ब्लोगजगत में रह्ते हुए आपको साल हुए हों, महीनों हुए हों या जुम्मे जुम्मे आठ दिन, टिप्पणी का महत्व तो जानते ही होंगे। बेशक ये कहने को कहा जाता है कि टिप्पणी ..ज्यादा..या कम ..अच्छी बुरी....आलोचना, प्रशंसा कैसी भी हो ...उससे ब्लोग को ..पोस्ट को और लिखने वाले लेखक ..की काबिलियत या नाकाबिलियत को नहीं आका जा सकता है। मगर इतना तो आम तौर पर होता है कि अच्छे लिखने वालों को सभी पढते भी हैं और टीपते भी हैं । मैंने आमतौर पर ...इसलिये कहा है..क्योंकि अभी ही कोई कह देता कि सबसे ज्यादा टीप तो विवाद वाले पोस्टों को मिलती है। मगर ऐसा अक्सर नहीं होता। खैर, मेरा यहां ये सब कहने लिखने का कोई मकसद नहीं है।
दरअसल पिछले दिनों जब सर्च इंजनों में न जाने क्यों ..जब अपने ही नाम को तलाश किया तो एक अजब सी बात पता चली....या कहूं कि दो बातें पता चली। उनमें से पहली तो ये कि ....मुझे परिणामों में उन ब्लोग्स का पता भी बताया गया जहां मैं टीप के आया था । यानि कि टिप्पणी देने का मतलब है कि आपका उस ब्लोग से जुड जाना...। जिस तरह से आप किसी ब्लोग पर टीप कर उससे जुड जाते हैं...उसी तरह कोई भी आपके ब्लोग को टीप के आपके ब्लोग से जुड जाता है। तो इस सूरत में..जब भी कोई खोज की जाती है आप दो परिणामों में दिखाई देंगे। है न कमाल का औजार ये टिप्पणी।
अब बात दूसरे औजार की । मैंने खुद सहित बहुत से ब्लोग्गर्स को देखा है ....जो पोस्ट को लिखते और प्रकाशित करते समय एक बात अक्सर ही भूल जाते हैं। अपनी पोस्ट को किसी भी टैग के अंतर्गत रखना। जबकि टैग ही वो सूत्र है ..जो सर्च में सबसे पहले काम करता है। आपका लिखी रचना ..जिस भी विधा में हो , जिस भी विषय पर हो, जिस भी शैली में हो, और आप उसे चाहे जिस वर्ग में रखना चाहते हों...देखना चाहते हों। उस पोस्ट के अनुरूप ...टैगों का प्रयोग जरूर करें। और यथासंभव टैग ऐसे चुनें..जो सबसे ज्यादा खोज के दौरान ढूंढे जाते हों। अरे इसका भी सरल उपाय है। आपको खुद बखुद ये पता चल जाएगा कि ये टैग कौन से हैं।आखिर आप भी तो एक पाठक हैं.......क्यूं हैं न..........?