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शनिवार, 31 दिसंबर 2011

हिंदी अंतर्जाल पर चार वर्ष पूरे ..ब्लॉगियाते , फ़ेसबुकियाते और ट्विट्टराते अनुभव






मुलाकातों का सिलसिला चल निकला



फ़िर तो यादें ही यादें


इस बीच हिंदी अंतर्जाल पर कब चार साल का सफ़र पूरा हो गया इसका अहसास ही नहीं हुआ । यूं तो ये सफ़र इतना बडा लंबा और विस्तृत नहीं है कि इसके लिए अभी कुछ लिखा कहा जाए ,किंतु पिछले चार सालों में अंतर्जाल पर बीते बिताए लम्हों को , उसके बहाने बने नए पुराने रिश्तों को , दिनचर्या में आए बदलाव को , और शायद सोच में आए परिवर्तन को थोडी देर ठहर कर टटोलने का मन हो तो फ़िर इससे बेहतर मौका और क्या हो सकता था भला । वर्ष २०११ अपने अंतिम पडाव पर है , बेशक दिन रात में कोई बडा फ़र्क न आता हो , या शायद ठंड के तेवर में भी रत्ती भर का फ़र्क पडता हो इससे ,किंतु ये तो होता ही है कि वर्ष की आखिरी संख्या बदल जाती है ।
और ढेर सारी सुनहरी यादें

शुरूआत में हिंदी अंतर्जाल से परिचय सिर्फ़ ब्लॉगर तक ही हुआ था वो भी एक खूबसूरत संयोग से । शायद सितम्बर अक्तूबर महीने की बात है जब कादम्बिनी ने अपने एक अंक को ब्लॉग और ब्लॉगर्स पर आधारित करके आठ पेज के एक लबें आलेख के साथ साथ बहुत कुछ बताया समझाया था ब्लॉग के बारे में । उस अंक और अपने एक सहकर्मी जो उस समय कंप्यूटर में और अब भी मुझसे दक्ष थे , उनकी मदद से ब्लॉग भी बन गया और ब्लॉगिंग भी शुरू हुई । हम दोनों के लिए ही ये एक नया अनुभव था । हालांकि उस वक्त हिंदी अंतर्जाल से सायबर कैफ़े में बैठ कर सिर्फ़ एक डेढ घंटे की नियमित जानपहचान से ज्यादा तक बात नहीं पहुंची थी । अंतर्जाल पर बिताए उन एक घंटों के दौरान ध्यान सिर्फ़ ब्लॉग लिखने और पढने तक ही सीमित रहता था । हमारे लिए एक इस नए फ़लक पर विचरने के अलावा हिंदी अंतर्जाल से जुडने का एक दिलचस्प कारण ये भी रहा कि जब भी सहकर्मियों और उस समय के मीडिया मित्रों को जैसे ही किसी ब्लॉग का पता थमाया ,पृष्ठ खुलने पर हिंदी में सामग्री को देख कर उनके हर्षमिश्रित चेहरे को देखने का मचा ही और होता था , और यकीन मानिए कि ऐसा अब भी कई बार हो जाता है ।कल्पना करिए कि उन्हें जब ब्लॉगवाणी ,चिट्ठाजगत ,हिंदी ब्लॉग्स , नारद , सारथि , रफ़्तार जैसे एग्रीगेटर्स की झलक दिखाई जाती तो क्या होता होगा ।
विमर्श ,बहस , बैठक


गूगल , वर्डप्रेस ,या किसी भी अन्य प्लेटफ़ार्म ने अब तक , हिंदी अंतर्जाल पर लिखने पढने वाले ब्लॉगर्स के लिए कहीं से भी धेले भर आर्थिक लाभ नहीं देने के बावजूद हिंदी ब्लॉग्स की संख्या बढती रही ।और तो और कई जुझारू साथियों ने अपने अपने समाचार पोर्टल और सामूहिक ब्लॉग्स की ऐसी धूम मचाई कि कहीं इसे न्यू मीडिया का नाम दिया जाने लगा तो कहीं भविष्य का साहित्य संसार ।  इसके साथ ही बढती रही हिंदी अंतर्जाल द्वारा उत्पन्न की जा रही चुनौती । मीडिया , साहित्य और सरकार तथा प्रशासन तक के लिए ये उनकी आंख की किरकिरी बन कर उभर आया । सबसे कमाल की बात ये रही कि , तुम मुझे चाहो या मुझसे नफ़रत करो ,मगर मुझे नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते जैसे आज हिंदी अंतर्जाल को दरकिनार करना बहुत कठिन हो गया है ।
कभी तिलयार

हिंदी अंतर्जाल के प्रारंभिक दो वर्ष अनियमितता और बेतरतीबी से ही बीते , और इसके कारण भी कई थे । घर पर कंप्यूटर आने के बाद हमारे जैसे लिखन पठन के व्यसनी के लिए इससे बेहतर साथी और कौन हो सकता था । और फ़िर ऐसा भी नहीं था कि यहां सबकुछ आभासी ही है ,बल्कि कभी कभी तो यहां उससे ज्यादा देखने और महसूसने को मिला जो वास्तविक जीवन में शायद उतना तल्ख नहीं रहा है अब तक । मसलन ,कुछ दिनों तक एग्रीगेटर्स और उस समय के दो बेहतरीन संकलकों पर लगातार बमबारी , सक्रियता क्रम और पसंद नापसंद वाले बटन को लेकर , एक से एक , जी बिल्कुल एक से बढकर एक तहलकी (यूं तो ये तहलका का वर्जन है लेकिन जिसका अर्थ तल से हलकी ) रिपोर्टें आईं । पोस्टों में ही संकलंकों का नाम लेकर उन्हीं की छाती पर रोज़ क्विंटल क्विंटल भारी चार्ज़शीट लादी गई ।

अब इसका और इसके साथ ही अन्य बहुत सी कारगुजारियां का  कुल परिणाम ये रहा कि एक एक करके दोनों ही संकलक , ब्लॉगरों को गड्डम गड्ड छोड के चलते बने । हालांकि , चूंकि दोनों अभी मौजूद हैं तकनीक की भाषा में कहें तो सर्वर पर हैं तो कभी न कभी यदि वे वापसी करें तो कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए । लेकिन इसका परिणाम ये हुआ कि हिंदी ब्लॉग के पाठकों ने फ़िर पढने के लिए अपने अपने विकल्प तलाशे । इस प्रयास में कई बेहतरीन संकलक ,जैसे हमारीवाणी , इंडली , ब्लॉगप्रहरी , ब्लॉगमंडली ,बलॉगगर्व , के अलावा दर्ज़नों फ़ीड क्ल्सटर प्लेटफ़ार्म , तथा बहुत सारे ब्लॉगस्पॉट संकलक ब्लॉग्स पाठकों के सामने निकल कर आए ।

कभी सांपला

बहुत सारी उथल पुथल , सम्मान , आरोप , बैठकों , के बीच पिछले कुछ महीनों में ये बदलाव दोस्तों ने महसूस किया कि , हिंदी ब्लॉगिंग के प्रति रुझान कम हुआ है ,पोस्टों पर पाठकों की संख्या और टिप्पणियों की संख्या में भी बहुत कमी आ गई है । इसके लिए सोशल नेटवर्किंग साइट्स का बढता प्रभाव भी एक कारण माना गया । लेकिन इससे अलग एक बहुत बडा कारण खुद गूगल की सेवाओं , विशेषकर जीमेल और ब्लॉगर में बहुत सारी गडबडियों का होते रहना भी जरूर रहा । आज भी हिंदी ब्लॉगिंग को लेकर गूगल और वर्डप्रेस जैसी सेवा प्रदाता कोई भी कंपनी के पास कुछ भी आम या खास नहीं है । यहां तक कि ये गारंटी भी नहीं कि कल को आपका जीमेल खाता या ब्लॉगर खाता ही नदारद मिले । शायद इसलिए मुझ सहित बहुत सारे मित्र , इस ठिकाने को पुख्ता करने के लिए अपने पक्के ठिकानों की ओर बढ चले ।
नए ठिकाने का थंबनेल


हिंदी ब्लॉगिंग से जुडे दोस्तों की फ़ेहरिस्त बहुत लंबी है ,नाम लूंगा तो मुझे यकीन है कि चाहे लाख कोशिश कर लूं ,किसी न किसी का नाम तो छोड बैठूंगा ही । फ़िर इस ब्लॉगजगत से लेकर , फ़ेसबुक , ट्विटटर और अन्य तमाम मंचों पर इतना स्नेह व मान मिला , अच्छे बुरे वक्त में , जो साथ और अपनापन मिला , और अब भी मिल रहा है ,उसे सिर्फ़ महसूसा जा सकता है ,लिखा नहीं ।ये एक कमाल का संयोग रहा कि , अपने लगभग दो दर्ज़न ब्लॉग्स में से चार ब्लॉग्स पर साथी अनुसरकों की शतकीय संख्या को पाना , लगभग एक हज़ार पोस्टों , और इतनी ही तस्वीरों की यादों समेत ,मेरी मौजूदगी को बेपनाह स्नेह मिलता रहा ।



ये जरूर है कि आने वाले समय में हिंदी ब्लॉगिंग एक मंच के रूप में , एक माध्यम और एक विधा के रूप में ,एक तकनीक के रूप में , एक वर्ग के रूप में , एक विचारधारा के रूप में स्थापित हो इसी दिशा में , मैं अंतर्जाल की अपनी इस यात्रा को आगे बढाऊंगा । बेशक इस साल बहुत सी कडवी यादों और घटनाओं में से एक , गुरूवर और मित्र स्व. डॉ. अमर कुमार  तथा फ़िर हिमांशु भाई का अचानक चले जाना रहा और कहीं न कहीं ये जता बता गया कि , जब तक साथ है , अभिव्यक्त करो ...करते रहो , करते रहो । मंच चुनो ,माध्यम चुनो , तरीका और शैली भी जो पसंद हो चुनो लेकिन इंसान हो तो इंसान की भावनाओं को अभिव्यक्त करो , क्योंकि ये समाज के अस्तित्व के लिए बहुत जरूरी है । और कमाल देखिए कि हम खुद भी इस बीच बहुत बदलते रहे ,













इस उम्मीद के साथ कि आने वाले दिन , हमारी आपकी सोच के साथ ही बदलेंगे और ठीक वैसे बदलेंगे जैसा कि हमने आपने चाहा है , मैं इस सफ़र के अगले पडाव की ओर बढता हूं ,मुझे यकीन है कि हमेशा की तरह आप मेरे साथ हैं , आप सबको शुभकामनाएं .......साथ , स्नेह , विश्वास , बनाए रखिएगा ।

23 टिप्‍पणियां:

  1. सही कह रहे देखते देखते काफी कुछ बदल गया ... वैसे यह बदलाव भी बेहद जरुरी है जीवन के लिए ... रहा सवाल ब्लोगिंग का ... तो मेरा मानना यह है कि अभी सिर्फ़ शुरुआत हुयी है ... असली परवाज तो अभी हम लोगो ने देखी ही नहीं है !

    आपको सपरिवार नव वर्ष २०१२ की हार्दिक बधाइयाँ और शुभकामनाएं !

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  2. अतिशय बधाईयां , आप ऐसे ही दमकते रहें।

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  3. दिन महीने साल गुज़रते जाएंगे.
    हम ब्लॉगिंग में जीते, ब्लॉगिंग में मरते जाएंगे,
    देखेंगे, देख लेना...

    उपलब्धिपूर्ण चार वर्ष पूरे करने के लिए बधाई और आने वाले गौरवपूर्ण वर्षों के लिए शुभकामनाएं...

    वैसे अजय भईया, जैसे आप उम्र के रिवर्स गियर में चल रहे हैं, मुझे डर है कि कहीं एक दिन बाल ब्लॉगरों को भी चुनौती न देने लगें...

    जय हिंद...

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  4. मुबारक हो चार साल का सफ़र! आगे के लिये मंगलकामनायें। :)

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  5. अंतर्जाल मे ब्लॉग की भूमिका रचनाकारों के लिये तो अद्वितीय है ही साथ ही हम जैसे अबूझ-माड़ से आये इंसानों के लिये भी बहुत फ़ायदेमंद रही। भले ही हम साहित्य का "सा" भी नही जानते पर मन के उद्गार प्रकट करने मे आप समस्त मित्रों की भूमिका अविस्मर्णीय है। यादों को सुंदर ढंग से सजाने व नये साल की हार्दिक शुभकामनाओं सहित……॥

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  6. नव वर्ष की हार्दिक बधाइयाँ और शुभकामनाएं !

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  7. हम खुद आ गए अपना नाम दर्ज कराने, आपके साथ की मीठी यादों सहित.

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  8. अच्छी गर्मागर्म यादें हैं जिन्हें संजो कर रखना चाहिए ।
    आपको सपरिवार नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें ।

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  9. yaade... kimti yaade ..aur sahi kaha ki kuch badal gaya hai kuch yaade apani gaherai apane manas patal par apani chaap chodkar hi jati jati ...

    acchi aur damdaar post

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  10. इन चार वर्षों में क्या कुछ नहीं हुआ!!!!! मूंछ से सफ़ाचट भी :)

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  11. शुभकामनाएं, लेकिन इन दिनों नियमित नहीं रहे हैं।

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  12. शुभकामनाएं, लेकिन इन दिनों नियमित नहीं रहे हैं।

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  13. हिंदी ब्लॉगिंग में धुंआधार, शानदार, चमकदार, मजेदार चार वर्ष के सफ़र के बाद अंतर्जाल की अपनी इस यात्रा को आगे बढ़ाते हुए अगले पड़ाव की शुभकामनाएँ

    सफ़र जारी रहे बदलावों के साथ
    क्योंकि
    परिवर्तन, जीवन का ही दूसरा नाम है

    इस मौके पर
    ढ़ेर सारी ज़फ्फी इधर से
    और
    पप्पी उधर से लीजिए :-)

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  14. आशा है कि यह सफर चलता रहेगा।

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  15. धुंआधार ब्लॉगिंग ब्लॉगिंग ब्लॉगिंग
    नववर्ष की आपको बहुत बहुत हार्दिक शुभकामनाएँ.

    शुभकामनओं के साथ
    संजय भास्कर

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  16. शुभकामनायें ....ये सफर हूँ ही चलता रहे ...और काफिला बनता रहे

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  17. बहुत अच्छी तस्वीरों के साथ नये साल की बधाई

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  18. अरे वाह ....बढिया और खूबसूरत पेशकश

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मैंने तो जो कहना था कह दिया...और अब बारी आपकी है..जो भी लगे..बिलकुल स्पष्ट कहिये ..मैं आपको भी पढ़ना चाहता हूँ......और अपने लिखे को जानने के लिए आपकी प्रतिक्रियाओं से बेहतर और क्या हो सकता है भला

साथ चलने वाले

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