रविवार, 14 फ़रवरी 2021

प्रशासनिक उपेक्षा के शिकार :राजस्थान के पर्यटक स्थल

 

बहुत बार ये बात मैं पहले भी कह चुका हूँ क़ी ठीक तलवे के बीचों बीच काला तिल देख कर माँ अक्सर कह दिया करती थी कि इस लड़के के पाँव में चक्कर लगे हैं।  कारण था मेरा लगातार घूमते रहना और सड़क , सफर जैसे उन दिनों किताब ,रेडियो ,चिट्ठी की तरह बिलकुल करीब के साथी थे मेरे।   कॉलेज के पूरे पाँच साल रोज़ तीस किलोमीटर सायकल से नाप डालने का हुनर ज़िंदगी भर काम आता रहा।  बहुत घूमा , घूमता हूँ और घूमना चाहता हूँ।  

पिछले कुछ सालों में मेरा रुख पश्चिम की तरफ रहा है और कमोबेश आठ यात्राएं मैंने की हैं पिछले दो सालों में ही।  कार ,बस , रेल , डबल डेकर रेल हर साधन और हर मार्ग से सिवा हवाई मार्ग के।  सफर की जब भी बात होती है तो मुझे सड़क की याद आ जाती है और शायद यही वजह रही है कि , बिना सड़क वाला सफर यानी हवाई सफर से अब तक बचता ही रहा हूँ।  

जयपुर , अलवर , जोधपुर , उदयपुर , माउंट आबू , चित्तौड़गढ़ ,जैसलमेर , फिलहाल इन तमाम शहरों को देखने समझने की एक कोशिश हो चुकी है।  जयपुर में अनुज का निवास है और उदयपुर में अनुजा का , इन दोनों शहरों में बहुत बार जाना हुआ और इसके बावजूद भी बार बार जाने का मन हो आता है।  

राजस्थान की धरती से इतिहास की किताबों में हमारा परिचय "राजों रजवाड़ों वाला , राजपूती शान वाला , राणा प्रताप वाला विशाल भूभाग वाला सा ही दिलाया जाता रहा है मगर मेरी यात्राओं में मैंने जाना कि अलौकिक धर्म क्षेत्र है पूरा राजस्थान। पग पग पर भगवान् स्वयं अनेक नामों रूपों में आज भी आपको महसूस होंगे।  हिन्दू , जैन ,शैव सबकी आराध्य और पवित्र भूमि।  

हर यात्रा की तरह जोधपुर यात्रा को भी विस्तार से लिखूंगा , लेकिन इस पोस्ट में मैं एक बहुत जरूरी विषय रखना चाह रहा हूँ वो ये कि , देश से लेकर विदेशी पर्यटकों तक की ख़्वाबों की नगरी , गुलाबी नगरी , झीलों का शहर , बने राजस्थान के शहरों के बेहद खूबसूरत और स्वच्छ होने के बावजूद कुछ पर्यटन स्थलों को छोड़ कर अन्य सब में सरकारी उदासीनता के चिन्ह साफ़ दिखाई देते हैं।  

जल महल -के पास पर्यटकों द्वारा झील की मछलियों को आटा , दाना आदि खिलाने वाले स्थान पर मंडराता शूकरों का झुंड  पास फैली हुई बेशुमार गंदगी।  मुझे लगता है प्रशासन को उस ओर जल्द से जल्द ध्यान देना चाहिए , हैरानी होती है कि आज जब मीडिया से लेकर सोशल मीडिया तक का उपयोग करके लोग इन सब चीज़ों को ठीक कर रहे हैं तो फिर अब तक कैसे ??? खैर इस समस्या को तुरंत दूर किया जाना चाहिए। 

 




जलमहल क्षेत्र , झील का पानी भी संभवतः नियमति रूप से साफ़ नहीं किया जाता , यह दूषित पानी से ही पता चल रहा था 




हालांकि पर्यटन स्थलों और यहां तक कि सड़कों के बीच पड़ने वाले गोल चौराहों की खूबसूरती आपका मन मोहे बिना नहीं रहती है , विशेषकर मेरे पसंदीदा शहर उदयपुर और माउंट आबू में।  बाजार में पॉलीथिन ,प्लास्टिक पन्नियों के उपयोग की पाबंदी के आदेश का जैसा पालन मैंने माउंट आबू में देखा वो शायद ही किसी अन्य शहर में संभव हो पाता  हो। 

उदयपुर शहर , बला का खूबसूरत शहर है , हर तरफ झीलें और खूबसूरत स्थानों की भरमार , जिस कोने में निकल जाइये बोगनवेलिया बाहें फैलाए आपको बुला रहे होते हैं।  उदयपुर शीशे की तरह शफ्फाक शहर है।  बहुत स्वच्छ सुथरा , मगर बावजूद इसके कुछ पर्यटन स्थलों पर सिर्फ एक छोटी सी कलात्मक पहल से उन तमाम पर्यटन स्थलों का वो अनुमप रूप निकल कर आ सकता है कि उन्हें देखने वालों को ये उम्र भर के सौगात से कम नहीं लगे। 

वैसे करिश्मा , जादू , वरदान जैसा ही है राजस्थान भारत के लिए , एक अनमोल रत्न सरीखा।  रेत के कण कण से सूरज की तपिश की तरह ललकता राष्ट्रवाद का प्रकाश और तेज।  राजमहलों की इतनी बड़ी दुनिया और किसी देश के किसी भी प्रान्त स्थान में मिलना कठिन है।  विराट अट्टालिकाएं , एक से बढ़ कर एक अभेद्य किले और उन किलों को मस्तक पर धारे हुए माँ भारती के वो सपूत , वो बांके जिन्होंने समय के आसमान पर अपनी वीरता और पराक्रम की कहानी लिख दी।  





किलों के सम्मोहन में एक बात कहनी बहुत जरूरी है वो ये कि , इनसे जुड़ी दास्तानें , गौरवमयी क्षण , उस इतिहास से परिचय कराने की जो ललक राज्य ,प्रशासन और स्थानीय स्तर पर होनी चाहिए उसमें कहीं न कहीं बहुत कुछ किए जाने की गुंजाइश तो है ही।  

राजस्थान रंगीला है , भरपूर ऊर्जा और प्रेम से लबरेज़।  ...चलिए अगली पोस्ट में चलेंगे जोधपुर के सफर पर।  सड़क मार्ग से। ..


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