पिछले कुछ दिनों से कुछ बहुत सारे घटनाएं बेशक अलग अलग हो रही हैं मगर लगभग एक ही चरित्र और परिणाम के कारण उन्होने बहुत ज्यादा व्यथित और क्रोधित तो किया ही है साथ ही बहुत सी बातें सोचने पर मजबूर कर दिया है।
हाल ही में गोहाटी में एक प्रदर्शन के दौरान एक आदिवासी महिला को कुछ लोगों ने सरेआम नग्न करके पीटा और दौड़ाया।
इस देश कि प्रथम महिला आ ई पी एस किरण बेदी ने आखिरकार प्रशाशन की उपेक्षा से क्शुब्द हो कर अपने ईस्तेफे की पेशकश कर दी।
एक महिला लेखिका अपनी जान माल की सुरक्षा की खातिर दर दर भटक रही है, और उसको लेकर राजनीती तो की जा रही है मगर उसके लिए कोई आगे नहीं आ रहा।
अब ज़रा इन बातों पर भी गौर फरमाइये,
इस देश में अभी राष्ट्रपति एक महिला ही है।
इस देश को चलाने वाली (चाहे परोक्ष रुप में ही सही ) भी एक महिला ही है।
इस देश के बहुत से राज्यों में मायावती, शेइला दिक्सित, विज्यराजे सिंधिया, जयललिता ,आदि जैसी कद्दावर
राज्नेत्रियाँ हैं।
तो क्या समझा जाये इससे? कहाँ हैं महिला अधिकारों की समानता का दावा करने वाले?
कहाँ हैं वो लोग जो कहते नहीं थकते कि नहीं अब वो बात नहीं रही आज कि महिला ताक़तवर है आगे है।
सच तो ये है कि अब भी बहुत कुछ या कहूँ लगभग सब कुछ वैसा का वैसा ही है।
आपको क्या लगता है ?
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गुरुवार, 29 नवंबर 2007
कहाँ हैं महिला शाशाक्तिक्करण वाले
पिछले कुछ दिनों से कुछ बहुत सारे घटनाएं बेशक अलग अलग हो रही हैं मगर लगभग एक ही चरित्र और परिणाम के कारण उन्होने बहुत ज्यादा व्यथित और क्रोधित तो किया ही है साथ ही बहुत सी बातें सोचने पर मजबूर कर दिया है।
हाल ही में गोहाटी में एक प्रदर्शन के दौरान एक आदिवासी महिला को कुछ लोगों ने सरेआम नग्न करके पीटा और दौड़ाया।
इस देश कि प्रथम महिला आ ई पी एस किरण बेदी ने आखिरकार प्रशाशन की उपेक्षा से क्शुब्द हो कर अपने ईस्तेफे की पेशकश कर दी।
एक महिला लेखिका अपनी जान माल की सुरक्षा की खातिर दर दर भटक रही है, और उसको लेकर राजनीती तो की जा रही है मगर उसके लिए कोई आगे नहीं आ रहा।
अब ज़रा इन बातों पर भी गौर फरमाइये,
इस देश में अभी राष्ट्रपति एक महिला ही है।
इस देश को चलाने वाली (चाहे परोक्ष रुप में ही सही ) भी एक महिला ही है।
इस देश के बहुत से राज्यों में मायावती, शेइला दिक्सित, विज्यराजे सिंधिया, जयललिता ,आदि जैसी कद्दावर
राज्नेत्रियाँ हैं।
तो क्या समझा जाये इससे? कहाँ हैं महिला अधिकारों की समानता का दावा करने वाले?
कहाँ हैं वो लोग जो कहते नहीं थकते कि नहीं अब वो बात नहीं रही आज कि महिला ताक़तवर है आगे है।
सच तो ये है कि अब भी बहुत कुछ या कहूँ लगभग सब कुछ वैसा का वैसा ही है।
आपको क्या लगता है ?
हाल ही में गोहाटी में एक प्रदर्शन के दौरान एक आदिवासी महिला को कुछ लोगों ने सरेआम नग्न करके पीटा और दौड़ाया।
इस देश कि प्रथम महिला आ ई पी एस किरण बेदी ने आखिरकार प्रशाशन की उपेक्षा से क्शुब्द हो कर अपने ईस्तेफे की पेशकश कर दी।
एक महिला लेखिका अपनी जान माल की सुरक्षा की खातिर दर दर भटक रही है, और उसको लेकर राजनीती तो की जा रही है मगर उसके लिए कोई आगे नहीं आ रहा।
अब ज़रा इन बातों पर भी गौर फरमाइये,
इस देश में अभी राष्ट्रपति एक महिला ही है।
इस देश को चलाने वाली (चाहे परोक्ष रुप में ही सही ) भी एक महिला ही है।
इस देश के बहुत से राज्यों में मायावती, शेइला दिक्सित, विज्यराजे सिंधिया, जयललिता ,आदि जैसी कद्दावर
राज्नेत्रियाँ हैं।
तो क्या समझा जाये इससे? कहाँ हैं महिला अधिकारों की समानता का दावा करने वाले?
कहाँ हैं वो लोग जो कहते नहीं थकते कि नहीं अब वो बात नहीं रही आज कि महिला ताक़तवर है आगे है।
सच तो ये है कि अब भी बहुत कुछ या कहूँ लगभग सब कुछ वैसा का वैसा ही है।
आपको क्या लगता है ?
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