यूं तो आप अभी सिर्फ़ लादेन से जुडी खबरों पर विषयों पर और उसकी दाढी मूंछ न काट कटा पाने पर भी लिख सकते हैं अगले एक महीने तक ..( सिंपल है जी , जब लादेन से जुडी बातें खत्म हो तो उसके बच्चों , पोते पोतियों सब पर भिड जाइए ) लेकिन चूंकि पिछले दिनों हिंदी ब्लॉग जगत के अति संवेदनशील घोषित किए जाए चुके भूभाग पर फ़िर से कुछ ब्लॉग हलचलें देखी गई और ब्लॉगटर ( ये रिक्टर पैमाने का एक गूगलीय वर्जन है ) पे इसकी तीव्रता ..अरे अभी आंकी कहां गई है अभी तो लोग नापिए रहे हैं ..अलग अलग थर्मामीटर से ..तो इसलिए ये हमारा फ़र्ज़ बनता है ...जब उनका बन सकता है जो इस हलचल से हुए नुकसान की .गहराई .वो......दूर से माप रहे थे तो फ़िर हमारा तो जैसे धर्म कर्म मर्म चर्म सब कुछ बनता था इससे रिलेटेड ( देखिए इसके लिए तो अब खास टराई भी नहीं करना होता ..बस कौमा क्वेश्चन मार्क भी लगा देंगे तो भाई लोग खुद रिलेट कर लेंगे ) कुछ लिखने पढने का । सो पढ तो हमने पोस्ट से लेकर अखबार की कतरन तक सब डाली , लेकिन अपना कर्मबोध और जोर मारने लगा तो सोचा कि ये पोस्ट लिखनी भी निहायत ही जरूरी है ,इसलिए लिख ही डाली ।
तो पहला सूक्त नियम ये है कि
आप हिंदी ब्लॉगिंग को समय समय पर गरियाते रहें , उसे कोसते रहें , माखौल उडाते रहें , खिल्ली उडाते रहें , और इस काम में आपका सहयोग भी कुछ साहित्यकार , कुछ पत्रकार , कुछ समाचार आदि भरपूर साथ निभाएंगे , और कमाल कि बात ये है कि इसके लिए ये कतई जरूरी नहीं है कि आपने ब्लॉग लेखन कब शुरू किया , पिछली दस पोस्टें भी पढीं हों या न हों ..आप तो शुरूआत ही एक गरियायमान पोस्ट से कर सकते हैं और उससे तो अपके हिट होने के चांसेज़ उसी तरह से हो जाते हैं जैसे ऋतिक रोशन की कहो न प्यार है से एंट्री सुपर डुपर हिट हुई थी । अरे नहीं नहीं, ये जिस थाली में खाया उसी में छेद किया वाली फ़ीलींग मन में मत रखिए जी , हम तो कहते हैं कि ब्लॉगिंग में उतरे हैं तो मन ही नहीं रखा करिए , बस ढेला उठाया और दन्न से उछाल दिया , देखा कित्ता आसान है ।
और इसके लिए आप बहाने भी आराम से ढूंढ सकते हैं , बल्कि ये कहना चाहिए कि ..आपका मन होना चाहिए बखिया उधेडने का , बहाना सब आपको खुद तलाश लेगा ।
दूसरा नियम , अगर आप ब्लॉगिंग को मेंटल टाईप से चाहने लगे हों तो फ़िर
आपको कम से कम एक बार ब्लॉग बैठक , ब्लॉगर मीट , ब्लॉगर सम्मेलन जरूर करवाना चाहिए , देखिए इससे क्या होगा कि आपके मन में फ़ौरन ही ब्लॉग अनुरक्ति और ब्लॉगर विरक्ति के भाव उत्पन्न होंगे । और हां एक बात और चाहे आप ब्लॉगर मीट की पूरी तैयारी योजना आयोग को भी सौंप दें और मेट्रो परियोजना के कर्तधर्ता श्रीधरन जी खुद भी इसे सफ़ल करने पर तुल जाएं तो मजाल है कि उसकी गारंटी कोई ले , सिर्फ़ एक पोस्ट . एक पोस्ट ...हां आगे आपने बिल्कुल ठीक सोचा ..लेकिन फ़िर भी आपको एक बार तो करना ही चाहिए , ।
चलिए ठीक है इतना भी कंपलसरी नहीं है , लेकिन आप किसी सम्मेलन में शामिल होकर वहां आराम से दांति चियार चियार के दोस्तों के साथ सब बात मुलाकात ,( उनसे भी जिनकी आपसे मुक्कालात तक हुई हो )करने के बाद घर आकर उसका पोस्टमार्टम करने की अपेक्षा तो रहती ही है ,और इस अपेक्षा पर आपको खरा उतरना ही चाहिए , । यकीन जानिए कि इससे आपको भी फ़ायदा पहुंचने की पूरी गुंजाईश रहती है ।
देखिए जी ब्लॉगजगत का एक बहुत ही बेतुका , बेबुनियादी , बे ..हां मतलब अबे टाईप का चलन हो गया है ,
कोई कितना भी बडा , महान , ग्रेट स्टेटस वाला ब्लॉगर ब्लॉगिंग करने मैदान में उतरता तो ये नहीं कि उसका स्वागत गाजे बाजे से किया जाए , ये नहीं कि उसके पाव भर की पोस्ट पर क्विंटल भर की टिप्पणियां करे और पोस्टों से ये साबित कर दे कि फ़लां बाबू ने हिंदी में ब्लॉगिंग में खासकर हिंदी में ब्लॉगिंग करने का निर्णय़ लेकर मानो हिंदी ब्लॉगिंग पर उपकार किया है ..अरे कुछ भी नहीं करते हैं भाई लोग जी ..यहां तक कि नीतिश कुमार का ब्लॉग , मनोज वाजपेयी का ब्लॉग भी बे भाव के ही साईड लगा रहता है । माने आप कितना भी बडे ओहदे , साईज़ , शेप वाले हों ब्लॉगिंग के मैदान मे तो भईया आब निरे ब्लॉगर ही माने जाने जाएंगे तो ई भी गांठ बांध ही लीजीए ..
ओह सारे सूक्त वचन अब एक ही बार में पढिएगा क्या ...अरे रुकिए महाराज रुकिए अभी ..आगे की कथा ज़ारी रहेगी ..अरे हां
इस ब्लॉग पर आज एक पोस्ट आएगी कुछ ब्लॉगर्स को अपने ब्लॉग के साथ बातचीत करते हुए सुना गया है देखिएगा किसने क्या कहा सुना ...शाम तक मिलता हूं फ़िर
सूक्त वाक्य बढ़िया दिए हैं ...दूसरे ब्लॉग की पोस्ट का इंतज़ार है
संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…
8 मई 2011 2:53 pm
:))
यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…
8 मई 2011 3:46 pm
भूमिका अच्छी है। आगे की पोस्ट की प्रतीक्षा है।
दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…
8 मई 2011 4:33 pm
झा जी सफल ब्लोगर बनाने के बढ़िया शार्टकर्ट !
अरुण चन्द्र रॉय ने कहा…
8 मई 2011 6:20 pm
हा हा!! क्या ज्ञान मिला है...एक बार हमने भी करा ली थी ब्लॉग बैठक जबलपुर में. :)
Udan Tashtari ने कहा…
8 मई 2011 7:03 pm
:)
Kajal Kumar ने कहा…
8 मई 2011 7:09 pm
इस्पात भी हम बनाते हैं
पोस्ट भी हम लिखते हैं...
प्रवीण पाण्डेय ने कहा…
8 मई 2011 7:45 pm
ब्लाग गुरु जी अच्छा ज्ञान दे रहे हे आप..
राज भाटिय़ा ने कहा…
8 मई 2011 7:51 pm
हम तो इस लिए ही इन सब से दूर रहने की कोशिश करते है ... क्या फायेदा एक दिन अचानक से हमारा भी सम्मान हो और फिन फाटक से ना अपमान भी हो जाए !
शिवम् मिश्रा ने कहा…
8 मई 2011 9:03 pm
सूक्तियां कभी न अंत होने वाली यात्रा हो:) तथास्तु॥
चंद्रमौलेश्वर प्रसाद ने कहा…
8 मई 2011 9:35 pm
बिलकुल सही लिखा है ...हम तो अजय झा के फालोवर है :-))
शुभकामनायें !
सतीश सक्सेना ने कहा…
9 मई 2011 9:14 am
झाजी,आप प्रयोगवादी हैं और हम आपके चेले,सो जो भी 'मीट-माट'करनी हो हमका चुप्पे-से बताय दिहो !
संतोष त्रिवेदी ने कहा…
9 मई 2011 9:29 am
जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ
Sawai Singh Rajpurohit ने कहा…
9 मई 2011 5:23 pm
जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ
संजय कुमार चौरसिया ने कहा…
9 मई 2011 5:51 pm
अरे ये आखिर की टिप्पणियों में जन्मदिन कहाँ से आ गया । चलिये क्षमा सहित हमारी ओर से भी, बी लेटेड... जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ...
सुशील बाकलीवाल ने कहा…
10 मई 2011 9:04 pm
प्रिय दोस्तों! क्षमा करें.कुछ निजी कारणों से आपकी पोस्ट/सारी पोस्टों का पढने का फ़िलहाल समय नहीं हैं,क्योंकि 20 मई से मेरी तपस्या शुरू हो रही है.तब कुछ समय मिला तो आपकी पोस्ट जरुर पढूंगा.फ़िलहाल आपके पास समय हो तो नीचे भेजे लिंकों को पढ़कर मेरी विचारधारा समझने की कोशिश करें.
दोस्तों,क्या सबसे बकवास पोस्ट पर टिप्पणी करोंगे. मत करना,वरना......... भारत देश के किसी थाने में आपके खिलाफ फर्जी देशद्रोह या किसी अन्य धारा के तहत केस दर्ज हो जायेगा. क्या कहा आपको डर नहीं लगता? फिर दिखाओ सब अपनी-अपनी हिम्मत का नमूना और यह रहा उसका लिंक प्यार करने वाले जीते हैं शान से, मरते हैं शान से
श्रीमान जी, हिंदी के प्रचार-प्रसार हेतु सुझाव :-आप भी अपने ब्लोगों पर "अपने ब्लॉग में हिंदी में लिखने वाला विजेट" लगाए. मैंने भी लगाये है.इससे हिंदी प्रेमियों को सुविधा और लाभ होगा.क्या आप हिंदी से प्रेम करते हैं? तब एक बार जरुर आये. मैंने अपने अनुभवों के आधार आज सभी हिंदी ब्लॉगर भाई यह शपथ लें हिंदी लिपि पर एक पोस्ट लिखी है.मुझे उम्मीद आप अपने सभी दोस्तों के साथ मेरे ब्लॉग एक बार जरुर आयेंगे. ऐसा मेरा विश्वास है.
क्या ब्लॉगर मेरी थोड़ी मदद कर सकते हैं अगर मुझे थोडा-सा साथ(धर्म और जाति से ऊपर उठकर"इंसानियत" के फर्ज के चलते ब्लॉगर भाइयों का ही)और तकनीकी जानकारी मिल जाए तो मैं इन भ्रष्टाचारियों को बेनकाब करने के साथ ही अपने प्राणों की आहुति देने को भी तैयार हूँ.
अगर आप चाहे तो मेरे इस संकल्प को पूरा करने में अपना सहयोग कर सकते हैं. आप द्वारा दी दो आँखों से दो व्यक्तियों को रोशनी मिलती हैं. क्या आप किन्ही दो व्यक्तियों को रोशनी देना चाहेंगे? नेत्रदान आप करें और दूसरों को भी प्रेरित करें क्या है आपकी नेत्रदान पर विचारधारा?
यह टी.आर.पी जो संस्थाएं तय करती हैं, वे उन्हीं व्यावसायिक घरानों के दिमाग की उपज हैं. जो प्रत्यक्ष तौर पर मनुष्य का शोषण करती हैं. इस लिहाज से टी.वी. चैनल भी परोक्ष रूप से जनता के शोषण के हथियार हैं, वैसे ही जैसे ज्यादातर बड़े अखबार. ये प्रसार माध्यम हैं जो विकृत होकर कंपनियों और रसूखवाले लोगों की गतिविधियों को समाचार बनाकर परोस रहे हैं.? कोशिश करें-तब ब्लाग भी "मीडिया" बन सकता है क्या है आपकी विचारधारा?
रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा" ने कहा…
15 मई 2011 10:48 am
बहुत बढ़िया लिखा है आपने! जन्मदिन की हार्दिक बधाइयाँ और शुभकामनायें!
Babli ने कहा…
19 मई 2011 9:13 am
वाह..क्या खूब ...कटाक्ष किया है...
Dr (Miss) Sharad Singh ने कहा…
24 मई 2011 2:07 pm
जहां-जहां चोट की आपने,वहा-वहां सचमुच लगी हो,तो जल्द ही नज़ारा बदलने की उम्मीद पाल सकते हैं हम!
कुमार राधारमण ने कहा…
26 मई 2011 10:22 pm
http://shayaridays.blogspot.com
Richa P Madhwani ने कहा…
2 जून 2011 10:49 am