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सोमवार, 13 अक्तूबर 2008

एकता परिषद् हो या एकता कपूर, एक ही बात है

अपनी आदत के अनुरूप , मित्र लादेन पांडे, दूर से ही चिच्याते हुए आए, सुने हैं झा जी , एकता के लिए कोई बैठक हो रही है, आपको ख़बर है की नहीं।
हमने भी अनमने भाव से कह दिया, ठीक ही तो है यार इस एकता कपूर और इसके धारावाहिकों ने पूरा बेडा गर्क कर के रख दिया है, न सर पैर का पता चलता है , न घर द्वार का, ना रिश्ते नातों का कोई मतलब रहता है न ही जीवन मृत्यु का, कमबख्त ने तो महाभारत को भी अपना सीरियल बना कर छोड़ दिया है, अब तो बर्दाश्त के बाहर की बात है, बैठक होनी ही चाहिए।
अरे आप का कहे जा रहे हैं, दरअसल वो बात नहीं है।

मैं थोडा ठिठका, अच्छा , तो फ़िर क्या, एकता कपूर की शादी वादी के लिए कोई बैठक कर रहे हैं, अजी छोडो आप भी किस चिंता में पड़े हो , वो क्या एक शादी करेगी, उसे तो सारे कैरक्टर वाले लोगों से अलग अलग शादी करनी पड़ेगी।

अब लादेन पांडे भड़क गए, का झा जी, हम जा रहे हैं, हम तो ये कहने आए थे कि, देश की गंभीर आंतरिक स्थिति को देखते हुए एकता परिषद् की महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है, आप पता नहीं कौन सा रोना लेकर बैठ गए।

अरे क्यों भड़क रहे हो लादेन भाई , तुम तो यार सचमुच लादेन की तरह बिदक रहे हो , काहे कि महत्वपूर्ण बैठक, कैसी एकता, और कौन सी परिषद्। तुम ही बताओ , इस बैठक में किस बात पर चर्चा नहीं हो रही है जानते हो, आतंकवाद पर। अब बताओ , इस देश में आतंकवाद का मकसद और परिणाम सिर्फ़ इसलिए ही हैं ना कि इस देश की एकता टूटे, वरना क्या आतंकवादियों ने यहाँ से सोने की चिडिया पकड़नी है। ये सब तो एक नाटक चल रहा है, बिल्कुल एकता कपूर के नाटक की तरह। सम्प्रदायवाद, जातिवाद, धर्म परिवर्तन , पता नहीं कौन कौन से एपिसोड ढूंढे और शूट किए जा रहे हैं, असली मुद्दे को छुआ तक नहीं जा रहा।
जिस तरह एकता कपूर के सभी सीरियलों में , परिवार, समाज, रिश्ते ,नाते, नारी, कथा ,कहानी का एक ही हश्र और अर्थ , यानि बिना मतलब और बिना सर पैर का होता है , उसी तरह इस एकता परिषद् में सब कुछ एक ही ढर्रे पर चलता रहता है, जिसका ना कोई प्रभाव है ना ही कोई परिणाम.अब बताओ भैया लादेन पांडे , है न एकता कपूर और एकता परिषद् बिलकुल एक जैसे, बिल्कुल जुड़वा भाई बहन।

लादेन जी मुस्काते हुई अपना पांडे पण दिखाते हुए हमारे गले लग गए.

4 टिप्‍पणियां:

  1. aap dono ka bahut bahut dhanyavaad. padhne aur saraahne ke liye bhee.

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  2. एकता ने हिंदू समाज की धज्जियाँ उड़ा रखी हैं, नेताओं ने एकता की धज्जियाँ उड़ा दीं.

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मैंने तो जो कहना था कह दिया...और अब बारी आपकी है..जो भी लगे..बिलकुल स्पष्ट कहिये ..मैं आपको भी पढ़ना चाहता हूँ......और अपने लिखे को जानने के लिए आपकी प्रतिक्रियाओं से बेहतर और क्या हो सकता है भला

साथ चलने वाले

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