बेबाक , बिंदास , बेलौस ,बेसाख्ता सी कुछ बातें ......
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बिखरे आखर
ट्विटर सेंसर को तैयार , गूगल ने किया इनकार ,
उपयोग दुन्नो का अईसा करें , रहे टेंसन में सरकार
मेरे इर्द गिर्द रहकर , तुम जो यूं , अपना ये ...
1 सप्ताह पहले
















बहुत अच्छी प्रस्तुति।
मनोज कुमार ने कहा…
5 मार्च 2010 9:25 अपराह्न
कहां मनाना है अजय जी
आप तो बस आदेश कीजिए
हम हाजिर हो जाएंगे
सदा की तरह
सदा के लिए।
अविनाश वाचस्पति ने कहा…
5 मार्च 2010 10:19 अपराह्न
Bharatme adhiktar mahilaon ko ye mahila diwas kya bala hoti hai,ye tak nahi pata!
kshama ने कहा…
5 मार्च 2010 10:36 अपराह्न
अजय भाई , अच्छा किया आपने बता दिया । अब सब पुरुष मिलकर महिला दिवस मनाएंगे ।
डॉ टी एस दराल ने कहा…
5 मार्च 2010 10:44 अपराह्न
खूब याद दिलाया।
दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…
5 मार्च 2010 11:09 अपराह्न
जिस तरह ढेर सारे दिवस मना लिये जाते हैं उसी तरह यह दिवस भी मना लिया जायेगा । दुनिया उसी तरह चलती रहेगी आधी दुनिया उसी तरह रहेगी । जाने कितनी तरह तरह की पोस्ट लिखी जायेंगी, कविता ,कहानी, आलेख ,चित्र ,व्यंग्य ,संस्मरण, साक्षात्कार और फिर सब कुछ पहले की तरह हो जायेगा । फिर भी हम निराशावादी नहीं है... न ही पुरुषवादी ..कुछ नही न वादी न प्रतिवादी .. बस सोचते है कि खुशहाल रहे न केवल आधी बल्कि पूरी आबादी ।
शरद कोकास ने कहा…
5 मार्च 2010 11:43 अपराह्न
आने वाले महिला दिवस पर सभी महिलाएं एकता से रहने का प्रण लें लें .. किसी भी देश में, समाज में और परिवार में यदि सभी महिलाओं में एकता दिखाई पडे .. तो मेरा दावा है कि किसी एक महिला का बाल भी बांका नहीं हो सकता !!
संगीता पुरी ने कहा…
6 मार्च 2010 1:38 पूर्वाह्न
पढ लिया है लेकिन ज्यादा विस्तार से टिप्पणी नहीं कर पाएंगें...क्यों कि अभी हम भी महिला दिवस पर एक पोस्ट की तैयारी में व्यस्त हैं :-)
पं.डी.के.शर्मा"वत्स" ने कहा…
6 मार्च 2010 2:23 पूर्वाह्न
संगीता पूरी से सहमत हूँ ! माँ के बना हम कहाँ , और लड़कियों के साथ कोई भी समस्या महिलाओं के योगदान के बिना संभव नहीं , नयी लडकी से व्यवहार करते अक्सर माँ भूल जाती है कि वह भी कभी बच्ची थी !
सतीश सक्सेना ने कहा…
6 मार्च 2010 7:51 पूर्वाह्न
मनाते हैं..पटाखे खरीद लाये हैं और गुलाल होली का रखा है...मिलाजुला कर यह त्यौहार भी मन ही जायेगा. :)
Udan Tashtari ने कहा…
6 मार्च 2010 9:38 पूर्वाह्न
हम तो भाई महिला नहीं मातृ दिवस वाले हैं। हम महिला को मातृ रूप में देखते हैं जो संसार की जननी है। महिला आरक्षण बिल आने से राजनीति में शुचिता बढ़ने की सम्भावना है।
Dr. Smt. ajit gupta ने कहा…
6 मार्च 2010 10:40 पूर्वाह्न
बहुत अच्छी प्रस्तुति।
संजय भास्कर ने कहा…
6 मार्च 2010 12:46 अपराह्न
बिल्कुल सब एेसे ही चलता रहेगा आैर महिला िदवस भी मनता रहेगा।
INDRADHANUSH ने कहा…
6 मार्च 2010 5:13 अपराह्न
ek din ka shor uske baad sab band ........jaisa hamesha hota aaya hai..........achcha likha aapne.
वन्दना ने कहा…
6 मार्च 2010 5:48 अपराह्न
अच्छी प्रस्तुति...पर ऐसे दिवसों से कुछ नहीं होने वाला ....आपने आरुषि, राठौर और किरण बेदी के अच्छे मुद्दे उठाये हैं....
sangeeta swarup ने कहा…
6 मार्च 2010 7:00 अपराह्न
बहुत बढ़िया लगा! आपने बड़े ही सुन्दरता से प्रस्तुत किया है!
Babli ने कहा…
6 मार्च 2010 8:19 अपराह्न
बहुत सुंदर फ़िर इस दिन के बाद सास बहू मै कभी लडाई नही होगी, सारी महिलाये मिल जुल कर रहेगी.
राज भाटिय़ा ने कहा…
6 मार्च 2010 8:53 अपराह्न
सामयिक कटाक्ष
बी एस पाबला ने कहा…
6 मार्च 2010 10:55 अपराह्न