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ये इस ब्लोग की पांच सौवीं पोस्ट है , या शायद उससे एक ज्यादा ...है न बधाई देने की बात ....मगर नहीं वाह मत कहिएगा ......आज मन वाह नहीं आह कहने को कर रहा है .............आह ....!!!!!!!!!!!







मैं भीष्म नहीं ,
मैं अजर नहीं ,
मारो , मर जाऊंगा ,
मैं कभी भी अमर नहीं ॥

मैं खडा देखता हूं ,समय को ,
और समय देखता है मुझको ,
तुम चलाओ जब तक शैय्या बने ,
खत्म न हो जाए "शर" कहीं ?


टूटा तोडा गया कई बार,
हर बात तुम्हीं ने जोडा भी ,
बस डर इस बात का रहता है , इस टूट- अटूट में ,
कभी मैं भी न जाऊं ,बिखर कहीं .........

37 टिप्पणियाँ:

किस बात का ग़म है भाई
देने भी नहीं देते बधाई।

चलिए मुबारक !

11 मार्च 2010 10:50 अपराह्न  

आह,बस पांच ही सौ। हजार करते तो कोई बात होती। आपने वाह लिखने से मना किया था इसलिए ऐसा लिखा।..

11 मार्च 2010 11:12 अपराह्न  

भईया हजार नहीं कई हजार करोड़ लिख डालो मैं तो यही शुभकामनाएं दूंगा और बधाई भी ।

11 मार्च 2010 11:17 अपराह्न  

:( ये क्या है? पांच सौवी पोस्ट और इतनी उदास? हंसने तक पर पाबंदी लगा दी आपने?
बधाई हो, पंच-शतक पर.

11 मार्च 2010 11:27 अपराह्न  

नो नो नो वाह!! बस, बधाई और बधाई और शुभकामनाएँ...५०० पूरी नहीं हुई बल्कि हजारे के लिए बस ५०० बची हैं...

11 मार्च 2010 11:33 अपराह्न  

पाँच सौ वीं पोस्ट के लिए बहुत बहुत बधाई!

11 मार्च 2010 11:47 अपराह्न  

बहुत बहुत बधाई और हार्दिक शुभकामनाएं.

रामराम.

11 मार्च 2010 11:54 अपराह्न  

जिंदगी में ये टूट फूट चलती रहती है...भावपूर्ण रचना ....बधाई

12 मार्च 2010 12:05 पूर्वाह्न  

12 मार्च 2010 12:13 पूर्वाह्न  

बधाई और भविष्य के लिए ढेर सारी शुभकामनाए....ऐसे ही जारी रहें ...........

12 मार्च 2010 1:03 पूर्वाह्न  

जख्म पर जख्म खाता रहा
फ़िर भी दिल मुस्कुराता रहा
तीर तो इस कदर लगते रहे
के दर्द का अहसास जाता रहा।

ये दुनिया ऐसे ही चलनी है।
500 पोस्ट की बधाई हो बधाई

12 मार्च 2010 1:21 पूर्वाह्न  

अरे आप को पांच सॊ वार बधाई, इस पांच सॊवी पोस्ट पर.

12 मार्च 2010 1:33 पूर्वाह्न  

बधायी ! यही चाहिए थी न तो लीजिये नोश फरमाईये !

12 मार्च 2010 3:19 पूर्वाह्न  

500vi post ke liye badhai..

12 मार्च 2010 4:51 पूर्वाह्न  

ये इस ब्लोग की पांच सौंवी पोस्ट है ....'
मैं भीष्म नहीं ,
मैं अजर नहीं ,
कौन मानता है कि वह भीष्म है चाहे पाँच सौवीं पोस्ट ही क्यों न लिख ले.
बधाई

12 मार्च 2010 5:00 पूर्वाह्न  

500वे पोस्‍ट पर बहुत बधाई .. कोई भी कारण हो .. इतना उदास होने की आवश्‍यकता नहीं !!

12 मार्च 2010 6:26 पूर्वाह्न  

बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएं....!!

12 मार्च 2010 6:27 पूर्वाह्न  

इस टूट अटूट में कही मैं न बिखर जाऊं ....
अच्छी कविता ...
पाँच सौ वीं पोस्ट की बहुत बहुत बधाई ..!!

12 मार्च 2010 7:22 पूर्वाह्न  

वाह भी और बधाई भी!
आपका श्रम सराहनीय है!

12 मार्च 2010 7:33 पूर्वाह्न  

५०० वीं पोस्ट की बधाई !!

12 मार्च 2010 8:42 पूर्वाह्न  

आपने 500 तीर मारे हैं, लेकिन किस पर? ये सारे ब्‍लागर तो अजर-अमर हैं। आपके तीर सलामत रहे, बहुत यही दुआ है।

12 मार्च 2010 9:53 पूर्वाह्न  

bahut badhaii....bhagvaan aapkee jaisee urjaa hamare andar kab dega.....

12 मार्च 2010 10:07 पूर्वाह्न  

अरे अजय पांच सौंवी पोस्ट पर बधाई और भाई हम तो वाह ही कहेंगे। :)

12 मार्च 2010 11:06 पूर्वाह्न  

रचना बढ़िया लगी. पांच सौ वी पोस्ट की बधाई स्वीकार करें और दस हजार पोस्ट लिखें शुभकामना के साथ

12 मार्च 2010 12:07 अपराह्न  

पाँच सौ वीं पोस्ट के लिए बहुत बहुत बधाई!

12 मार्च 2010 12:46 अपराह्न  

वाह कहने का मन तो हमारा भी नहीं है
क्योंकि हमारा मन कहता है
वाह! वाह!! वाह!!!

खुश रहें, खुश रखें

12 मार्च 2010 2:36 अपराह्न  

पांच सौंवी पोस्ट की बहुत बहुत बधाई अजय जी!

12 मार्च 2010 3:50 अपराह्न  

मेरी तरफ से भी बधाई अजय जी , लिखते रहिये , बहुत ही अच्छा लिखते हो ! कवितायें तो खासकर !

12 मार्च 2010 4:47 अपराह्न  

धैर्य धैर्य

12 मार्च 2010 10:14 अपराह्न  

भाई! जब पाँच सौ तक नहीं टूटे-बिखरे तो अब डर कैसा। भीष्म को "इच्छामृत्यु" का वर है। वर है, तो शर का डर कहाँ? आप शीघ्र ही हज़ार पूरे करें, ऐसी हमारी कामना है, और यह भी कि उस पर भी हमें टीपने का अवसर मिले, ऐसे ही…

फ़ुटनोट: मेरी अज्ञानता क्षमा हो, आप से ही नहीं, सभीसे निवेदन है। मैं बहुत दिन तक अपने ही बज़ पे प्रतिक्रिया दे कर खुश था, फिर देखा कहीं छप नहीं रही। फिर भी, लोगों के बज़ पर टिप्पणी देता फिरा…
अब समझ आया है कि यह बज़ केवल पढ़ने के लिए है, प्रतिक्रिया तो छाप पर देनी होती है। सो बधाई! हज़ार बार बधाई।
अब बताएँ आप क्या कर लेंगे भाई?

13 मार्च 2010 12:00 पूर्वाह्न  

यानी वर है, तो शर का डर कहाँ?
(हम ऐसे ही हैं, हम पर असर कहाँ!

13 मार्च 2010 12:02 पूर्वाह्न  

बहुत अच्छी प्रस्तुति।
इसे 13.03.10 की चिट्ठा चर्चा (सुबह ०६ बजे) में शामिल किया गया है।
http://chitthacharcha.blogspot.com/

13 मार्च 2010 12:12 पूर्वाह्न  

बधाई के साथ एक कविता का अंश
क्या आप सोच सकते हैं
सर से पाँव तक
असंख्य तीरों से बिन्धकर भी
कोई ज़िन्दा रह सकता है

अगर आप ध्यान से सोचें तो
इसमें आश्चर्य की कोई बात नहीं
मेरे देश के आम परिवार का पितामह
कितने ही तीर खाकर अब तक ज़िन्दा है
महंगाई का तीर
भुखमरी का तीर
ग़रीबी का तीर बेरोज़गारी का तीर
अशिक्षा का तीर
कुशिक्षा का तीर
दंगई का तीर
नंगई का तीर...

13 मार्च 2010 9:29 पूर्वाह्न  


500 पोस्ट पर टाइम खोटी करने के बाद ऎसा ही लगता होगा । बहुत स्वाभाविक कविता है.. मैं ऎसी कवितायें नहीं लिख पाता, लिहाज़ा 498 वीं पोस्ट तक आकर पिछली 100-50 को हलाल कर देता हूँ । कोई मलाल न रहे.. इसलिये आपके दुःख में भी आपके साथ खड़ा हूँ.. :)

13 मार्च 2010 12:00 अपराह्न  

पांच सेकड़ा पूरा करने की बधाई।
आत्मदया अचअचा गुण नहीं है। इसे तजना जरूरी है।

13 मार्च 2010 12:03 अपराह्न  

500 vi post ki hardik badhayi.

13 मार्च 2010 1:06 अपराह्न  

पांच सेकड़ा पूरा करने की बधाई।
आत्मदया अचअचा गुण नहीं है। इसे तजना जरूरी है।

26 मार्च 2010 12:00 पूर्वाह्न  

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