गुरुवार, 6 मार्च 2008

माँ

माँ , तेरी गोद मुझे,
मेरे अनमोल,
होने का,
एहसास कराती है॥

माँ, तेरी हिम्मत,
मुझको,
जग जीतने का,
विश्वास दिलाती है॥

माँ, तेरी सीख,
मुझे ,
आदमी से,
इंसान बनाती है॥

माँ, तेरी डाँट,
मुझे, नित नयी,
राह दिखाती है॥

माँ, तेरी सूरत,
मुझे मेरी,
पहचान बताती है॥

माँ, तेरी पूजा,
मेरा, हर,
पाप मिटाती है॥

माँ तेरी लोरी,
अब भी, मीठी ,
नींद सुलाती है॥

माँ , तेरी याद,
मुझे,
बहुत रुलाती है॥

माँ , माँ है और कोई उस जैसा नहीं होता , है न .

7 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही सुंदर और भावपूर्ण और बड़ी प्यारी कविता ।

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  2. dr saahab aur aadarniya mahavir jee aap dono kaa dhanyavaad.

    जवाब देंहटाएं
  3. भाई साहब, आपकी कविता वाकई मर्मस्पर्शी है... मां के विभिन्न रूपों को समझाने की एक बेहद सरल और सफल कोशिश.. बधाई हो

    जवाब देंहटाएं

मैंने तो जो कहना था कह दिया...और अब बारी आपकी है..जो भी लगे..बिलकुल स्पष्ट कहिये ..मैं आपको भी पढ़ना चाहता हूँ......और अपने लिखे को जानने के लिए आपकी प्रतिक्रियाओं से बेहतर और क्या हो सकता है भला

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