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शनिवार, 1 मार्च 2008

ब्लॉगजगत का प्रथम विश्वयुद्ध

मुझे उम्मीद नहीं थे की इतनी जल्दी ब्लॉगजगत पर इतना बड़ा और घमासान युद्ध शुरू हो जायेगा। ये तो लग रहा था की किसी अन्य भाषा के ब्लोग्गेर्स एक दूसरे से इतने ज्यादा नहीं जुड़ते हैं या कहूँ की एक दूसरे के प्रति इतने ज्यादा भावुक नहीं होते जितने हिन्दी ब्लॉग जगत के , और इसलिए देर सवेर इस अन्दर तक घुसने की प्रवृत्ति का कुछ दुष्परिणाम तो निकलना ही था। खैर, मुझे ये भी मालूम है की आप कहेंगे की मरा मारी तो चलती ही रहती है। मगर हुज़ूर, इतनी हिंसा, इतनी उठा-पटक , आमने सामने का चैलेन्ज तो फ़िर आप ही बताइये की युद्ध कैसे नहीं हुआ ? नहीं भाई ये सा रे गा माँ पा संगीत की प्रथम विश्वयुद्ध टाईप का कोई तलेंट शोस नहीं है। ये तो हमारे बहुत से बुद्धिजीवी भाईयों का मानसिक द्वंद है। हाँ , ये अलग बात है की विचार इतना आक्रामक और आलोचनात्मक है की ब्लॉगजगत पर कारगिल वाली स्थिति हो गयी है। लोग इधर उधर भाग रहे हैं, चिचिया रहे हैं, बौखला रहे हैं,। एक दूसरे को धकिया रहे हैं, लतिया रहे हैं, । नोंच खसोट जारी है । कहने का मतलब लोग अपनी भडास निकाल रहे हैं और सीधे सीधे कहूं तो उबकाई कर रहे हैं।

अब तक मैं यही सोचता था की यार, बताओ , एक हम ही खानाबदोश की तरह अपने ठिकाने के लिए भटक रहे हैंह। ना कोई मोहल्ले में बुलाता है ना ही कसबे में घुसने देता है, ना कोई लिंक बानाता है ना ही कहीं हमारी चर्चा होती है। अजे लानत है हम पर । मगर आजकल ब्लॉगजगत पर जो आपातकाल वाली स्थिति है उससे तो लगता है की यार चलो अच्छा हुआ अपना कोई कस्बा या मोहल्ला नहीं है और हम अपने बंकर में bइल्कुल सुरक्षित बैठे हैं। भैया अच्छा है की अपनी तो नेपाल और श्रीलंका वाली स्थिति है तो बड़े बड़े इन अमेरिकी ब्लागरों के बीच क्यों पिसे।

तो भइया लोग आप लोग दूर दूर से इस विश्वयुद्ध का दर्शन किजीइए और इंतज़ार किजीये की कब इसकी समाप्ति की घोषणा होगी। अजी तभी तो कुछ नया पढने को मिलेगा।

मेरा अगला पन्ना - क्यों पैदा होती हैं बेटियाँ ?

9 टिप्‍पणियां:

  1. सही है, मुहाने पर डटे इन्तजार करो और बोर होने लगो तो हमसे बतियाओ. हम भी वहीं कुन्न्ड़ में बीड़ी चिलम लिये बैठे हैं. :)

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  2. Haa aapke agale lekh ka intazaar karenge, vishwa yuddh chalane dijiye.Aap kuchh dusara kijiye padhane ke liye hum baithe hai.To wada raha kal milenge aapka lekh padhane ke liye.

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  3. ye koi pehla vishva yudh nahi hai, isse pehle bhi kai ho chuke hain

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  4. विश्व युद्ध के बाद सं रा संघ की स्थापना होगी सदस्य्ता के लिए तैयार रहें।
    बेस्ट आफ लक

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  5. achha jee,
    to aap log bhee vishwa yuddh ko apne bankar mein chhup kar maze se dekh rahe hain. haan sanyukt raashtra sangh kee sadasyataa ke liye to taiyaar hain basharte ki koi amerikaa naa ho wahaan bhee. dhanyavaad.

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  6. घबराईये मत.. दूसरे में भी देरी नहीं लगेगी.. और अपने समीर भैया जब बीड़ी चिलम लेकर तैयार बैठे ही हैं तो हमें उसकी चिंता भी नहीं है.. :D

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  7. ब्लोग जगत में मनोरंजन की अपार संभावना है. देखते रहिये अभी तो बहुत कुछ होना है.

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  8. होता है शबोरोज़ तमाशा मेरे आगें.ग़ालिब
    भाईजान अभी तो कई तमाशे वेटिंग लिस्ट में हैं इंतज़ार कीजिये. कहीं चुहियों की चूँ-चूँ- बिल्लों की खों-खों.देखे इस पते पर- http://subhashbhadauria.blogspot.com/2008/02/blog-post_22.html
    कहीं कुत्तों का रुदन हंस का डिस्को-इस पते पर-
    http://subhashbhadauria.blogspot.com/2008/01/blog-post_13.html
    आप ने विश्वयुद्ध से वाकिफ़ कराया.

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मैंने तो जो कहना था कह दिया...और अब बारी आपकी है..जो भी लगे..बिलकुल स्पष्ट कहिये ..मैं आपको भी पढ़ना चाहता हूँ......और अपने लिखे को जानने के लिए आपकी प्रतिक्रियाओं से बेहतर और क्या हो सकता है भला

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