गुरुवार, 16 जून 2011

bm-feedback@nic.in...............ताकि सनद रहे ....



चित्र , गूगल से साभार



आज मेरे मोबाईल पर एक संदेश आया , भ्रष्टाचार पर अपने विचार सरकार को भेजें इस मेल पते पर bm-feedback@nic.in.पहले तो मैं चौका कि क्या ये सचमुच उसी सरकार की तरफ़ से आया है जिसने थोडे दिनों पहले ..लाठी मैसेज सेवा देकर लोगों को बता दिया था कि खुद उसका भ्रष्टाचार को लेकर रुख क्या है । लेकिन फ़िर समाचार पत्रों में इस बाबत पढा तो पाया कि ये वाकई सरकार की तरफ़ से आम लोगों तक पहुंचा संदेश है जिसमें सरकार लोगों से भ्रष्टाचार के मुद्दे पर उनकी राय जानना चाहती है । तो इसलिए इस पोस्ट के माध्यम से मेरा आप सबसे ये आग्रह है कि इस मेल पते पर सरकार को इतनी मेल भेजी जाए कि उनको जरा सही सही अंदाज़ा तो हो कि वाकई जनता क्या सोच रही है इस भ्रष्टाचार के मुद्दे पर और सरकार के लिए उसके पास क्या संदेश है । मैं अपना पत्र कल सार्वजनिक करूंगा यहीं पर जो मैं मेल करने जा रहा हूं । आप अगर मेल से नहीं भेजना चाहते अपना मत , तो चिट्ठी ,पत्री , फ़ोन , अखबार , जिस भी माध्यम से चाहें अपनी राय जरूर रखें सरकार के सामने । अंतर्जाल पर  लिखने पढने वाले तमाम मित्रों से ये आग्रह है कि दो शब्द लिखें या दो हज़ार , लेकिन आप लिखें जरूर और अगर उचित लगे और लगे कि वो औरों के सामने भी आनी चाहिए तो उसे उपयुक्त मंचो पर बांटिए भी ।


यहां पर सोशल नेटवर्किंग साईट्स से जुडे तमाम मित्र और सभी मीडिया मित्रों से एक सहायता और साथ ये चाहते है हम कि वे सब अपने अपने माध्यमों में अब इस जनलोकपाल बिल के मुद्दे को बहस और विमर्श के लिए खुला छोडें । आम लोगों से सीधा पूछा जाए कि वे क्या चाहते है । विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में लगाता बहस चले और लोगों के विचार रखे जाएं । न सिर्फ़ आम लोगों बल्कि , नेता , अभिनेता , खिलाडी , फ़िल्मकार , साहित्यकार , सबको इस मुद्दे पर अपनी राय रखने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए । इससे सरकार को तो अंदाज़ा हो ही जाएगा खुद लोगों को भी ये ठीक ठीक पता चलेगा कि क्या वाकई जनता परिवर्तन चाहती है , क्या वाकई जनता चाहती है कि कोई ऐसा पहरेदार आए अब देश को बचाने के लिए जिसके पास इतने अधिकार हों कि वो न शहंशाह के कानून की तरह , खुद ही मुजरिम ढूंढ के , खुद ही उसका मुकदमा सुने और सजा भी सुनाए ? लडाई शुरू तो बहुत पहले हो चुकी थी ,जरा मध्यांतर के लिए विश्राम मोड में आ गई थी अब पुन: अटेंशन मोड में आ जाइए ..कल मिलता हूं अपनी पाती के साथ

14 टिप्‍पणियां:

  1. आप भेजिए ... हम भी तैयारी में लगते है ...

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  2. बहुत अच्छा और प्रेरक विचार है।
    ज़रूर भेजेंगे।

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  3. अजय जी, मैंने एक पोस्‍ट लिखी थी - "व्‍यवस्‍था परिवर्तन करो और भ्रष्‍टाचार से मुक्ति पाओ" - 25 जुलाई 2010 को। इसमें मैंने लोकपाल बिल की उपयोगिता पर प्रकाश डाला था। आप उसे देखें।

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  4. बहुत अच्छा और प्रेरक विचार है।
    ज़रूर भेजेंगे।

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  5. अच्छी जानकारी दी धन्यवाद हम भी जरुर कुछ लिखेंगे | आप ने सही कहा की ये चर्चा बंद नहीं होनी चाहिए और माहौल लगातार बना होना चाहिए तभी सरकार पर कुछ करने का दबाव होगा नहीं तो उसे लगगे की उसने तो बड़ी आसानी से इस सारे आन्दोलन को दबा दिया अब उसे इस पर ध्यान देने की जरुरत नहीं है |

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  6. बहुत बढ़िया हम तो लगे हुए हैं अजय भाई चाहे अंजाम जो भी हो...कुछ न कुछ तो अच्छा परिणाम आएगा ही अच्छे व ईमानदारी भरे प्रयास का...

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  7. बहस में सबके भय दूर होंगे और बाहर भी आ जायेंगे।

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  8. 'ये इश्क नहीं आसां,बस इतना समझ लीजै,
    इक आग का दरिया है और डूब के जाना है।'

    व्‍यवस्‍था परिवर्तन और भ्रष्‍टाचार से मुक्ति पाने की राह भी कुछ ऐसी ही है।

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  9. जरुर लिखते हैं..आपकी पाती का इन्तजार भी.

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  10. मेरा बिना पानी पिए आज का उपवास है आप भी जाने क्यों मैंने यह व्रत किया है.

    दिल्ली पुलिस का कोई खाकी वर्दी वाला मेरे मृतक शरीर को न छूने की कोशिश भी न करें. मैं नहीं मानता कि-तुम मेरे मृतक शरीर को छूने के भी लायक हो.आप भी उपरोक्त पत्र पढ़कर जाने की क्यों नहीं हैं पुलिस के अधिकारी मेरे मृतक शरीर को छूने के लायक?

    मैं आपसे पत्र के माध्यम से वादा करता हूँ की अगर न्याय प्रक्रिया मेरा साथ देती है तब कम से कम 551लाख रूपये का राजस्व का सरकार को फायदा करवा सकता हूँ. मुझे किसी प्रकार का कोई ईनाम भी नहीं चाहिए.ऐसा ही एक पत्र दिल्ली के उच्च न्यायालय में लिखकर भेजा है. ज्यादा पढ़ने के लिए किल्क करके पढ़ें. मैं खाली हाथ आया और खाली हाथ लौट जाऊँगा.

    मैंने अपनी पत्नी व उसके परिजनों के साथ ही दिल्ली पुलिस और न्याय व्यवस्था के अत्याचारों के विरोध में 20 मई 2011 से अन्न का त्याग किया हुआ है और 20 जून 2011 से केवल जल पीकर 28 जुलाई तक जैन धर्म की तपस्या करूँगा.जिसके कारण मोबाईल और लैंडलाइन फोन भी बंद रहेंगे. 23 जून से मौन व्रत भी शुरू होगा. आप दुआ करें कि-मेरी तपस्या पूरी हो

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  11. कहीं ऐसा तो नहीं कि सरकार-बहादुर अपने विरोधियों की लिस्ट बना रही हो ?
    फिर भी हम भेज देंगे !

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  12. bhrastacharya ki mukhya jad h jo fimails 18 ki age me sarkari naukri me mil jati h ispr rok lgni chahiye!
    kisi b sarkari vibhag me fimails ki age 28 se km n li jaye,
    srkar se nivedan h ki hr dipot me job ke liye kuch praivet admi rkhne chahiye jinke pas koi unr,anubhav aur yogyta h

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मैंने तो जो कहना था कह दिया...और अब बारी आपकी है..जो भी लगे..बिलकुल स्पष्ट कहिये ..मैं आपको भी पढ़ना चाहता हूँ......और अपने लिखे को जानने के लिए आपकी प्रतिक्रियाओं से बेहतर और क्या हो सकता है भला

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