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रविवार, 4 अक्तूबर 2009

मंत्री जी .कुछ यूं किजीये न....




जब से कैटल क्लास वाला एतिहासिक बयान थरूर जी ने दिया....उनकी तो जो फ़जीहत हुई सो हुई...बांकी मंत्रियों की भी शामत टाईप की आ गयी है....कभी बचत के नाम पर तो कभी जनता से मिलन के नाम पर ..कोई किसी झुग्गी में जाकर ..दाल ....अरे रे...नहीं नहीं ..दाल नहीं.....पता नहीं ...क्या क्या के साथ रोटी खा रह है....तो कोई...किसी के यहां पानी पी पी के पता नहीं...क्या साबित कर रहा है....ओह हो सकता है कि ..ये चांद मिंया के लिये मैसेज हो कि ..देखिये हमारे यहां पानी की कमी नहीं है...बस हमें ही इन गरीबों के पास आने की फ़ुर्सत नहीं है..। मगर ये अब उनकी फ़ूटी किस्मत का ही कमाल है कि...उनके इन प्रयासों को भी तारीफ़ कम ..ढोकसला/ढोंग और इसी तरह के तमाम विशेषणों से नवाजा जा रहा है। अब ये तो उनके कमाये हुए पुण्य का ही प्रताप है कि ..उनके काम को इस तरह से ऐसी सराहना मिल रही है। इश्वर उन्हें इसी तरह सारा क्रेडिट देता रहे। मगर मंत्री जी ....आप लोग तो बेकार इस झंझट में पडे हो । पब्लिक अब उतनी बुडबक नहीं रही है जी..। फ़ट से समझ जाती है ..कि आप लोग रामलीला खेल रहे हो ..और पब्लिक ने ....रामानंद सागर जी के रामायण के बाद इसमें इंट्रेस्ट दिखाना छोड दिया है । अरे इसमें निराश होने की बात ही नहीं है ..देखिये हमारे पास कितना सरल उपाय है आपके लिये.........

एक एक करके आप सबको अपने विभाग के हिसाब से बताते हैं.......

रक्षा मंत्री जी....आप तो बस इतना ही किजीये कि अपने पुत्र/पुत्री/भाई/भतीजे...किसी को सेना में भर्ती करवा के ..सीमा पर तैनाती करवाईये...इश्वर न करे ..वो शहीद न भी हो तो भी ..कम से कम उनका दर्द तो आपको अपने घर में ही महसूस हो सकेगा...और यदि शहीद के पिता/माता होने का गर्व आपको कभी मिल गया...तो समझ जाइए कि देश के सभी शहीदों ..को जो ये पेट्रोल पंप और ..पता नहीं कौन कौन से झुनझुने आप पकडा देते हैं न..उनकी खनक आपके कान में सुनाई देगी....बस ..इतना सा काम करना है...

शिक्षा मंत्री जी......आपके लिये तो और भी आसान है जी...बस अपने बच्चों को आप सरकारी स्कूलों में ही दाखिला करवाओ....देखना जब आप के बच्चे ...खुद आपको आंखों देखा हाल सुनायेंगे न तो...ये तो सबसे तेज़ चैनल के एक्सक्लुसिव न्यूज़ से भी ज्यादा एक्सक्लुसिव होगा...कोई दौरा नहीं...किसी रपट की जरूरत नहीं...सब अपने आप आपके सामने आ जायेगा....

परिवहन मंत्री जी और रेल मंत्री जी .....आप लोगों के लिये बस इतना ही कि ...कभी सरकारी बस ..अजी आपकी अपनी में भी कभी अपने घर से दफ़्तर जाईये...यकीन मानिये..उसी दिन जाने कितनी नयी योजनायें बना लेंगे आप....और रेल मंत्री जी के लिये भी ...आप कभी पूजा के समय में...या ऐसे ही किसी समय...लाईन में खडे होकर जेनरल का टिकट लेकर ...साधारण डिब्बे में बस एक बार..भूजा चना फ़ांकते हुए घर तक पहुंच कर दिखा दिजीये....देखिये रेल के सारे फ़ायदे....आपको नुकसान की तरह लगने लगेंगे...

अब किन किन मंत्री जी के लिये अलग अलग एप्लीकेशन भरते रहें...चलिये इन जेनरल कुछ अर्ज़ किये द्ते हैं जी..

आप सब लोग ई फ़ाईनल कर लिजीये कि ....अपने कार्यकाल के दौरान ..कम से कम इतने दिन आप अपने लोगों के बीच रहेंगे...यानि अपने कार्यक्षेत्र में...और उतने दिन रहना ही पडेगा....सबको...

संसद सत्र के लिये आप कितने /क्या /कैसे ....तैयार हैं....वो कौन कौन से मुद्दे/प्रश्न/समस्यायें/बातें हैं जो आप हमारे लिये उठाने जा रहे हैं।उस पर आपका नज़रिया/एजेंडा...क्या है..ये पहले ही बताते जाईये...

ये जो आपके पास हमारे कल्याण के लिये ..फ़ंड जैसा एक घपलेबाजी का औजार दिया गया है...उसे आप कब कैसे कहां कितना उपयोग करने जा रहे हैं.....?

बस इत्ता इत्ता काम कर लिया न तो .......ई सब उपर वाला सो काल्ड ढकोसला करने की जरूरत ही नहीं रहेगी....समझे न ......चलिये फ़िर लिखेंगे एक ठो चिट्ठी ...अभी चलते हैं...

19 टिप्‍पणियां:

  1. झा जी, सबसे पहले मंत्रियों को ये कहना सिखा दो...जय हिंद...

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  2. जब वे अगले चुनावी सीजन में आयें तो कह लीजियेगा ! अभी मंत्री जी व्यस्त है! आप से नहीं मिल सकते ! भाई साहब खा न नहीं मिल सकते तो निकलिए यहाँ से ! और भी जनता मिलने आयी है -एक दो बिलागर भी कई घंटे से इंतज़ार कर रहे है !

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  3. आप तो ऐसे न थे?
    उम्मीद ठीक कि एक एक मंत्रालय पर अलग अलग आलेख आएंगे लेकिन अलसा गए। दिल्ली माँ बैठे हो, मटेरियल की क्या कमी है?
    हम तो अब्बो सोच सोच मुस्का रहे हँ कि हमरी बहिन जी पीक ऑवर में रेड लाइन बस माँ चढ़ा दी जाँय तो का हो ?

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  4. अरे यह कमीने सब बेठ भी जायेगे, नेता बनने से पहले यह जेब काटने का काम, गुंडा गर्दी इन्ही बसो मे, अड्डो मे ओर झोपडपट्टी मै ही तो करते थे

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  5. बहुत ही बढिया व्यंग्य...लेकिन आपने कुछ जल्दी ही खत्म कर दिया...

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  6. क्या बात है अजय जी. और थरूर.....क्या कहने उनके भी.

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  7. इत्ते खतरनाक आइडिए....भला ऐसे मैं मंत्री कौन बनना चाहेगा ??

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  8. Vyang ki dhaar peni thi...

    Bis ye bhi bata diya hota ki Swasth Mantri ji ki is baare main kya rai hai?

    aur soochna evm prasaran mantralay ?
    unhein shashi ji ke twitteriya rog ke baare main kuch nahi kehna?
    :P

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  9. सोच रहा था जुगाड़ कर मंत्री-फ़ंत्री बन जाऊं मगर अब लग रहा है फ़िर से सोचना पडेगा।

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  10. बहुत बढ़िया लिखा आपने..पर समस्या ये है की मंत्री जी मानेंगे आपकी बात ..आज तो सब बस अपनी ही सुनते है.

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  11. अगर मंत्रियों के लिए ऎसे नियम निर्धारित कर दिए जाए तो बेचारे नेतागिरी करने की बजाय कहीं ठेला लगाकर सब्जी तरकारी बेचना ज्यादा पसंद करेंगें :)

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  12. बहुत हीं अच्छी खबर ली अपने मंत्रियो की ।

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  13. ताऊओं (मंत्रियों) से सीधे पंगें? देख लेंगे झा जी को भी.:)

    रामराम.

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  14. "..ये चांद मिंया के लिये मैसेज हो कि ...."


    फिज़ा ने मंत्रियों के साथ सांठ-गांठ करके राजनीति की फ़िज़ा बदल दी है:)

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  15. जनता की यह आवाज़ अगर मंत्री सुन लेते तो देश कबका सुधर जाता ।

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  16. bahut sahi ajay ji

    namaskar

    bahut hi behatreen lekh .. padhkar hi aanand aa gaya ji .. kaash koi aapki baat maan kar is desh ke mantriyo ko ye sabak de de.. to desh chalane waale jaan jaayenge ki desh ka real halaat kaise hai ..

    is lekh ke meri badhai sweekar kare.

    regards

    vijay
    www.poemsofvijay.blogspot.com

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मैंने तो जो कहना था कह दिया...और अब बारी आपकी है..जो भी लगे..बिलकुल स्पष्ट कहिये ..मैं आपको भी पढ़ना चाहता हूँ......और अपने लिखे को जानने के लिए आपकी प्रतिक्रियाओं से बेहतर और क्या हो सकता है भला

साथ चलने वाले

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