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शनिवार, 4 अप्रैल 2009

क्या अपने यहाँ भी हो रही है ऐसी ब्लॉग्गिंग ?

अभी हाल ही में ब्लॉग्गिंग को लेकर पढ़े एक आलेख में कई सारी चौंकाने वाली बातें पढी। हठात तो यकीन ही नहीं हुआ , मगर जब पूरी ख़बर विस्तार से पढी तो उस पर अविश्वास करने का कोई कारण नहीं था। ख़बर ये थी की दुनिया भर में जितने भी मीडियाकर्मी सलाखों के पीछे हैं उनमें से करीबन ४५ प्रतिशत लोग या तो ब्लॉगर हैं या वेब आधारित रिपोर्टर या सम्पादक हैं।
ख़बर में बताया गया है की मिश्रा में २००३ के बाद से अब तक करीब १४ हजार लोगों को सरकार के विरुद्ध ब्लॉग लिखने की वजह से गिरफ्तार किया जा चुका है। इरान में पिछले ५ सालों में ८ न्ब्लोग्गोरों को गिरफ्तार किया गया है तो चीन में २००३ के बाद से ११ ब्लोग्गरों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें से अधिकतर या तो अब भी जेल में हैं या उन्हें देश निकाला दे दिया गया है। इन आंकडों ने मुझे कुछ बातें सोचने पर मजबूर कर दी।

पहली ये की , यदि सचमुच यही ब्लॉग्गिंग है तो फ़िर हम क्या कर रहे हैं। क्या इन ब्लोग्गेर्स के साथ इसलिए ऐसा हुआ है क्योंकि ऊपर लिखित सभी देश अभिव्यक्ति की स्वंत्रता को बिल्कुल भी पसंद नहीं करते ऐसे में खुल्लम खुल्ला उन्की आलोचना को वे कैसे बर्दाश्त कर सकते हैं। सबसे अहम् बात ये की कौन कहता है की ब्लॉग्गिंग एक प्रभावहीन और औचित्यहीन अभिव्यक्ति माध्यम है जो दिशाहीन भी है। मुझे तो लगने लगा है की यदि सही मायनों में इसको दिशा मिल जाए तो बहुत सम्भव है की यहाँ इस देश में भी ये पत्रकारिता के हिलते डुलते आधार को न सिर्फ़ संभाल लेगा बल्कि उससे कहीं आगे निकल जायेगा।

इस आधार से तो लगता है की अभी तो हम महज शुरात ही कर रहे हैं। ये बेशक है की अब देश में और बाहर भी हिन्दी ब्लॉग्गिंग की , उनके लेखकों की, उनमें उठ रहे विषयों की और ब्लॉग्गिंग की दिशा और दशा की चर्चा हो रही है, और तमाम क्षेत्रों के दिग्गज देर सवेर इसका दामन थाम ही रहे हैं, किंतु अभी भी शायद वो धार वो पैनापन , वू कातिलाना अंदाज, वो बेबाकी , आ नहीं पा रही है। क्या ये सम्भव है की भैविश्य में हिन्दी ब्लॉग्गिंग का प्रहार और मिजाज भी सरकार और प्रशाशान को इतना तिलमिला दे के यहाँ भी एक आध को जेल जाना पड़े, मगर ये जनता के हित में होना चाहिए। महज अपने निजी विचारों और स्वार्थों से प्रेरित होकर लिखा जाने वाला सच भी फरेब जैसा ही लगता है।
जब मैं ख़ुद ही ब्लॉग्गिंग में आया था, तो ठीक ठीक नहीं समझ पाया था की आख़िर यहाँ मुझे करना क्या है, मगर देर से ही सही महसूस हुआ की अपने दिल की आवाज को सही शब्दों के सहारे सबके सामने रखना है। और अब तो मन करने लगा है की खुल्लम खुल्ला मैं भी शुरू हो ही जाऊं उस सत्य से परदा उठाने जिसकी हिम्मत अभी तक नहीं हो पायी है। दरअसल मेरा इशारा उस संस्थान (न्यायपालिका ) में छुपी गन्दगी को बाहर दिखाने की है जो पता नहीं किन कारणों से बहार नहीं आ पाती है। पता नहीं ये ठीक होगा या नहीं कम से कम खुल्लम खुल्ला अपनी पहचान कायम रखते हुए , देखिया क्या होता है.

10 टिप्‍पणियां:

  1. शुक्र है कि अभी भारत में बोलने की आज़ादी तो बची है:)

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  2. हमारे देश भारत में सभी को बोलने सुनने और अभिव्यक्त करने की भरपूर आजादी है . लोकतंत्र में जनता को यही तो फायदे है . धन्यवाद.

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  3. हमने तो कदम बढ़ा दिये हैं देखते हैं क्या होता है ।

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  4. आप न्यायपालिका की गंदगी को सामान्यीकृत कर के लिख सकते हैं। अब तो न्यायपालिका भी मानती है कि वहाँ गंदगी है।

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  5. हमारे यहाँ की न्‍यायपालिका अंग्रेजों की दी हुई है। अभी भी हमारे यहाँ दोहरे कानून हैं, एक राजा के लिए और एक प्रजा के लिए। इसी कारण न्‍यायपालिका में गंदगी पसरी पड़ी है। कोई भी राजनेता और भ्रष्‍ट नौकरशाही कानून के दायरे में जब तक नहीं आ सकती तब तक की इस देश में लोकपाल विधेयक को मंजूरी नहीं मिलेगी। आज ये लोग कानून से ऊपर हैं।

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  6. aap sabkaa bahut bahut dhanyavaad, padhne aur apne vichaar baantne ke liye. sach kahan aap logon ne kam se kam ham is maamle mein to anya bahuton se kaafee khushkismat hain.

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  7. अभी हमारे देश में अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता है। विश्व में सबसे बडा लोकतांत्रिक देश भारत ही कहलाता है । जहाँ हम अपने विचारों को सबके सामने रख सकते है। लिखनी की स्वतंत्रता के विषय में आपकी चिन्ता सही है।

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  8. chintaa karna prarambh kar dijiye kyonki India ke chinnayi [madras]main bhi blogers par bandishen shuru ho gayi hain .Aapka pryaas saraahniy hai.saadhu vaad.

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  9. ajay ji.. maine b ye khabar padhi thi...
    par mera pachha ye hai ki sarvjanik rup se abhivyakti ke liye kuch to naitikata honi chahiye,,,,
    aur ye apne yaha b dekhne mai aa raha hai ki kai blogger sari hadain par kar dete hai...

    abhivyakti ki swtantrata ka ye matlab kaha se aa gaya ki aapko kisi ko b gali de sakane ka adhikar mil gaya...

    sudhar vanchhaniy hai..

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मैंने तो जो कहना था कह दिया...और अब बारी आपकी है..जो भी लगे..बिलकुल स्पष्ट कहिये ..मैं आपको भी पढ़ना चाहता हूँ......और अपने लिखे को जानने के लिए आपकी प्रतिक्रियाओं से बेहतर और क्या हो सकता है भला

साथ चलने वाले

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