जब हम सबसे पहली बार राम लीला में अपना रोल पाने पहुंचे तो ...मन ही मन ये तय कर लिया था कि....राम से कम किसी रोल पर तो कोई कंप्रोमाईज़ नहीं करेंगे....एक यही तो वो रल है ...जिसके बहाने हम ..पूरे दस दिन अपने ..होमवर्क से दूर रह सकते थे...दूसरे किसी रोल में ये सेफ़्टी गारंटी नहीं थी.......सो सीधा ही दावा ठोंक दिया.....वैसे भी उन दिनो वैसे ही ठोंका जाता था....तब कौन सा ऐस ऐम ऐस की टेंशन थी....कि हफ़्ते भर इंतज़ार के बाद पता चलता....यही कि हमें भी हमारे दावे के अनुरूप उन्होंने ठोंका...नहीं ..बाहर फ़ेंका.....कारण भी एक दम वाजिब था ......जवाब मिला.....राम का रोल....झपटू चाचा का बेटा....लुटकुनमा करेगा...क्योंकि ..रामलीला में सबके कपडे सिलाने के अलावा......राम लीला के दौरान सबको चाय और समोसे की स्पोंसरशिप भी उसकी तरफ़ से ही थी......हमने भी मन मार के हां में हां मिला दी.....और इस तरह से ही अपने योगदान के हिसाब से सबको रोल मिल गये......हाय रे कैटल क्लास....बताईये जो बात थरूर को अभी पता चली है...हमें तो तभी जता दिया था सबने......मगर ये क्या बात हुई जी...हमारा तो व्यक्तित्व ही राजकुमारों सा है...सो न करना मंजूर है...मगर राजकुमार तो बनेंगे ही.....चलो ठीक है....राम, लक्षमण, और भरत की तो बुकिंग हो चुकी है...बस एक शत्रुघ्न का रोल रह गया है.....आप कर लो...बहुत ही सेफ़ रोल है......हमने भी झट से हामी भर दी.....हमारे डायलोग भी तो बताओ.....और ये भी कि हमारे अपोजिट कौन है..मतलब..नायिका.....अरे कहा न सेफ़ रोल है...शत्रुघ्न ने कब डायलोग बोल दिया जो तुम बोलोगे....और अपोजिट..तुम्हारे हमेशा ही..भरत रहेंगे.....बताओ यार क्या रोल मिला .....मगर राजकुमार तो बन ही गये....और यकीन मानिये....शत्रुघ्न वाला वो रोल आज तक कोई वैसा नहीं कर पाया..
अगली बार तय कर लिया था कि ...इस बार तो कैटल क्लास की हालत...तो फ़ैटल क्लास टाईप हो गयी है.....और फ़िर राजकुमारों वाला दमदार रोल तो कर के देख ही लिया था....कलाकार आदमी कब एक तरह की भूमिका चाहता है.....उसे तो वैरायटी चाहिये....सो हमें भी चाहिये थी....हमने फ़ट से अपनी ये इच्छा ...डायरेक्टर लुट्कुन जी को भी बताई...(.जी सच सुना आपने....इस बार लुट्कुन जी ने समोसे के साथ साथ...रामलीला के बाद पूरी नाटक मंडली को ...सनीमा दिखाने का वादा भी कर लिया था...सो इस टैलेंट से वे फ़टाक से डायरेक्टर बन गये....मुझे तो यकीन है कि यदि वे बौलीवुड में भी अपने इसी टैलेंट का उपयोग करते..तो आज मधुर भंडारकर तो तगडा कमपटीशन मिलता....)..उन्होंने..हमें चारों तरफ़ से जांचा परखा....और कहा...चलो ..फ़ैसला हो गया....या जटायु का रोल कर लो.....या जामवंत का......और ये दोनों रोल के मिलने का एक महान कारण भी हमें बताया गया.....देखो इन दोनों रोल के कौस्ट्यूम काफ़ी अलग हैं......कोई भी पहन रहा है तो उसे खुजली हो रही है....तुम्हारा क्या है...तुम्हें तो वैसे भी खुजली रहती ही है....तो आखिरकार ये तय हो गया कि ..दोनों ही रोल हमने ही करने हैं.....और क्या खूब किया जी....कोई भी आज तक नहीं कर पाया.....
इसके बाद तो हमने तय कर लिया कि जाओ जी हमें तो अपने पुरुष पात्रों ने कोई बहुत बडा ब्रेक नहीं दिलाया सो अबके तो चाहे जो हो जाये......हम कोई ऐतिहासिक..महिला किरदार ही करेंगे...और देखिये.....हमने इतिहास रच दिया....लुटकुनमा जी ने कहा...देखो भैया...तुम अभीये जो एक बार नाक कटा लोगे न.....तो फ़िर जिंदगी भर इसका टेंशन नहीं रहेगा.....और धीरे धीरे तो आपको इसकी आदत ही पड जायेगी....और आगे जाकर आप खूब नाक कटाओगे...चाहे रामलीला करोगे ......या ब्लोग्गिंग....जहां भी नाक घुसेडोगे...कौनो न कौनो...फ़ट से आपकी नाक काट लेगा...कमाल का यादगार रोल रहा ये भी......
चलिये आप लोग मौज करिये...और अपने बच्चों को खूब रामलीला दिखाईये.....
(नोट:- यार अब इसे पढ कर ये मत कहने लगना कि...हमने इन पात्रों का मजाक उडाया है....फ़लाना ढिमकाना...हमने तो अपनी दास्तान सुनाई है ...आप तो बस मुस्कुरा लो जी.....)ई जो उपरका पैरा ..अंडर लाईन हो गया है....हमको नहीं पता...कैसे हो गया है....हट भी नहीं रहा...झेलिये आज ऐसे ही...