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रविवार, 28 अक्तूबर 2007

करवा चौथ सचमुच कड़वा है भाई !

चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी

करवा चौथ कि धूम मची है ,बाजारों में जिधर देखो मेहँदी ही मेहँदी लग रही है, और सारे पतियों को ये याद दिलाया जा रहा है कि, देखो बच्चे ,ये जो अग्रीमेंट किया था ( वैसे तो ये पतियों के लिए एक एक्सीडेंट ही होता है) उसको फिर से एक्सटेंशन मिल रही है। जिन जिन पुरुशात्माओं कि पत्नियों ने पिछले दिनों नवरात्रि के सारे व्रत रख कर अपना वज़न बढ़ा लिया और उनकी जेब और ,स्वयम उनका वज़न (यहाँ ये बता दूं कि बहुत से प्राणियों का वज़न सिर्फ और सिर्फ उनके जेब के वज़न पर निर्भर करता है) घटा दिया वे बेचारे यही सोच कर परेशां हो रहे हैं कि यार ये सारे व्रत एक साथ ही क्यों आ जाते हैं कम कम एक महीने का गैप तो होना ही चाहिऐ ।
बाजारों में मेहँदी लगाने से संबंधित जो प्रथा स्थापित है उस पर हमारी फुरसत में रहने वाली टीम ने बड़ा ही गहरा शोध और अध्यन किया है, और कुछ बहुत ही गोपनीय बातें सामने आई हैं जिन्हें इसी अवसर पर यदि सामने ना रखा गया तो वो क्या करेंगे गोपनीय रह कर। यह जो बाज़ार में सारे मकबूल फ़िदा हुस्सैन बैठ कर सुंदर सुंदर महिलाओं और कन्याओं कि नरम नरम हथेलियों पर एक से एक चित्रकारी करते रहते हैं वे १०० प्रतिशत कुंवारे होते हैं । इसी लिए उन्हे उन शादी शुदा बेचारों के दर्द से कोई मतलब नहीं होता जो बेचारे इस एक्सटेंशन प्रमाणपत्र को अपना सामने ही इस तरह सजते हुए देखते हैं।
मेहँदी कि इस रस्म के दो तरह के तत्काल प्रभाव जरूर पड़ते हैं । पहला ये कि जो पति अपनी पत्निओं को स्वयम ही बाज़ार ले कर मेहँदी लगवाने को तत्पर होते हैं तो ये समझ जाना चाहिऐ कि वे अपनी पत्निओं से तंग आ चुके हैं और बाज़ार सिर्फ इसलिए जा रहे हैं ताकि जितनी देर में मेहँदी लगाने का पूरी प्रक्रिया पूर्ण हो कम से kam उतनी
देर तक वे किसी और कि खूबसूरत बीवी को निहार सके. दूसरा और सबसे खतरनाक प्रभाव ये कि उसके बाद पत्नी कम से कम अगले पांच घंटों तक कोई भी काम खुद नहीं करने वाली और बच्चा पकड़ने से लेकर पत्नी को पानी पिलाने का महान काम भी आपको खुद ही करना पड़ेगा।
करवा चौथ के समबन्ध में पिछले वर्षों में महान बिग बी साहब ने एक और नयी मुसीबत सबके लिए पैदा कर दी । बुढापे में खुद तो अपने दोस्त वीरू कि सुंदर बीवी के लिए बागबान में करवाचौथ का व्रत रख लिया, ( सबका मानना है कि इस तरह का व्रत तो उन्हे कभी ख़ुशी कभी गम में अपनी बीवी के लिए रखना चाहिऐ था) और बाकी पतियों को फंसा कर चले गए । पिछली बार ऐसी ही एक जिद पर मैने तो अपनी धरम पत्नी जी को स्पष्ट कह दिया था कि मैं यह व्रत तभी करूँगा जब तुम हेमा कि तरह मुझ से दूर चली जाओगी या नहीं तो कहो तो अपनी सबसे पक्के दोस्त फुग्गा सिंह कि पत्नी कचनार कौर के लिए ही रखूंगा। इसके बाद उन्होंने कभी मुझे व्रत रखने के लिए नहीं कहा।
तो भैया आप सबके लिए तो पता नहीं कि ये व्रत कैसा टेस्ट देगा मगर हमारे लिए तो सचमुच ही बहुत , बहुते , बहुत ज्यादे कड़वा है भाई। भगवान् आप लोगों का सुहाग बनाए रखे।
आपका
jholtanma

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