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शनिवार, 29 दिसंबर 2007

नये साल पर एक और शुभकामना कविता

इश्वर करे इस ,नये साल में,
कुछ ऐसा जो हो हो जाये,
नारी बने विश्व शक्ति,
सब उस पर केन्द्रित हो जाये॥


जो आपका हमारा साथ रहे,
हर सपना जीवित हो जाये,
नर-नारी चलें कदम-कदम,
सब इतने विकसित हो जाएं॥

ना आये कोई आपदा,
ना ही कहीं आशान्ति हो,
प्रकृति रहे शीतल-शांत ,
जन-जीवन में क्रांति हो॥

मानवता हो दृढ, और सबल,
इन्सानियत सहक्ति बन जाये,
कर्म बने कर्तव्य सभी का,
क्षुधा ही तृप्ति बन जाये।


एक बार फिर सभी ब्लॉगर/ चिट्ठाकार दोस्तों को हमारी तरफ से नव वर्ष के शुभ आगमन पर हार्दिक बधाई और शुभकामना।

आपका अपना,

अजय कुमार झा
फोन ९८७१२०५७६७.

2 टिप्‍पणियां:

  1. "मानवता हो दृढ, और सबल,
    इन्सानियत सहक्ति बन जाये,
    कर्म बने कर्तव्य सभी का,
    क्षुधा ही तृप्ति बन जाये।"

    मैं आपकी भावना एवं कामना का अनुमोदन करता हूँ!!

    उत्तर देंहटाएं
  2. shashtree jee,

    bahut bahut dhanyavaad aapke jaise varishth logon ki tippnni hamare liye aashirwad se kam nahin hai.

    उत्तर देंहटाएं

मैंने तो जो कहना था कह दिया...और अब बारी आपकी है..जो भी लगे..बिलकुल स्पष्ट कहिये ..मैं आपको भी पढ़ना चाहता हूँ......और अपने लिखे को जानने के लिए आपकी प्रतिक्रियाओं से बेहतर और क्या हो सकता है भला

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