बेबाक , बिंदास , बेलौस ,बेसाख्ता सी कुछ बातें ......
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बिखरे आखर
ट्विटर सेंसर को तैयार , गूगल ने किया इनकार ,
उपयोग दुन्नो का अईसा करें , रहे टेंसन में सरकार
मेरे इर्द गिर्द रहकर , तुम जो यूं , अपना ये ...
1 सप्ताह पहले















किस बात का ग़म है भाई
देने भी नहीं देते बधाई।
चलिए मुबारक !
डॉ टी एस दराल ने कहा…
11 मार्च 2010 10:50 अपराह्न
आह,बस पांच ही सौ। हजार करते तो कोई बात होती। आपने वाह लिखने से मना किया था इसलिए ऐसा लिखा।..
विनीत कुमार ने कहा…
11 मार्च 2010 11:12 अपराह्न
भईया हजार नहीं कई हजार करोड़ लिख डालो मैं तो यही शुभकामनाएं दूंगा और बधाई भी ।
Mithilesh dubey ने कहा…
11 मार्च 2010 11:17 अपराह्न
:( ये क्या है? पांच सौवी पोस्ट और इतनी उदास? हंसने तक पर पाबंदी लगा दी आपने?
बधाई हो, पंच-शतक पर.
वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…
11 मार्च 2010 11:27 अपराह्न
नो नो नो वाह!! बस, बधाई और बधाई और शुभकामनाएँ...५०० पूरी नहीं हुई बल्कि हजारे के लिए बस ५०० बची हैं...
Udan Tashtari ने कहा…
11 मार्च 2010 11:33 अपराह्न
पाँच सौ वीं पोस्ट के लिए बहुत बहुत बधाई!
दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…
11 मार्च 2010 11:47 अपराह्न
बहुत बहुत बधाई और हार्दिक शुभकामनाएं.
रामराम.
ताऊ रामपुरिया ने कहा…
11 मार्च 2010 11:54 अपराह्न
जिंदगी में ये टूट फूट चलती रहती है...भावपूर्ण रचना ....बधाई
sangeeta swarup ने कहा…
12 मार्च 2010 12:05 पूर्वाह्न
Sadaiv badhaiya
गिरीश बिल्लोरे ''पॉडकास्टर'' ने कहा…
12 मार्च 2010 12:13 पूर्वाह्न
बधाई और भविष्य के लिए ढेर सारी शुभकामनाए....ऐसे ही जारी रहें ...........
sarita jha ने कहा…
12 मार्च 2010 1:03 पूर्वाह्न
जख्म पर जख्म खाता रहा
फ़िर भी दिल मुस्कुराता रहा
तीर तो इस कदर लगते रहे
के दर्द का अहसास जाता रहा।
ये दुनिया ऐसे ही चलनी है।
500 पोस्ट की बधाई हो बधाई
ललित शर्मा ने कहा…
12 मार्च 2010 1:21 पूर्वाह्न
अरे आप को पांच सॊ वार बधाई, इस पांच सॊवी पोस्ट पर.
राज भाटिय़ा ने कहा…
12 मार्च 2010 1:33 पूर्वाह्न
बधायी ! यही चाहिए थी न तो लीजिये नोश फरमाईये !
Arvind Mishra ने कहा…
12 मार्च 2010 3:19 पूर्वाह्न
500vi post ke liye badhai..
'अदा' ने कहा…
12 मार्च 2010 4:51 पूर्वाह्न
ये इस ब्लोग की पांच सौंवी पोस्ट है ....'
मैं भीष्म नहीं ,
मैं अजर नहीं ,
कौन मानता है कि वह भीष्म है चाहे पाँच सौवीं पोस्ट ही क्यों न लिख ले.
बधाई
M VERMA ने कहा…
12 मार्च 2010 5:00 पूर्वाह्न
500वे पोस्ट पर बहुत बधाई .. कोई भी कारण हो .. इतना उदास होने की आवश्यकता नहीं !!
संगीता पुरी ने कहा…
12 मार्च 2010 6:26 पूर्वाह्न
बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएं....!!
RaniVishal ने कहा…
12 मार्च 2010 6:27 पूर्वाह्न
इस टूट अटूट में कही मैं न बिखर जाऊं ....
अच्छी कविता ...
पाँच सौ वीं पोस्ट की बहुत बहुत बधाई ..!!
वाणी गीत ने कहा…
12 मार्च 2010 7:22 पूर्वाह्न
वाह भी और बधाई भी!
आपका श्रम सराहनीय है!
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…
12 मार्च 2010 7:33 पूर्वाह्न
५०० वीं पोस्ट की बधाई !!
मनोज कुमार ने कहा…
12 मार्च 2010 8:42 पूर्वाह्न
आपने 500 तीर मारे हैं, लेकिन किस पर? ये सारे ब्लागर तो अजर-अमर हैं। आपके तीर सलामत रहे, बहुत यही दुआ है।
Dr. Smt. ajit gupta ने कहा…
12 मार्च 2010 9:53 पूर्वाह्न
bahut badhaii....bhagvaan aapkee jaisee urjaa hamare andar kab dega.....
Shefali Pande ने कहा…
12 मार्च 2010 10:07 पूर्वाह्न
अरे अजय पांच सौंवी पोस्ट पर बधाई और भाई हम तो वाह ही कहेंगे। :)
mamta ने कहा…
12 मार्च 2010 11:06 पूर्वाह्न
रचना बढ़िया लगी. पांच सौ वी पोस्ट की बधाई स्वीकार करें और दस हजार पोस्ट लिखें शुभकामना के साथ
महेन्द्र मिश्र ने कहा…
12 मार्च 2010 12:07 अपराह्न
पाँच सौ वीं पोस्ट के लिए बहुत बहुत बधाई!
संजय भास्कर ने कहा…
12 मार्च 2010 12:46 अपराह्न
वाह कहने का मन तो हमारा भी नहीं है
क्योंकि हमारा मन कहता है
वाह! वाह!! वाह!!!
खुश रहें, खुश रखें
बी एस पाबला ने कहा…
12 मार्च 2010 2:36 अपराह्न
पांच सौंवी पोस्ट की बहुत बहुत बधाई अजय जी!
जी.के. अवधिया ने कहा…
12 मार्च 2010 3:50 अपराह्न
मेरी तरफ से भी बधाई अजय जी , लिखते रहिये , बहुत ही अच्छा लिखते हो ! कवितायें तो खासकर !
पी.सी.गोदियाल ने कहा…
12 मार्च 2010 4:47 अपराह्न
धैर्य धैर्य
काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…
12 मार्च 2010 10:14 अपराह्न
भाई! जब पाँच सौ तक नहीं टूटे-बिखरे तो अब डर कैसा। भीष्म को "इच्छामृत्यु" का वर है। वर है, तो शर का डर कहाँ? आप शीघ्र ही हज़ार पूरे करें, ऐसी हमारी कामना है, और यह भी कि उस पर भी हमें टीपने का अवसर मिले, ऐसे ही…
फ़ुटनोट: मेरी अज्ञानता क्षमा हो, आप से ही नहीं, सभीसे निवेदन है। मैं बहुत दिन तक अपने ही बज़ पे प्रतिक्रिया दे कर खुश था, फिर देखा कहीं छप नहीं रही। फिर भी, लोगों के बज़ पर टिप्पणी देता फिरा…
अब समझ आया है कि यह बज़ केवल पढ़ने के लिए है, प्रतिक्रिया तो छाप पर देनी होती है। सो बधाई! हज़ार बार बधाई।
अब बताएँ आप क्या कर लेंगे भाई?
हिमान्शु मोहन ने कहा…
13 मार्च 2010 12:00 पूर्वाह्न
यानी वर है, तो शर का डर कहाँ?
(हम ऐसे ही हैं, हम पर असर कहाँ!
हिमान्शु मोहन ने कहा…
13 मार्च 2010 12:02 पूर्वाह्न
बहुत अच्छी प्रस्तुति।
इसे 13.03.10 की चिट्ठा चर्चा (सुबह ०६ बजे) में शामिल किया गया है।
http://chitthacharcha.blogspot.com/
मनोज कुमार ने कहा…
13 मार्च 2010 12:12 पूर्वाह्न
बधाई के साथ एक कविता का अंश
क्या आप सोच सकते हैं
सर से पाँव तक
असंख्य तीरों से बिन्धकर भी
कोई ज़िन्दा रह सकता है
अगर आप ध्यान से सोचें तो
इसमें आश्चर्य की कोई बात नहीं
मेरे देश के आम परिवार का पितामह
कितने ही तीर खाकर अब तक ज़िन्दा है
महंगाई का तीर
भुखमरी का तीर
ग़रीबी का तीर बेरोज़गारी का तीर
अशिक्षा का तीर
कुशिक्षा का तीर
दंगई का तीर
नंगई का तीर...
शरद कोकास ने कहा…
13 मार्च 2010 9:29 पूर्वाह्न
500 पोस्ट पर टाइम खोटी करने के बाद ऎसा ही लगता होगा । बहुत स्वाभाविक कविता है.. मैं ऎसी कवितायें नहीं लिख पाता, लिहाज़ा 498 वीं पोस्ट तक आकर पिछली 100-50 को हलाल कर देता हूँ । कोई मलाल न रहे.. इसलिये आपके दुःख में भी आपके साथ खड़ा हूँ.. :)
डा० अमर कुमार ने कहा…
13 मार्च 2010 12:00 अपराह्न
पांच सेकड़ा पूरा करने की बधाई।
आत्मदया अचअचा गुण नहीं है। इसे तजना जरूरी है।
उन्मुक्त ने कहा…
13 मार्च 2010 12:03 अपराह्न
500 vi post ki hardik badhayi.
वन्दना ने कहा…
13 मार्च 2010 1:06 अपराह्न
पांच सेकड़ा पूरा करने की बधाई।
आत्मदया अचअचा गुण नहीं है। इसे तजना जरूरी है।
संजय भास्कर ने कहा…
26 मार्च 2010 12:00 पूर्वाह्न