इस गैज़ेट में एक गड़बड़ी थी.

मंगलवार, 29 सितंबर 2009

ब्लोगवाणी के बिना एक दिन.....


अब से कुछ समय पहले एक बार एसा हुआ कि ...केबल टीवी वालों की हडताल हुई......उस समय ये डिश टीवी...फ़िश टीवी नहीं आया था.....और बदकिस्मती से हमें ये ब्लोग्गिंगा भी पता नहीं था...शायद उस वक्त ये गर्भ में ही थी...खैर तो मैं कह रहा थी कि केबल वालों की हडताल पूरे तीन दिन तक चली....और मत पूछिये कि कैसे कटे गम में ...वो दिन वो रात दोस्तों....टीवी था मौन, करनी पडती थी बीवी से ही बात दोस्तों.....बस किसी तरह रो धो के कट ही गये....

मगर हमें क्या पता था कि इतिहास खुद को ही दोहराता है.....हालांकि महफ़ूज़ भाई ने अभी कुछ दिन पहले ही इतिहास का एक पूरा पाठ पढाया था.....और वो रात तो कयामत की रात थी...जैसे अचानक ही ज्वालामुखी फ़टा और सब कुछ लावा की तरह बह गया....और बह गये उसमें हम सब ब्लोग्गर्स भी....मन में बस यही चल रहा थी.....

लो कर दिया इक धोबी ने फ़िर अपना संधान,
किसी को मिला वनवास ,अयोध्या हो गयी सुनसान.....

बस जी फ़िर तो अगले दिन का क्या कहें...हमारा हाल भी अन्य सभी ...ब्लोग्गर्स की तरह ही था...हम दूसरों से पूछ रहे थे और दूसरे हमसे....थोडी और खुजली बढी तो ....ये भी पूछा पाछी होने लगी...रूठे रूठे पिया ...माने कि नहीं...मानेंगे कि नहीं...सब तरफ़ घोडे दौडाये गये.....यार और भी हैं क्या ..जहां बलोग्स दर्शन हो सके....अपने अब बचे इकलौते पूत ..चिट्ठाजगत के अलावा .....
थे जो हाय मेरे दो अनमोल रतन.....
दोनों पाऊं फ़िर, कौन करूं ऐसा जतन

बर्दाश्त नहीं हुआ तो एक पोस्ट लिख मारी ..भटकते हुए ..जो भी जहां जहां मिले उनके बार में भी सोचा सबको बताते चलें....मगर कह दिया कि ...भाई ये माशूकायें हैं....इनसे अपनी धर्मपत्नी वाली निष्ठा की उम्मीद तो कतई न रखना ..सो भाई लोगों ..... नैन मट्टक्के के लिये ....चाहो तो लगे रहो.......हमें पता था..कि इन सबसे कुछ होने वाला नहीं है....अगला प्रयास ये रहा कि ..सोचा मीडिया मित्रों से कहा जाये ...यार हमारा संधि प्रस्ताव ले कर तुम ही कान्हा बन के चले जाओ..शायद हस्तिनापुर बच जाये..इसी बहाने तुम्हारे नाम इस युग का एक पुण्य तो हो ही जायेगा.....मगर वे सब के सब रावण फ़ूंकने में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे थे

हम भी अपने रावण.....मतलब हमारे यहां जिसे फ़ूंका जाना था उसे लिये हुए पहुंच गये....जितना रावण मुतमईन था उससे कम हम भी नहीं लग रहे थे......अबे क्या हुआ...रावण का साईज़ छोटा लगा क्या....नहीं नहीं...रावण का साईज़ तो राम जी (भाजपा वाले) और रहीम जी (अपने हाथ छाप वाले ) की दया से दिनोंदिन खूब बढ रहा है........तो फ़िर क्या रावण के जलने से खुश नहीं हो...कोई उधारी ली थी क्या रावण ने ...जो यूं थोबडा लटकाये खडे हो......अब उन्हें कौन समझाता ....कि किस तीर का असर कहां हुआ है......श्रीमती जी
ने आखिरकार भांप ही लिया.....क्या हुआ ब्लोग्गिंग में कुछ हुआ है क्या....तुम्हारी रोनी सूरत देख कर तो यही लगता है....खैर किसी तरह हमें..दुलारते-पुचकारते हुए ...रावण को समझाया गया कि ..भाई मियां...इस बार तो यूंही जल मरो.....इनको कोई होश नहीं है.....

हम भी रावण की तरह जले फ़ुंके ....घर आकर बिना कुछ लिखे पढे ...चादर तान कर सो गये.......हमें फ़िर से क्या पता था ......कि रात की सुबह होती है....

और सुबह हुई....अचानक फ़ोन की घंटी बजी ....भैया कोप भवन से बाहर निकल आओ....ब्लोगवाणी वापस आ गयी ......और इसके बाद भी बेचैनी कुछ कम नहीं हुई.......अजी नहीं सुनिये तो.....औफ़िस निकलना था...सोच रहे थे....यार दोस्त वापस आया है ......चैन से गले भी नहीं लगा सके....बैरन नौकरिया........

हम गाते रहे दिन भर...

तो राम ने वापस कर दी अयोध्या, खत्म हुआ बनवास,
प्रेम बडा और नफ़रत छोटी, फ़िर से हुआ विश्वास......

13 टिप्‍पणियां:

  1. hahahahahaha........ ajay ji maza aa gaya padh ke.........


    sahi kaha aapne.........

    राम ने वापस कर दी अयोध्या, खत्म हुआ बनवास,
    प्रेम बडा और नफ़रत छोटी, फ़िर से हुआ विश्वास......

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  2. अजय इस पोस्ट मे अपने मन की बात जिन मिथक प्रतीकों के मध्यम से आपने कही है वे तो बेहतरीन है।

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  3. चलिए इस बहाने धर्मपत्नी से बतियाँ करने का अवसर तो मिला ...

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  4. कल तो मिसेज झा जी बहुत खुश होगी, दो साल बाद पति देवता को फ़ुरसत जो मिली.....ओर आज आप खुश होगे कि फ़िर से ब्लांगिग का नशा चढ गया.
    आप ओर सब को बहुत बहुत बधाई ब्लांगबाणी के लोट आने की.
    ओर आप ने लेख बहुत सुंदर लिखा, इसे भाभी ने पढा कि नही

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  5. ब्लॉगवाणी आ गई है तो नूर आ गया है...
    नहीं तो ब्लॉगरों का जोश चकनाचूर हो रहा था...
    फुलझ़ड़ियां छोडने वाले झा जी भी हो गए थे धीर गंभीर...
    लेकिन अब उनकी अगली पोस्ट भी होगी मस्ती के लिए तीर..
    (झा जी आपकी पोस्ट पढ़-पढ़ कर तुकबंदी का शौक चर्राने लगा है..अब चाहे कूड़ा है झेलनी तो पड़ेगी ही..)

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  6. दुख भरा दिन बीता रे भईय्या
    अब सुख आया रे

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  7. बधाईयाँ जी कम से कम इस से एक पोस्ट तो बन ही गयी इसी बहाने ब्लागर्स दशहरा भी मन गया शुभकामनायें

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  8. हर अंधेरी रात के बाद चांदनी रात तय है. बधाईयां जी बधाईयां.

    रामराम.

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  9. वाह, अजय जी...बहुत खूब वर्णित किया ..
    धन्यवाद जी..

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  10. मैं तो इस अवसर से वंचित रह गया। जहाँ था वहाँ तो कम्प्यूटर ही नहीं था।
    अगले क्लाइमेक्स की प्रतीक्षा रहेगी ;)

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मैंने तो जो कहना था कह दिया...और अब बारी आपकी है..जो भी लगे..बिलकुल स्पष्ट कहिये ..मैं आपको भी पढ़ना चाहता हूँ......और अपने लिखे को जानने के लिए आपकी प्रतिक्रियाओं से बेहतर और क्या हो सकता है भला

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