अथ जूतम जूता जुत्ते जुत्ते ....
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इन दिनों आधुनिक काल में ईराकी समाज से से निकली प्रथा ..पदम पादुका पदे पदे
..यानि कि जूता चलाइए ..अभियान ने धीरे धीरे भारत में भी दोबारा से अपना महत्व
स्...
2 दिन पहले




























हाथ में मोबाइल ( कैमरा ) हो तो शिकारी बन ही जाते हैं । :)
ई तो बहुते सानदार फोटुएं आई हैं ।
चौथी और छठी विशेष रूप से बहुत अच्छी लगी ।
डॉ टी एस दराल ने कहा…
15 जनवरी 2012 3:31 pm
गजब फोटो है सब की सब ... जय हो महाराज !
शिवम् मिश्रा ने कहा…
15 जनवरी 2012 3:34 pm
वाह फ़ोटो ही फ़ोटो ☺
काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…
15 जनवरी 2012 3:41 pm
कितने मेगापिक्सेल का है, फोटो तो गजबिया लग रहा है।
प्रवीण पाण्डेय ने कहा…
15 जनवरी 2012 5:45 pm
फोटोवाज लग रहें है आप, मोबाइल कौनसा है यह तो बताएं ?
Sunil Kumar ने कहा…
15 जनवरी 2012 5:52 pm
जी मोबाइल नोकिया 5233 है , और एक जरूरी बात ये बताना भूल गया कि इनमें से अधिकांश चलती हुई रेलगाडी की खिडकी और दरवाज़े से खींची गई हैं । हां सच कहूं तो इससे खींची तस्वीरें मुझे भी पसंद आती है ।शुक्रिया आप सबका , आप सबको अच्छी लगी तो मुझे भी अच्छा लगा
अजय कुमार झा ने कहा…
15 जनवरी 2012 6:08 pm
बहुत सुंदर ..
संगीता पुरी ने कहा…
15 जनवरी 2012 6:27 pm
बधाई स्वीकार करें |
आकाश सिंह ने कहा…
15 जनवरी 2012 8:58 pm
Arey waah... Gazab fotu khiche hai bhayya... Aap to fotugraphy bhi mast kar lete hain... Kuchh chhodenge ki nahi???
Shah Nawaz ने कहा…
15 जनवरी 2012 9:27 pm
बढि़या तस्वीरें, लेकिन पेज खुलने में समय लगा.
Rahul Singh ने कहा…
15 जनवरी 2012 10:18 pm
राहुल जी ,
ऐसा शायद इसलिए हुआ क्योंकि तस्वीरें काफ़ी बडी हैं ।
अजय कुमार झा ने कहा…
15 जनवरी 2012 10:21 pm
बहुत सुन्दर फोटो हैं ..
संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…
16 जनवरी 2012 12:31 am
पुनाईचक बेलीरोड लिखा देखे के मोन खुश हो गया भिया.. :)
PD ने कहा…
16 जनवरी 2012 12:42 pm
सारी ही अच्छी है।
ajit gupta ने कहा…
16 जनवरी 2012 12:55 pm
छः हज़ार चित्र... हम्म्म. इनमें से आपके पसंदीदा चित्रों को अलग करना न भूलें. "बहुत बार मुसीबत में फ़ंसने के बावजूद , फ़ोटो खींच कर सहेजना मुझे पसंद आता है । " और अगली बार आपने जिन मुसीबतों का ज़िक्र किया है, उनके बारे में बताएं, उम्मीद हैं, वहां हास्य का पुट भी होगा. :)
अनूषा ने कहा…
1 फरवरी 2012 12:23 pm
मोबाइल से फोटो खींचना मेरा भी पसंदीदा शगल है...उसमें कुछ ऐसा कैप्चर हो जाता है जो वैसे बिसर जाता। जैसे स्टेशन पर बिकते कुछ बांस के खिलौने...या सूप फटकती कोई दादी अम्मा या पीले हरे खेत...बहुत कुछ ऐसा जो आपके ब्लॉग पर यहाँ सकेरा हुआ दिख रहा है।
अच्छा लगा :) फोटो खींचना जारी रहे :)
Puja Upadhyay ने कहा…
2 फरवरी 2012 1:05 pm
यूँ ही आना हुआ आपके ब्लॉग पर...
कहते हैं ना..its man behind the camera..
सो मोबाइल कौन सा है क्या पूछें...
बढ़िया फोटोग्राफी..
सादर.
vidya ने कहा…
20 फरवरी 2012 10:54 pm
अच्छा लगता है अपनी दुनिया को फैलते देखते हुए। जब तक संबंध हैं,तभी तक संसार।
कुमार राधारमण ने कहा…
20 फरवरी 2012 11:03 pm