इस गैज़ेट में एक गड़बड़ी थी.

गुरुवार, 3 सितंबर 2009

हम सेंटी हैं कि मेंटल .....चलिये आप ही बताइये..























बहुत दिनों बाद जैसे ही मित्र चिट्ठा सिंग....(ओहो..फ़िर गड्बड हो गयी...अच्छा चिट्ठा झा...चिट्ठा मिसर..या चिट्ठा शुकल कह लिजीये.....अरे क्यों नहीं कहेंगे...नहीं तो फ़िर अपने विवेक बाबू...को लगेगा कि जरूर हमने उनका ही सिंग तोड के ..चिट्ठा बाबू के चिपका दिया है....) तो मैं कह रहा था...कि जैसे ही वे मिले...कहने लगे...और झाजी...सुने हैं..बडे हौवा हौवा के पोस्ट ठेल रहे हैं..ऐसा लग रहा है जैसे आपको ही सबसे जादे भकभका के लगा है...और भी लोग हैं..कोइ इत्ता नहीं भडकता...आप तो बस घुस जाते हैं...एक दम ताऊ वाला लट्ठ ले के..उ के घर के भीतर तक...ई कोनो बात हुआ.....अरे ऊ जो सोच रहे हैं..जो लिख रहे हैं..ऊ उनका अपना निजि .(.निजि समझते हैं न....अरे निजि माने कि जो बात खुल्लम खुल्ला बताने के लिये आपको कौनो चैनल वाला पैसा दे ....तो समझिये वही निजि है...बांकी सब तो खाम्खा का बिजी है...)...मामला है....तो आपको काहे एतना मिर्चाई लग जाता है...का पूरा ब्लोग जगत का ठिकेदार बन गये हैं का....हमको तो लगता है ...आप एकदम से ...मेंटल हैं....
हम बौखला कर चौंकने वाला एक्स्प्रेशन देते...इससे पहले ही बोल पडे.....मेरा मतलब ....खाली मेंटल नहीं.....सेंटीमेंटल.....ओह...अब आपको कैसे समझाये.....अच्छा चलिये आपसे कुछ प्रश्न करते हैं...आप जवाब देते जाइये.....बकिया अपने आप पता चल जायेगा..कि आप हैं का ..सेंटी...कि मेंटल.....हम कहे कि ठीक है...अभी हमने कौन सा ताऊ को ....इंटरव्यू के लिये टाईम दिया हुआ है...तब तक यदि चिट्ठा सिंग कुछ ले रहे हैं .....तो हर्ज़ ही क्या है....शुरू हो जाईये.....

अच्छा बताइये कि क्या अब आपको दुनिया में सबसे प्यारा अपना लैपटौप लगता है....अपनी नौकरी और अपनी छोकरी से (छोकरी माने पत्नी )...से भी...

हां....कम से कम इन दोनों से ज्यादा तो जरूर करता हूं.....क्योंकि दोनों ही दुश्मन समझते हैं..मेरे बेचारे इस चपटे दोस्त को.......

आप सेंटी हैं.......


क्या आपको महसूस होता है....जैसे ब्लोग जगत में..कुछ दिन आप अनियमित होते हैं..तो लोग आपको मिस करने लगते हैं....


हां...हां.....कई लोग तो कहते भी हैं....क्या बात है भई...आजकल तो तुम भी पढने नहीं आते....अमा ब्लोग जगत के इतने काम तो आ ही सकते हो...यदि कुछ ढंग का लिखते नहीं तो ...टीपने के काम ही आ जाया करो....

अच्छा इसके बाद भी लगता है कि वे मिस करते हैं......मेंटल हो...


क्या ऐसा होता है...किसी ब्लोग पर को पढा...और बिना टीपे यदि किसी कारण से निकलना पडा तो मन उचाट सा हो जाता है.....


हां हां....होता है...कई बार होता है......सेंटी हुआ न..मैंने हुलस कर पूछा...हां...


अच्छा ...कभी ऐसा होता है..कि किसी पोस्ट में घुसे टीपने...टीप आये...फ़िर दोबारा जाकर देखा..कि कौन क्या क्या टीप रहा है....फ़िर किसी की टिप्प्णी को इस तरह से लिया ...जैसे....महाभारत सीरियल में......भीष्म कहते थे....आक्रमण......और सारे तीर कमान.....ले कर तैयार......


कभी ...हमेशा ऐसा ही होता है......और क्या बताऊं...होता ही रहता है....होता ही जाता है.......इसके साथ ही ..पता नहीं क्या क्या और भी होता है.....


बस बस....समझ गया.......ये सब मेंटल की निशानी है......


मेरा लटका बूथा देख कर ...चिट्ठा दिलासे देने वाले अंदाज़ में बोले.....अरे काहे उदास होते हो भैया....मेंटल लोग भी बहुत काम आते हैं ..कभी कभी....वैसे ..प्रशनों का एक राउंड और भी पूछा जायेगा...


चलिये ...तब तक हम भी और मित्रों से सलाह करते हैं.......कि हम सेंटी हैं कि मेंटल.....

24 टिप्‍पणियां:

  1. ब्‍लाग जगत में सब एक जैसे हैं !!

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  2. ख़ूब कही...........
    बहुत ख़ूब कही..........
    बधाई !

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  3. वैसे आप दोनों ही मिला कर हैं -सेंटीमेंटल

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  4. इतनी सेंटी - मेंटल पोस्ट पर कौन सेंटी ना होगा ?

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  5. अब क्या कहें?
    खग ही जाने खग की भाषा :-)

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  6. सेंटी तो हमने बी कर दिया तुसी
    पर मेन टल में से टलने वाले हम नहीं
    टहलते जरूर रहेंगे
    मेल में
    ब्‍लॉग पर
    टिप्‍पणियों में
    चाहे सेंटीफ्लैट हो जाएं
    पर सेंटीमेंटल बने रहेंगे
    जमे रहेंगे।

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  7. कोई गडबड जरुर है, अच्छी बात है आप आपस मै ही समझोता कर ले कि कोन सेंटी ओर कोन मेंटल है, हम कुछ नही बोलेगा, कहते है ना दुसरे की फ़टी मे टांग नही आडानी चाहिये....्फ़िर यहां तो ताऊ का लठ्ट भी दिख रहा है
    राम राम

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  8. पढ़ के अपुन भी सेंटी हो गया :-)

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  9. वैसे हमारी नजर में तो आप सैंटीमैंटल ही है....लेकिन हो सकता है कि किसी की नजर में सैंटी/मैंटल भी हों:)

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  10. आप तो बहुते सेंटी हैं.......वैसे पाबला जी सही आंक गये मौके पर:

    खग ही जाने खग की भाषा :-)

    हम तो चुप्पई रहेंगे!!

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  11. वाह वाह क्या बात है! बहुत खूब और बिल्कुल सही फ़रमाया आपने!

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  12. पाबलाजी ने सही ताड लिया, :) लगता है आपका इंटर्व्यु लेना ही पडॆगा? कब का टाईम देते हैं?:)

    रामराम.

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  13. ताऊ जी, दो-चार साल रूक जाइए, पहले इंटरव्यू देने लायक तो बन जाऊँ :-)

    अभी तो मेरे खेलने-कूदने के दिन हैं :-))

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  14. लिजीये ....मैं तो अभी अभी पैदा ही हुआ हूं फ़िर तो....आप बुजुर्ग लोग आपस में बातें किजीये....मैं सुन रहा हूं.........

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  15. झा जी , मैं बहुत नियमित तो नहीं हूँ, फिर भी ब्लोग्स पढना अच्छा लगता है, उसकी रचनात्मकता हमको कुछ न कुछ दे कर ही जाती. लेकिन आप ने जिस ढंग से ये ब्लॉग लिखा है, समझ नहीं आ रहा है कि आप क्यों जानबूझ कर हिंदी कि टांग तोड़ने का प्रयास कर रहे हैं, ऐसा नहीं है कि आप अच्छी हिंदी नहीं लिख रहे हैं फिर भी भाषा का सम्मान तो करिए.
    यह वह मंच है जिस पर खड़े होकर आप कुछ संदेश दे रहे हैं. कुछ अर्थपूर्ण और सार्थक तो होना चाहिए.
    कृपया गलत शब्द तो मत प्रयोग कीजिये. ऐसे ब्लॉग को पढ़ कर बहुत खूब बहुत खूब कहने का अर्थ मेरे समझ नहीं आता है. आप बहुत लोकप्रिय लेखक है ये तो समझ आ रहा है लेकिन इस ब्लॉग का संदेश मेरी समझ नहीं आ रहा है. आपसे सार्थक लेखन की आशा करती हूँ.

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  16. हा..हा..बढिया है. वैसे हमें कभी सेंटी और कभी मेंटल होते रहना चाहिये.

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  17. सेंटी लोग ही मेंटल कहलाते हैं जी आज कल ...पर्सनल तजुर्बे से कह रहे हैं :)

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  18. बहुत कन्फ्यूजन है भाई...जारी रहें.!

    ---

    आप हैं उल्टा तीर के लेखक / लेखिका? [उल्टा तीर] please visit: http://ultateer.blogspot.com

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  19. अरे भैया, किसी के सिंग हो या किसी के सिर से सिंग गायब हो, पर है तो सब के सब [सेंटी-सेंट परसेंट] मेंटल:)

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  20. न पूरा सेंटी हुये न पूरा मेंटल! बस कुछ कुछ हुआ है!

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मैंने तो जो कहना था कह दिया...और अब बारी आपकी है..जो भी लगे..बिलकुल स्पष्ट कहिये ..मैं आपको भी पढ़ना चाहता हूँ......और अपने लिखे को जानने के लिए आपकी प्रतिक्रियाओं से बेहतर और क्या हो सकता है भला

साथ चलने वाले

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