,...अमां हमें काहे का डर जी ...हम कौन सा खान या बच्चन हैं ..कि लोग बाग हमारे नाम और काम का फ़ायदा उठा लेंगे ..। ले दे कि एक ब्लागर ठहरे ...सो जो भी सींग से सींग लडाएगा ...उहो तो ब्लागारे होगा । तो बन गया आनन फ़ानन में और्कुट प्रोफ़ाईल ..। हमने बिछडे दोस्त का सुना था ..सो पहले उसी मुहिम पर काम किया गया । मैट्रिक में जो साथी छूटा था ..पहले उसकी तलाश की कोशिश हुई ....आखिरी बार जहां उसके होने का अनुमान था ..वो सूत्र लगा के ..लगे हाथ पांव मारने ....एक लिंक मिला ..मगर चित्र नदारद ..अब क्या करें ..। उसी मार्गदर्शक ने सुझाया ...हमने उसके प्रोफ़ाईल को टटोला ....युरेका ...वही स्कूल जिससे हम पढे थे .....आगे मित्रों की सूची देखी ...उसके छोटे भाई का नाम भी मिल गया ....मगर चूंकि तस्वीर नहीं थी ..सो ..सोचा ये गया कि ..तुक्के में एक संदेश भेजा जाए...और कुछ इंतजार किया जाए...।

थोडे दिन क्या ..बस दिन के बाद ही मैसेज आ गया ...अपना वही बिछडा दोस्त निकला ..पूरे उन्नीस वर्षों के बाद ..बस कुछ ही पलों में ..फ़ोन नम्बर का आदान प्रदान...जो मित्र मेरे संपर्क में थे ....वे मेरे माध्यम से उसके संपर्क में ...और उसके दायरे में जो थे ..वे सब मेरी पहुंच में आ चुके थे ॥ सिर्फ़ चंद घंटों मे ही एक अच्छी खासी मंडली बन गई हमारी ॥..अजी ये तो एक शुरुआत भर थी ...इसके बाद तो जैसे और्कुट महाराज को पता ही चल गया कि हमें कौन कौन ..अपनी दोस्ती में चाहिये....एक के बाद एक ब्लोग्गर ..हमने कहा...अरे इहां भी ...लो जी ...मजा आ गया । इसके बाद उसी परिचित ने ..पता नहीं किस किस सोशल साईट्स पर मुझे जोड दिया ...हालांकि भूले भटके ही उधर जा पाता हूं ॥ मगर इतना तो है कि ..कम से कम मेरे लिये तो ये सोशल साईटस ..बेमानी नहीं हैं ॥आज अचानक ध्यान गया तो देखा कि अपने और्किटिया दोस्तों की संख्या तो तीन सौ के पार चली गयी है ॥ यानि भैया ....वीरेन्द्र सहवाग हो लिये हम तो ......॥ जय हो ...आज तो मन टैण टैनेन कर रहा है इस खुशी में ........आप बताईये आपका कित्ता स्कोर हुआ जी .........?

19 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत बहुत बधाई भाई,

    हमारे तो कब से 500+ अभी तक सभी से बात नही हो पायी है।

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  2. बधाई तो ले ही लो भाई!
    हो सके तो 301वाँ हमको बना लो भाई

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  3. हमारे ओर्कुटीया मित्रों की संख्या तो ८०० के पार जाने वाली है जी :)

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  4. वाह!! भई..लम्बी पारी खेल रहे हो..बहुत बधाई...

    हमारा स्कोर त क्या बतावें..अभी चल ही रहा है गुजारा जैसे तैसे. :)

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  5. बहुत बधाई जी, हमारा तो अभी खाता ही नही खुला.:)

    रामराम.

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  6. उन ३०० में से एक तो हम भी है सो बधाई लीजिये और हमे भी दीजिये !

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  7. बहुत बहुत बधाई हम तो वहाँ जा ही नहीं पाते कभी कभार समय मिलता है। अपली ये संख्या लाखों मे पहुँचे शुभकामनायें

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  8. बधाई हो बधाई
    पता है कितने आर्कुटिया
    कितनो के बन चुके हैं जंवाई,
    कितनो ने अपने जमा पुंजी गंवाई,
    कितनो की भाग गई लुगाई
    कितनो की हो गई है जुदाई
    हम तो आपके आंकड़े को देखकर चिंतित है भाई
    हमारी मुंछे देखलोग भाग जाते है भुत की नाई
    इतने झंझावातों मे फ़िर भी टिके रहे
    महारथी हो -आपको लख-लख बधाई

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  9. झा जी बधाई हो ३०० तक पहुचने की, हम भी बस ९८६ तक पहुचने वाले है, सिर्फ़ ९०० मित्रो की ओर जरुरत है

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  10. नेट के कारण मुझे अपने दो मित्र 16 और 10 वर्षों के बाद मिले। ब्लॉग मंच पर तो जाने कितने जन्मों के बाद मिले। मुझे अभी भी याद है जब अचानक अपने ब्लॉग पर आप को पहला प्रशंसक पाया था।

    बाकी भैया, सतर्क रहना। ऑर्कुट जैसी जगह पर 300 मित्र कुछ खतरनाक सा तो लगता ही है !

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  11. भाई हमारे दुबई में तो ऑरकुट ही बैन है ...........

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  12. इन तीन सौ दोस्तो को अब कुछ श्रेणीयो मे डालीये
    १. रोजाना सँपर्क मे रहने वाले
    २. सप्ताह मे एक बार सम्पर्क वाले
    ३. महीने मे एक सम्पर्क वाले
    ४. कभी कभार भूले भटके सम्पर्क वाले
    ये आभासी दूनिया है झा जी ! ये श्रेणीयाँ आपको आईना दिखायेगी की सच मे कितने दोस्त है !

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  13. बधाई हो ! अपने पास तो पूरे चिठे देकन का भी टेम नाहि है भैया:)

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  14. भैया, हम तो तीन साल पहले ही ब्रायन लारा बनकर अपने पांव खींच लिये थे.. लगा कि 500-600 भी कहीं दोस्त हो सकते हैं.. सो बाद में डिलीट मारना शुरू कर दिया.. अब फिर से 400 के पास भटक रहे हैं.. एक दिन बैठ कर फिर से डिलीट मारना चालू होगा.. आमतौर पर उनको डिलीट मारता हूं जो बस दिखावे के लिये फ़्रेंड रीक्वेस्ट भेज देते हैं.. :)

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मैंने तो जो कहना था कह दिया...और अब बारी आपकी है..जो भी लगे..बिलकुल स्पष्ट कहिये ..मैं आपको भी पढ़ना चाहता हूँ......और अपने लिखे को जानने के लिए आपकी प्रतिक्रियाओं से बेहतर और क्या हो सकता है भला

साथ चलने वाले

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