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कल इस ब्लोगजगत में प्रेत की तरह विचरते हुए (जी हां अब तो ये हाल हो गया है कि ब्लोग्गिंग के आसपास न भी हों तो आत्मा ..प्रेतात्मा बनके यहीं मंडराती रहती हैं ) और ऐसे में ही घूमते घूमते बहुत से ब्लोग्गर्स मित्रों को देखा कि वे अपने ही ब्लोग से बतिया रहे थे ...बातचीत दिलचस्प थी सो सोचा कि आपको भी बताता चलूं ।

पहला दृश्य :- और भई कैसे हो ...अब तो बुढा से गए हो ....यार उम्र से न सही पोस्ट के हिसाब से तो इत्ते बरस के हो ही गए हो , और फ़िर हमने बार बार एलान किया कि मियां जी की उम्र इत्ती हो गई है पोस्ट के हिसाब से ....और बेटा जिन सबने बधाई दी है वे सब गवाह हैं इसके ...बेटा और अब तो इतना दमादम हम पोस्ट पटक रहे हैं कि बहुत जल्दी ही बुजुर्गी पेंशन मिलने लगेगी ...और तुम लाठी टेक के कहते फ़िरना हजारी ब्लोग आ गये हैं सावधान ।

दूसरा दृश्य :- ब्लोग ही ब्लोग्गर को धमका रहा था ....क्यों बे काहे को बना दिया हमको ...फ़्री फ़ंड का जगह मिला तो ले के डाल दिया एक प्लौट ...अबे जब लिखना विखना था नहीं तो काहे एक ठो जगह घेर के रख दिए हो ..और उहां लोग ई सोच सोच के फ़ूले जा रहे हैं ...कि देखो हिंदी ब्लोग्गिंग में ब्लोग्स की संख्या फ़लाना हो ढिमकाना हो गई ....एक तुम हो ...महीनों तक यहां झांकने नहीं आते ....कभी एक आध बार कुछ टपाक से लिख मारा ...तो फ़िर टीपोगे तो क्या खाक ..और तुम्हारी इसी आदत के कारण ...कम्बखत हमारा पूरा कैरियर ही चौपट हुआ जा रहा है । अबे कुछ देखो ..कुछ सीखो ...देखो भाई लोग कित्ता सीरियसली लिए हुए हैं ऐसे ...। और हो भी क्यों न एक जमाना हुआ करता था जब लोग बाग मुर्गे लडाते थे ..अब हमारी बदौलत ...यहां इश्वर तक को आपस में लडा लडा कर थका दे रहे हैं । अबे बिना दाम के इत्ता इत्ता काम हो रहा है यहां एक तुम हो जाने कैसे ब्लोग्गर हो यार ???

तीसरा दृश्य :- यार अब तुम मुझसे क्यों नाराज़ होते हो ...कित्ता तो लिखता हूं ..दिन रात भी नहीं देखता ...जब देखो लिख मारता हूं ....फ़िर भी कहीं तुम्हारी चर्चा वर्चा नहीं होती ...अब करूं क्या तुम्ही बताओ । न अपनी रेपुटेशन बन रही है न तुम्हारी ....अबे इत्ता भी क्या भडकना यार ..तुझे ये किसने कह दिया कि चर्चा में पोस्ट घुसने से रेपुटेशन बन जाती है ..अब ज्यादा मुंह न खुलवा मेरा ...सबको पता है कि चर्चा की खुद की .......छोड यार ये अपन इस बात पर क्यों लडें ...आ एक बढिया सी पोस्ट लिखता हूं ...अबकी तो चर्चा में तेरा आना पक्का है ॥

चौथा दृश्य :- हें हें हें ....क्या सोच रहे हो प्यारे ...यही न कि आज भी सारे समाचार पत्रों में तुम ही तुम हो ...बेटा ये सबके बस की बात नहीं है ..रोज रोज अखबार में छपना ....आखिर इत्ते सारे ब्लोग्स के बीच तू भी कुछ है बेटा ....लो अब इसमें क्या मुंह बनाना ...कि तुम्हें यहां ब्लोग जगत में कोई पढता नहीं टीपता नहीं ....टौप लिस्ट , हौट लिस्ट ..में भी नहीं होते ...अबे मगर छपास में तो एक क्लास है यार.......... जो सबमें नहीं है यहां ..है भी तो वो दिखता कहां है ..और जो दिखता है वो छ्पता है ...ओह आओ जल्दी से एक लिख मारूं ..कल भी तो छपना है ।

पांचवां दृश्य :- उफ़्फ़ हे भगवान ..अमां तुमने समझ क्या रखा है मुझे ...मैं कोई गुल्लक हूं ..कि जब जी में आता है पचास पैसे, एक रुपए दो रुपए पांच के सिक्के से साथ नोट मरोड के घुसेड देते हो । अबे कविता , कहानी , व्यंग्य , लेख , आलेख , तुक्का तिकडम , लस्टम पस्टम ,ढिशुम पटक , सब कुछ एक एक करके भी बिना कुछ भी तय किए हुए ..बिना कोई पैमाना बनाए ...सब कुछ मेरे अंदर घुसेडे चले जा रहे हो । अबे तुम्हारे अंदर इत्ता लिखने का कीडा है तो क्यों नहीं मेरे कुछ और भी भाई बंधु तैयार कर लेते बे । जानते हो तब मेरा क्या हाल होता है जब कोई कविता पढने आता है और उसे तुम्हारे लेख पढने पडते हैं ..पता नहीं क्या क्या बोल जाता है ....मैं उस झटके से उबर भी नहीं पाता कि ..अगले दिन कोई लेख प्रेमी ...आता है कविता देख कर फ़िर वही ....ओह मैं और कुछ नहीं कह सकता ..


छ्ठा दृश्य :- ओ भाई बस ..बस ..बस ...माफ़ करो यार ..तुम्हें देख तो ऐसा लग रहा जैसे किसी झुग्गी वाले को इंडिया गेट वाला गो मैदान मिल गया है कि भैय्या डाल लो अपनी झुग्गी जहां भी मन करे और जित्ती भी मन करे उत्ती । एक तो तुम्हारी खोपडी का ही नहीं पता चलता ...सोते जागते और उसके बीच के समय में भी जाने क्या क्या सोचते रहते हो ...कुछ नया सूझता नहीं कि बस हो गया एक नया ब्लोग तैयार ...अबे तुम्हारा तो जो हाल है न देखना एक दिन ...वो मल्टीप्लेक्स का बडा पर्दा लगवाना पडेगा ..तुम्हें अपना डैशबोर्ड देखने के लिए । अब कोई डैड एंड है कि नहीं कि तुम्हारे ब्लोग्स का ..एक दर्जन ...दो दर्जन ..अब तो भाई ..उसे भी टापने वाले हो ॥जिस दिन हम सारे मिल कर पिल पडे न उस दिन झेलना बेटा ।


सावधान ब्लोग रिपोर्टर घूम रहा है ..अभी तो बहुते बातचीत रिकार्ड करनी है जी ...देखिए आगे का का होता है ..यदि आप भी कौनो टाईप से फ़ुसफ़ुसा रहे हैं तो ..ध्यान रहे कल को ये बातचीत ..रिपोर्टर सुन सकता है .......

31 टिप्पणियाँ:

हा हा हा जोरदार झा जी
बधाई।

19 मार्च 2010 12:31 पूर्वाह्न  

वाह्! बहुत ही मजेदार ब्लाग-ब्लागर संवाद रचा आपने... शायद अन्तिम पैराग्राफ में आपके वाला ब्लाग आपसे मुखातिब था कि झा जी नें डेढ दर्जन से भी ऊपर उसके भाईबन्द पैदा कर रखे हैं :-)

19 मार्च 2010 12:50 पूर्वाह्न  

मजेदार जी बोत बोत नाईस

19 मार्च 2010 1:06 पूर्वाह्न  

हा हा!! संभलना पड़ेगा..यह ब्लॉग रिपोर्टर तो अंदर की बात छाप रहा है.

19 मार्च 2010 1:26 पूर्वाह्न  

19 मार्च 2010 3:21 पूर्वाह्न  

Baaz ki drishti se har gatividhi par aapki gahri nazar rahti hai bhaia, maan gaye...

19 मार्च 2010 6:08 पूर्वाह्न  

बतकही ...ब्लॉग रिपोर्टर ....बढियां है

19 मार्च 2010 6:50 पूर्वाह्न  

nice........................................................................................................................................................................................................................................................................................................................................................................................................................................

19 मार्च 2010 7:33 पूर्वाह्न  

रिपोर्ट के लिये आभार.
मजेदार

19 मार्च 2010 7:43 पूर्वाह्न  

बहुत अच्छा लगा।

19 मार्च 2010 8:20 पूर्वाह्न  

धा हा हा बहुत बढिया। शुभकामनायें

19 मार्च 2010 8:27 पूर्वाह्न  

अजय जी, आपका ब्‍लाग कदम दर कदम खुलता है, पढ़ने का मजा ही किरकिरा हो जाता है। कुछ करिए। आपकी अभिव्‍यक्ति काबिले तारीफ है। बधाई।

19 मार्च 2010 8:35 पूर्वाह्न  

झा जी,
वाह बहुत ही जोरदार हा हा हा...

19 मार्च 2010 8:53 पूर्वाह्न  

अजय जी,

डॉ. श्रीमती गुप्ता सही कह रही हैं, आपका ब्लोग खुलने में बहुत अधिक समय लेता है। ऐसा शायद फॉलोवर्स वाला विजेट के बड़ा होने के कारण हो सकता है। कृपया इस विजेट को साइडबार में लगायें ताकि यह छोटा हो जाये और ब्लोग जल्दी खुले।

19 मार्च 2010 9:31 पूर्वाह्न  

wah waah waaah

rochak post.......

19 मार्च 2010 9:59 पूर्वाह्न  

अब तो बचके रहना पडेगा इन ब्लाग रिपोर्टर जी से.:)

रामराम.

19 मार्च 2010 10:34 पूर्वाह्न  

बहुत गठीला लिखते हैं
मज़ा आ गया जी

19 मार्च 2010 10:49 पूर्वाह्न  

हा हा हा मज़ा आ गया।ये ब्लाग रिपोर्टर अपना मूच्छू ललित लगता है।वैसे वो है भी बहुत पुराना रिपोर्टर्।मज़ा आ गया झा साब्।

19 मार्च 2010 11:11 पूर्वाह्न  

आदरणीय डा. अजित गुप्ता जी और अवधिया जी ..शुक्रिया मैं कोशिश करता हूं कि ठीक करूं इसे आपने जैसा कहा है करके देखता हूं ..आभार

19 मार्च 2010 6:08 अपराह्न  

:)

19 मार्च 2010 6:26 अपराह्न  

:)
:)

19 मार्च 2010 7:22 अपराह्न  

मतलब यह कि ब्लॉगिंग का वायरस अब इतना कहर ढा रहा है कि ब्लॉगिंग के अलावा कुछ नही दिखाई दे रहा ..धन्य हो ।

19 मार्च 2010 10:41 अपराह्न  

आप तो बड़े जासूस हैं जी....अब तो डर के रहना पड़ेगा जी.......
लड्डू बोलता है जी.....

19 मार्च 2010 11:02 अपराह्न  

सावधान ब्लोग रिपोर्टर घूम रहा है ..अभी तो बहुते बातचीत रिकार्ड करनी है जी ...देखिए आगे का का होता है .. क्राइम ब्रांच को सूचित करो स्टिंग ऑपरेशन चलाओ भाई हा हा हा

20 मार्च 2010 8:40 अपराह्न  

वाह बहुत ही बढ़िया, जोरदार, मज़ेदार और रोचक पोस्ट रहा! बधाई!

21 मार्च 2010 9:46 पूर्वाह्न  

हा हा हा हा हा हा......

21 मार्च 2010 11:22 अपराह्न  

ख़ूबसूरत पंक्तियों में टिपण्णी देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद! मुझे बेहद पसंद आया!
बहुत ही बढ़िया, ज़ोरदार, मज़ेदार और रोचक पोस्ट रहा!

24 मार्च 2010 12:33 अपराह्न  

हा..हा..हा..मजेदार !!


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"पाखी की दुनिया" में इस बार पोर्टब्लेयर के खूबसूरत म्यूजियम की सैर

24 मार्च 2010 12:58 अपराह्न  

bahut hi majedaar aur shaandaar .aajkal sabke paas ek vishya ye bhi hai charcha ke liye ,jahan anubhav naye naye jam rahe hai ,

25 मार्च 2010 5:55 अपराह्न  

बहुत गठीला लिखते हैं
मज़ा आ गया जी

25 मार्च 2010 11:58 अपराह्न  

बतकही ...ब्लॉग रिपोर्टर ....बढियां है

25 मार्च 2010 11:58 अपराह्न  

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